9 महीने के बच्चे की गतिविधियां, विकास और देखभाल | 9 Mahine Ke Shishu Ka Vikas

9 Mahine Ke Shishu Ka Vikas

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अगर आपका शिशु अपने उम्र के 9वें महीने में कदम रख चुका है, तो वह पहले से ज्यादा चुस्त और थोड़ा नटखट भी हो गया होगा। आपको उसकी भोली मुस्कान लुभाती होगी और आप उसके विकास के संबंध में और भी बहुत कुछ जानना चाहते होंगे। मॉमजंक्शन के इस लेख में आपको 9 महीने का बच्चा क्या-क्या कर सकता है, क्या खा सकता है आदि बातों के बारे में जानकारी मिलेगी।

9 महीने के बच्चे का वजन और हाइट कितनी होनी चाहिए?

9 महीने के शिशु का विकास पिछले महीनों की तुलना में काफी एक्टिव हो जाता है। उसके वजन और हाइट में भी काफी बदलाव होते हैं। नौ महीने की बेबी गर्ल का सामान्य वजन लगभग 7.2 से लेकर 9.3 किलो तक और लंबाई करीब 70 सेंटीमीटर तक हो सकती है। वहीं, बेबी बॉय का सामान्य वजन लगभग 7.9 किलो से लेकर 10.2 किलो तक हो सकता है और लंबाई लगभग 72 सेंटीमीटर तक हो सकती है (1)

नोट : हर शिशु का शारीरिक विकास अलग-अलग होता है। इसलिए, सभी के वजन और लंबाई में अंतर हो सकता है। इस बारे में आपको डॉक्टर बेहतर बता सकते हैं। अगर आपको लगता है कि अन्य शिशु की तुलना में आपके शिशु का वजन कम या जरूरत से ज्यादा है, तो आप डॉक्टर से चेकअप करवा सकते हैं।

लेख के अगले भाग में हम 9 महीने के शिशु के विकास में होने वाले जरूरी माइलस्टोन के बारे में बताएंगे।

9 महीने के बच्चे के विकास के माइल्सटोन क्या हैं?

अब आपका शिशु नौ महीने का हो चुका है और वह पहले से ज्यादा फुर्तीला हो गया होगा। 9 महीने की उम्र में बच्चे की गतिविधियों में बदलाव आने लगता है और वो नई-नई चीजें सीखने लगता है। ऐसे में उसके मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक परिवर्तनों पर ध्यान देना जरूरी है। यहां जानिए कि 9 महीने के शिशु में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं :

मानसिक विकास

  1. इशारों की नकल करना – आपने यह तो सुना ही होगा कि बड़े जो करते हैं, बच्चे उसे देखकर दोहराने की कोशिश करते हैं। यह बात काफी हद तक सच है, क्योंकि 9 महीने के बच्चे अपने आसपास हर वक्त रहने वाले लोगों की नकल करने का प्रयास करते हैं। सिर्फ आदतें ही नहीं, बल्कि आवाजों की भी नकल करने लगते हैं। इसलिए, जो उनके साथ रहते हैं, उन्हें कोई भी काम सावधानी से करना चाहिए और सोच-समझकर बोलना चाहिए (2) (3)
  1. आवाजें निकालना – 9 महीने में शिशु कई तरह की आवाजें निकालने लगते हैं, यहां तक कि ‘मम्मा-बाबा’ तक बोलना सीखने लगते हैं (2) (4)
  1. चीजों को दिखाना – इस उम्र में शिशु को चीजों और लोगों की काफी समझ हो जाती है। उन्हें जो चीज चाहिए होती है या जिस इंसान के पास जाना होता है, वो उनकी तरफ उंगली से इशारा करके दिखाने लगते हैं (2)
  1. लुका छिपी खेलना – अगर कोई उनके साथ लुका छिपी खेलें, तो उन्हें अच्छा लगता है और वो उस खेल का मजा लेने लगते हैं (2) (4)
  1. ‘न’ की समझ – 9 महीने के शिशु ‘न’ शब्द को समझने लगते हैं। अगर वो कोई चीज मांगे और उन्हें न मिले, तो वो रोने लगते हैं (2)
  1. चीजों को मुंह में डालना – इस उम्र में शिशु थोड़ी बहुत चीजें खाना सीखने लगते हैं। उनके सामने कुछ भी रहता है, तो वो उसे अपने मुंह में डाल लेते हैं। इसलिए, इस दौरान माता-पिता को शिशु पर काफी ध्यान रखना जरूरी होता है (2)
  1. किताबें देखना – 9 महीने के बच्चे रंग-बिरंगी किताबों के तरफ भी बहुत आकर्षित होते हैं। अगर बड़े उनके साथ बैठकर उन्हें कार्टून की किताबें दिखाएं, तो वो काफी देर तक उसकी तरफ आकर्षित रहते हैं (4)
  1. चीजों को फेंकना – शिशु चीजों को जमीन पर फेंकना या दीवार पर मारना सीखने लगते हैं। अगर एक बार उन्हें उठाकर वो चीज वापस दो, तो उन्हें मजा आता है और वो बार-बार उसे दोहराते हैं (4)

शारीरिक विकास

  1. क्रॉल या घुटनों के बल चलना – माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं होता, जब उनका शिशु घुटनों के बल चलकर उनके तरफ आता है। 9 महीने का बच्चा घुटनों के बल चलना सीखने और खेलने लगता है (2)
  1. बिना सहारे के बैठना – शिशु जन्म के कुछ महीने तक खुद से बैठ नहीं पाता, क्योंकि उनकी रीढ़ की हड्डी कमजोर होती है और सही तरीके से विकसित नहीं होती है। फिर जैसे-जैसे वो बड़े होने लगते हैं, उनकी रीढ़ की हड्डी मजबूत होने लगती है और जब शिशु 9 महीने के होते हैं, तो वो बिना सहारे के बैठने लगते हैं (2)
  1. चीजों को पकड़ना – शिशु अपने तर्जनी और अंगूठे से छोटी-छोटी चीजों को पकड़ना सीखने लगते हैं और एक हाथ से दूसरे हाथ में पास करना भी सीख जाते हैं (2) (3)
  1. कंधों और हाथों का उपयोग – शिशु कंधों और हाथों का सहारा लेने लगते हैं। अगर उन्हें नीचे या बेड पर पेट के बल लेटाया जाता है, तो वो अपने हाथों से खुद को रोक सकते हैं। इसको पैराशूट रिफ्लेक्स कहते हैं (3)
  1. सहारे से खड़ा होना – शिशु सहारे के साथ-साथ धीरे-धीरे खड़े होने लगते हैं। कई बार तो वो इशारे करके या रो-रोकर लोगों को अपने पास बुलाते हैं। फिर उनके सहारे खड़े होकर खुश हो जाते हैं (2)

सामाजिक और भावनात्मक विकास

  1. जानने वालों के ज्यादा करीब – जो लोग शिशु के साथ ज्यादा वक्त बिताते हैं, उनके साथ शिशु ज्यादा घुल-मिल जाते हैं और प्यार जताते हैं। साथ ही उनके करीब रहना पसंद करते हैं (2)
  1. अजनबियों से डर – शिशु को लोगों को पहचानने की समझ होने लगती है। वो अपने और अजनबियों के बीच फर्क समझने लगते हैं। इसलिए, जब वो कोई नया चेहरा देखते हैं या किसी अजनबी के गोद में जाते हैं, तो रोने और चिड़चिड़ाने लगते हैं (2)
  1. पसंदीदा खिलौना – 9 महीने में शिशु कई तरह के खिलौनों से खेलना सीख जाते हैं। साथ ही कई बार उनको कुछ विशेष तरह के खिलौनों के साथ खेलना ज्यादा पसंद होता है। ऐसे में उनके पसंदीदा खिलौने भी हो जाते हैं, जिनके साथ उन्हें खेलना अच्छा लगता है (2)

आगे जानिए 9 महीने बच्चे को कौन-कौन से टीके लगवाने जरूरी है।

9 महीने के बच्चे को कौन-कौन से टीके लगाए जाते हैं?

9 महीने के शिशु का विकास सही तरीके से हो, उसके लिए उन्हें लगने वाले टीकों का ध्यान रखना जरूरी है। टीकाकरण के कारण ही शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है और बीमारियों से उनका बचाव हो सकता है। इसलिए, लेख के इस भाग में हम 9 महीने बच्चे को लगाए जाने वाले टीकों के बारे में जानकारी दे रहे हैं (5)

  • ओपीवी 2
  • एमएमआर -1

नोट : टाइफाइड कॉन्जुगेट वैक्सीन, ये टीका शिशु को 9 से 12 महीने के बीच लगाया जाता है। हालांकि, इसके बारे में आपको डॉक्टर या शिशु विशेषज्ञ से और अच्छी जानकारी मिल सकती है।

अब बारी आती है यह जानने की कि 9 महीने के बच्चे के लिए कितना दूध आवश्यक है।

9 महीने के बच्चे के लिए कितना दूध आवश्यक है?

मां का दूध – शिशु को 6 महीने तक सिर्फ मां का दूध ही पिलाना ही चाहिए। उसके बाद शिशु को ठोस आहार देना शुरू किया जा सकता है। वहीं, कुछ शिशु 6 महीने के बाद भी मां के दूध का सेवन करते हैं। अगर आपका 9 महीने का शिशु भी उन्हीं में से एक है, तो उसे दिन भर में तीन से पांच बार स्तनपान करा सकते हैं। अगर मिलीलीटर की बात करें, तो शिशु लगभग 887 से 946 मिलीलीटर (30 to 32 ounces) तक दूध पी सकता है। यह मात्रा काफी हद तक शिशु के स्वास्थ्य और भूख पर भी निर्भर करती है (6)

फॉर्मूला फीड – अगर आपका शिशु फॉर्मूला दूध पीता है, तो आप उसे उसकी इच्छानुसार चार से पांच बार फॉर्मूला फीड दे सकते हैं। आप दिनभर में 700 से 950 मिलीलीटर तक फॉर्मूला दूध दे सकते हैं (7)

नोट : शिशु की दूध पीने की मात्रा उसके भूख और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। हर शिशु की भूख और जरूरत अलग-अलग होती है, तो उसी के अनुसार वो दूध पीते हैं।

दूध के बाद बारी आती है आपके 9 महीने बच्चे के विकास के लिए सही मात्रा में आहार के बारे में जानने की।

9 महीने के बच्चे के लिए कितना खाना आवश्यक है?

9 महीने के बच्चे का विकास सही तरीके से हो, उसके लिए उसका सही आहार लेना बहुत जरूरी है। शिशु को धीरे-धीरे पौष्टिक तत्व युक्त आहार मिलना बहुत आवश्यक है। नौवें महीने का बेबी ठोस आहार लेना शुरू कर देता है। इसलिए, यहां हम आपको बता रहे हैं कि 9 महीने के बच्चे के लिए कितना खाना आवश्यक है (7)

खाद्य पदार्थमात्रा
बेबी सीरीयल (शुरुआत करें होल वीट और मिश्रित अनाज से)पूरे दिन में 4 से 8 चम्मच या उससे ज्यादा भी दे सकते हैं
हरी सब्जियांहर दिन एक चौथाई कप से आधा कप दो से तीन बार
फलहर दिन एक चौथाई कप से आधा कप दो से तीन बार
डेयरी उत्पाद – दही या पनीरएक चौथाई कप दही या पनीर के छोटे टुकड़े दिनभर में एक से दो बार
प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ – अंडे की जर्दी, चिकन, बीन्सएक चौथाई कप एक से दो बार
पानीआधा से एक कप (लगभग 125 से 250 मिलीलीटर – 4 to 8 oz) मतलब पूरे दिन में आधा से कप
फलों का जूसशिशु के एक साल का होने के बाद ही दें।

नोट : शिशु को एक साल होने के बाद ही होल मिल्क और अंडे का सफेद भाग दें। इसके अलावा, हर शिशु का स्वास्थ्य और जरूरत अलग-अलग होती है, इसलिए यह डाइट चार्ट एक उदाहरण के तौर पर हमने आपके साथ शेयर किया है।अपने शिशु के डाइट चार्ट के लिए आप शिशु विशेषज्ञ से राय ले सकते हैं।

आगे जानिए 9 महीने बच्चे के लिए कितनी नींद जरूरी है।

9 महीने के बच्चे के लिए कितनी नींद आवश्यक है?

9 महीने के बच्चे का विकास सही तरीके से हो, उसके लिए पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। 9 महीने के बच्चे की नींद में पहले की तुलना में बदलाव हो सकते हैं। 9 महीने के बच्चे के लिए 24 घंटे में से 12-16 घंटे की नींद जरूरी होती है। इसमें कुछ देर की झपकियां भी शामिल हैं (8)

9 महीने के बच्चे के लिए खेल और गतिविधियां

अब बात करते हैं आपके 9 महीने के नन्हे और फुर्तीले शिशु के लिए कुछ खेल और गतिविधियां के बारे में, जो उन्हें मानसिक और शारीरिक तरीके से और एक्टिव बनाने में आपकी मदद कर सकती हैं (9)

  • गेंद से खेलना – शिशुओं को बॉल से खेलना अच्छा लगता है। अगर उनके सामने कोई छोटी या बड़ी गेंद रखी जाए, तो वो उसे दूर फेंकने की कोशिश करते हैं। कोई उसे फिर से गेंद लाकर दे, तो शिशु बार-बार मजे के लिए यह प्रक्रिया दोहराते हैं। इस उम्र के शिशु को आवाज करने वाले और लाइट वाले खिलौने पसंद होते हैं।
  • किताबें या तस्वीरें देखना शिशु को रंग-बिरंगी किताबें दिखाएं और उन्हें कहानियां सुनाएं। ऐसा करने से वो न सिर्फ किताब के पन्नों को पलट-पलटकर आपकी कहानी सुनाने की नकल करेंगे, बल्कि रंगों को भी देखकर खुश होंगे।
  • बाल्टी के साथ खेलना – शिशु के सामने कोई बाल्टी रख दें और उसमें उनके सामने खिलौने गिराएं। इससे वो भी आपकी नकल करेंगे और खिलौने गिराएंगे। वो जैसे ही ऐसा करें आप उनके सामने ‘धप’ या कोई और शब्द बोलें। ऐसा करने से वो धीरे-धीरे कुछ शब्द सीखने लगेंगे। अगली बार जब आपका बच्चा बाल्टी में कुछ गिराए, तो आप चुप रहकर उसकी प्रतिक्रिया का इंतजार करें।
  • गाना या ताली बजाना – शिशु के सामने ताली बजाकर या गाना चलाकर खेलें। कई शिशु तो गाने सुनकर नाचने तक की कोशिश करते हैं और उत्सुक होकर ताली भी बजाने लगते हैं।

लेख के आगे के भाग में जानिए कि 9 महीने के बच्चे के माता-पिता को उनके नन्हे के लिए कौन सी स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं होती हैं।

9 महीने के बच्चों के माता-पिता की आम स्वास्थ्य चिंताएं

  • काली खांसी – काली खांसी संक्रामक होती है और यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। अगर आपके बच्चे की नाक बह रही हो, उसे हल्का बुखार हो और वो लगातार खांस रहा हो, तो बिना देर करते हुए उसे डॉक्टर के पास ले जाएं। इससे शिशु को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
  • निमोनिया – अगर आपके शिशु को लगातार बुखार हो, ठंड लगे, उल्टी और सांस लेने में तकलीफ हो, तो यह निमोनिया का लक्षण हो सकता है। ऐसी स्थिति में बिना देर करते हुए डॉक्टर से संपर्क कर शिशु की सेहत पर ध्यान दें।
  • कान में संक्रमण – कभी-कभी ऐसा होता है कि नहलाते वक्त शिशु के कान में हल्का पानी जा सकता है। हालांकि, माता-पिता तौलिए से कान साफ कर देते हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसा करने से भी पानी ठीक से नहीं निकलता है। इस कारण शिशु को कान दर्द की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है और कान में संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में शिशु को तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं और सावधानी बरतें।

9 महीने बच्चे के बारे में जानिए कुछ और बातें।

बच्चे की सुनने की क्षमता, दृष्टि और अन्य इंद्रियां

क्या मेरा बच्चा देख सकता है?

आपके शिशु की दृष्टि महीने दर महीने तेज होने लगती है और नौवें महीने में आपकी शिशु की दृष्टि काफी विकसित हो जाती है। अब आपका शिशु दूर और पास दोनों चीजें तो देख ही सकता है, साथ ही चलती हुई चीजों पर भी ध्यान केंद्रित कर सकता है। उसे रंग-बिरंगी किताबें और खिलौने देखना और परिचित चेहरों को देखना पसंद आने लगता है (10)

क्या मेरा बच्चा सुन सकता है?

आपका शिशु जन्म के बाद से ही आपको सुनने और समझने लगता है। वो जैसे-जैसे बड़ा होता है, उसके सुनने और समझने की ताकत भी विकसित होने लगती है। इस उम्र में शिशु आवाजों को और शब्दों जैसे – दा, बा को सुनकर समझने लगता है और उससे अपने शब्द जैसे – दादा, बाबा बनाकर बोलने की कोशिश करने लगता है (10)

क्या मेरा बच्चा स्वाद और गंध को पहचान सकता है?

इस उम्र से ही शिशु अपने पसंद के खाने का धीरे-धीरे चुनाव करने लगते हैं। अगर आपका शिशु कुछ खाने से इंकार करे, तो आप उसे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार वो चीज देने की कोशिश करें। ऐसा करने से वो कभी न कभी उस चीज को जरूर चखेंगे। इसके अलावा, शिशु को अच्छी खुशबू वाली चीजों को हल्का-हल्का सुंघाएं, ताकि उनमें गंध की समझ और ज्यादा होने लगे (10)

नीचे पढ़ें नौवें महीने में शिशु की सफाई को लेकर ध्यान देने के संबंध में कुछ टिप्स।

बेबी स्वच्छता से जुड़ी कुछ बातें

शिशु को नहलाएं – शिशु को रोजाना नहलाएं। आप मौसम के अनुसार शिशु को नहलाने का फैसला कर सकते हैं। अगर रोजाना नहीं नहला सकते हैं, तो गीले तैलिये से हल्का-हल्का करके उनके शरीर को पोछें। फिर मॉइस्चराइजर या बेबी क्रीम लगाएं।

हाथ धोना – बाहर से आने के बाद शिशु को छूने से पहले हाथ धोएं। शिशु बहुत ही नाजुक होते हैं और उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए उन्हें किसी भी चीज का संक्रमण जल्दी हो सकता है। इसलिए, बाहर से आने के बाद जो कोई भी शिशु को गोद में ले या छूने की कोशिश करे, तो पहले उसे हाथ धोने को कहें।

घर की साफ-सफाई – 9 महीने में शिशु क्रॉल करके जमीन पर खेलना शुरू कर देते हैं, ऐसे में ध्यान रहे कि आपका घर साफ-सुथरा रहे। इस उम्र में शिशु को कुछ भी उठाकर मुंह में डालने की आदत होती है। ऐसे में वो नीचे पड़ी चीजों को उठाकर मुंह में ले सकते हैं और इससे उनका स्वास्थ्य खराब हो सकता है। इसलिए, हर वक्त घर की सफाई पर ध्यान दें।

खिलौनों को साफ करना – शिशु खिलौनों से खेलते-खेलते कई बार उसे मुंह में लेने लगते हैं। अगर खिलौना गंदा हो, तो वो गंदगी शिशु के पेट में जा सकता है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

शिशु के कपड़े – शिशु के कपड़ों को एंटीसेप्टिक लिक्विड से और गुनगुने पानी से धोएं, ताकि उनमें कीटाणु की समस्या न हो।

खाने का बर्तन – 9 महीने का बच्चा थोड़ा बहुत ठोस आहार लेने लगता है। ऐसे में शिशु को जिस कटोरे और चम्मच से आप आहार दे रहे हैं, उसे अच्छी तरह से धोएं।

आगे हम बताएंगे कि कैसे माता-पिता अपने शिशु के विकास में सहयोग कर सकते हैं।

माता-पिता बच्चे के विकास में कैसे मदद कर सकते हैं?

शिशु का सही विकास हो, उसमें माता-पिता का महत्वपूर्ण योगदान होता है। नीचे उसी के बारे में हम कुछ बातें बता रहे हैं :

  1. माता-पिता शिशु को रंग-बिरंगी किताबें दिखाएं और कहानियां व लोरी सुनाएं।
  1. पौष्टिक आहार खिलाएं।
  1. उनके साथ खेलें और ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताएं।
  1. नई-नई चीजें और खिलौने दिखाएं।
  1. उन्हें जमीन पर खेलने और क्रॉल करने दें।
  1. इस उम्र में शिशु जमीन पर खेलने और क्रॉल करने लगते हैं। ऐसे में आपका घर बेबी प्रूफ होना भी जरूरी है, ताकि आपके शिशु को चोट न लगे या कोई अन्य समस्या न हो। टेबल व कुर्सी के नुकीले कोनों का ध्यान रखें। इससे आपके शिशु को चोट लगने का डर होता है। छोटी-छोटी चीजें जमीन पर न हो, जिसे शिशु मुंह में ले सके, कहीं पर भी तार न निकला हो।

अब हम आपको 9 महीने बच्चे के कुछ लक्षण बताएंगे, जिसके बारे में माता-पिता को ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि अगर इन लक्षणों पर ध्यान न दिया गया, तो यह चिंता का कारण हो सकता है।

9 महीने के बच्चे के विकास के बारे में माता-पिता को कब चिंतित होना चाहिए?

  • अगर आपका शिशु खड़े होने में असमर्थ हो।
  • अगर शिशु चीजों को उंगलियों से पकड़ नहीं पा रहा हो (9)
  • दूर की चीजों को देखने और समझने में परेशानी हो रही हो।
  • अगर शिशु अपनी आंखों को ज्यादा रगड़ या नोंच रहा हो (10)
  • आवाजों को सुनकर कोई प्रतिक्रिया न दे रहा हो।
  • अगर बैठने में परेशानी हो रही हो।
  • अगर शिशु चिड़चिड़ा हो और दिनभर रोता रहे।

इस महीने के लिए चेकलिस्ट

अन्य महीनों की तरह 9 महीने शिशु के लिए भी माता-पिता को चेकलिस्ट रखनी चाहिए, ताकि उन्हें शिशु के बेहतर विकास का पता चलते रहे।

  • नियमित रूप से डॉक्टर से शिशु का चेकअप कराएं।
  • 9 महीने में दिए जाने वाले वैक्सीन के बारे में जानकारी रखकर शिशु को सही वक्त पर वैक्सीन दिलवाएं।
  • शिशु की सफाई का पूरा ध्यान रखें।
  • 9 महीने के शिशु की तस्वीर खींचना न भूलें, जिससे आपको शिशु के शारीरिक विकास का पता चलेगा।

आगे हम माता-पिता द्वारा पूछे जानें वाले कुछ आम सवालों के जवाब देंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 9 महीने की उम्र में बच्चे चलना शुरू कर सकते हैं?

9 महीने की उम्र में बच्चे क्रॉल करना सीख जाते हैं। अगर चलने की बात करें, तो कुछ बच्चे चल सकते हैं और कुछ नहीं भी चल सकते हैं। यह पूरी तरह से शिशु के स्वास्थ्य और उनके विकास पर निर्भर करता है (11)

मेरे 9 महीने के बच्चे ने बैठना नहीं सीखा है। क्या मुझे इस बारे में चिंता करनी चाहिए?

आमतौर पर शिशु छठे महीने से बिना सहारे के थोड़ा-बहुत बैठने लगते हैं (12), लेकिन अगर आपका बच्चा 9 महीने का हो चुका है और अभी तक बैठना नहीं शुरू किया है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। बेहतर होगा कि आप एक बार डॉक्टर से इस बारे में बात करें और अपने शिशु का चेकअप करा लें।

शिशु का स्वस्थ विकास किसी भी माता-पिता के लिए तोहफे से कम नहीं होता है। अगर शिशु खुश और सेहतमंद रहे, तो उसके और उसके माता-पिता दोनों के लिए खुशी की बात होती है। आशा करते हैं कि इस लेख से आपको अपने शिशु को खुश रखने के टिप्स मिलेंगे और इसमें दी गई जानकारी आपको अपने बच्चे को स्वस्थ रखने के काम आएगी। अगर आपके पास भी 9 महीने के बच्चे से जुड़ी कोई जानकारी है या सवाल है, तो उसे हमारे साथ नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें।

संदर्भ (References) :

 

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