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बच्चों के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता की 15 अच्छी आदतें | Personal Hygiene For Kids

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कहते हैं कि स्वच्छ तन में ही स्वच्छ मन का वास होता है। इसलिए, बच्चों को स्वस्थ व स्वच्छ रखने के लिए उन्हें व्यक्तिगत स्वच्छता की महत्ता के बारे में सिखाना जरूरी है। व्यक्तिगत स्वच्छता बच्चों को न केवल साफ रहने में मदद करती है, बल्कि संक्रामक रोगों के प्रसार को भी रोक सकती है। अक्सर बच्चों को साफ सफाई को लेकर कई अच्छी व बुरी आदतों का ज्ञान नहीं होता, लेकिन समझाने व सिखाने पर बच्चे जल्दी इन आदतों को अपना लेते हैं। जीवन भर काम आने वाली स्वच्छता की इन आदतों से आप बच्चों को मॉमजंक्शन के इस आर्टिकल के जरिए आसानी से अवगत करा सकते हैं।

लेख में सबसे पहले आपको बताते हैं कि बच्चों की स्वच्छता का महत्व क्या है।

बच्चों के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता का क्या महत्व है?

व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी आदतें जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और उम्र को बढ़ाने में मददगार हो सकती हैं। बच्चों के लिए साफ सफाई की महत्ता को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है (1) (2)

  1. डायरिया और बुखार से बचाव के लिए साफ-सफाई जरूरी है।
  1. त्वचा रोग, पेट में कीड़े पड़ने की समस्या व दंत रोग जैसी बीमारियां से बचे रहने के लिए भी स्वच्छता संबंधित आदतों को सीखना चाहिए।
  1. साफ रहने से बच्चे संक्रमण से बच सकते हैं। संक्रमण के प्राथमिक कारण में दूषित जल और साफ सफाई न होना शामिल है।
  1. अस्वच्छता के कारण होने वाले इंफेक्शन से बच्चे के शारीरिक विकास में बाधा आ सकती है।
  1. व्यक्तिगत स्वच्छता की अच्छी आदतों से बच्चे खुद के बारे में अच्छा महसूस करते हैं।
  1. साफ न रहने वाले बच्चों की नकारात्मक छवि बन सकती है, जिससे उनके सामाजिक जीवन में परेशानी आ सकती है।
  1. साफ न रहने से बच्चे के बालों में जूं पड़ने की समस्या हो सकती है।

आगे पढ़िए बच्चों में साफ-सफाई से जुड़ी कौन-कौन सी आदतें होनी चाहिए।

बच्चों के लिए 15 सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत स्वच्छता की आदतें

बच्चे को स्वस्थ रहने और खुद के बारे में अच्छा महसूस करने के लिए स्वयं को साफ रखने की जरूरत है। व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी आदतें उनमें आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ स्वच्छता आदतें कुछ इस प्रकार से हैं (2) (3)

  1. हाथ धोना: स्वास्थ्य व स्वच्छता के लिए बच्चों को खाने से पहले, वॉशरूम या टॉयलेट जाने के बाद और स्कूल व बाहर से आने के बाद साबुन या हैंडवॉश से हाथ धोने की आदत डालना जरूरी है। गंदे हाथों के जरिए कीटाणु शरीर में प्रवेश करते हैं, जो बीमारी का कारण बनते हैं।
  1. खांसते व छींकते हुए मुंह ढकना: बच्चों को खांसते या छींकते हुए टिश्यू पेपर या रुमाल से मुंह ढकने की आदत होनी चाहिए। साथ ही टिश्यू पेपर न मिलने पर बांह की मदद से मुंह ढकने की आदत डालें। दरअसल, खांसते या छींकते हुए रोगाणुओं द्वारा अन्य संक्रमित हो सकते हैं।
  1. दांतों की सफाई: बच्चे को सुबह और रात के समय ब्रश करने की आदत डालनी चाहिए। दांतों की अच्छे से सफाई, ब्रश करना व जीभ साफ करने से सांस की बदबू और दांतों की बीमारियों से बच्चों को बचाया जा सकता है।
  1. नहाना: बच्चे में रोज नहाने की आदत डालें। इससे पूरे शरीर की सफाई हो जाती है। बच्चों में नहाने के बाद टॉवल से शरीर को अच्छे से सुखाने के बाद ही सूखे कपड़े पहनने की आदत भी डालें।
  1. नाखून काटना: हाथों की उचित सफाई के लिए हाथ धोने के अलावा बच्चों के नाखूनों को भी समय-समय पर काटना चाहिए और उन्हें साफ रखना चाहिए। नाखून साफ न रखने से उसमें जमी गंदगी और बैक्टीरिया खाने के साथ शरीर में पहुंच जाते हैं।
  1. साफ कपड़े और जूते: बच्चों को रोजाना साफ कपड़े और जूते पहनने की आदत होनी चाहिए। कई बार बच्चे नहाने के बाद भी पहले पहने हुए कपड़े ही पहन लेते हैं, लेकिन बच्चों को ऐसा न करने की सख्त हिदायत दें। ऐसा करने से उस कपड़े के बैक्टीरिया दोबारा शरीर में आ जाते हैं।
  1. जननांग क्षेत्र की सफाई: बच्चों को नहाते हुए बाजुओं के नीचे, जननांग और गुदा क्षेत्र की अच्छे से सफाई करना सिखाएं। साथ ही बच्चों में अंडरगारमेंट्स रोजाना बदलने की आदत भी डालें।
  1. जानवर को छूने के बाद हाथ धोना: अक्सर बच्चे घर में या बाहर जानवर, जैसे – कुत्ते, बिल्ली आदि को छूते हैं। ऐसा करने के बाद उन्हें तुरंत साबुन से हाथ धोने की शिक्षा दें। किसी भी चीज को छूने के बाद हाथों को अच्छे से साबुन से धोने का महत्व भी समझाएं।
  1. शौचालय शिष्टाचार: बच्चों को शौचालय का शिष्टाचार सिखाना भी जरूरी है। बच्चों को सिखाएं कि टॉयलेट जाने के बाद हमेशा टॉयलेट सीट (इंग्लिश टॉयलेट) को टिश्यू पेपर से पोछ लें और पानी डालकर फ्लश करें। साथ ही शौच करने के बाद गुप्तांग को धोने की भी हिदायत दें।
  1. पांव की सफाई: बच्चों को हाथों के साथ-साथ पांव की भी नियमित सफाई करना सिखाएं। बच्चे को बताएं कि हमेशा बाहर से वापस घर आने पर पांव अच्छे से साबुन से धोने चाहिए। साथ ही पांव की उंगलियों के बीच के हिस्से को अच्छे से साफ करना भी जरूरी है। बच्चों के पैरों को सूखा और साफ रखना महत्वपूर्ण है। बच्चों को हर वक्त फुटवियर पहनकर रहने के लिए प्रोत्साहित करें।
  1. चेहरे की सफाई: बच्चे को चेहरे को साफ पानी और साबुन से धोना सिखाना चाहिए। चेहरे के साथ ही उन्हें आंख के साइड के हिस्से में और नाक व कान के अंदर जमी गंदगी को साफ करने की शिक्षा भी दें।
  1. माहवारी में सफाई: अगर किशोरियों व लड़कियों का मासिक धर्म शुरू हो गया है, तो उन्हें समय-समय पर सैनिटरी पैड बदलने और अपने निजी अंगों (गुप्तांग) को साफ रखना सिखाएं।
  1. आसपास सफाई रखना: बच्चों को घर के अंदर व बाहर यानी अपने आसपास कहीं भी गंदगी न फैलाने की सीख दें। बच्चों को सिखाएं कि कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालना चाहिए। इसके अलावा, अपने बिस्तर के आसपास पानी या खाद्य पदार्थ गिरने पर तुरंत साफ करने की हिदायत दें। ऐसा न करने से वहां बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
  1. बाल धोना: बच्चों को सप्ताह में 1-2 बार अच्छे से बाल धोने की आदत डालें। इसके अलावा, बच्चों को केवल अपनी कंघी व हेयर बैंड आदि इस्तेमाल करना सिखाएं।
  1. फल व सब्जियां धोकर खाना: बच्चों को हमेशा फल व सब्जियां (गाजर, मूली, चुकंदर आदि) को धोकर खाने की शिक्षा दें।

लेख के अगले हिस्से में जानिए कि बच्चों को इन स्वच्छता की आदतें सीखने के लिए प्रेरित कैसे करें।

बच्चों में पर्सनल हाइजीन की आदत किस तरह डालें?

छोटी उम्र में बच्चे अच्छी या बुरी कोई भी आदत बहुत जल्द सीख लेते हैं। नीचे दिए आसान तरीकों से बच्चों में सफाई की आदत डाल सकते हैं (4) (5) (6)

  1. शुरुआत में बच्चों की दिनचर्या में हाथ धोना, ब्रश करना और नहाने जैसे सामान्य व्यवहार शामिल करें। जब बच्चे इन व्यवहारों से अवगत हो जाएं और उन्हें इसकी आदत हो जाए, तो अन्य आचरण सिखाएं।
  1. बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता व्यवहार सिखाने के लिए सबसे पहले स्वयं उन आदतों को अपनाएं। बड़ों को देखकर बच्चे सीखते हैं, इसलिए ऐसा करके आप उनके आदर्श बन सकते हैं।
  1. बच्चों को बताएं कि अच्छी आदतें क्या होती हैं और बुरी आदतों में क्या-क्या शामिल होता है। बच्चों का दोनों में अंतर समझना जरूरी है।
  1. बच्चों को रोगाणुओं और बैक्टीरिया की अवधारणाओं से अवगत कराएं। बच्चों को बताएं कि अगर वे स्वच्छता का ध्यान नहीं रखेंगे, तो कैसे ये बैक्टीरिया उन्हें बीमार कर सकते हैं।
  1. बच्चे जब कभी भी स्वच्छता के अच्छे आचरण को प्रदर्शित करें, तो उनकी प्रशंसा करके मनोबल को बढ़ाना न भूलें।
  1. बच्चों को अच्छे और बुरे गंध से भी अवगत कराएं, ताकि वह पहचान सकें कि गंदी चीजों और खाद्य पदार्थों के सड़ने पर कैसी गंध आती है।
  1. खेल-खेल में बच्चे को उनके कमरे व घर के अन्य सामान को व्यवस्थित तरीके से अपनी जगह पर रखने की सीख दें। उन्हें दिखाएं कि जब सामान अपनी जगह पर नहीं थे, तो कितना अजीब सा सब लग रहा था और जब सबकुछ अपनी जगह पर रखने पर वो जगह कितनी साफ लग रही है।
  1. सिखाई गई बातें के बारे में एक-दो दिन छोड़कर उन्हें याद दिलाते रहें या उससे जुड़े कुछ सवाल पूछ लें।
  1. बच्चे को डांटकर या जोर जबरदस्ती से स्वच्छता व्यवहार सिखाने की कोशिश न करें। कभी वो गलती कर दें या साफ-सफाई का ध्यान न दे, तो उसे प्यार से ही समझाएं और उस गंदगी से होने वाले नुकसान के बारे में बताएं।
  1. बच्चे को घर, बाहर या स्कूल आदि में साफ कपड़े व जूते चप्पल आदि पहनने और बालों को कंघी करने की आदत डालें। उन्हें बताएं ऐसा करने से हर कोई उनकी तारीफ करेगा।
  1. बच्चों को मजेदार गतिविधियों जैसे खेल, कोई स्पेशल टास्क या ऑनलाइन गेम की मदद से व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में बताएं। इन गतिविधियों के बारे में हम नीचे विस्तार से बताएंगे।

अब जानते हैं कि बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता की आदतें सिखाते हुए कौन सी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

अपने बच्चों को हाइजीन सिखाते वक्त किन-किन बातों का ख्याल रखें?

बच्चों को स्वच्छता गतिविधियां सिखाते हुए यह ध्यान देना जरूरी है कि वे कोई भी गतिविधि आवश्यकता से अधिक न करें और जाने अनजाने में कोई ऐसी गलत आदत न पाल लें, जो आगे चलकर उनके लिए मुश्किल पैदा करे। इनके अलावा, बच्चों को स्वच्छता के बारे में सिखाते हुए निम्न बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है (7)

  1. ध्यान रखें कि बच्चे नहाते हुए ही कान साफ करें और नहाने के बाद सूखे तौलिए से कान को सूखा लें। बच्चों को कान साफ करने के लिए कॉटन स्वैब, लकड़ी आदि डालने से मना करें।
  1. बच्चे जब भी साबुन या हैंडवॉश से हाथ धोएं, तो गौर करें कि वे पानी में हाथों से साबुन को ठीक तरह से निकाल रहें हैं या नहीं। अगर बच्चे को साबुन या हैंडवॉश आदि से एलर्जी हो जाए, तो चिकित्सक से संपर्क करें।
  1. बच्चों को दांत साफ करने के लिए सॉफ्ट ब्रिसल वाला ब्रश ही दें और उन्हें बताएं कि दांतों के हर कोने व जीभ को कैसे साफ करना है। अगर बच्चा बहुत ज्यादा देर तक दांत साफ कर रहा है, तो उसे ऐसा करने से रोकें।
  1. बच्चों के नाखूनों की सफाई करते हुए नाखूनों को काटने या संवारने से पहले सभी उपकरणों (जैसे- नेल कटर, फाइलर) आदि को अच्छी तरह से साफ करें।
  1. बच्चों के नहाने से पहले पानी का तापमान हमेशा जांच ले। यह न ज्यादा गर्म हो और न ज्यादा ठंडा।
  1. बच्चे को बताएं कि नहाते हुए अपनी बगलों (बाहों के नीचे), टांगों के बीच, जननांगों व पैर की उंगलियों के बीच के हिस्से को कैसे साफ करना चाहिए। ऐसे स्थानों पर गंदगी व बैक्टीरिया रहते हैं, जिनसे बच्चे के शरीर में दुर्गंध आती है।
  1. ध्यान दें कि बच्चा किसी भी चीज को ओवर न करें। जैसे नहाने को कहा गया है, तो सारा दिन बाथरूम में नहाने में न निकाल दें।

आगे जानिए कि कैसे बच्चों को विभिन्न गतिविधियों के जरिए स्वच्छता के बारे में सिखाया जा सकता है।

बच्चों के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता गतिविधियां

बच्चे खेल, मनोरंजन व अन्य विशेष गतिविधियों (जिन्हें वो एंजॉय करते हों) की मदद से साफ-सफाई की आदतों को सिखाया व बताया जा सकता है। इससे बच्चे इन आदतों को जल्दी सीखते हैं। बच्चों को निम्नलिखित विभिन्न गतिविधियों के जरिए मनोरंजन के साथ व्यक्तिगत स्वच्छता के बारे में बता सकते हैं।

  1. ग्लिटर जर्मस : इस स्वच्छता गतिविधि के तहत बच्चे के हाथों पर पहले लोशन और उसके बाद नॉन-टॉक्सिक केमिकल ग्लिटर (चमकीला पदार्थ) लगाया जाता है। इसके बाद उसे सबसे पहले हाथों को सिर्फ पेपर टॉवल से, फिर ठंडे पानी से और अंत में साबुन और गर्म पानी से धोने के लिए कहा जाता है। इसके बाद अंत में बच्चे से पूछा जाता है कि किस तरह से हाथ साफ करने पर ग्लिटर पूरी तरह से छूटा (1)

ग्लिटर सिर्फ साबुन व गर्म पानी से धोने पर ही बच्चों के हाथों से निकलता है, इसलिए बच्चे इस गतिविधि के जरिए समझ पाएंगे कि ग्लिटर की तरह ही जर्म एक जगह से दूसरी जगह फैलते हैं और सही से हाथ न धोने पर वो यूं ही त्वचा पर बने रहते हैं। स्कूल में भी इस गतिविधि से बच्चों को सफाई का महत्व समझाया जाता है (1)

  1. जर्म ट्रांसफर: इसे खेल के जरिए भी बच्चों को समझाया जा सकता है कि जर्मस एक शख्स से दूसरे शख्स तक ट्रांसफर कैसे होते हैं। इस गेम के लिए बच्चों को बिना बताए अपने हाथों में पेंट (साबुन से धुलने वाला) लगाकर उनके सामने छींकने की एक्टिंग करें।

इसके बाद पेंट लगे हाथों से अपने दैनिक कार्य करते हुए उन सभी सामानों को छुएं, जिन्हें आप अक्सर छूते हैं। फिर बच्चों को उन सभी स्थानों पर जाकर पेंट को छूने के लिए कहें। गतिविधि के अंत में उन सभी स्थानों की गणना करें जहां-जहां जर्मस ट्रांसफर हुए। बच्चों को बताएं कि हाथ न धोने पर इसी प्रकार उन्हें जर्मस संक्रमित कर सकते हैं।

  1. अच्छी आदतें व बुरी आदतें: इस खेल के लिए उन सभी गतिविधियों की एक सूची बनाएं, जो अच्छी व बुरी आदतों में शामिल हैं। इसके बाद बच्चों से पूछे कि कौन सी गतिविधि अच्छी है और कौन सी बुरी। उसके जवाब के अनुसार उन्हें प्वॉइंट या नंबर दें। फिर बच्चों को बताएं कि उन्हें कौन सी अच्छी आदतों को जारी रखना है और कौन सी बुरी आदतों को छोड़ना चाहिए। सही जवाब देने पर बच्चों की प्रशंसा करें।
  1. गाना गाते हुए हाथ धोना: हाथ धोने पर रोग नियंत्रण केंद्र (सीडीसी) के दिशा निर्देशों के अनुसार, स्वस्थ और साफ रहने के लिए साबुन और गर्म पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना चाहिए। बच्चे 20 सेकंड तक हाथ धोएं इसे सुनिश्चित करने के लिए उन्हें इस दौरान कोई जिंगल या गाना गाने के लिए कहा जा सकता है। इस दौरान हाथ धोने का सही तरीका, हाथ पोंछने के बाद तौलिए से उसे सुखाने की जानकारी भी दें (8)
  1. रोगाणुओं पर चर्चा: बच्चों को बताएं कि रोगाणु तब भी फैलते हैं जब कोई व्यक्ति डेस्क, दरवाजे का हैंडल, कैफेटेरिया टेबल आदि की सतह को छूता है। फिर अपने हाथों को धोने से पहले ही अपनी आंखों, मुंह या नाक को छू लेता है, जिससे वो बीमार हो सकता है।

हाइजीन गतिविधियों के अंतर्गत बच्चों को सप्ताह में कम से कम 2 बार रोगाणुओं के बारे में बताना और समझाना जरूरी है कि वो कैसे उनके संपर्क में आ सकते हैं व रोगाणुओं से कैसे बचा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या बच्चों का गंदा रहना उन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है?

हां, बच्चों का गंदा रहना उन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

2. क्या हाइजीन न होने पर हमें बीमारियां जल्दी पकड़ लेती हैं?

हां, हाइजीन का ध्यान न रखने पर बीमारियां हमें जल्दी पकड़ सकती है (1)

आज के बच्चे कल का भविष्य हैं, इसलिए उन पर ध्यान देकर और स्वच्छता संबंधी आदतों का ज्ञान देकर भविष्य की पीढ़ी को मजबूत व स्वस्थ बनाया जा सकता है। बच्चों का इम्यूनिटी सिस्टम बड़ों के मुकाबले कमजोर होता है। ऐसे में बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता संबंधी गतिविधियां सीखाना और भी जरूरी हो जाता है। उन्हें हर कदम में स्वच्छ व स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करते रहें।

संदर्भ (References) :

1. Personal Cleanliness Activities in Preschool Classrooms By NCBI
2. Personal hygiene among primary school children living in a slum of Kolkata, India By NCBI
3. State of personal hygiene among primary school children: A community based cohort study By NCBI
4. Teaching Your Child Good Personal Hygiene By Ministry of Education
5. Handwashing & Nail Hygiene By Centers for Disease Control and Prevention
6. Personal hygiene for children By Health Direct
7. Nail Hygiene By Centers for Disease Control and Prevention
8. Keeping Hands Clean By Centers for Disease Control and Prevention