बच्चे को प्रेरित करने के 25+ तरीके | How To Motivate Students In Hindi

How To Motivate Students In Hindi

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प्रत्येक बच्चा अपने आप में खास होता है। सभी की काबिलियत एक जैसी नहीं होती, लेकिन सबमें कोई न कोई खास गुण जरूर होता है। जरूरत है तो बस उसे पहचानने की। पढ़ाई के लिए बच्चे को प्रेरित करने के दौरान माता-पिता में सामंजस्य की जरूरत होती है। मॉमजंक्शन के इस लेख के जरिए हम माता-पिता के लिए बच्चों को प्रेरित करने से जुड़े कुछ टिप्स लेकर आए हैं। तो बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के तरीके जानने के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।

आइए, सबसे पहले बच्चों व विद्यार्थियों को प्रेरित करने के उपायों के बारे में जान लेते हैं।

बच्चों व विद्यार्थियों को प्रेरित करने के 25+ तरीके | Bache ko motivate kaise karein

बच्चे वही सीखते हैं, जो आसपास देखते हैं। माहौल और रहन-सहन का उनपर काफी प्रभाव पड़ता है। बच्चे की सही संगत उसके व्यक्तित्व के विकास में अहम भूमिका निभा सकती है। बच्चा किसी भी काम को करने में पीछे रहता है, तो पेरेंट्स को तरीका बदलने की जरूरत है। नीचे हम कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जिन्हें आजमाकर बच्चे को हर काम में आगे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

  1. खुद की सहभागिता – बच्चे को किसी भी चीज के लिए प्रेरित करने का सबसे अच्छा तरीका है कि माता-पिता खुद को भी उस कार्य में शामिल करें। उदाहरण के लिए, अगर बच्चे को किसी खेल, पढ़ाई संबंधी विषय या अन्य किसी काम के प्रति प्रेरित करना चाहते हैं, तो पेरेंट्स को पहले खुद उस विषय में अपनी रुचि दिखानी चाहिए। ताकि, बच्चे का झुकाव खुद-ब-खुद ही इस तरफ होने लगे।
  1. हर प्रयास की करें प्रशंसा – पैरेंट्स को अपने बच्चों द्वारा किए गए हर प्रयास की प्रशंसा करनी चाहिए। भले ही बच्चे को उसमें सफलता हासिल न हुई हो, लेकिन उसके प्रयासों की सराहना करें। जैसे बच्चे ने किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है, लेकिन वो उसे जीत नहीं पाया। ऐसे में बच्चे को बताएं कि उन्होंने प्रतियोगिता को जीतने के लिए, जो प्रयास किए उससे उन्हें बहुत खुशी मिली और एक दिन वह जरूर कामयाबी हासिल करेंगे। इससे बच्चा अगली बार और मेहनत के साथ हिस्सा लेगा।
  1. नई चीजें सिखाएं – अक्सर माता पिता बच्चे पर अच्छे नंबर लाने के लिए इतना दबाव बना देते हैं कि वह रोबोट बनकर रह जाता है। इससे वह न तो पढ़ाई में मन लगा पाता है और न ही दूसरी एक्टिविटी में। बच्चे को पढ़ाई के लिए मोटिवेट करें, लेकिन उन पर ग्रेड्स का दबाव न बनाएं। बच्चा पढ़ाई के अलावा जिन चीजों में दिलचस्पी रखता है, उनके बारे में पता लगाकर उन्हें नई-नई चीजें सीखवाएं।
  1. रिवार्ड दें – बच्चों को गिफ्टस बहुत पसंद होते हैं। बच्चे को मोटिवेट करने का यह भी एक तरीका हो सकता है। इसलिए, बच्चे की हर उपलब्धि के लिए उसे उसका मनपसंद गिफ्ट दें। हालांकि, बच्चों को इतने भी गिफ्ट न दें, कि उनकी आदत खराब हो जाए।
  1. बच्चे के रोल मॉडल बनें – पैरेंट्स बच्चे के सबसे पहले शिक्षक होते हैं। अपने माता-पिता को देखकर ही बच्चा ज्यादातर चीजें सीखता है। इसलिए बच्चे को प्रोत्साहित करने के लिए सबसे पहले जो काम आप चाहते हैं कि वो करें, उसे पहले आप खुद करके दिखाएं।
  1. हौसला बढ़ाएं – बच्चा किसी चीज से डरता है, तो उसके उस डर दूर करने की कोशिश करें। हर मुश्किल परिस्थिति से लड़ने के लिए उन्हें तैयार करें। बच्चा कभी किसी चीज में सफल नहीं होता है, तो उसे निराश न होने दें। उसे समझाएं कि आज नहीं तो कल वो जरूर इसमें कामयाब होंगे बच्चे को किसी काम को करने में बहुत ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है, तो उसे हार न मानने दें। जितना हो सकता है उसका हौसला बढ़ाएं।
  1. सकारात्मक रवैया रखें – कुछ पैरेंट्स बच्चे को डरा कर रखते हैं। इससे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव हो सकता है। बच्चे को प्यार से पढ़ने व दूसरी चीजों के लिए प्रोत्साहित करें। उनके प्रति हमेशा अपना सकारात्मक व्यवहार रखें। बच्चा अगर किसी कार्य में फेल हो जाता है, तो उसे गुस्सा करने की बजाय उसके प्रति सहानुभूति रखें।
  1. सीखने की क्षमता समझें – प्रत्येक बच्चा दूसरे से अलग होता है। जरूरी नहीं कि सीखने की जो आदत एक बच्चे की हो वही दूसरे की भी हो। इसलिए बच्चे की सीखने की क्षमता को भी समझना जरूरी है। उसकी क्षमता के अनुसार ही उस पर पढ़ाई या किसी कार्य को करने का जोर डालें। साथ ही जरूरत व सुविधा अनुसार बच्चे को ट्यूशन भी दिलवाएं।
  1. शेड्यूल बनाएं – बच्चे के हर काम का समय फिक्स होना जरूरी है। बच्चे के सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक का एक टाइमटेबल बनाएं। इससे बच्चे को पढ़ने, खेलने व सोने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। शुरुआत में बच्चे को थोड़ी दिक्कत हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे यह बच्चे की आदत बन में आ जाएगा।
  1. बच्‍चों की बात भी सुनें – बच्चे को समझा रही हैं तो ऐसा न हो कि सिर्फ अपनी ही बात सुनाएं। बच्चे की बात को भी तवज्जो दें। उसकी बात सुनें कि आखिर वह क्या कहना चाहता है। हो सकता है वो अपनी परेशानियां शेयर करें, तो ऐसे में उसकी दिक्कतों का समाधान निकालें।
  1. फेल होने पर गुस्सा न करें – पहले से ही बच्चे पर अच्छे नंबर लाने के लिए दबाव होता है। फेल होने जैसी स्थिति में अगर गुस्सा करेंगे, तो हो सकता है कि बच्चे पर बुरा असर पड़े और वह दबाव को झेल न पाए। इसलिए ऐसी स्थिति से बचना चाहिए।
  1. लालच न दें – बच्चे को कभी न कहें कि चैप्टर पूरा करने पर चॉकलेट, टॉफी या उसका पसंदीदा सामान मिलेगा। ऐसे लालच देने की कोशिश न करें। इससे बच्चा जब भी पढ़ाई करेगा तो इनाम की उम्मीद करेगा। पढ़ाई बच्चे के लिए रोज का रूटीन होना चाहिए न की कोई स्पेशल काम, जिसके लिए उसे इनाम दिया जाए। हां, कभी-कभार बच्चे की जरूरत के अनुसार उसे कुछ चीजें तोहफे में दे सकते हैं। जैसे- स्टडी टेबल या स्टडी लैंप, कैल्क्यूलेटर, स्केचबुक, कलर बुक आदि।
  1. तारीफ करें – जब भी कभी बच्चा कुछ अच्छा करे, तो उसकी तारीफ करें। सिर्फ बड़ों को ही नहीं बच्चों को भी अपनी तारीफ सुनना पसंद होता है। अपनी प्रशंसा सुनकर बच्चे का मनोबल बढ़ता है और उसके अंदर ओर अच्छा कर दिखाने की भावना आती है।
  1. तुलना न करें – बहुत सारे पैरेंट्स अपने बच्चे की दूसरे बच्चे से तुलना करने लगते हैं। बात-बात पर दूसरे बच्चे का उदाहरण देते हैं। इसके पीछे माता-पिता की सोच यह हो सकती है कि बच्चा देखादेखी मोटिवेट होगा, लेकिन कभी-कभी इसका उल्टा हो सकता है। इससे बच्चे के अंदर हीन भावना आ जाती है और वह दूसरों से जलन की भावना रख सकता है।
  1. जरूरत का रखें ख्याल – बतौर माता-पिता बच्चे के सिलेबस और जरूरतों पर नजर रखना चाहिए। बच्चे को अप-टू-डेट रखने के लिए जरूरी है कि उसे कब क्या चाहिए इसका खास ख्याल रखा जाए।
  1. परेशानियों का करने दें सामना – कई माता-पिता बच्चों को जरा भी परेशानी नहीं होने देते। वो उनकी हर मुसीबत का हल खोजने में लगे रहते हैं। ऐसा न करें। इसकी बजाय बच्चों को कुछ परेशानियों का सामना खुद करने का मौका दें। इस दौरान पैरेंट्स बच्चे पर नजर बनाए रख सकते हैं, जिससे अगर परेशानी बढ़ जाती है, तो वो उनकी मदद कर सकें। अगर बच्चा खुद से परेशानी से लड़कर बाहर आएगा, तो इससे उसके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी।
  1. व्यायाम की आदत डालें – एनसीबीआई पर उपलब्ध एक शोध के अनुसार, एक्सरसाइज से बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में बढ़ोतरी होती है। बच्चों को शरीरिक गतिविधियों में भाग लेने देना चाहिए, जिसमें दौड़ने-भागने वाले खेलों के साथ ही सामान्य तौर पर स्कूल में कराई जाने वाली फिजिकल ट्रेनिंग को शामिल किया जा सकता है। इससे उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है।
  1. पर्याप्त नींद है जरूरी – पढ़ाई के प्रति बच्चे को प्रेरित करने के चक्कर में उसकी नींद से समझौता न करें। बच्चे के लिए डायट के साथ पर्याप्त नींद जरूरी है, वरना वह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है।
  1. चेकिलिस्ट तैयार करें – बच्चे के लिए एक लक्ष्य सेट कर दें। इसके लिए एक चेकलिस्ट बनाएं और उसमें बच्चे के लिए रोजाना के अलग-अलग टास्क दे दें। रात को सोने से पहले उससे पूछें कि उसने पूरे दिन में कितने टास्क को पूरा किया है। इसके बाद उसे बताएं कि अभी वो अपने लक्ष्य से कितने दूर हैं और अगले दिन ज्यादा टास्क पूरा करने के लिए बच्चे को प्रोत्साहित करें। इससे बच्चे में तय लक्षय को हासिल करने का जज्बा बढ़ेगा।
  1. असफलता से न होने दें निराश – बच्चा अगर किसी कॉम्पीटिशन में हार जाता है, तो उसे बताएं कि इसमें निराश होने वाली बात नहीं है। उन्हें आगे और भी कई मौके मिलेंगे। उन्हें निराश होने की जगह उन मौकों को अपने नाम करने के लिए मेहनत करनी होगी। उन्हें समझाएं कि यह हार नहीं उनका सफलता की तरफ पहला कदम है।
  1. इमोश्नल स्पोर्ट – कई बार बच्चे सफलता न हासिल होने पर डिमोटिवेट हो जाते हैं। ऐसे समय में बच्चे को इमोश्नल स्पोर्ट दें। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ सकता है।
  1. तनाव से बचाएं – बच्चे के आस-पास तनाव को भटकने न दें। किशोरावस्था में बच्चे को भावनात्मक रूप से खास ख्याल की जरूरत होती है। ऐसे में पैरेंट्स को बच्चों पर खास नजर बनाकर रखनी चाहिए। बच्चे के व्यवहार में किसी तरह का बदलाव नजर आता है, तो कुछ समय में उनसे उनकी परेशानी पूछें। बच्चे से बात करके यह पता लगाएं कि कही कोई उन्हें परेशान तो नहीं करता है। उनके तनाव का कारण जानकर उसे दूर करने की कोशिश करें।
  1. ग्रुप डिस्कशन के लिए प्रेरित करें – देखा गया है कि बच्चे जब ग्रुप डिस्कशन करते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास की बढ़ोतरी होती है और विषय भी अच्छे से समझ आता है। साथ ही पढ़ाई के लिए प्रेरित भी होते हैं।
  1. असफलता को सफलता में बदलना सिखाएं – विफल होना कोई बुरी बात नहीं है। असफलता कई पाठ पढ़ाती है। ऐसे में बच्चा अगर फेल हो जाता है तो उसे बताएं कि कमी कहां रह गई और किस तरह वह प्रयास करके उन्हें सफलता में बदल सकता है। उनकी विफलताओं में भी उनमें हिम्मत दें और उस काम को अधिक मेहनत से करने के लिए प्रेरित करें।
  1. धैर्य रखें – पढ़ाई को लेकर बच्चों में उत्साहवर्धन करने के दौरान माता-पिता को धैर्य रखने की जरूरत होती है। बच्चे द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयासों पर खुश होकर दिखाएं। साथ ही समझाएं कि अच्छी सफलता पाने के लिए आगे अधिक मेहनत करनी होगी
  1. डाइट से समझौता नहीं – कहते हैं कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन निवास करता है। बच्चे का शरीर स्वस्थ होगा, तो पढ़ाई में मन लगेगा। ऐसे में उसकी डाइट का खास ख्याल रखें। उसका खाना पौष्टिक तत्वों से भरपूर होना चाहिए।
  1. दोस्ती का रिश्ता कायम करें – भले ही आप माता-पिता हैं, लेकिन बच्चे के साथ दोस्ती का रिश्ता बनाकर रखें। कॉम्पिटिटिव वर्ल्ड में ऐसी कई स्थितियां व वजहें हैं, जो बच्चे को कमजोर कर सकती हैं। वहीं, अगर पेरेंट्स का बच्चे के साथ दोस्ती का रिश्ता होगा, तो वो किसी भी तरह की परेशानी को बेझिझक पैरेंट्स के सामने रख सकेंगे और उनके साथ मिलकर उस समस्या का हल भी निकाल लेंगे।

हर बच्चा अलग होता है। कुछ बच्चे सेल्फ मोटिवेटेड होते हैं, तो कुछ को प्रेरित करने की जरूरत होती है। वहीं, कुछ बच्चे ऐसे होते हैं, जिन पर बहुत ज्यादा ध्यान देनी की आवश्यकता होती है। ऐसे में पेरेंटिंग के कुछ तरीकों को बदलकर बच्चों को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इस लेख में हमने बच्चे को प्रेरित करने के 25 से ज्यादा तरीके साझा किए हैं, जिन्हें अपनाकर आप भी अपने बच्चे को मोटिवेट कर सकती हैं। बच्चों से जुड़ी ऐसी ही जानकारियों के लिए आप हमारे अन्य लेख भी पढ़ सकते हैं।

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