छोटे बच्चे अपना सिर क्यों पटकते हैं? | Shishu Ke Sir Patakne Ki Aadat Ko Kam Kaise kare

Shishu Ke Sir Patakne Ki Aadat Ko Kam Kaise kare

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कुछ बच्चे सोते, खेलते या किसी तरह की गतिविधि करते समय अपना सिर पकटने लगते हैं। इसे देखकर लोगों को यह लग सकता है कि यह बच्चे का किसी तरह का स्वाभाव होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिशु का बार-बार सिर पटकना असामान्य भी हो सकता है। छोटे बच्चे अपना सिर क्यों पटकते हैं, जानने के लिए पढ़ें मॉमजंक्शन का यह लेख। यहां छोटे बच्चों में हेड बैंगिंग के लक्षण व इसे रोकने के तरीके बताए गए हैं।

सबसे पहले पढ़ें कि शिशु का हेड बैंगिंग सामान्य है या नहीं।

क्या बेबी का सिर पटकना सामान्य है?

हां, बचपन में शिशु का बार-बार सिर पटकना सामान्य है। लगभग 60% छोटे शिशुओं में इसकी समस्या होती है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, शिशु का सिर पटकना नींद से संबंधित रिद्धमिक मूवमेंट डिसऑर्डर (Sleep-Related Rhythmic Movement Disorder) से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, अभी तक इसकी असल वजह अज्ञात ही है (1)।

नवजात शिशुओं को ही नहीं, बल्कि छोटे व बड़े बच्चों में भी यह आदत होती है। साथ ही मानसिक रोग या तंत्रिका संबंधी रोग वाले बच्चों में भी इसका जोखिम हो सकता है (2)। एक केस स्टडी में पाया गया है कि एक साल की उम्र से ही बच्चे सिर पटकना शुरू कर सकते हैं। यह आदत 10 साल की उम्र के बाद धीरे-धीरे कम हो सकती है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि सिर पीटने से बच्चे को गंभीर चोट भी लग सकती है (1)।

अब लेख में आगे बढ़ते हुए जानिए कि छोटे बच्चों में सिर पटकने की समस्या क्यों होती है।

छोटे बच्चे अपना सिर क्यों पटकते हैं? | Shishu ke sir patakne ka karan

छोटे बच्चे अपना सिर क्यों पटकते हैं, इसके पीछे कई वजह हैं। इनमें अधिकतर कारण को सामान्य ही माना जाता है। कुछ बच्चे सिर पटकने की आदत आसपास के लोगों को देखकर भी सीख सकते हैं। चलिए, नीचे अध्ययन के आधार पर इसके कारण पढ़ते हैं।

1. गुस्से की वजह से

बच्चे के सिर पीटने की एक वजह गुस्सा या फर्स्टेशन भी है। ऐसा आम तौर पर विकासात्मक समस्या से जूझ रहे शिशु करते हैं। सीडीसी की अनुसार, ऐसे बच्चे अपनी बातों व परेशानियों को जाहिर करने में खुद को असमर्थ महसूस करते हैं, जिस वजह से बच्चा गुस्से में या निराश होकर सिर पटकने की हरकत करके स्वयं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर सकता है (3)

2. दर्द से निजात के लिए

छोटे बच्चे के शुरुआती शारीरिक विकास में कई तरह के बदलाव होते हैं। उन्हीं में से एक बच्चे के दांत निकलना भी है। बताया जाता है कि बच्चा शुरुआती विकास से जुड़े दर्द या कान के संक्रमण से जुड़े दर्द की वजह से भी हेड बैंगिंग कर सकता है। ऐसा करने से बच्चे को लगता है कि दर्द में आराम मिल रहा है (4)। ऐसे में आमतौर पर देखा जाता है कि चेहरे की जिस तरफ के हिस्से का कान दर्द या दांत निकलने का दर्द होता है, बच्चा उसी तरफ सिर को झुकाकर पीट सकता है।

3. अटेंशन के लिए

बच्चे का सबसे अधिक लगाव पेरेंट्स व आस-पास रहने वाले अन्य परिजनों से होता है। बड़ों की तरह बच्चों को भी अपने करीबियों की अटेंशन की चाहत होती है। ऐसे में कई बार बच्चा अटेंशन पाने के लिए भी ऐसा कर सकता है (4)। कहीं-न-कहीं बच्चे को इसका एहसास होता है कि ऐसा करने से वह अपने पेरेंट्स का ध्यान खुद की तरफ आकर्षित कर सकता है।

4. विकासात्मक समस्या

सीडीसी (सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) के अनुसार, बच्चे के सिर पटकने की आदत उसके विकासात्मक समस्या या बौद्धिक अक्षमता जैसे कि बच्चे में ऑटिज्म या अन्य विकार का लक्षण भी हो सकता है (5)। हालांकि, ऐसे मामले बहुत ही कम देखे गए हैं। अगर बच्चे में सिर पटकना की शिकायत ऑटिज्म या किसी अन्य विकास से जुड़ी होगी, तो इस दौरान उस समस्या से जुड़े दूसरे लक्षण भी देखते हैं। इसकी पुष्टि साउथ अफ्रीका सरकार की तरफ से जारी गाइडलाइन में भी की गई है (4)।

5. आराम के लिए

पेरेंट्स छोटे बच्चों की देखभाल कैसे करें, इससे जुड़ी एक गाइडलाइन दक्षिण अफ्रीका सरकार की तरफ से जारी की गई है। उसमें बताया गया है कि ज्यादातर बच्चों को जब नींद आती है और आराम करने का मन करता है, तो वो अपना सिर हल्का आगे-पीछे की तरफ झुलाने की कोशिश करते हैं। ऐसा करने से रिद्धम मूमेंट होता है. जिससे उन्हें आराम मिलता है (4)। इस दौरान अगर सामने दीवार या अन्य चीज होगी, तो उसमें उनका सिर लगेगा, जिस वजह से इसे भी हैड बैंगिंग के कारण में शामिल किया जाता है।

6. रिद्धमिक मूवमेंट डिसऑर्डर (Rhythmic Movement Disorder)

जैसा लेख के शुरुआत में बताया गया है कि बच्चे के सिर पटकने की आदत उसमें स्लीप रिलेटेड रिद्धमिक मूवमेंट डिसऑर्डर (RMDs) के कारण भी हो सकती है। यह बचपन में होने वाली नींद से जुड़ी समस्या है, जो बड़े समूह में मांसपेशियों को एक साथ प्रभावित करती है, जैसे कि बार-बार शरीर के किसी हिस्से को हिलाना, सिर पीटना या किसी अन्य तरह की शारीरिक हरकत करना। बच्चे ऐसा सोने से पहले, नींद में और जागने के बाद भी कर सकते हैं (1)।

7. स्टीरियोटाइपिक मूवमेंट डिसऑर्डर (Stereotypic Movement Disorder)

स्टीरियोटाइपिक मूवमेंट डिसऑर्डर (SMD) एक तरह का मानिसक विकार है, जो मानसिक मंदता को दर्शाता है। इसकी वजह से भी बच्चे में सिर पटकने की आदत हो सकती है। बच्चों के साथ ही यह स्थिति वयस्कों में भी देखी जा सकती है। एनसीबीआई के एक शोध के अनुसार, इससे ग्रस्त वयस्कों को सिर पटकने से खुशी का अनुभव तक हो सकता है (6)।

स्क्रॉल करके जानें कि शिशु का बार-बार सिर पटकना कब तक जारी रहता है।0

छोटे बच्चे सिर पटकना कब बंद करते हैं?

नौ माह की उम्र से ही शिशुओं में इसकी आदत शुरू हो सकती है, जो चार वर्ष की उम्र तक अपने आप दूर भी हो सकती है। हालांकि, लगभग 5 फीसदी बच्चों में पांच वर्ष की उम्र के बाद भी इसकी आदत देखी जा सकती है। जहां कुछ बच्चे सिर्फ कुछ मिनटों तक ही सिर को पटकते हैं, वहीं, कुछ बच्चे घंटों तक सिर का पटकना जारी रख सकते हैं। लड़कियों के मुकाबले लड़कों में इसका जोखिम तीन गुना अधिक होता है (7)।

एनसीबीआई में मौजूद एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बच्चों में 16 साल की उम्र तक भी सिर पटकने की आदत हो सकती है। इसको लेकर एक केस स्टडी की गई, जिसमें शामिल बच्चा बचपन में प्रति सप्ताह 3 से 5 बार रात में अपना सिर पटकता था और 10 साल की उम्र के बाद इसमें 50 प्रतिशत तक कमी देखी गई (1)। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सिर पटकना की शिकायत किसी एक उम्र में ठीक नहीं होती। यह उम्र प्रत्येक बच्चे में अलग हो सकती है। हां, किसी बच्चे में चार और किसी में दस साल की उम्र के बाद ये आदत कम हो सकती है।

आगे पढ़ें छोटे बच्चों में हेड बैंगिंग के लक्षण।

शिशु के हेडबैंगिंग के लक्षण

बच्चे का सिर पटकना अपने आप में ही एक लक्षण है। हां, इस दौरान बच्चे में कुछ बदलाव भी नजर आ सकते हैं, जिन्हें इसके लक्षणों में शामिल किया जा सकता है।

  • नींद से पहले या नींद के दौरान बच्चे का सिर पकटना (8)
  • दिन के समय अधिक नींद आना (8)
  • चिंता करना (6)
  • घबराहट होना
  • सिर पीटने से खुशी का अनुभव करना (6)
  • सिर में चोट लगना (9)
  • बैठते हुए सिर को पीछे या सामने की तरफ किसी ठोस वस्तु या दीवार पर मारना
  • लेटे रहने की स्थिति में गद्दे या तकिए की तरफ सिर पटकना
  • खिलौनों से खेलते समय बार-बार उसे अपने सिर पर मारना

शिशु के हेड बैंगिंग के दौरान पेरेंट्स को क्या करना चाहिए, अब यह भी जान लेते हैं।

शिशु अगर सिर पटकने लगे तो क्या करना चाहिए?

बच्चे को सिर पटकता देखकर कई पेरेंट्स हैरान व परेशान हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इस बात को आगे समझिए।

1. दीवार से दूर करें

बच्चा जिस बेड पर सोता है, उसे दीवार से सटा कर न रखें। साथ ही अगर बच्चा किसी दीवार के किनारे बैठा है या लेटा हुआ है, तो उसे दीवार से दूर कर दें। इस तरह हेड बैंगिग के दौरान शिशु के सिर को चोट लगने से बचाया जा सकता है (4)।

2. सिर को सहलाएं

बच्चे को सुलाते समय उसके सिर को सहलाएं। ऐसा करने से बच्चे को आराम मिलेगा और वह जल्दी सो सकता है। साथ ही अगर सोते समय बच्चा सिर पटकता है, तो इस दौरान भी उसके सिर को सहला सकते हैं (4)।

3. ध्यान भटकाएं

जब भी बच्चा सिर पटकना शुरू करे, तो उसका ध्यान भटकाने का प्रयास करें। इस दौरान बच्चे पर प्यार जताते हुए ताली बजाएं, गाना गाकर सुनाएं या अन्य किसी तरह की गतिविधि करें (4)।

4. बातें करें

अगर बच्चा बात कर सकता है, तो उससे बातें करें और उससे सिर पटकने का कारण पूछें। अगर वह बताता है कि वो ऐसा सिर दर्द या कान दर्द के कारण कर रहा है, तो उसका डॉक्टरी इलाज कराएं।

5. नजरअंदाज करें

कई बार बच्चा पेरेंट्स का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए भी ऐसा कर सकते हैं। अगर बच्चा कभी-कभार ही ऐसा करता है, तो यह वह अटेंशन पाने के लिए कर सकता है। ऐसे में बच्चे की इस हरकत को पेरेंट्स नजरअंदाज भी कर सकते हैं।

6. तकिए का इस्तेमाल करें

अगर बच्चे में हेड बैंगिग की आदत है, तो उसके आस-पास मौजूद चीजों, जिनका अक्सर वह इस्तेमाल करता है, उसे गद्देदार बनाएं। बच्चे की कुर्सी, टेबल, पालने में तकिए का इस्तेमाल करें। ताकि बच्चा जब भी सिर पटके, तो उसे किसी तरह की चोट न लगे।

7. विशेषज्ञ से मिलें

अगर बच्चे में हेड बैंगिग के लक्षण गंभीर हैं और उसके व्यवाहर में अन्य अक्रामक या जोखिम भरे लक्षण नजर आते हैं, तो बाल विशेषज्ञ से मिलें। बच्चे के लक्षणों व स्थिति की पुष्टि करें और उचित देखभाल के साथ इलाज कराएं। बाल विशेषज्ञ इसके लिए 3डी वीडियो तकनीक चिकित्सा की मदद से बच्चे का उपचार कर सकते हैं। यह तरीका बच्चों के लिए सुरक्षित व प्रभावकारी माना जाता है। यह प्रक्रिया सूदिंग प्रभाव प्रदान करके बच्चे को सोने में मदद कर सकती है (10)।

छोटे बच्चे के सिर पटकने की समस्या कैसे रोक सकते हैं, अब हम इसके बारे में बता रहे हैं।

छोटे बच्चे की हेडबैंगिंग आदत को कैसे रोका जा सकता है?

साक्ष्य बताते हैं कि छोटे बच्चे के सिर पटकने की समस्या बढ़ती उम्र के साथ अपने आप ही दूर हो जाती है (1)। बच्चे की यह आदात गंभीर न बने और समय रहते इसे दूर किया जा सके, इसके लिए पेरेंट्स कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं। यहां हम ऐसे ही कुछ टिप्स दे रहे हैं, जो बच्चे के सिर पटकने की आदत को रकने में मददगार होंगे।

1. जबरदस्ती न सुलाएं

पेरेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उन्हें बच्चे को जबरदस्ती नहीं सुलाना चाहिए। बच्चे को तभी सुलाएं, जब उसे नींद आ रही हो (4)। दरअसल, बच्चे को जबरदस्ती सुलाने का प्रयास करेंगे, तो इससे बच्चा परेशान हो सकता है और इस वजह से गुस्से में आकर भी वह सिर को पटक सकता है। ऐसे में सुलाने के सही तरीके से उसे न सिर्फ जल्दी नींद आएगी, बल्कि उसे ऐसी किसी भी हरकत से भी रोकेंगे।

2. चिंता न करें

अगर बच्चा बहुत छोटी उम्र में ही सिर पटकता है और धीरे-धीरे उसमें यह लक्षण कम हो रहे हैं, तो पेरेंट्स को इसके प्रति चिंता नहीं करनी चाहिए। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होगा उसकी यह समस्या अपने आप कम होती जाएगी। इसके लिए पेरेंट्स को बच्चे के पांच साल तक के होने का इंतजार करना चाहिए। अगर इस उम्र के बाद भी बच्चा सिर पटकना जारी रखता है, तो डॉक्टर से संपर्क करें (1)।

3. दवाओं की खुराक दें

वैसे तो छोटे बच्चों में सिर पटकने की समस्या के लिए डॉक्टरी इलाज की जरूरत नहीं होती है, लेकिन अगर बढ़ती उम्र के साथ बच्चे में यह लक्षण गंभीर हो रहा है, तो डॉक्टरी सलाह पर दवाओं की खुराक दी जा सकती है। इसके लिए डॉक्टर सेडेटीव (Sedative) प्रभाव वाली दावओं की सलाह दे सकते हैं, जो नींद लाने व सोने में मदद करती हैं (7)।

4. बच्चे के प्रति ध्यान दें

जब बच्चा सिर पटके न सिर्फ तभी, बल्कि हर समय बच्चे को पूरी अटेंशन दें। पेरेंट्स के इस व्यवहार से बच्चे पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे एक तो बच्चा अटेंशन पाने के लिए ऐसी कोई हरतक नहीं करेगा और दूसरा जब भी बच्चा ऐसा कुछ करेगा, तो आसानी से उसे चोट लगने से बचाया जा सकता है। साथ ही अगर बच्चा बातों को समझने लगा है, तो उसे समझा भी सकते हैं कि चोट लगने के डर की वजह से उसे ऐसा नहीं करना चाहिए।

5. गुस्सा न करें

कुछ पेरेंट्स बच्चे के सिर पटकने की आदत के पीछे की असल वजह को नहीं जान पाते, जिस वजह से वह बच्चे को डांटने या डराने लगते हैं। ऐसा न करें। सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि बच्चा ऐसा क्यों करता है, यह उसे खुद भी नहीं पता होता है। ऐसे में बच्चे पर गुस्सा होने के बजाय बच्चा कब-कब अपना सिर पीटता है, उन स्थितियों की पहचान करें। इससे सिर पटकने के कारणों को समझने में आसानी होगी और बच्चे को इससे रोका जा सकेगा।

6. सही दिनचर्या बनाएं

बच्चे को स्तनपान कराने से लेकर, उसके नहाने, खेलने व सोने की भी दिनचर्या बनाएं। पेरेंट्स द्वारा बनाए गए तय समय में बच्चे को ढलने में कुछ दिनों का समय लग सकता है। हालांकि, इसके बाद बच्चा निर्धारित समय पर भूख व नींद महसूस करेगा। अगर बच्चे को अपने तय समय पर सोने की आदत होगी, तो काफी हद तक बच्चे के सिर पीटने की समस्या को रोका जा सकता है।

7. संगीत सुनाएं

अगर बच्चा सोने से पहले सिर पीटता है, तो उसे शास्त्रीय संगीत जैसे सॉफ्ट और आरामदायक संगीत सुना सकते हैं। इस तरह के संगीत नींद लाने में मदद कर सकते हैं। साथ ही बच्चे के सोने के कमरे को अंधेरा या बहुत हल्की रोशनी रखें (11)। इस तरह बच्चे को अच्छी नींद आएगी और उसे सिर पीटने की आदत से रोका जा सकता है।

8. अटेंशन के लिए बच्चे को प्रोत्साहित न करें

अगर बच्चा पेरेंट्स की अटेंशन पाने के लिए अपना सिर पटकता है, तो पेरेंट्स को इसके लिए बच्चे को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। अगर पेरेंट्स ऐसा नहीं करेंगे, तो बच्चे को जब भी अपनी तरफ माता-पिता का ध्यान आकर्षित करना होगा, तो वह अपना सिर पटक सकता है। इससे माता-पिता की मुश्किलें अधिक बढ़ सकती हैं। जब बच्चा अपना सिर पटके, तो उस पर तुरंत ध्यान न दें। अगर इसके कुछ समय बाद बच्चा सो जाता है, तो यह प्राकृतिक हो सकता है। मगर पेरेंट्स की अटेंशन पाने के बाद बच्चा हंसता है या किसी तरह की फुर्तीली गतिविधि करता है, तो उसे बताएं कि इस तरह उसका सिर पटकना कितना जोखिम भरा है।

9. वस्तुओं को बनाएं बेबीप्रूफ

बच्चे के पालने से लेकर, उसकी कुर्सी तक में मुलायम गद्दे लगवाएं। साथ ही बच्चे के आस-पास किसी भी तरह की धारदार, नुकीली या लोहे जैसी कठोर वस्तु न रखें। इस तरह की वस्तुओं से बच्चे को सिर पटकते समय चोट लग सकती है। अगर बच्चा सोने से पहले या सोते समय सिर पटकता है, तो उसके सिर के नीचे मुलायम या राई का तकिया लगाएं।

10. थकावट

दिनभर बच्चे से साथ तरह-तरह के खेल खेलें। इससे सोते के समय तक बच्चा शारीरिक रूप से बहुत थकान महसूस करेगा। इस तरह जब बच्चे में सोने से पहले शारीरिक ऊर्जा की कमी होगी, तो वह थककर जल्दी सो सकता है और उसका सिर पटकना भी कम हो सकता है।

11. चेकअप कराएं

बच्चे का सिर पटकना कहीं सिर दर्द, दांद दर्द या कान के संक्रमण के कारण तो नहीं है, इसका पता लगाएं। अगर बच्चा बार-बार एक ही तरह से सिर को पटकता और रोता भी है, तो डॉक्टर से बच्चे के स्वास्थ्य का चेकअप कराएं। इससे रोने की वजह की पुष्टि होगी, जिससे सिर पटकने की समस्या को रोका जा सकता है।

लेख में अंत में पढ़ें कि छोटे बच्चे के सिर पटकने की समस्या में कब डॉक्टर से मिलना जरूरी होता है।

डॉक्टर से कब सलाह लें

बढ़ती उम्र के साथ छोटे बच्चे में सिर पटकने की समस्या कम नहीं होती, तो डॉक्टर से इलाज कराना जरूरी है। इसके अलावा, निम्नलिखित स्थितियां भी हैं, जिनमें पेरेंट्स को डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए (1) (4) (12)।

  • हेड बैंगिंग के दौरान बच्चे के सिर में चोट लगने पर।
  • बच्चे का हेड बैंगिंग बहुत ज्यादा करना, जिस वजह से बच्चे और परिजनों की नींद खराब हो रही हो।
  • रात में बच्चे को मिर्गी आना

जाहिर है कि छोटे बच्चे के सिर पटकने से पेरेंट्स को दुविधा होती ही होगी। फिर चाहे बच्चा ऐसा अटेंशन पाने के लिए करे या फिर किसी अन्य कारण से। ऐसे में परेशान होने के बजाय, पेरेंट्स लेख में बताई गई बातों का ध्यान रखकर बच्चे को हेड बैंगिंग से रोक सकते हैं। साथ ही उसके सिर में चोट लगने के जोखिम को भी कम किया जा सकता है। बस ध्यान रखें कि बढ़ती उम्र के साथ हेड बैंगिंग बढ़ रही है, तो चिकित्सक से संपर्क करना आवश्यक है।

संदर्भ (References)

  1. Head banging persisting during adolescence: A case with polysomnographic findings
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4173244/
  2. Head banging in young children
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/2021098/
  3. Disability and Safety: Aggressive Behavior and Violence
    https://www.cdc.gov/ncbddd/disabilityandsafety/aggression.html
  4. Habits – Parent Easy Guide
    https://parenting.sa.gov.au/pegs/peg53-Habits.pdf
  5. Self-Directed Violence and Other Forms of Self-Injury
    https://www.cdc.gov/ncbddd/disabilityandsafety/self-injury.html
  6. Adult head-banging and stereotypic movement disorders
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/9756153/
  7. Rhythmic Movement Disorder
    https://www.sciencedirect.com/topics/medicine-and-dentistry/rhythmic-movement-disorder
  8. Adult headbanging: sleep studies and treatment
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/8776793/
  9. Head and neck injury risks in heavy metal: head bangers stuck between rock and a hard bass
    https://www.bmj.com/content/337/bmj.a2825
  10. Vestibular Stimulation Therapy for Rhythmic Movement Disorder
    https://clinicaltrials.gov/ct2/show/NCT03528096
  11. Sleep and your baby
    https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/healthyliving/sleep-and-your-baby
  12. Rhythmic movement disorder in childhood: An integrative review
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/27884450/
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