शिशु को डकार दिलाना क्यों है जरूरी व इसके सही तरीके | Shishu Ko Dakaar Kaise Dillaye

Shishu Ko Dakaar Kaise Dillaye

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खाना खाने के बाद अक्सर डकार आती है। अब यह डकार है क्या और क्यों आती है? इसके बारे में शायद ही कुछ लोग जानते हों। डकार को अंग्रेजी में बर्पिंग या बेल्चिंग भी कहते हैं। यहां हम बता दें कि पेट में जमा हवा के बाहर निकालने की प्रक्रिया को डकार कहा जाता है (1)। बड़ों में यह प्रक्रिया खुद ही हो जाती है, लेकिन बच्चों के लिए खुद से डकार लेना संभव नहीं होता। वजह यह है कि नवजात बच्चे अपने शरीर को नियंत्रित नहीं कर पाते, इसलिए उन्हें डकार दिलानी पड़ती है (2)। यही वजह है कि मॉमजंक्शन के इस लेख में हम बच्चों में डकार क्यों आवश्यक है या बच्चे डकार क्यों लेते हैं, जैसी कई जरूरी बातें बता रहे हैं।

आइए, लेख में आगे बढ़कर शिशु डकार क्यों लेते हैं, इसका कारण जान लेते हैं।

शिशु क्यों लेते हैं डकार?

बच्चों में डकार लेने का मुख्य कारण एरोफेगिया (दूध पीने के दौरान हवा को निगलना) माना जाता है (3)। दरअसल, नवजात बच्चे शारीरिक रूप से मजबूत नहीं होते हैं। ऐसे में उन्हें स्तनपान या बोतल से दूध पीने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है और जल्द थक जाते हैं। इसलिए, वो कुछ देर रुक कर खुद को आराम देते हैं और फिर दूध पीना शुरू करते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत नवजात कभी-कभी दूध पीने के दौरान कुछ मात्रा में हवा भी निगल जाते हैं। इस हवा को बाहर निकालने के लिए ही बच्चे डकार लेते हैं।

आगे हम बताएंगे कि शिशु के लिए डकार क्यों जरूरी है।

शिशु को डकार दिलाना क्यों जरूरी है? | Bache Dakaar Aane Ke Fayde In Hindi

नीचे दिए गए बिंदुओं के माध्यम से यह समझने में मदद मिल सकती है कि शिशु को डकार दिलाना क्यों आवश्यक है।

  1. दूध उगलने की आशंका : विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ बच्चों में लोअर इसोफेगल स्पिंचर (गले के निचले हिस्से की मांसपेशियां) अविकसित होती हैं। सामान्य रूप से ये मांसपेशियां एक वाल्व की तरह काम करती हैं, जो खाद्य या तरल के गले से नीचे जाने के बाद बंद हो जाती हैं। इससे खाए या पिए गए तरल के वापस मुंह में आने की आशंका न के बराबर होती है। वहीं, शिशुओं में इन मांसपेशियों के अविकसित होने की स्थिति में उनके दूध उलटने की आशंका अधिक बनी रहती है। इस समस्या से बचाव के लिए ही शिशुओं को बोतल से दूध पिलाने या स्तनपान कराने के बाद डकार दिलाने की सलाह दी जाती है (4)
  1. पेट में दर्द से राहत : स्तनपान या बोतल से दूध पीने के दौरान निगली गई हवा पेट में दर्द की समस्या पैदा कर सकती है, जिस कारण मुमकिन है कि बच्चा लगातार रोता रहे (3)। ऐसे में डकार के माध्यम से पेट में फंसी हवा को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है।
  1. भूख की कमी से बचाव : पेट में निगली गई हवा फंसी रहने की स्थिति में बच्चे में भूख की कमी देखी जा सकती है (3)। इस आशंका को कम करने में भी डकार सहायक मानी जा सकती है।
  1. अच्छी नींद के लिए : अच्छी नींद के लिए भी बच्चों को रात में सोने से पहले स्तनपान के बाद डकार दिलाने की सलाह दी जाती है (5)। इससे बच्चा खुद से सोने के लिए प्रेरित भी होगा और हवा फंसने के कारण बच्चे को पेट में दर्द का अनुभव भी नहीं होगा। इस तरह वह एक अच्छी नींद ले पाएगा।

लेख के अगले भाग में हम बच्चों को डकार दिलवाने के सही समय के बारे में जानेंगे।

शिशु को डकार कब दिलवाएं?

नीचे दिए गए बिंदुओं के माध्यम से समझने में मदद मिल सकती है कि बच्चे को कब डकार दिलवाने की आवश्यकता है।

  • अगर बच्चा दूध उगल रहा है, तो ऐसे में भी आप बच्चे को डकार दिला सकते हैं (4)
  • अगर बच्चे को दूध पीने में असहजता हो रही है या दूध पीना छोड़कर रोने लगे, तो उसे डकार दिलाने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि मुमकिन है कि दूध के साथ हवा निगलने के कारण बच्चा ऐसा कर रहा हो (3)
  • इसके अलावा, बच्चे को सोने से पहले भी दूध पिलाने के बाद डकार जरूर दिलानी चाहिए (5)। इसे बच्चे में अच्छी आदतों को विकसित करने में से एक माना जा सकता है।

आइए, अब जानते हैं कि शिशु को डकार किस तरह से दिलानी चाहिए।

शिशु को डकार कैसे दिलाएं? | बच्चों को डकार दिलाने का सही तरीका | Shishu Ko Dakaar Kaise Dillaye

यहां हम कुछ पोश्चर बता रहे हैं, जो शिशु को डकार दिलाने में मदद कर सकते हैं (2)

  • शिशु को गोद में सीधा बिठाएं
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सिर को एक हाथ से सहारा देते हुए शिशु को गोद में सीधा बिठाएं। इससे बच्चे के पेट में फंसी गैस को पेट के ऊपरी हिस्से तक आने में मदद मिलेगी और बच्चा आसानी से डकार ले सकेगा। इस दौरान आप बच्चे की पीठ को सहला भी सकते हैं।

  • कमर से मोड़ते हुए बच्चे को पैरों पर लिटाएं
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कमर से मोड़ते हुए बच्चे को ऐसे लिटाएं कि बच्चे का पेट का हिस्सा आपकी जांघों पर रहे। वहीं, पैरों का हिस्सा जमीन की तरफ लटका हुआ रहे। इस स्थिति में बच्चे के आगे की ओर झुकने की वजह से उसके पेट में फंसी हवा पेट के ऊपरी हिस्से में आ जाएगी। साथ ही पेट पर दबाव के कारण हवा को मुंह से बाहर निकलने में आसानी होगी और बच्चा आसानी से डकार ले सकेगा।

  • शिशु को कंधे से लगाएं
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जैसा कि ऊपर बताया गया है कि शिशु को सीधे बिठाने से पेट में मौजूद हवा पेट के ऊपरी हिस्से में आ जाती है और उसे डकार लेने में आसानी होती है। इसलिए, शिशु के सिर को एक हाथ से सहारा देते हुए उसे गोद में लेकर कंधे से लगाना भी डकार दिलाने के लिए अच्छी पोजीशन हो सकती है।

डकार दिलवाने के तरीके के बाद शिशु को डकार कितनी बार दिलाएं यह भी समझ लेते हैं।

शिशु को कितनी बार डकार दिलवाएं?

नीचे दिए गए बिंदुओं के माध्यम से इस बात को आसानी से समझने में मदद मिल सकती है कि शिशु को कितनी बार डकार दिलाना चाहिए (4)

  • शिशु को डकार कितनी बार दिलवाना चाहिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि बच्चा दिन में कितनी बार दूध पी रहा है। वजह यह है कि दूध पिलाने के तुरंत बाद शिशु को डकार दिलानी चाहिए। इसलिए, जितनी बार भी शिशु को दूध पिलाएं, शिशु को उतनी बार डकार दिलाना आवश्यक है, ताकि पेट में हवा फंसने से बच्चे को तकलीफ न झेलनी पड़े।
  • इसके अलावा, अगर बच्चे को गैस की समस्या है, तो बच्चे को बोतल से दूध पिलाने की स्थिति में करीब 60 मिली दूध पिलाने के बाद डकार दिलाना चाहिए। वहीं, स्तनपान कराने की स्थिति में प्रत्येक स्तन से दूध पिलाने के तुरंत बाद बच्चे को दूध पिलाना चाहिए।

आइए, अब हम समझ लेते हैं कि सोते हुए बच्चे को डकार कैसे दिलाएं।

सोते हुए बच्चे को डकार कैसे दिलाएं?

सोते हुए बच्चे को डकार दिलाने संबंधी कोई ज्ञात प्रमाण तो उपलब्ध नहीं है, लेकिन जानकारों के मुताबिक सोते हुए बच्चे को डकार दिलाने के लिए कंधे से लगाना एक बेहतर स्थिति हो सकती है। इसके लिए आप शिशु को धीरे से गोद में उठाते हुए कंधे से लगाएं और सिर को एक हाथ से सहारा देते हुए उसकी पीठ को थपथपाएं। ऐसा करने से सोता हुआ बच्चा आसानी से डकार ले पाएगा।

लेख के अगले भाग में अब हम जानेंगे कि डकार लेते वक्त बच्चे क्यों रोते हैं।

शिशु डकार लेते हुए क्यों रोते हैं?

डकार लेते वक्त बच्चे के रोने के कारण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं (6):

  • अगर शिशु ने स्तनपान के दौरान अधिक हवा निगल ली है और डकार दिलाने के बावजूद पूरी हवा बाहर नहीं आती है, तो यह डकार दिलाते वक्त बच्चे के रोने का मुख्य कारण हो सकता है।
  • वहीं, अगर बच्चे ने जरूरत से अधिक दूध पी लिया है, तो इस अवस्था में भी शिशु डकार दिलाने के दौरान रो सकता है।

बच्चे के डकार न लेने की स्थिति में क्या करना चाहिए आगे हम यह जानने का प्रयास करेंगे।

अगर शिशु डकार न ले, तो क्या करें? | Agar Bacha Dakar Na Le To Kya Kare

अगर डकार दिलाने के सभी प्रयास अपनाए जा चुके है और फिर भी शिशु डकार नहीं ले रहा है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस वक्त आपको शांति से शिशु के हाव-भाव पर ध्यान देना चाहिए, जो इस प्रकार हो सकते हैं :

अगर बच्चा डकार लेने की जगह दूध मुंह से निकाल दे, तो घबराने की जरूरत नहीं है। मुमकिन है कि दूध निकालने के साथ ही पेट में फंसी हवा बाहर निकल गई हो।

  • अगर डकार न आने की स्थिति में भी शिशु खुश और शांत दिखाई दे रहा है, तो आपको परेशान नहीं होना चाहिए। यह इशारा है कि बच्चे ने हवा नहीं निगली है और उसे डकार की आवश्यकता नहीं है।
  • इसके विपरीत डकार न आने की स्थिति में अगर बच्चा रो रहा है और परेशान है या फिर बार-बार दूध पलट रहा है, तो इस स्थिति में बिना देरी किए शिशु को डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

आगे हम जानेंगे कि किस उम्र से शिशु को डकार दिलाने की जरूरत नहीं होती।

शिशु को कब से डकार दिलवाना बंद करना चाहिए?

अगर किसी के मन में यह सवाल आ रहा है कि बच्चे को डकार दिलवाना कब बंद करना चाहिए, तो बता दें कि इसका कोई निर्धारित समय नहीं है। समय के साथ जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाएगा, वैसे-वैसे उसकी मांसपेशियां मजबूत होंगी और वह दूध पीने के दौरान हवा निगलना कम करता जाएगा। इस प्रकार बच्चा समय के साथ डकार लेने की प्रक्रिया धीरे-धीरे कम करता जाएगा। ऐसे में जब आपको लगे कि अब बच्चे को डकार लेने की आवश्यकता नहीं है, तो डकार दिलाना बंद किया जा सकता है।

आइए, अब हम शिशु को डकार दिलवाने के समय दूध उगलने की स्थिति को भी समझ लेते हैं।

क्या होगा अगर शिशु डकार दिलवाते समय दूध उगलता है? | New Born Baby Ka Dudh Nikalna

डकार दिलाते वक्त बच्चों का थोड़ा-सा दूध उगलना एक सामान्य प्रक्रिया है। इसमें परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। शिशु के 7 से 12 माह का होने पर शिशु खुद से डकार लेने लगता है और यह प्रक्रिया अपने आप समाप्त हो जाती है (7)

अंत में हम जान लेते हैं कि बच्चों की डकार के विषय में डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

कुछ स्थितियां ऐसी भी हैं, जिनके नजर आने पर बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। यह स्थितियां कुछ इस प्रकार हो सकती हैं :

  • अगर बच्चा डकार नहीं ले पा रहा है और इस वजह से लगातार रो रहा हो।
  • बच्चा डकार दिलाने के बाद-बार दूध उगल रहा हो।

छोटे शिशु के लिए खुद से डकार लेना मुश्किल है। इसलिए, उन्हें सहारा देकर आप उन्हें डकार लेने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए लेख में दिए डकार दिलाने के आसान तरीके मददगार साबित हो सकते हैं। साथ ही लेख के माध्यम से आपने यह भी जाना कि समय के साथ बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता जाएगा, उसे आपको डकार दिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हमें उम्मीद है कि यह जानकारी जरूर आपके काम आएगी। यह आर्टिकल अपने परिचितों के साथ शेयर करना न भूलें।

संदर्भ (References):