बच्चे को दूध पीते समय पसीना आना: कारण व कम करने के उपाय | Baby Sweating During Breastfeeding In Hindi

Baby Sweating During Breastfeeding In Hindi

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पसीना आना बेहद ही सामान्य स्थिति होती है। आमतौर पर अत्यधिक गर्म तापमान के संपर्क में आने या शरीर को बहुत थका देने वाला कोई कार्य लगातार करने से पसीना आता है। ऐसे में वयस्कों की तरह ही गर्म तापमान के संपर्क में आने की वजह से बच्चों को भी पसीना आता है। वहीं स्तनपान के दौरान भी बच्चों को पसीना आ सकता है, लेकिन कुछ महिलाएं को यह बात काफी परेशान करती है। यही वजह है कि मॉमजंक्शन के इस लेख में हम स्तनपान के दौरान शिशु को पसीना आना कितना सामान्य है और कब इस मामले में चिंता करने की जरूरत है, यह विस्तार से बताने जा रहे हैं।

तो आइए सबसे पहले जानते हैं कि बच्चे को दूध पीते समय पसीने आना कितना आम है।

क्या स्तनपान के दौरान बच्चों को पसीना आना सामान्य है?

आमतौर पर बच्चे को दूध पीते समय पसीना आना सामान्य माना जा सकता है। वजह यह है कि किसी भी तरह के आहार का सेवन शरीरिक तापमान को बढ़ाने का काम करता है (1)। वहीं शरीर का तापमान बढ़ने के कारण पसीना आता है, जिससे शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है (2)। ऐसे में यह माना जा सकता है कि स्तनपान के दौरान बच्चों को सामान्य तौर पर पसीना आ सकता है। हालांकि, इसके अलावा भी कुछ आम कारण हैं, जिनकी वजह से बच्चे को स्तनपान के दौरान पसीना आ सकता है। उन कारणों के बारे में हम आपको लेख में विस्तार से बताएंगे।

लेख के अगले भाग में अब हम स्तनपान के दौरान बच्चे के सिर पर अधिक पसीना आने की वजह बताएंगे।

स्तनपान करते समय बच्चे के सिर पर पसीना क्यों आता है?

लेख में आपको पहले ही बताया जा चुका है कि स्तनपान के दौरान शरीर का तापमान बढ़ सकता है, जिसकी वजह से बच्चे को पसीना आ सकता है। वहीं बच्चों में पसीना निकलने की प्रक्रिया से संबंधित एक शोध में माना गया है कि शारीरिक तापमान के कारण पसीना मुख्य रूप से बच्चे के माथे पर दिखाई देता है। वहीं भावनात्मक स्थिति में पसीना बच्चे की हथेलियों और पैरों के तलवों पर दिखाई देता है। यह शोध एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित है (2)। इस आधार पर हम यह कह सकते हैं कि स्तनपान के दौरान मुख्य रूप से बच्चे के माथे और सिर पर पसीना देखने को मिल सकता है।

यहां अब हम स्तनपान के दौरान बच्चों को पसीना आने के कुछ सामान्य कारण बताएंगे।

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यहां हम कुछ सामान्य वजह बता रहे हैं, जिनके कारण बच्चे को दूध पीते समय पसीना आ सकता है। यह स्थितियां कुछ इस प्रकार हैं :

  • मां की त्वचा से संपर्क होना : दूध पिलाने के दौरान, बच्चा मां की त्वचा के संपर्क में रहता है। यानी शिशु व मां त्वचा के जरिए एक-दूसरे से संपर्क कर पाते हैं। ऐसे में मां के शरीर से निकलने वाली गर्मी बच्चे की त्वचा तक पहुंचती है (3)। वहीं, लेख में पहले ही बताया गया है कि तापमान और भावनात्मक स्थिति के आधार पर शिशुओं में पसीने की वृद्धि हो सकती है (2)। इस आधार पर यह कह सकते हैं कि मां के शरीर के तापमान के संपर्क में आने की वजह से शिशु को दूध पीते वक्त पसीना आ सकता है।
  • कमरे का अधिक तापमान : लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि शारीरिक तापमान बढ़ने के कारण बच्चों पसीना आ सकता है। वहीं शारीरिक तामपान बढ़ने की एक वजह कमरे का बढ़ा हुआ तापमान भी हो सकता है (2)। ऐसे में कमरे का तापमान अधिक होने के कारण बच्चे को अधिक गर्मी महसूस हो सकती है। इस वजह से उन्हें स्तनपान के दौरान पसीना आ सकता है।
  • बच्चे को अधिक कपड़े पहनाना : अक्सर माता-पिता बच्चे के शरीर को गर्म बनाए रखने के लिए उसे कई कपड़े पहना देते हैं या कंबल से ढंक देते हैं। ऐसी स्थिति में भी बच्चे को अधिक गर्मी लग सकती है (4)। वहीं बढ़ा हुआ तापमान बच्चे में पसीना आने का सामान्य कारण माना जाता है (2)। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि अगर स्तनपान के दौरान बच्चे को अधिक कपड़े पहनाएं गए हैं तो उसे अधिक पसीना आ सकता है।
  • बच्चे को ढंकना : सार्वजनिक स्थानों पर शिशुओं को स्तनपान कराना मां के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस वजह से मां सार्वजनिक स्थानों या लोगों की भीड़ वाले स्थान पर शिशु को स्तनपान कराने के दौरान बच्चे को पूरी तरह से ढंक सकती हैं। इस दौरान जहां बच्चा पूरी तरह से ढंक जाता है, वहीं वह मां की त्वचा के संपर्क में भी बना रहता है। ऐसे में बच्चे का शारीरिक तापमान अधिक बढ़ सकता है (3) (4)। वहीं लेख में हम पहले ही बता चुके हैं कि तापमान के कारण बच्चों को पसीना आ सकता है (2)। ऐसे में स्तनपान के दौरान बच्चे को ढंकना भी बच्चों में पसीना आने का एक कारण बन सकता है।
  • शिशु को गर्म कपड़े पहनाना : तापमान के आधार पर शिशुओं में पसीने की ग्रंथियां अधिक सक्रिय हो सकती हैं (2)। वहीं, गर्म कपड़े पहनाने से बच्चे के शरीर का तापमान बढ़ सकता है। ऐसे में बच्चे को गर्मी महसूस हो सकती है और इसकी वजह से बच्चे को पसीना आ सकता है।
  • एक ही स्थिति में लंबे समय तक स्तनपान कराना : एक ही स्थिति में लंबे समय तक शिशु को स्तनपान कराने से भी शिशु को पसीना आ सकता है। वजह यह है कि इस दौरान बच्चा मां की त्वचा के संपर्क में अधिक समय तक रह सकता है। ऐसे में मां की त्वचा के संपर्क में अधिक समय तक एक ही स्थिति में बने रहने से बच्चे के शरीर का तापमान अधिक बढ़ सकता है (3)। इस कारण भी बच्चों को स्तनपान करते समय उन्हें पसीना आ सकता है (2)

आगे अब हम कुछ गंभीर कारण बताएंगे, जिनकी वजह से बच्चे को स्तनपान के दौरान पसीना आता है।

क्या नर्सिंग करते समय पसीना आना एक स्वास्थ्य समस्या है?

लेख में हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि स्तनपान के दौरान बच्चों को पसीना आना सामान्य बात है। फिर भी अगर स्तनपान के दौरान बच्चे को अधिक पसीना आ रहा है, तो इस पर ध्यान दिया जाना जरूरी हो जाता है। वजह यह है कि कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण भी बच्चे को स्तनपान के दौरान पसीना आ सकता है। स्तनपान के दौरान बच्चों में अधिक पसीने का कारण बनने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कुछ इस प्रकार हो सकते हैं :

  • हाइपरहाइड्रोसिस : हाइपरहाइड्रोसिस डिसऑर्डर के कारण बच्चे को स्तनपान के दौरान अत्यधिक पसीना आ सकता है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसकी वजह से अत्यधिक पसीना आता है। इस स्थिति में थर्मोरेगुलेशन (शरीर के आंतरिक तापमान को बनाए रखने की प्रक्रिया) अधिक सक्रिय हो जाती है, जिस कारण पसीना सामान्य से अधिक आता है (5)। इसके अलावा, हाइपरहाइड्रोसिस डिसऑर्डर वाले शिशुओं में बुखार और चिड़चिड़ापन के लक्षण भी देखे जा सकते हैं। साथ ही लेटने के बाद बच्चों में पसीने वाली त्वचा के रंग में बदलाव भी देखा जा सकता है (6)
  • हाइपरथायरायडिज्म : जब थायरॉयड ग्रंथि जरूरत से अधिक थायरॉयड हार्मोन (थायरोक्सिन) का निर्माण करने लगती है, तो उसे हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है। बच्चे के शरीर में अत्यधिक थायराइड हार्मोन होने से उनका मेटाबॉलिज्म बढ़ सकता है, जिसकी वजह से बच्चे को अधिक पसीना आ सकता है। साथ ही हाइपरथायरायडिज्म की वजह से बच्चे का वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना, बच्चे में चिड़चिड़ापन, नींद संबंधी विकार जैसी स्थितियां भी नजर आ सकती हैं (7)
  • जन्मजात हृदय रोग : बच्चों में जन्मजात हृदय रोग के कारण उनके श्वसन तंत्र की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिसके कारण शिशु को अधिक पसीना आने की समस्या हो सकती है। इसकी पुष्टि एनसीबीआई पर प्रकाशित एक रिसर्च पेपर से होती है (8)। आंकड़ों के अनुसार 100 में एक बच्चे को जन्मजात हृदय रोग हो सकता है। दरअसल, कुछ स्थितियों में गर्भ में रहने के दौरान भ्रूण के दिल या दिल से जुड़ी धमनियों का निर्माण अधूरा रह जाता है, जिसकी वजह से हृदय की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इसके कारण अधिक पसीना आने के साथ-साथ बच्चों में सांस लेने की समस्या, स्तनपान करने में कठिनाई और त्वचा व होंठ का रंग नीला होना जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं (9)
  • श्वसन तंत्र संक्रमण : एंटीबायोटिक्स, टीके, खून चढ़ाने या कुछ खाद्य पदार्थों के कारण शिशुओं में श्वसन तंत्र संक्रमण हो सकता है, जिसमें विशेष रूप एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis) की समस्या हो सकती है। यह एक प्रकार की एलर्जी होती है, जो ऊपरी वायु मार्ग के साथ-साथ निचले वायु मार्ग को भी प्रभावित कर सकती है। इस स्थिति के गंभीर होने पर बच्चों में खांसी, घरघराहट, दस्त या पसीना आने की समस्या हो सकती है (10)। इस आधार पर अगर शिशु को किसी तरह का श्वसन तंत्र संक्रमण होता है, तो उसे स्तनपान के दौरान पसीना आ सकता है।
  • स्लीप एप्निया : एनसीबीआई पर मौजूद एक अन्य अध्ययन से यह पुष्टि होती है कि स्लीप एप्निया वाले शिशु में नींद के दौरान अत्यधिक पसीना, खर्राटे या गले से आवाज आने के साथ अन्य लक्षणों की समस्या हो सकती है (11)। इसके अलावा, स्लीप एप्निया की समस्या होने पर सोते समय गले की दीवारें आपस में मिल जाती है, जिसकी वजह से ऊपरी वायुमार्ग बंद हो सकता है और कुछ समय के लिए (आमतौर पर 10 सेकंड से 1 मिनट के लिए) सांस आने की प्रक्रिया बंद हो सकती है (12)। ऐसे में शरीर का तापमान अधिक हो सकता है (13), जो शिशु को पसीना आने का कारण बन सकता है।

अब हम बच्चों में स्तनपान के दौरान पसीना आने की समस्या को कम करने के कुछ कारगर उपाय बता रहे हैं।

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान शिशु में पसीना आने को कम करने के लिए टिप्स

स्तनपान के दौरान अगर बच्चे को पसीना आने की समस्या बनी रहती हैं, तो यहां बताए गए उपायों को अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह उपाय कुछ इस प्रकार हैं :

  • बच्चे को ढीले व आरामदायक कपड़े पहनाएं।
  • तापमान अधिक ठंडा होने पर ही बच्चे को गर्म कपड़े पहनाएं।
  • गर्मियों के मौसम में बच्चे को सूती कपड़े पहनाएं। ताकि बच्चे के शरीर तक हवा पहुंच सके।
  • बच्चे को पॉलिस्टर फाइबर वाले कपड़े या अधिक मोटे कपड़े न पहनाएं।
  • स्तनपान कराते समय बच्चे को पूरी तरह से न ढंके।
  • बच्चे को स्तनपान कराने का सही तरीका अपनाकर भी स्तनपान के दौरान पसीना आने की समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए स्तनपान कराते समय बच्चे की स्थिति बदलते रहें व दोनों ही स्तनों से स्तनपान करवाएं।
  • सार्वजनिक स्थानों पर स्तनपान कराते समय नर्सिंग कवर का इस्तेमाल करें।
  • शिशु को स्तनपान कराते समय हवादार कमरे में रहें। इससे बच्चे के शरीर का तापमान सामान्य बना रहेगा।

स्तनपान के दौरान पसीना आने की स्थिति के लिए डॉक्टर से कब मिलना चाहिए, आगे हम इस बारे में जानेंगे।

डॉक्टर से परामर्श कब करें?

अगर स्तनपान के दौरान शिशु को पसीना आता है, तो निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, जो हैं:

  • शिशु को हाइपरहाइड्रोसिस डिसऑर्डर होना (बुखार, चिड़चिड़ापन और त्वचा के रंग में बदलाव होना) (5)
  • शिशु को हाइपरथायरायडिज्म की समस्या होना (शिशु का वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना, बच्चे में चिड़चिड़ापन, नींद संबंधी विकार होना) (7)
  • शिशु को श्वसन तंत्र का संक्रमण होना (खांसी आना, गले से आवाज आना या दस्त लगना) (10)

तो जैसा लेख से यह पता चलता है कि तापमान का स्तर सामान्य तौर पर नवजात शिशुओं में पसीने की वृद्धि कर सकता है। इस आधार पर माना जा सकता है कि स्तनपान के दौरान शिशु को पसीना आना स्वाभाविक हो सकता है। हालांकि, अगर स्तनपान के दौरान पसीना आने के साथ ही शिशु में लेख में बताए गए अन्य लक्षण भी नजर आते हैं, तो ऐसी स्थिति में जल्द ही बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए और डॉक्टरी सलाह पर शिशु का उपचार कराना चाहिए। उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आपको बच्चे को दूध पिलाते समय पसीना आने के कारण की उचित जानकारी मिल गई होगी। ऐसे में इस जानकारी को अन्य लोगों तक पहुंचाने के लिए इस लेख को दूसरों के साथ भी जरूर शेयर करें और पढ़ते रहें मॉमजंक्शन।

संदर्भ (References)