6 महीने के बच्चे की गतिविधियां, विकास और देखभाल | 6 Mahine Ke Shishu Ka Vikas

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अगर आपका शिशु छह महीने का हो गया है, तो आपको उसमें कई तरह के बदलाव नजर आने लगेंगे। छह महीने का होते-होते शिशु में विभिन्न तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं। अब शिशु माता-पिता और अपने आस-पास रहने वाले लोगों को न सिर्फ पहचानने लगता है, बल्कि उनके साथ खेलने भी लगता है। साथ ही छह माह के शिशु ठोस पदार्थ भी खाना शुरू कर देते हैं। इसके अलावा, 6 महीने के बच्चे की गतिविधियों में भी कई तरह के परिवर्तन होते हैं। मॉमजंक्शन के इस लेख में हम आपके छह महीने के शिशु में होने बदलावों और अन्य बातों के बारे में जानकारी देंगे।

6 महीने के बच्चे का वजन और हाइट कितनी होनी चाहिए?

पहले कुछ महीनों की तुलना में 6 महीने के बच्चे के वजन और हाइट में काफी बदलाव होते हैं। छठे महीने में बेबी गर्ल का सामान्य वजन लगभग 5.6 से लेकर 7.5 किलो तक और लंबाई करीब 65.7 सेंटीमीटर तक हो सकती है। वहीं, बेबी बॉय का सामान्य वजन लगभग 6.2 किलो से लेकर 8.2 किलो तक हो सकता है और लंबाई लगभग 67.6 सेंटीमीटर तक हो सकती है (1)।  यह डब्ल्यूएचओ के विकास चार्ट के अनुसार एक औसत भारतीय बच्चे के लिए एक औसत अनुमान है। आपके बच्चे के वजन और लंबाई में थोड़ा बहुत फर्क हो सकता है। बाल रोग विशेषज्ञ ग्रोथ रिकॉर्ड को चेक करके देखेगा कि यह सामान्य है या नहीं।

नोट : सभी शिशुओं की शारीरिक संरचना अलग-अलग होती है, इसलिए हर शिशु के वजन और कद में कुछ अंतर हो सकता है। शिशु का वजन और लंबाई काफी हद तक उसके स्वास्थ्य पर भी निर्भर करती है। इस बारे में आपको अधिक जानकारी डॉक्टर ही दे सकते हैं।

लेख के आगे के भाग में हम आपको 6 महीने के शिशु के विकास के बारे में जानकारी देंगे।

6 महीने के बच्चे के विकास के माइल्सटोन क्या हैं?

जैसा कि आप जान ही चुके होंगे कि शिशु जन्म के एक-दो महीने बाद से ही कुछ न कुछ नया सीखने लगते हैं। उनका सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और यहां तक कि भावनात्मक विकास भी होने लगता है। 6 महीने के शिशु का विकास तो पहले के कुछ महीनों की तुलना में अधिक होने लगता है और वह कई और नई चीजें जानने लगता है। बता दें कि ये विकास एक औसतन अनुमान के तौर पर है। हर बच्चे की विकास क्षमता अलग-अलग हो सकती है। यह संभव हो सकता है कि आपका बच्चा 6 महीने में विकास की सही क्षमता को प्राप्त न कर सके। आमतौर पर 1-2 महीने की भिन्नता देखी जा सकती है। वहीं, अगर 2 महीने से अधिक देरी हो जाती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है। नीचे विस्तार से जानिए बच्चे से विकास से जुड़ी जानकारी।

मानसिक विकास

  1. चीजों को मुंह में लेना – छठे महीने में शिशु सामने पड़ी चीजों को मुंह में लेना सीखने लगते हैं। इसलिए, इस दौरान माता-पिता को थोड़ा ज्यादा सावधान रहना चाहिए और शिशु पर हर वक्त ध्यान रखना चाहिए, ताकि वो नीचे पड़ी चीजों को या खिलौनों को मुंह में न ले सकें।
  1. आवाजों की नकल करना – जब शिशु 6 महीने का हो जाता है, तो वह अक्सर आवाजों को सुनकर उसकी नकल उतारने की कोशिश करने लगता है। कई बार तो वह अपने आस-पास लोगों को देखकर भी उनकी नकल उतारने की कोशिश करता है (2)
  1. नाम सुनकर प्रतिक्रिया देना – 6 महीने के बच्चे अपने नाम को भी समझने और पहचानने लगते हैं। जब कोई उन्हें उनके नाम से पुकारता है, तो वो प्रतिक्रिया देते हैं (3)
  1. चीजों को लेकर उत्सुक होना – इस उम्र में शिशु चीजों को लेकर ज्यादा जिज्ञासु होने लगते हैं। उनके सामने अगर कुछ रखा हो, तो वो उन्हें छूने और पकड़ने की कोशिश करते हैं। साथ ही आस-पास रखी चीजों को देखने लगते हैं (3)
  1. आवाजें निकालने लगते हैं – 6 महीने के शिशु तरह-तरह की ध्वनियां निकालने लगते हैं (3), साथ ही मां, डाडा, बाबा जैसे शब्द बोलने की कोशिश करने लगते हैं। इतना ही नहीं आइने में देखकर या खिलौनों की आवाज सुनकर या उनके साथ खेलते हुए वो अपनी भाषा में गाने की भी कोशिश करते हैं या तरह-तरह की आवाजें निकालने लगते हैं। यहां तक कि खुद की आवाज सुनकर भी खुश हो जाते हैं। छह माह के शिशु अपनी खुशी और दुख को प्रकट करने के लिए भी आवाजें निकालते हैं। वो रोने या चिल्लाने लगते हैं, ताकि लोगों का ध्यान उनकी तरफ आकर्षित हो (2) (3)
  1. चीजों को पकड़ना और लोगों को देना – इस उम्र में शिशु न सिर्फ चीजों को पकड़ना सीखने लगते हैं, बल्कि अगर उनके हाथ में पकड़ी हुई चीज को मांगा जाए, तो वो देना भी सीखने लगते हैं। इतना ही नहीं, अगर उनके हाथ में पकड़ी हुई चीज गिर जाए, तो उन्हें पता होता है कि उसे उठाना भी है (3)

शारीरिक विकास

  1. रंगों में फर्क करना – 6 महीने में शिशु की आंखों में भी बदलाव होने लगता है यानी उनकी दृष्टि तेज होने लगती है। वो दो रंगों के बीच अंतर समझने लगते हैं और उनके सामने अगर कोई रंग-बिरंगी किताब या खिलौने हों, तो वो लगातार कई देर तक उनको देखना पसंद करते हैं (4)
  1. आंखों और हाथ के बीच तालमेल – छठे महीने में शिशु के आंख और हाथ का तालमेल बैठने लगता है। वो जिन चीजों को देखते हैं, उन्हें पकड़ने की भी कोशिश करते हैं, भले ही वो वस्तु न हिले (4)
  1. सभी उंगलियों के साथ वस्तुओं को पकड़ना – छठे महीने में शिशु छोटी वस्तुओं को अपनी सारी उंगलियों के साथ पकड़ना सीख जाते हैं। अगर आपका शिशु फॉर्मूला दूध पीता है, तो आप गौर करेंगे कि आपका शिशु धीरे-धीरे बोतल पकड़ना शुरू कर देता है (5)
  1. बिना सहारे के बैठना – 6 महीने में शिशु की मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होने लगती है और वो बिना किसी सहारे के बैठना सीखने लगते हैं। यहां तक कि वो सिर को सीधा करना भी सीखने लगते हैं और जब वो पेट के बल लेटते हैं या किसी के गोद में जाते हैं, तो सिर को सीधा रखने की कोशिश करने लगते हैं और गर्दन को इधर-उधर घुमाकर आस-पास की चीजों को भी देखने लगते हैं (3) (2)
  1. दांत आना – छठे महीने में शिशु को दांत आने शुरू हो जाते हैं (2) (6), इसी कारण उनके मसूड़ों में सिहरन होनी शुरू होती है और वो चीजों को काटना भी शुरू करने लगते हैं। वहीं, एक सामान्य बच्चे के दांत निकलने में 13 महीने तक की देरी हो सकती है। अगर आपके बच्चे के दांत 6 महीने में नहीं निकलते हैं, तो चिंता की बात नहीं है। शिशु के दांत निकलने के लिए आप और 6 से 7 महीने तक का इंतजार कर सकते हैं।
  1. हल्के-फुल्के ठोस आहार के लिए तैयार – जैसा कि हमने ऊपर बताया कि छठे महीने में शिशु को दांत आने लगते हैं, लेकिन इसी के साथ उसकी पाचन शक्ति भी पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत हो जाती है। इसलिए, शिशु को मां के दूध के साथ-साथ ठोस आहार देने की भी जरूरत होती है। ऐसे में जब कोई उनके सामने कुछ खाता है, तो वो भी खाने के लिए उत्सुकता दिखाने लगते हैं (7)। इसके अलावा, अगर 6 महीने में बच्चे के दांत न आए हों, तो भी उन्हें थोड़ा-बहुत ठोस आहार दिया जा सकता है। 6 महीने से बच्चे को मां के दूध के साथ-साथ पूरक आहार की भी जरूरत होती है क्योंकि इनसे उन्हें पोषण मिलता है।

ध्यान रहे आपका शिशु हल्के-फुल्के ठोस आहार के लिए तब ही तैयार होगा, जब वो अपने गर्दन और सिर को सही तरीके से कंट्रोल कर बैठना सीखने लगे। हालांकि, शिशु को ठोस आहार देने से पहले अपने डॉक्टर से भी एक बार जरूर बात करें और शिशु को क्या खिलाना है और क्या नहीं उसका एक आहार चार्ट भी लें (8)

सामाजिक और भावनात्मक विकास

  1. परिचित लोगों के पास और अजनबी से दूरी – 6 महीने के बच्चे अपने आस-पास रहने वाले लोगों को पहचानने लगते हैं। अपने माता-पिता और घर के अन्य सदस्यों को दूर से ही पहचानने लगते हैं, लेकिन वहीं किसी अनजान व्यक्ति को देखकर घबरा जाते हैं। उन्हें देखकर डर जाते हैं और रोने लगते हैं (3)
  1. माता-पिता के साथ खेलना – शिशु माता-पिता के साथ खेलना और वक्त बिताना पसंद करने लगते हैं (3)। कई बच्चे तो अगर पूरे दिन के बाद अपने पिता को देखते हैं, तो खिलखिलाकर खेलने के लिए इशारा भी करते हैं।
  1. दूसरों के भाव पर प्रतिक्रिया देना – 6 महीने के बच्चे दूसरों के हाव-भाव पर भी प्रतिक्रिया देना सीखने लगते हैं। अगर उनके सामने कोई खुश है, तो वो भी अपने हाव-भाव से खुशी व्यक्त करेंगे (3), लेकिन अगर कोई दुखी है खासकर वो जिन्हें वो पहचानते हैं, तो वो भी दुखी हो जाते हैं और रोने लगते हैं। अगर उनके पास बैठा कोई बच्चा रो रहा हो, तो वो भी रोना शुरू कर सकते हैं।

आगे हम आपको 6 महीने के शिशु को लगाए जाने वाले टीकों की जानकारी देंगे।

6 महीने के बच्चे को कौन-कौन से टीके लगने चाहिए?

अगर छठे महीने में बच्चे की देखभाल की बात करें, तो इसमें शिशु का टीकाकरण होना जरूरी है। 6 महीने के शिशु का विकास सही से हो, उसके लिए उन्हें सही वक्त पर सही टीकाकरण कराना बहुत ही आवश्यक है, ताकि बीमारियों से उनका बचाव हो सके। इसलिए, नीचे हम आपको 6 महीने के बच्चे को कौन-कौन से टीके लगवाने चाहिए, उसके बारे में बता रहे हैं (9)

  • ओपीवी 1
  • हेप-बी 3

नोट : इस उम्र में टीकाकरण इस बात पर भी निर्भर करता है कि पहले उन्हें कौन से टीके लग चुके हैं। अगर आपके बच्चे को कॉम्बिनेशन टीके लग रहे हैं, तो 6 महीने पर हेपेटाइटिस बी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पहले ही उन्हें यह टीका लग चुका हो सकता है। अगर नहीं, तो हेपेटाइटिस बी के टीके की आवश्यकता है। इस उम्र में भी इन्फ्लुएंजा वैक्सीन की पहली खुराक दी जाती है। इन टीकों के बारे में आपको डॉक्टर या विशेषज्ञ से और अधिक जानकारी मिल जाएगी।

लेख के अगले भाग में हम बता रहे हैं कि 6 महीने के बच्चे के लिए कितना दूध जरूरी है।

6 महीने के बच्चे के लिए कितना दूध आवश्यक है?

शिशु जैसे-जैसे बड़ा होता है, उसकी भूख और खाने-पीने की आदतें भी बदलने लगती हैं। 6 महीने के बच्चे की भी दूध पीने की आदतों में बदलाव होने लगता है। इसलिए, नीचे हम आपको 6 महीने के बच्चे के लिए कितना दूध आवश्यक है, उस बारे में जानकारी दे रहे हैं।

मां का दूध – यह तो लगभग सभी जानते हैं कि 6 महीने तक शिशु के लिए मां का दूध ही जरूरी होता है, लेकिन छठे महीने में शिशु को हल्के-फुल्के ठोस आहार भी देना जरूरी होता है। इस दौरान, शिशु को औसतन 700 से 800 एमएल प्रतिदिन मां के दूध की जरूरत होती है (10)। कुछ शिशु इससे ज्यादा या कम दूध भी पी सकते हैं। यह पूरी तरह से उसकी भूख व गतिविधियों पर निर्भर करता है।

अगर आपका शिशु दूध पीने के लिए ज्यादा उत्सुकता न दिखाए, तो डॉक्टर से सलाह के बाद उसे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ठोस आहार भी देना शुरू कर सकते हैं (11)

फॉर्मूला दूध : अगर आप अपने शिशु को किन्हीं कारणों से फॉर्मूला दूध दे रहे हैं, तो ऐसे में 6 महीने के बच्चे को दिनभर में करीब 800 एमएल तक फॉर्मूला दूध दिया जा सकता है (12)

आगे हम आपको शिशु के ठोस आहार के बारे में जानकारी देंगे।

6 महीने के बच्चे के लिए कितना खाना आवश्यक है?

6 महीने का बच्चा धीरे-धीरे ठोस आहार के प्रति अपनी जिज्ञासा व्यक्त करने लगता है। साथ ही उसका पाचन तंत्र इतना विकसित हो जाता है कि ठोस आहार को हजम कर सके। ऐसे में 6 महीने में शिशु को मां के दूध के साथ-साथ सॉलिड फूड भी दिया जा सकता हैं। एक बार में आपका बच्चा जितना खाएगा वह आपके बच्चे की मुट्ठी के आकार के बराबर हो सकता है। ठोस आहार निम्न प्रकार से हो सकता है (13) :

  • अनाज : पूरे दिन में 4 से 8 चम्मच या कभी-कभी उससे ज्यादा भी दे सकते हैं।
  • सब्जियों की प्यूरी – 4 से 8 चम्मच
  • फलों की प्यूरी – 4 से 8 चम्मच
  • प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ – 1 से 6 चम्मच
  • पानी – आधे से एक कप या 125ml से 250ml तक दे सकते हैं।

नोट : ये सब देने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

शिशु को पहली बार ठोस आहार देते समय इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है (12) (14) :

  • जब शिशु किसी नए ठोस आहार का सेवन करना शुरू करें, तो एक वक्त में एक ही तरह का खाद्य पदार्थ दें, न कि कई सब्जियों का मिश्रण। जो नया खाद्य पदार्थ बच्चे को दिया जा रहा है, उसे ही तीन से चार दिन दें। इससे आपको पता चल जाएगा कि यह आपके बच्चे को सूट कर रहा है या नहीं।
  • मां का दूध आयरन का समृद्ध स्रोत नहीं होता, इसलिए शिशु के लिए आयरन युक्त अनाजों का चुनाव करें। इसे आप ब्रेस्टमिल्क में मिलाकर सेवन करा सकते हैं।
  • शिशु को शहद न दें, क्योंकि शहद में बैक्टीरिया हो सकते हैं, जो आपके शिशु के लिए घातक साबित हो सकते हैं।
  • बच्चे को हर तरह के पौष्टिक आहार खिलाने की आदत डालें।

आगे हम आपको 6 महीने के शिशु की नींद के बारे में जानकारी देंगे।

6 महीने के बच्चे के लिए कितनी नींद आवश्यक है?

भले ही शिशु जन्म के बाद कई घंटे सोता हो, लेकिन धीरे-धीरे विकास होने के साथ-साथ उसकी नींद की आदतों में भी बदलाव होने लगता है। जब शिशु 6 महीने का होता है, तो उसकी नींद की अवधि पहले की तुलना में कम या ज्यादा होने लगती है। 6 महीने के शिशु को रात में 6 से 8 घंटे तक की नींद की जरूरत होती है (2)। इसके अलावा, वह पूरे दिन में एक-दो बार कुछ-कुछ घंटों की झपकी ले सकता है। यह पूरी तरह से शिशु की आदतों व गतिविधियों पर निर्भर करता है।

लेख के आगे के भाग में हम इसी बारे में आपको बताएंगे।

6 महीने के बच्चे के लिए खेल और गतिविधियां

6 महीने का बच्चा काफी फुर्तीला हो जाता है और खेलने व अन्य गतिविधियों में ज्यादा दिलचस्पी दिखाने लगता है। इसलिए, नीचे हम आपको 6 महीने की उम्र में बच्चे की गतिविधियों के बारे जानकारी दे रहे हैं।

  • जब शिशु 6 महीने का हो जाता है, तो वो लोगों को देखकर उनकी नकल करना सीखने लगता है। अगर उसके सामने कोई ताली बजाए, तो वो ताली बजाने की कोशिश करता है। अगर वह कोई गाना सुनता है, तो खुशी से ताली बजाने लगता है।
  • 6 महीने के बच्चे अपने माता-पिता और हमेशा साथ रहने वाले लोगों को पहचानने लगते हैं। इस स्थिति में उनके साथ आप लुका-छिपी भी खेल सकते हैं। लुका-छिपी से हमारा मतलब यह है कि आप अपने चेहरे को कपड़े से ढक लें और शिशु के सामने छुपने का नाटक करें। ऐसे में शिशु आपके चेहरे से कपड़ा हटाने की कोशिश करेंगे और खिलखिलाकर खेल का आनंद लेंगे।
  • छठे महीने में शिशु रंगों में अंतर समझने लगते हैं। ऐसे में आप उनके सामने रंग-बिरंगी कार्टून वाली किताबें रखें और उन्हें कहानियां भी सुनाएं। बच्चे के सामने किताबें पढ़ना जल्दी शुरू किया जाना चाहिए, भले ही आपका बच्चा कोई दिलचस्पी न दिखाए। यह आगे चलकर बच्चों में पढ़ने की आदतों के विकास में मदद कर सकता है।
  • उनके सामने चलने वाले खिलौने व गेंद रखें और उन्हें पकड़ने के लिए प्रेरित करें।
  • शिशु को गाने सुनना भी अच्छा लगने लगता है। ऐसे में आप उनके सामने गाना चला सकते हैं। कई बार तो शिशु खुश होकर बैठे-बैठे ही उछलने लगते हैं।
  • आप शिशु को आईने के सामने ले जाकर भी उन्हें खेलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। शिशु आईने में अपने प्रतिबिंब को देखकर खुश हो जाते हैं और खेलते-खेलते कई तरह की आवाजें भी निकालने लगते हैं।
  • शिशु के साथ बात करें, इससे वो खुश होकर अपने तरीके से आप से बात करने का प्रयास करेंगे।
  • उनके सामने कुछ बर्तन या डिब्बे रख दें और उनके हाथ में प्लास्टिक का कोई डंडा थमा दें। ऐसा करने से वो उन डिब्बों और बर्तनों पर मारने लगेंगे और उससे निकलने वाली ढप-ढप की आवाज से उत्साहित भी होंगे।

नोट : शिशु की इन गतिविधियों के दौरान ध्यान रहे कि माता-पिता उनके साथ ही रहें, ताकि खेलने के दौरान उन्हें चोट न लगे।

आगे जानिए 6 महीने के बच्चों के माता-पिता की आम स्वास्थ्य चिंताएं क्या-क्या होती हैं?

6 महीने के बच्चों के माता-पिता की आम स्वास्थ्य चिंताएं

6 महीने का बच्चा कई सारी चीजें करने लगता है जैसे – खेलना, ठोस आहार का सेवन करना, उछलना आदि। ऐसे में कई बार उन्हें कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी होने लगती हैं। यहां हम 6 महीने के बच्चों की कुछ ऐसी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में बता रहे हैं, जिन पर माता-पिता को समय रहते ध्यान देना चाहिए।

बुखार – कभी-कभी मौसम में बदलाव के कारण शिशु के शरीर के तापमान में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। अगर बच्चे के शरीर का तापमान 99.5 F है, तो मतलब उसे फीवर है। शिशुओं के मुंह में थर्मामीटर न लगाएं बल्कि उनके बगल में थर्मामीटर लगाएं।

डायरिया – छठे महीने में शिशु जो भी देखता है, उसे मुंह में लेने लगता है। इस स्थिति में कई बार शिशु को एलर्जी या संक्रमण के कारण दस्त और उल्टी की समस्या हो सकती है। ऐसे में अगर शिशु को बार-बार उल्टी या पेट खराब की परेशानी हो रही है, तो बिना देर करते हुए उसे डॉक्टर के पास ले जाएं।

कान में दर्द – कई बार शिशु के कान में गंदगी जम जाने से या पानी चले जाने से कान में संक्रमण की समस्या हो सकती है। आमतौर पर ऐसा उन शिशुओं में देखा जाता है, जिन्हें बिस्तर पर लेटते समय बोतल से दूध पिलाया जाता है। ऐसे में शिशु असहज या रोने लग सकता है। अगर ऐसा होता है, तो समझ जाएं कि आपको बच्चे को डॉक्टर से चेकअप कराने की जरूरत है।

लगातार रोना – अगर आपका बच्चा कुछ खा नहीं रहा, दूध नहीं पी रहा, ठीक से सो नहीं रहा है और लगातार रो रहा है, तो समझ जाए कि उसे कुछ शारीरिक तकलीफ है। उसे पेट दर्द, शरीर में दर्द या अन्य कोई परेशानी हो सकती है।

लेख के इस भाग में जानिए 6 महीने के बच्चे से जुड़ी कुछ अन्य जानकारियां।

बच्चे की सुनने की क्षमता, दृष्टि और अन्य इंद्रियां

क्या मेरा बच्चा देख सकता है?

छठे महीने में शिशु की दृष्टि और तेज हो जाती है और वो दूर तक देखने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, शिशु रंगों में अंतर भी समझने लगता है। साथ ही चलती हुई चीजों जैसे – गेंद या खिलौनों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। इतना ही नहीं उनके हाथों और आंखों के बीच तालमेल में भी सुधार होने लगता है और वो चलती हुई चीजों पर ध्यान केंद्रित कर उन्हें पकड़ सकता है (4)

क्या मेरा बच्चा सुन सकता है?

अब आपका शिशु हर तरह की आवाजों को सुनने की क्षमता रखता है। साथ ही अगर आप कुछ बोलते हैं, तो कुछ शब्दों को सुनकर समझने की कोशिश करता है। यहां तक कि कुछ आवाजों को सुनकर उसकी नकल उतारने का प्रयास भी करता है (4)

क्या मेरे बच्चा सूंघ और स्वाद को महसूस कर सकता है?

छठे महीने में बच्चे ठोस आहार का सेवन करना शुरू कर सकते हैं। हालांकि, शुरुआत में शिशुओं को दूध के स्वाद के अलावा कोई स्वाद पता नहीं होता है। ऐसे में जितना हो सके बच्चे को कोई भी शुगर या शुगर प्रोडक्ट देने से बचें। इसके अलावा, कम से कम 10 महीने की उम्र तक किसी भी मात्रा में नमक युक्त खाद्य पदार्थ न दें। इसके अलावा, उनकी सूंघने की क्षमता भी बढ़ने लगती है और वो अच्छी व खराब गंध में फर्क समझने लगते हैं।

आगे जानिए छठे महीने में बच्चे को साफ-सुथरा रखने के कुछ टिप्स।

बेबी स्वच्छता से जुड़ी कुछ बातें

शिशु के बेहतर विकास में उनकी स्वच्छता का भी बड़ा योगदान होता है। अगर शिशु साफ-सुथरे रहेंगे, तो बीमार नहीं होंगे। नीचे हम इसी संबंध में कुछ खास बातें आपको बता रहे हैं :

  • नहाना – शिशु को नियमित तौर पर नहलाएं। अगर मौसम ठंडा है और आप रोज नहीं नहला सकते, तो कम से कम उनके शरीर को गर्म या गुनगुने पानी में भीगे तौलिए से पोंछ दें।
  • मुंह की सफाई – मसूड़ों की मालिश या दांतों को साफ करने के लिए पेस्ट के बिना नरम सिलिकॉन फिंगर ब्रश का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, अगर उनके दांत निकल गए हैं, तो खासतौर पर दूध पिलाने के बाद साफ करें। इस तरह से बच्चे को दांतों को जल्दी ब्रश करने की आदत पड़ जाती है और बड़े होने के बाद उन्हें अपने दांतों को ब्रश करने में परेशानी नहीं होती है। इसके साथ ही बच्चे की उम्र के पहले साल में कम से कम एक बार बाल रोग डेंटिस्ट से बच्चे के दांतों का चेकअप जरूर कराएं।
  • आंखों की देखभाल – शिशु के आंखों की देखभाल के लिए सुबह नर्म तौलिए को पानी में भिगोकर या फिर वाइप्स की मदद से आंखों को साफ करें, ताकि गंदगी निकल जाए।
  • नैपी का ध्यान रखें – थोड़ी-थोड़ी देर में शिशु के नैपी को चेक करते रहें। अगर शिशु का डायपर गीला हो गया है, तो उसे तुरंत बदल दें, ताकि शिशु को रैशेज न हो। डायपर पहनाने से पहले शिशु के गुप्तांगों को अच्छे से पोंछे और क्रीम लगाएं, ताकि उन्हें संक्रमण या रैशेज न हो जाए।
  • नाखून काटे – बड़ों की तरह शिशु के भी नाखून बढ़ते हैं, इसलिए उन पर भी ध्यान दें। अगर नाखून बड़े हो जाएं, तो उन्हें काटे ताकि नाखूनों में जमी गंदगी से उन्हें संक्रमण या नाखूनों से उन्हें खरोंच न लगे।
  • खिलौनों और घर को साफ रखें – 6 महीने का बच्चा चीजों को मुंह में लेना सीखने लगता है, ऐसे में उनके खिलौनों को साफ रखें, ताकि अगर वो उन्हें मुंह में लें, तो उन्हें संक्रमण न हो। घर को साफ रखें, ताकि वो नीचे पड़ी गंदगी को मुंह में न ले सकें। इससे उन्हें न सिर्फ संक्रमण हो सकता है, बल्कि उनके गले में भी अटकने का डर होता है।

आगे जानिए माता-पिता शिशु के विकास में कैसे अपना योगदान दे सकते हैं।

माता-पिता बच्चे के विकास में कैसे मदद कर सकते हैं?

शिशु के सही विकास के लिए सबसे जरूरी है माता-पिता का योगदान। नीचे हम उसी के बारे में कुछ सुझाव दे रहे हैं :

  • शिशु के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताएं।
  • उनके साथ खेलें और उन्हें बाहर घुमाने ले जाएं।
  • उनके सामने रंग-बिरंगी किताबें रखें और उन्हें कहानियां व लोरी सुनाएं।
  • उनके साथ बात करें, ताकि वो भी बातें सुनकर अपने तरीके से बोलने की कोशिश करें।
  • अपने बच्चे के मनोरंजन के लिए मोबाइल, टीवी या किसी भी प्रकार की स्क्रीन का उपयोग न करें। खासतौर पर जब आप उन्हें खाना खिला रही हों।

आगे हम आपको 6 महीने के बच्चे में होने वाले कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिससे माता-पिता को सावधान रहना चाहिए।

6 महीने के बच्चे के विकास के बारे में माता-पिता को कब चिंतित होना चाहिए?

अगर शिशु में निम्न प्रकार के लक्षण नजर आएं, तो यह चिंता का विषय है (15):

  • अगर आपका शिशु चीजों को लेकर जिज्ञासु नहीं है और सुस्त है।
  • अगर वह हंस-बोल नहीं रहा है।
  • अगर परिचित चेहरे को देखकर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है।
  • अगर चीजों को पकड़ने या एक हाथ से दूसरे हाथ में देने में असुविधा हो रही हो।
  • अगर सहारे के बावजूद बैठ नहीं पा रहा हो।
  • अगर वो पूरे दिन रो रहा हो।
  • अगर वो ठीक से सो नहीं रहा हो।
  • अगर ठोस आहार खाने में असुविधा हो रही हो।

इस महीने के लिए चेकलिस्ट

छठे महीने के शिशु के लिए माता-पिता को एक चेकलिस्ट तैयार रखनी चाहिए, ताकि उन्हें शिशु के बेहतर विकास का पता चले।

  • शिशु को जरूरी वैक्सीन दिलवाना और नियमित रूप से डॉक्टर से चेकअप कराना।
  • शिशु को ठोस आहार देने के लिए डॉक्टर से सलाह-परामर्श करके डाइट चार्ट बनाना।
  • पानी कितनी मात्रा में देना है, इस बारे में डॉक्टर से पूछना।
  • 6 महीने के हिसाब से पर्याप्त खिलौने रखना।
  • शिशु के कपड़े, डायपर और साफ-सफाई का ध्यान रखना।

इस लेख के आगे के भाग में हम माता-पिता द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब देंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मुझे कैसे पता लगेगा कि मेरा बेबी ठोस भोजन के लिए तैयार है?

इसके कुछ लक्षण हो सकते हैं, जिससे आपको पता चल सकेगा कि आपका बच्चा ठोस आहार के लिए तैयार है या नहीं। नीचे हम इनके बारे में आपको बता रहे हैं (8) :

  • जब आपका शिशु अपनी गर्दन और सिर को कंट्रोल करने लगे।
  • जब आप शिशु को चम्मच से दूध पिलाएं या कुछ खिलाएं और वह खाने को बाहर न धकेले।
  • अगर आपका बच्चा किसी और को खाते देख उसकी तरफ जिज्ञासा व्यक्त करे।

क्या 6 महीने की उम्र में बेबी वॉकर का उपयोग कर सकता है?

नहीं, बेबी वॉकर से कुछ खास फायदा नहीं होता, बल्कि शिशु के गिरने का डर व अन्य जोखिम बढ़ जाते हैं (16)। इसलिए, बेबी वॉकर की सलाह नहीं दी जाती है।

6 महीने के बच्चे के लिए कौन से खिलौने अच्छे हैं?

आप अपने शिशु के लिए म्यूजिकल खिलौने, जिनमें लौरी या कविता बजे, सॉफ्ट बॉल, घूमने या चलने वाले खिलौने ले सकते हैं। इसके अलावा भी बाजार में कई सारे खिलौने उपलब्ध हैं।

क्या 6 महीने के बच्चे के बीमार होने पर भी टीकाकरण करवाया जा सकता है?

अगर आपके बच्चे को हल्का-फुल्का बुखार या सर्दी-जुकाम है, तो आप उसका टीकाकरण न करवाएं। एक बार शिशु जब ठीक हो जाए, तो उसके बाद टीकाकरण करवाया जा सकता है।

आशा करते हैं कि इस लेख से आपको अपने छह महीने के शिशु की देखभाल में मदद मिलेगी। अपने शिशु की जरूरतों को बेहतर तरीके से जानने के लिए, उनके साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताएं। इससे माता-पिता और शिशु के रिश्ते में मजबूती आएगी और बच्चे के सही विकास में भी मदद मिलेगी। उम्मीद करते हैं कि यह लेख आपके लिए ज्ञानवर्धक रहा होगा।

संदर्भ (References) :