बच्चों का अंगूठा पीना कैसे छुड़ाएं? | Bacha Angutha Kyo Chusta Hai

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छोटे बच्चों की शरारतें और हरकतें हर किसी का दिल जीत लेती हैं। वहीं, कई बार माता-पिता को उनके लाडले की कुछ आदतें इतना परेशान कर देती है कि वो उन पर नाराज होने लग जाते हैं। ऐसी ही एक आदत है अंगूठा चूसने की। यूं तो यह आदत समय के साथ छूट जाती है, लेकिन कई बच्चे सालों तक अंगूठा चूसते हैं। इससे परेशान मां-बाप कई कोशिश करते हैं, जिससे उनका बच्चा अंगूठा चूसना छोड़ दे। जब कई प्रयासों के बाद भी बच्चे की आदत नहीं छूटती, तो वो बच्चे को डांटना शुरू कर देते हैं, जो गलत है। बच्चे की यह आदत छुड़ाने के लिए बल का नहीं, बल्कि बुद्धि का प्रयोग करना चाहिए। मॉमजंक्शन के इस आर्टिकल में हम यह जानने का प्रयास करें कि आखिर बच्चे अंगूठा क्यों चूसते हैं। साथ ही कुछ ऐसे उपाय जानेंगे, जो उनकी अंगूठा चूसने की आदत को छुड़ाने में मदद करेंगे।

चलिए, सबसे पहले यह जान लेते हैं कि बच्चों के अंगूठा चूसने के पीछे कारण क्या है।

बच्चे अंगूठा क्यों पीते हैं?

माना जाता है कि बच्चे अंगूठा चूसने से सुरक्षित और खुशी महसूस करते हैं। साथ ही जब वो थके हुए हों, भूख लगी हो या बोरियत महसूस करते हैं, तो वो खुद को शांत करने या सोने के लिए अंगूठा चूस सकते हैं (1)। वहीं, एक वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक बच्चों के अंगूठा चूसने का संंबंध शारीरिक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक तनाव से भी जुड़ा हो सकता है। वैज्ञानिक शोध में माना गया है कि बच्चे अपने अंगूठे को मुंह में ट्रिगेमिनल नर्व को उत्तेजित करने के लिए डालते हैं, जो मांसपेशियों के संतुलन को बनाने और तनाव को मुक्त करने में मदद करता है (2)

आगे हम आपको बता रहे हैं कि बच्चे अंगूठा या उंगलियों को चूसना कब शुरू करते हैं।

बच्चे अपना अंगूठा चूसना कब शुरू करते हैं?

आपको शायद यकीन न हो, लेकिन मेडिकल रिसर्च का मानना है कि शिशु गर्भाशय में ही अंगूठा चूसना शुरू कर देते हैं (1)। शिशु गर्भावस्था के 29वें हफ्ते से ही अंगूठा मुंह में डालकर पीने लग जाते हैं। वहीं, जन्म के बाद करीब 10 से 34 प्रतिशत बच्चे अंगूठा चूसते हैं (3)

बच्चों का अंगूठा चूसना हानिकारक भी हो सकता है। आइए, इससे होने वाले नुकसान पर एक नजर डाल लेते हैं।

अंगूठा चूसना शिशुओं के लिए क्यों हानिकारक है?

बच्चों में अंगूठा चूसने की आदत काफी आम है, लेकिन इस आदत के लंबे समय तक रहने पर कई तरह के दुष्परिणाम भी होने लगते हैं। नीचे हम आपको विस्तार से अंगूठा या उंगली चूसने की वजह से होने वाली परेशानियों के बारे में बता रहे हैं (3) (4) (5) (6) (7) (8)

  1. दातों का अंदर धसना या बाहर निकलना: बच्चे द्वारा अंगूठे को बार-बार चूसने से बच्चे के दांत अंदर को धसने के साथ ही अपने स्थान से खिसक सकते हैं। इसके अलावा, बच्चे के दांतों का बाहर निकलना भी अंगूठा चूसने के कारण हो सकता है। अगर बच्चा लंबे समय तक अंगूठे को चूसता है, तो उसके दांंत टेड़े-मेड़े भी हो सकते हैं।
  1. तोतला पन : अगर बच्चा 4 साल तक लगातार अंगूठा चूसता रहा है और इस आदत को छोड़ने का नाम नहीं लो रहा है, तो उसे बोलते समय कठिनाई महसूस हो सकती है। उसके शब्द साफ नहीं निकलते। इसलिए, वो तोतलापन का शिकार हो जाता है।
  1. पैरोनीचिया (Paronychia) : यह ऐसी स्थिति होती है, जब बैक्टीरिया नाखूनों की जड़ को संक्रमित करता है। नाखून पर लगातार मुंह और दांतों की वजह से पड़ते दबाव की वजह से नाखून और त्वचा के बीच एक छोटा-सा अंतर आ जाता है। यहां बैक्टीरिया जमा होकर संक्रमण पैदा कर सकते हैं। फिर यही संक्रमण मुंह के जरिए पेट में जा सकता है।
  1. हर्पेटिक व्हिटलो (Herpetic whitlow) : यह एक प्रकार का संक्रमण है, जो नाखूनों और उंगलियों में होता है। इस संक्रमण के दौरान उंगली में बिल्स्टर (छाले – फफोले) हो जाते हैं, जिनमें काफी दर्द होता है।
  1. हाथों की हड्डी संबंधी समस्या : अंगूठे या उंगलियों को बार-बार चूसने की वजह से हड्डी पर भी असर पड़ सकता है। एक केस स्टडी के मुताबिक लंबे समय तक अंगूठे को चूसने से बच्चे की हड्डी काफी बढ़ गई थी। अंगूठा चूसने की आदत हड्डियों को बढ़ाने के साथ ही हड्डी को उसकी जगह से खिसाकने का भी काम कर सकती है।
  1. मानसिक कमजोरी : बच्चे के अंगूठा चूसने के आदत को मानसिक कमजोरी से भी जोड़कर देखा जाता है। अगर बच्चा लंबे समय से अंगूठा चूस रहा है और चार साल बाद भी इस आदत को नहीं छोड़ता है, तो शायद यह मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। ऐसे में न्यूरो से एक बार संपर्क कर लेना चाहिए।

नोट : यहां दुष्प्रभाव बताने का मतलब किसी को डरना नहीं, बल्कि सावधान करना है।

नीचे हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं, जिनकी मदद से बच्चों को अंगूठा चूसने से रोका जा सकता है।

बच्चे को अंगूठा चूसने से कैसे रोकें? | बच्चों का अंगूठा पीना कैसे छुड़ाएं? |

एक बार बच्चे को अंगूठा चूसने की आदत लग जाएं, तो उसे छुड़ाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। आप बच्चे से बात कर सकते हैं कि यह आदत बुरी होती है और इससे कई नुकसान हो सकते हैं। साथ ही उसके सामने कुछ उदाहरण भी रख सकते हैं। ध्यान रहे कि इस आदत की वजह से बच्चों को डांटे नहीं। यहां हम कुछ टिप्स दे रहे हैं (1) (9) (10):

छोटे बच्चों को अंगूठा चूसने से रोकने के टिप्स:

  • अगर बच्चा बहुत छोटा है, तो जैसे ही अंगूठा चूसने लगे उसके हाथों में दस्ताने पहनाना शुरू कर दें। इससे बच्चे की उंगलियां या अंगूठा बार-बार चूसने की आदत छूट सकती है।
  • छोटे बच्चे की यह आदत छुड़ाने के लिए आप उसे कोई खिलौना दे सकते हैं।
  • बच्चे को आप पेसिफायर (Pacifier) भी दे सकते हैं, लेकिन पेसिफायर का इस्तेमाल करने के लिए उस पर जोर न डालें।
  • आप बच्चे के अंगूठे में कुछ कड़वी चीज जैसे नीम का लेप लगा सकती हैं, ताकि वो अंगूठे से आने वाले कड़वे स्वाद की वजह से उसे चूसना छोड़ सकते हैं।

बड़े बच्चों को अंगूठा चूसने से रोकने के टिप्स:

  • अगर बच्चा इतना बड़ा है कि वो माता-पिता की बात समझ सकता है, तो उससे बात करें। उसे बताएं कि अगर उसे कुछ परेशानी है, तो वह अंगूठा चूसकर खुद को शांत करने की जगह आपसे बात करे।
  • जब बच्चा आपकी बात मानकर कुछ देर के लिए अंगूठा न चूसे, तो उसकी तारीफ करें।
  • उन्हें समय-समय पर याद दिलाते रहें कि अंगूठा चूसने से उसे कई नुकसान हो सकते हैं।
  • बच्चे की हरकत पर नजर रखकर यह जानने की कोशिश करें कि वह किस परिस्थिति में अंगूठे को मुंह में डालता है। अंगूठा चूसने की वजह का पता चलते ही उस पर काम करना शुरू कर दें।

चलिए, अब यह जान लेते हैं कि बच्चे अंगूठा चूसना कब बंद करते हैं।

बच्चों का अंगूठा चूसना कब बंद होता है?

अधिकांश बच्चे अपने अंगूठे को चूसना अपने आप बंद कर देते हैं। करीब 3 से 4 साल के होने पर बच्चों की यह आदत छूट जाती है। अगर चार साल के बाद भी बच्चे अंगूठे को चूसते हैं, तो आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं (1) (11)

अब तो आप जान ही चुके हैं कि बच्चे अंगूठा क्यों चूसते हैं। बस अब आप इस लेख में दी गई सभी बातों को जहन में रखकर अपने बच्चे की इस आदत छुड़वाने की कोशिश कर सकते हैं। ध्यान रखें कि आप बच्चों को गुस्से से नहीं, प्यार से ही जीत सकते हैं। आप किसी भी तरह की जोर-जबरदस्ती न करें। आप इस लेख को अपने दोस्तों के साथ भी साझा कर सकते हैं, ताकि अगर उनके बच्चे को भी कुछ ऐसी लत हो, तो उन्हें कुछ मदद मिल सके। आर्टिकल में दी गई जानकारी के इतर अगर आप कुछ सवाल हमसे पूछना चाहते हैं, तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से उन्हें हम तक पहुंचा सकते हैं। हम वैज्ञानिक प्रमाण सहित जवाब देने का प्रयास करेंगे।

संदर्भ (References):

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