बच्चों को हाथ धोना (हैंड वाशिंग स्टेप्स) कैसे सिखाएं? | Hand Washing Steps In Hindi

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शरीर की साफ-सफाई के प्रति बच्चों को शुरू से ही सिखाना चाहिए। इसमें नियमित रूप से हाथ धोना भी शामिल है। हाथों के साफ रहने से बच्चे कोरोना, सर्दी-जुकाम, फ्लू, उल्टी-दस्त, स्वाइन फ्लू, गले में संक्रमण व पेट की बीमारियाें से बचे रहते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि हाथ ही हैं, जो बैक्टीरिया और वायरस के संपर्क में सबसे पहले आते हैं और बीमारियों का कारण बनते हैं (1) (2) । अब बच्चों को हाथ कब-कब धोने चाहिए और कैसे धोने चाहिए, इसकी जानकारी होना जरूरी है। मॉमजंक्शन के इस आर्टिकल में हम इसी बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

यहां हम बता रहे हैं कि बच्चाें को किस प्रकार से हाथ धाने का तरीका सिखाना चाहिए।

बच्चों को हाथ धोना कैसे सिखाएं?

माता-पिता और बच्चे की देखभाल करने वाले बच्चों को हाथ धोना सिखाने और उसके प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अगर बच्चों में कम उम्र से ही अच्छी तरह हाथ धोने की आदत डाली जाए, तो यह जीवन भर उनके साथ रहती है। उन्हें कुछ इस तरह से हाथ धोना सिखाया जा सकता है (3):

  • शुरुआत में आप उनके छोटे-छोटे हाथों को अपने हाथ में लेकर बताएं कि कैसे साबुन इस्तेमाल करना है और किस तरह पानी से हाथ धोने हैं।
  • इसके अलावा, उनके सामने खुद अपने हाथ धोकर दिखाएं कि कैसे हाथ धोते हैं।
  • उन्हें यह बताएं कि हाथों को अंदर व बाहर दोनों तरफ से अच्छी तरह धोना है।
  • साथ ही उन्हें बताएं कि शौचालय से आने के बाद, खेलने के बाद, बाहर से घूमकर आने के बाद और भोजन करने से पहले व बाद में हाथ जरूर धोने चाहिए।
  • आप इस प्रक्रिया को मजेदार बनाने के लिए अपना खुद का हैंडवाशिंग गाना भी तैयार कर सकते हैं।

आगे हम बता रहें कि कैसे स्टैप बाय स्टैप बच्चों को हाथ धोना सिखाया जाए।

बच्चों के हाथ धोने के चरण | हैण्ड वाशिंग स्टेप्स इन हिंदी

बच्चों को सही तरह से हाथ धुलाना सिखाने के लिए निम्न स्टैप्स को फॉलो कर सकते हैं (1):

  • सबसे पहले बच्चों के हाथों को पानी से गीला करें।
  • इसके बाद हाथों पर साबुन या फिर हैंडवाश जेल डालें।
  • 20 सेकंड तक साबुन या हैंडवाश को अच्छी तरह से मलें ।
  • हाथों और कलाई की सभी सतहों पर उंगलियों से हल्का-हल्का रगड़ें।
  • हाथों के पीछे, कलाई पर, उंगलियों के बीच में, नाखूनों के नीचे और अंगूठों को साफ करना न भूलें।
  • इसके बाद पानी से हाथों को धो लें। ध्यान रहे कि पानी के जरिए साबुन अच्छी तरह से निकल जाना चाहिए।
  • इसके साफ तौलिया से हाथों को सूखा लें। तौलिया न हो, तो पेपर टॉवल इस्तेमाल कर सकते हैं।

आइए, अब जानते हैं कि बच्चों के हाथों को कितनी देर तक धोना चाहिए।

बच्चे को कितने देर तक हाथ धोना चाहिए?

वैसे तो सामान्य तौर पर हाथ धोने की अवधि कम से कम 20 सेकंड मानी गई है, लेकिन हाथों में गंदगी अधिक होने पर इससे अधिक समय तक भी हाथ धोए जा सकते हैं (4)।

अगर आप जानना चाहते हैं कि बच्चे कब-कब हाथ धोएं, तो लेख का अगला हिस्सा जरूर पढ़ें।

बच्चों को पूरे दिन में कब-कब हाथ धोना चाहिए?

बच्चों का दिनभर हाथ धोना भी सही नहीं है। हाथ हमेशा तय समय व परिस्थितियों में धोने चाहिए। बच्चों को इसकी सीख देना भी जरूरी है। नीचे हम इसी बारे में बता रहे हैं (4):

  • भोजन करने से पहले और बाद में।
  • शौचायल का उपयोग करने के बाद।
  • घर के आसपास फैली किसी भी प्रकार की गंदगी को छूने के बाद।
  • जानवरों को छूने के बाद, जिसमें परिवार के पालतू जानवर भी शामिल हैं।
  • किसी भी बीमार दोस्त या रिश्तेदार के यहां से आने के बाद या उसकी देखभाल करने से पहले और बाद में।
  • खांसने व छींकने के बाद और बहती नाक को पोंछने के बाद।
  • बाहर से खेलकर या घूमकर आने के बाद।
  • कचरा छूने के बाद।

हाथ धोने से संबंधित अन्य जानकारी के लिए पढ़ते रहें यह आर्टिकल।

हाथ धोना (हैंडवाशिंग): क्या करना चाहिए और क्या नहीं

माता-पिता को बच्चों को हाथ धोने के संबंध में यह बताना भी जरूरी है कि इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं। आइए, इस बारे में जानते हैं :

क्या करें?

  • हाथों को धोने से पहले हल्के गुनगुने या ठंडे पानी से हाथों काे गीला कर लेना चाहिए।
  • बच्चों के यह जरूर बताएं कि हाथ हमेशा वॉश बेसिन के अंदर ही धोने चाहिए।
  • हाथों को आपस में मलते समय नल को बंद रखें।
  • हाथ अच्छी तरह धुल जाने के बाद साफ तौलिये से पोंछ लें।

क्या नहीं करना चाहिए?

  • गीले हाथों से किसी भी चीज को नहीं छूना चाहिए।
  • हाथ धोते समय पानी या साबुन व पानी वॉश बेसिन से बाहर फर्श पर न गिरे।
  • साबुन को स्क्रब करते समय नल पर न रखें।
  • हाथ पर साबुन लगाने के बाद उसे पानी की जगह सूखी जगह पर रखें।
  • अपने हाथों को साफ करने के बाद वॉश बेसिन की सतह को न छुएं, क्योंकि इससे हाथ फिर से दूषित हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

हाथों को धोना या सेनिटाइज करनाबच्चों के लिए क्या ज्यादा सही है

हैंड सैनिटाइजर के जरिए हाथों को सेनिटाइज करना भी कोरोना जैसे वायरस और कई प्रकार के बैक्टीरिया को दूर करने का अच्छा तरीका हो सकता है। वहीं, शोध के अनुसार क्रिप्टोस्पोरीडीयम, नोरोवायरस और क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइल जैसे कुछ प्रकार के कीटाणुओं को हटाने में सैनिटाइजर की तुलना में साबुन और पानी अधिक प्रभावी होते हैं। इसके अलावा, अगर बच्चाें के हाथ ज्यादा गंदे व चिपचिपे हैं, तो हैंड सैनिटाइजर इसे दूर करने में प्रभावी नहीं हो सकता है (5)। हां, साबुन और पानी न हाेने पर जरूर सैनिटाइजर अच्छा विकल्प हो सकता है।

बच्चों के लिए अल्कोहल युक्त सेनिटाइजर्स से जुड़े क्या जोखिम हैं

अल्कोहल आधारित हैंड सैनिटाइजर को बच्चों की पहुंच से दूर रखा जाना चाहिए और इसका उपयोग तभी किया जाना चाहिए जब साबुन और पानी से हाथ धोना संभव न हो। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह बच्चों पर कई प्रकार के हानिकारक प्रभाव डाल सकता है। यह श्वास और हृदय गति को कम कर सकता है और बेहोशी का कारण बन सकता है। इससे बच्चों में घबराहट की समस्या भी हो सकती है (6)

आर्टिकल के माध्यम से आपने जाना कि बच्चाें में हाथ धोने की आदत उन्हें कई प्रकार की बीमारियों से दूर रख सकती है। यहां तक कि हाथों को हमेशा साफ रखने से कोविट-19 जैसे खतरनाक वायरस को फैलने से भी रोका जा सकता है। इसलिए, बच्चों को कम से कम 20 सेकंड तक जरूर होने धोने के लिए प्रेरित करें। हमें यकीन है कि आप हाथ धोने के महत्व को समझकर अपने बच्चे में इस अच्छी आदत का विकास करेंगे, ताकि वह कोरोना जैसी कई बीमारियों से बचा रहे। साथ ही आप भी समय-समय पर हाथ जरूर धोएं, क्योंकि बच्चे अपने बड़ों से ही सबकुछ सीखते हैं।

संदर्भ (References):

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