गर्भावस्था का सातवाँ महीना- लक्षण, बच्चे का विकास और शारीरिक बदलाव

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बधाई हो! आपने गर्भावस्था की दूसरी तिमाही पार कर ली है और तीसरी तिमाही में कदम रख लिया है। एक ओर जहां दूसरी तिमाही को हैप्पी टाइम कहा जाता है, वहीं तीसरी तिमाही में आपको पूरी सतर्कता बरतनी होती है। अब जब डिलीवरी का समय नज़दीक है और शिशु गर्भ में तेज़ी से विकास कर रहा है, तो आप ऐसा कोई काम न करें, जिससे आपको या शिशु को हानि पहुंचे।

मॉमजंक्शन के इस लेख में गर्भावस्था की तीसरी तिमाही की शुरुआत यानी गर्भावस्था के सातवें महीने (25वें सप्ताह से 28वें सप्ताह तक) से जुड़ी ज़रूरी जानकारियां दी गई हैं।

गर्भावस्था के सातवें महीने में लक्षण

गर्भावस्था के सातवें महीने में कुछ नए लक्षण नज़र आते हैं। ज़रूरी नहीं कि सभी लक्षण अच्छा ही महसूस कराएं। कुछ लक्षण परेशानियां भी लेकर आते हैं। इस दौरान आपको कुछ ऐसा महसूस हो सकता है :

  • ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन : जैसे-जैसे गर्भावस्था का समय बढ़ेगा और आप सातवें महीने में कदम रखेंगी वैसे-वैसे आपको ब्रेक्सटन हिक्स महसूस हो सकते हैं। यह हल्के-हल्के संकुचन होते हैं, जो 30 सेकंड से एक मिनट तक रह सकते हैं। ब्रेक्सटन हिक्स को ‘फाल्स लेबर’ भी कहा जाता है (1)
  • योनि स्राव में वृद्धि : गर्भावस्था में योनि स्राव होना सामान्य है। शुरुआती समय में यह किसी भी तरह के संक्रमण को गर्भाशय तक पहंचने से रोकता है। समय के साथ-साथ शिशु का सिर श्रोणि भाग पर दबाव डालता है, जिस कारण योनि से रिसाव होने लगता है। हालांकि, यह सामान्य है, लेकिन अगर आपको इस स्राव से दुर्गंध आने लगे, तो एक बार डॉक्टर से संपर्क कर लें।
  • स्तनों से रिसाव होना : गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में स्तनों से रिसाव होना शुरू हो जाता है। यह गाढ़ा और पीले रंग का पदार्थ होता है, जिसे ‘कोलोस्ट्रम’ कहते हैं। यह रिसाव दिन में किसी भी समय हो सकता है। जैसे-जैसे डिलीवरी का समय नज़दीक आता है यह एकदम रंगहीन हो जाता है और ऐसा होना सामान्य प्रक्रिया है।
  • अपच : गर्भावस्था में अपच की समस्या होना आम है। इस दौरान अक्सर पेट फूलना, छाती में जलन व जी-मिचलाना जैसा महसूस हो सकता है। यह समस्या तीसरी तिमाही में ज़्यादा बढ़ जाती है। शिशु के विकसित होने से पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता, जिस कारण अपच की समस्या होने लगती है।

तो ऊपर हमने पढ़े सातवें महीने के लक्षण अब जानिए इस दौरान होने वाले शारीरिक बदलावों के बारे में।

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प्रेग्नेंसी के सातवें महीने में शरीर में होने वाले बदलाव

यह अब आपकी अंतिम तिमाही की शुरुआत है। इस समय तक आपका पेट और बढ़ जाएगा और कई तरह के शारीरिक बदलाव देखने को मिलेंगे। नीचे हम बता रहे हैं कि सातवें महीने के दौरान शरीर में क्या-क्या शारीरिक बदलाव देखने को मिलते हैं (2) :

  • सातवें महीने तक आपका वज़न काफ़ी बढ़ जाता है, जो गर्भावस्था में सामान्य है। इस समय तक आपका करीब पांच किलो वज़न बढ़ सकता है। इसके अलावा, गर्भाशय बढ़ने के कारण पेट पर खिंचाव के निशान ज्यादा दिखने लगेंगे।
  • इस दौरान आपका गर्भाशय नाभि के ऊपर आ जाएगा और कभी-कभी सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। गर्भाशय ऊपर आने से आपको सोने में भी तकलीफ हो सकती है।
  • पहले के मुकाबले स्तन और बड़े हो जाएंगे। निप्पल के आसपास का रंग और गहरा हो सकता है।
  • इस समय पर आपका पेट लगातार बढ़ता जाता है, जिससे आपको चलने में और झुकने में समस्या हो सकती है।
  • शरीर में हो रहे तेज़ रक्त प्रवाह के चलते शरीर में सूजन आना सामान्य है।
  • वज़न बढ़ने के कारण आपको सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है।

आइए, अब जानते हैं गर्भावस्था के सातवें महीने में बच्चे का किस तरह विकास होता है।

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गर्भावस्था के सातवें महीने में बच्चे का विकास और आकार

  1. गर्भावस्था के सातवें महीने तक शिशु का आधे से ज़्यादा विकास हो जाता है।
  1. आपका शिशु अब बाहर की आवाज़ों पर प्रतिक्रिया भी दे सकता है और अंगड़ाइयों के साथ जम्हाइयां भी लेता है।
  1. इस महीने तक शिशु की पलकें और भौं आ जाती हैं।
  1. अब शिशु आंखें खोल भी सकता है और बंद भी कर सकता है।
  1. इसके अलावा, गर्भावस्था के सातवें महीने के अंत तक शिशु लगभग 14 इंच लंबा हो जाता है और उसका वज़न एक किलो के आसपास हो सकता है (3)

आइए, अब जानते हैं सातवें महीने के दौरान कैसी देखभाल होनी चाहिए।

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गर्भावस्था के सातवें महीने में देखभाल

गर्भावस्था का सातवां महीना आखिरी तिमाही की शुरुआत है। इस दौरान खास देखभाल की ज़रूरत होती है। आपकी जीवनशैली कैसी है, आप क्या खा रही हैं और किन चीज़ों से आप परहेज़ करती हैं, यह सब आपकी गर्भावस्था पर असर डालता है। अब हम बात करने जा रहे हैं गर्भावस्था के खान-पान की।

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गर्भावस्था के सातवें महीने में खाएं ये चीज़ें

गर्भावस्था के सातवें महीने में आपको अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना होगा। यह गर्भावस्था की आखिरी तिमाही है, इसलिए आप जो भी खाएं पौष्टिक खाएं, ताकि आपको और शिशु को भरपूर पोषण मिले। जानिए इस दौरान क्या खाना चाहिए (4) :

  • आयरन युक्त खाद्य पदार्थ : तीसरी तिमाही में खून की कमी से बचने के लिए भरपूर मात्रा में आयरन युक्त भोजन खाना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान, रोज़ाना 27 एमजी आयरन लेना चाहिए।
  • कैल्शियम युक्त भोजन : गर्भावस्था में बच्चे के विकास के लिए कैल्शियम ज़रूरी है। खासतौर पर तीसरी तिमाही में। हालांकि, इस दौरान अतिरिक्त कैल्शियम लेने की ज़रूरत नहीं होती। तीसरी तिमाही में रोज़ाना एक हज़ार एमजी कैल्शियम लेना चाहिए।
  • मैग्नीशियम युक्त खाना : मैग्नीशियम, कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह पैरों में होने वाली ऐंठन से राहत दिलाता है।
  • डीएचए से भरपूर खाना : डीएचए एक फैटी एसिड है, जो शिशु के दिमागी विकास के लिए ज़रूरी है। गर्भावस्था के दौरान रोज़ाना 200 एमजी डीएचए लेने की सलाह दी जाती है। इसके लिए आप कम स्तर की मरकरी वाली मछली, संतरे का जूस, दूध व अंडा ले सकते हैं (5)
  • फोलिक एसिड : शिशु के रीढ़ की हड्डी और दिमागी विकास के लिए फोलिक एसिड लेना ज़रूरी है। यह शिशु को स्पाइना बिफिडा जैसे विकार से बचाने में मदद करता है (6)। इसके लिए डॉक्टर गर्भवती को फोलिक एसिड के अनुपूरक भी देते हैं।
  • फाइबर युक्त भोजन : सातवें महीने के दौरान गर्भाशय काफी बढ़ जाता है, जिस कारण पेट का पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता। इस वजह से अक्सर गर्भवती को कब्ज़ की समस्या रहती है। इससे बचने के लिए जितना हो सके फाइबर युक्त भोजन खाएं।
  • विटामिन-सी : आयरन को ठीक से अवशोषित करने के लिए विटामिन-सी का सेवन करना ज़रूरी है। विटामिन-सी के लिए आप संतरा व नींबू अपने खान-पान में शामिल कर सकती हैं।

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गर्भावस्था के सातवें महीने में न खाएं ये चीज़ें

गर्भावस्था के सातवें महीने में सीने में जलन, पैरों में सूजन व कब्ज़ जैसी समस्याएं होना आम है। खान-पान में परहेज करने से इन समस्याओं से राहत पाई जा सकती हैं। जानिए, गर्भावस्था के सातवें महीने में क्या नहीं खाना चाहिए :

  • मसालेदार और ज्यादा फैट वाली चीज़ें : आपको इस दौरान ऐसी सभी चीज़ें खाने से बचना चाहिए, जिनमें तेल-मसालों का ज्यादा इस्तेमाल किया गया हो। इनसे सीने में जलन की समस्या बढ़ सकती है।
  • सोडियम का ज्यादा इस्तेमाल : शरीर में सूजन आना आम बात है। इससे बचने के लिए आपको सोडियम की मात्रा कम करनी होगी। ज्यादा नमक वाली चीज़ें जैसे चिप्स, डिब्बाबंद आहार व बाज़ार का अचार खाना कम करना चाहिए।
  • कैफ़ीन, अल्कोहॉल : गर्भावस्था में शराब, तंबाकू, सिगरेट और कैफ़ीन युक्त चीज़ें जैसे चाय-कॉफी के सेवन से बचना चाहिए। इनसे शिशु के विकास में बाधा पहुंचती है (7)
  • जंक फूड : इस दौरान जंक फूड जैसे- पीज़्ज़ा, बर्गर और बाहर की चाट-पकौड़ियां खाने से बचें। ये चीज़ें आपके पाचन को खराब करती हैं और इनमें पोषक तत्व भी नहीं होते हैं। अगर ज्यादा ही मन करे, तो आप घर पर ही ताज़ी सब्ज़ियों जैसे गाजर, खीरा, टमाटर का सैंडविच खा सकती हैं। सैंडविच बनाने के लिए आप गेहूं के आटे की ब्रेड का इस्तेमाल करें।

चूंकि व्यायाम करना काफी फायदेमंद होता है, तो जानिए सातवें महीने के व्यायाम के बारे में।

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गर्भावस्था के सातवें महीने के लिए व्यायाम

व्यायाम हर किसी के लिए ज़रूरी है। यह आपको न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रखता है, बल्कि तरोताज़ा भी रखता है। चूंकि, यह गर्भावस्था की आखिरी तिमाही है, इसलिए ऐसा कोई आसन नहीं करना चाहिए, जिससे शिशु को नुकसान पहुंचे। आप चाहें, तो इस दौरान अनुलोम-विलोम और हल्की-फुल्की सैर कर सकती हैं, लेकिन ज़्यादा शारीरिक गतिविधियां इस महीने में करने से मना की जाती हैं। फिर भी अगर आप व्यायाम करने की इच्छुक हैं, तो एक बार विशेषज्ञ से संपर्क करें, वो आपकी शारीरिक स्थिति देखकर उचित व्यायाम बताएंगे।

सातवें महीने के व्यायाम के बाद आइए अब जानते हैं कि इस दौरान कौन-कौन से मेडिकल टेस्ट होते हैं।

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गर्भावस्था के सातवें महीने के दौरान स्कैन और परीक्षण

गर्भावस्था में नियमित रूप से चिकित्सीय जांच करवाना ज़रूरी है, ताकि शिशु के विकास और स्वास्थ्य पर नियमित रूप से नज़र बनाई जा सके। जानिए, गर्भावस्था के सातवें महीने में कौन-कौन सी जांच की जाती हैं :

  • इस दौरान डॉक्टर शिशु के विकास की पूरी जांच करेंगे। शिशु के दिल की धड़कन की जांच के लिए फीटल हार्ट रेट मॉनिटरिंग, आपका रक्त संचार, गर्भाशय का आकार व किसी तरह का संक्रमण पता लगाने के लिए पेशाब की जांच की जाती है।
  • इसके अलावा, बायोफिज़िकल प्रोफाइल टेस्ट (Biophysical profile test) व कॉन्ट्रैक्शन स्ट्रेस टेस्ट (CST) किया जाता है। यह टेस्ट अल्ट्रासाउंड की मदद से होता है, जिसमें शिशु के दिल का स्वास्थ्य जांचा जाता है। यह जांच गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में होती है।

आपने जान लिया कि इस महीने में क्या-क्या जांच होती है। अब जानते हैं कि आपको क्या-क्या सावधानियां बरतने की ज़रूरत होगी।

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गर्भावस्था के सातवें महीने के दौरान सावधानियां

इस दौरान, आपको अपनी दैनिक क्रियाओं में सतर्कता बरतनी होगी। यहां हम कुछ सावधानियां बताने जा रहे हैं, जो गर्भावस्था का सातवां महीना स्वस्थ तरीके से पार करने में आपकी मदद करेंगी।

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गर्भावस्था के सातवें महीने में क्या करें?

  • खानपान : इस दौरान सबसे ज़्यादा ज़रूरी है सही खान-पान। गर्भावस्था के सातवें महीने में आप ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन करें। डॉक्टर की सलाह लेकर अखरोट और समुद्री भोजन का इस्तेमाल कर सकती हैं।
  • नियमित रूप से सैर करें : सातवें महीने में नियमित रूप से सैर करना, आपके लिए फायदेमंद रहेगा। इससे आपको प्रसव के दौरान आसानी होगी।
  • नियमित रूप से जांच कराएं : डॉक्टर से नियमित रूप से जांच करवाना ज़रूरी है। इसमें किसी तरह की लापरवाही न बरतें। अगर जांच में लगे कि शिशु के लिए अतिरिक्त पोषण की ज़रूरत है, तो अपनी खुराक में सुधार लाने की ज़िम्मेदारी आपकी है।
  • ज़रूरी अनुपूरक लें : गर्भावस्था में आप जो खा रही हैं, केवल उतना ही आपके लिए और शिशु के लिए काफ़ी नहीं है। शिशु का ठीक ढंग से विकास हो, उसके लिए डॉक्टर के बताए हुए ज़रूरी अनुपूरक लेना आवश्यक है।
  • खुद को व्यस्त रखें : डिलीवरी का समय जितना नज़दीक आएगा महिला की घबराहट उतनी ही बढ़ सकती है। इसलिए, ज़्यादा न सोचते हुए खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें। आप चाहें, तो अपनी पसंदीदा किताब पढ़ सकती हैं या पसंदीदा संगीत सुन सकती हैं।

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गर्भावस्था के सातवें महीने में क्या न करें?

  • गलत अवस्था में न सोएं : इस दौरान आप किस अवस्था में सोती हैं, यह काफ़ी मायने रखता है। दाईं ओर करवट लेकर या सीधा सोने से बचें। गर्भवती के लिए बाईं ओर करवट लेकर सोने की स्थिति सबसे सही मानी गई है (8)
  • आगे की ओर न झुकें : इस महीने में झुकने के लिए पूरी तरह से मना किया जाता है। अब आपका बेबी बंप बढ़ चुका है, ऐसे में आगे की ओर झुकने से उस पर दबाव पड़ सकता है, जो शिशु के लिए हानिकारक है।

सातवें महीने में कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो चिंता का विषय बन सकती हैं। जानिए इनके बारे में।

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गर्भावस्था के सातवें महीने के दौरान चिंताएं

गर्भावस्था का सातवां महीना कई अनुभव लेकर आता है। एक ओर जहां आप अपने अंदर शिशु की हलचल को महसूस करके सुखद अनुभव लेंगी, वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य परेशानियां भी आ सकती हैं। अगर सातवें महीने के दौरान आपको नीचे बताई गई समस्याएं होती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

  • अत्यधिक रक्तस्राव होने पर : सातवें महीने में अत्यधिक रक्तस्राव होने को नज़रअंदाज़ न करें। कई बार अपरा (placenta) नीचे की ओर गर्भाशय ग्रीवा तक आ जाती है, जिस कारण रक्तस्राव होने लगता है (9)
  • पेट में ज़ोर से दर्द : बढ़ते गर्भाशय के कारण पेट में हल्का-फुल्का दर्द होना सामान्य है, लेकिन अगर यह दर्द आपको तेज़ी से और असहनीय होने लगे, तो ऐसे में समय बर्बाद न करते हुए डॉक्टर से संपर्क करें।
  • एक घंटे में चार बार से ज़्यादा संकुचन : इस दौरान होने वाले संकुचन को ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन (फॉल्स लेबर पेन) कहा जाता है। यह ज़्यादातर गर्भावस्था के सातवें महीने से शुरू होते हैं और एक घंटे में एक या दो बार हो सकते हैं। इस दौरान आपको पेट की मांसपेशियों में कसाव महसूस होगा। अगर यह संकुचन एक घंटे में चार बार से ज्यादा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कभी-कभी इससे समय पूर्व प्रसव का खतरा बढ़ सकता है (1)
  • लगातार उल्टियां होने पर : अगर आपको उल्टियां हो रही हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। शरीर में पानी की कमी होने पर डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है, जिस कारण उल्टी होती है।

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होने वाले पिता के लिए टिप्स

अब तक डॉक्टर ने आपको बता ही दिया होगा कि आपका बेबी अब बाहर की आवाज़ें सुन सकता है। इसलिए, शिशु के जन्म से पहले ही उसके साथ मधुर रिश्ता बनाने का यही समय है। आप बाहर से उसके लिए गीत गाएं, उससे बात करने की कोशिश करें। इसके अलावा, होने वाले पिता के लिए हम कुछ और टिप्स भी दे रहे हैं, जिससे आप अपनी पत्नी की इस दौरान मदद कर सकते हैं

काम में मदद करें : घर के कामों में हाथ बंटाकर पत्नी की मदद कर सकते हैं। अगर आप खाना नहीं बना सकते, तो साफ़-सफ़ाई के जरिए गर्भवती का काम हल्का कर सकते हैं।

संयम बनाएं रखें : गर्भावस्था की आखिरी तिमाही में महिला को भूलने की समस्या होने लगती है। इसलिए, हो सकता है कि खाने में नमक डालना भूल जाए या अन्य कोई काम करना भूल जाए। ऐसे में आपको गर्भवती की स्थिति को समझना चाहिए और संयम बरतना चाहिए।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गर्भावस्था के सातवें महीने के दौरान पैर दर्द होने पर क्या करना चाहिए?

बढ़ते वज़न के कारण पैरों में दर्द की समस्या आम है। इससे राहत पाने के लिए आप तेल से पैरों की हल्की मालिश करवा सकती हैं। हो सके तो एड़ी के बल कुछ देर चलें। लेटते समय अपने पैरों के नीचे तकिया लगाकर पैर को ऊंचा रखिए, इससे आपको राहत मिलेगी। पैरों में खिंचाव लाएं। इसके लिए टखनों और टांगों की अंगुलियों को ऊपर की ओर धीरे-धीरे खींचने से आपको आराम महसूस होगा (10)

मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरे संकुचन, ब्रेक्सटन हिक्स हैं या समय से पहले लेबर हैं?

ब्रेक्सटन हिक्स और लेबर पेन में अंतर होता है। एक ओर जहां लेबर पेन लगातार होता है, तो वहीं ब्रेक्सटन हिक्स 30 सेकेंड से लेकर एक मिनट तक हो सकते हैं। लेबर का दर्द पीठ के पिछले हिस्से से शुरू होकर आगे की ओर बढ़ता है। वहीं, ब्रेक्सटन हिक्स में पेट सख्त हो जाता है। ब्रेक्सटन हिक्स बीच-बीच में ठीक भी होते रहते हैं।

क्या, मैं सातवें महीने की गर्भावस्था के दौरान अपनी पीठ के बल सो सकती हूं?

इस दौरान पीठ के बल सोने से मना किया जाता है। ऐसा करने से पीठ में दर्द और बढ़ सकता है और शिशु तक का रक्त प्रवाह धीमा पड़ सकता है। ऐसे में आपको बाईं ओर करवट लेकर सोने की सलाह दी जाती है (8)

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हम उम्मीद करते हैं कि आपको इस लेख में गर्भावस्था के सातवें महीने के दौरान की ज़रूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अगर फिर भी इससे संबंधित आप कोई सवाल पूछना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में हमसे पूछ सकते हैं। इसके अलावा, यह लेख उन परिचित महिलाओं के साथ शेयर करना न भूलें, जो सातवें महीने की गर्भवती हैं।

संदर्भ (References) :

1. Braxton Hicks contractions By Ncbi
2. Pregnancy stages and changes By Better Health Channel
3. Fetal growth and development by website of the state of south dakota department of health
4. Pregnancy and diet By Better Health Channel
5. Vitamins and other nutrients during pregnancy By marchofdimes
6. Folic Acid Helps Prevent Some Birth Defects By center of disease control and prevention
7. Pregnancy – medication, drugs and alcohol By Better Health Channel
8. Problems sleeping during pregnancy By Medline Plus
9. Vaginal bleeding in late pregnancy By Medline Plus
10. Aches and pains during pregnancy By Mediline Plus

 

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