बच्चे की बोतल छुड़ाने का सही समय व टिप्स | When To Stop Bottle Feeding In Hindi

When To Stop Bottle Feeding In Hindi

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शिशु का पालन-पोषण करना मुश्किल भरा काम है और इस जिम्मेदारी काे हर मां बखूबी निभाती है। शिशु के लिए क्या सही है और क्या गलत है, मां से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है मां की चुनौतियां भी बढ़ती हैं। ऐसा ही एक चुनौतीपूर्ण काम होता है, शिशु को नई आदत सिखाना या छुड़ाना। बच्चे का बोतल से दूध पीना भी इसी आदत में शामिल है। कुछ बच्चों की बोतल से दूध पीने की आदत छुड़ाना मां के लिए मुश्किल हो जाता है। मॉमजंक्शन के इस आर्टिकल में हम इसी मुद्दे पर बात करेंगे। यहां हम जानेंगे कि बच्चे का किस उम्र तक बोतल से दूध पीना सही है। साथ ही उसकी इस आदत को छुड़ाना का सही तरीका क्या है।

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि बच्चे को दूध की बोतल देना कब बंद करना चाहिए।

बच्चे की दूध की बोतल बंद करने का सही समय क्या है?

डॉक्टर मानते हैं कि 6 महीने के बाद बच्चे को कप से दूध देने की शुरुआत करनी चाहिए। साथ ही 12 माह का होते ही बोतल की आदत छुड़ाने का प्रयास करना चाहिए। वहीं, कुछ मामलों में देखा गया है कि बच्चे 1 वर्ष के होने के बाद भी यह आदत नहीं छोड़ते और बोतल से ही दूध पीना पसंद करते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक की रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अगर मां बच्चे को कप से दूध पीने के लिए प्रेरित करे, तो इस आदत को छुड़ाया जा सकता है (1)।

आइए, अब जानते हैं कि शिशु को तय समय के बाद बोलत से दूध क्यों नहीं पिलाना चाहिए।

बेबी को बोतल से दूध पिलाना क्यों बंद करना चाहिए?

बोतल से दूध पीने की आदत बच्चों को समय के अनुसार छुड़ा देनी चाहिए, अन्यथा यह बच्चे के शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती है। इन समस्याओं के बारे में नीचे बताया गया है।

1. दांतों में सड़न- लंबे समय तक बोतल से दूध पीते रहने से बच्चों के दांत में सड़न हो सकती है। साथ ही मुंह से बदबू आने की समस्या होने लगती है। बोतल के निप्पल से लगातार और लंबे समय तक चूसने से उनके दांतों की बनावट भी खराब हो सकती है। साथ ही भविष्य में चेहरे की मांसपेशियों के विकास पर असर पड़ सकता है (2) (3)।

2. संक्रमण का खतरा- अक्सर बच्चे बोतल से दूध लेटकर पीते हैं। वहीं, कुछ बच्चे रात में सोने के दौरान बोतल से दूध पीते हैं। ऐसे बच्चों में संक्रमण का ज्यादा खतरा होता है। दूध पीने का यह नेचुरल तरीका नहीं होता। दरअसल, लेटकर पीने से दूध बच्चे के गले में जमा होता रहता है। काफी समय तक इस स्थिति में रहने से बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप कान या गले में संक्रमण हो सकता है।

3. ठोस आहार की जरूरत- शिशु के 6 माह का होते ही उनकी डाइट में ठोस खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। इससे उन्हें सभी जरूरी पोषक तत्व मिल पाते हैं। वहीं, जो बच्चे 12 माह बाद भी बोतल से दूध पीने की आदत नहीं छोड़ते, वो अधिक मात्रा में दूध पीते हैं। इस कारण वो ठोस आहार खाने की कोशिश नहीं करते या बेमन से खाते हैं। ऐसे में बच्चे को सिर्फ दूध से पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिल पाते और उनका विकास प्रभावित हो सकता है (1)।

4. अधिक वजन- अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक का अपने शोध में कहना है कि तय समय के बाद भी बोतल से दूध पीने के कारण बच्चा जरूर से ज्यादा दूध का सेवन करता है। ऐसे बच्चे मोटापे का शिकार हो सकते हैं (1)।

5. एनीमिक होने का खतरा- अगर बच्चे को बोतल में गाय का दूध दे रहे हैं तो थोड़ा सतर्क हो जाएं। इसकी अधिक मात्रा बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है। लंबे समय तक बोतल के जरिए गाय का दूध पीने से शरीर में आयरन की कमी हो सकती है, जिससे बच्चे को एनीमिया हो सकता है (4)।

6. कमजोर प्रतिरोधक क्षमता- ऐसा माना गया है कि बोतल के जरिए दिए जाने वाले फॉर्मूला मिल्क में जरूरी पोषक तत्व नहीं होते। इस कारण से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। साथ ही संक्रमण होने की आशंका रहती है (5)।

लेख के सबसे अहम भाग में जानिए कि बच्चे से दूध की बोतल कैसे छुड़ाएं।

बच्चे को बोतल से दूध पिलाना बंद करने के तरीके

बच्चे से बोतल का दूध बंद कराने के कई तरीके हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है।

1. कप से पिलाएं- बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं। नई चीजों को जल्दी सीखने की कोशिश करते हैं। एक वर्ष पूरा होते ही बच्चे को कप से दूध पीने के लिए प्रेरित करें। बच्चों के लिए बाजार में कई आकर्षक कप उपलब्ध हैं। साथ ही आप खुद भी उसके सामने कप से पिएं, ताकि वो भी ऐसा करने के लिए प्रेरित हो।

2. धीरे-धीरे आदत बदलें- कभी भी एकदम से बोतल बंद करके कप से दूध पिलाने की कोशिश न करें। इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे अपनाएं। बोतल से दूध पीने की संख्या को कम और कप से दूध पिलाने की संख्या को ज्यादा करें।

3. ठोस आहार बढ़ाएं- जब आप बच्चे को ठोस आहार समय पर देंगे, तो धीरे-धीरे दूध पर निर्भरता कम हो जाएगी। इसलिए, जब भी बच्चे को भूख लगे, तो दूध की बोतल देने की जगह कुछ ठोस और पौष्टिक आहार दें।

4. सिपर का विकल्प- बोतल से दूध पिलाने की अपेक्षा सिपर का उपयोग कर सकते हैं। शिशु सिपर के हैंडल को आसानी से पकड़ सकता है, जिससे बॉटल के इस्तेमाल में कमी आएगी।

5. दूध को बोतल में घोलें- पुरानी तरकीब है कि बच्चे को बोतल में दूध दें, तो उसे पतला करके दें और कप में पूरा दूध पिलाएं। बच्चे को एहसास हो जाएगा कि कप में दूध बोतल की अपेक्षा ज्यादा स्वादिष्ट है।

6. बच्चे को पुरस्कार दें- जब भी आपका बच्चा प्याले में दूध खत्म करे, तो उसकी तारीफ करें। उसका मनपसंद खिलौना देकर भी उसे खुश कर सकती हैं। ऐसे में बच्चा कप या प्याले से दूध पीना पसंद करेगा।

7. प्यार करें- कप से पीने के दौरान दूध खत्म होने पर गले लगाना या किस करना बच्चे प्रभावित करता है। कभी-कभी बच्चे इस प्यार के लिए भी कप से दूध पीने लगते हैं।

8. बोतल को दूर रखें- बोतल से दूध छुड़ाने के दौरान इस बात का खास खयाल रखें कि बोतल बार-बार बच्चे की नजर में न आए। इससे बच्चा बोतल भूलकर कप या सीपर से ही दूध पीने का अभ्यस्त हो जाएगा।

कोई भी बदलाव एक दिन में नहीं आता। इसके लिए सतत प्रयास की जरूरत होती है। कुछ ऐसा ही बच्चे से दूध की बोतल छुड़ाने में भी है। बच्चे से पहली बार में दूध की बोतल छुड़ाना बहुत कठिन है। अगर शुरुआती प्रयास में बच्चा बोतल न छोड़े, तो निराश न हों। कुछ दिन के लिए बोतल छुड़ाने की प्रक्रिया बंद कर दें। इसके बाद फिर से कोशिश करें। इस लेख में दिए टिप्स जरूर आपके काम आएंगे। ऐसी ही और जरूरी जानकारी के लिए पढ़ते रहें मॉमजंक्शन।

संदर्भ (References)

  1. Bottle milk feeding and its association with food group consumption
    growth and socio‐demographic characteristics in Chinese young children
  2. Prolonged feeding practice and its effects on developing dentition
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/16224135/
  3. Consequences of bottle-feeding to the oral facial development of initially breastfed children
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/17003942/
  4. Consumption of cow\’s milk as a cause of iron deficiency in infants and toddlers
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/22043881/
  5. The Risks of Not Breastfeeding for Mothers and Infants
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2812877/
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