check_iconFact Checked

क्या शिशु को काजल या सुरमा लगाना चाहिए ? | Baccho Ka Kajal Lagana

Image: Shutterstock

IN THIS ARTICLE

शिशु को नहलाने-संवारने से लेकर उसे पौष्टिक भोजन देने जैसे सभी काम मां बेहद सावधानी और पूरे जतन के साथ करती हैं। इन सब के अलावा माएं एक काम और करती हैं, वो है बच्चों की आंखों में काजल लगाना। शिशुओं की आंखों में और माथे के एक कोने में काजल लगाने का चलन भारतीय संस्कृति से जुड़ा है, जिसका पालन लंबे समय से किया जा रहा है। इन सभी के साथ एक सवाल बार-बार किया जाता है कि क्या शिशुओं की आंखों में काजल लगाना ठीक है? आइए, मॉमजंक्शन के इस लेख में इसी का जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं। यहां हम बताने का प्रयास कर रहे हैं कि बच्चों की आंखों के लिए काजल कितना सुरक्षित है और इससे जुड़े तर्क में कितनी सच्चाई है।

आइए, लेख में आगे बढ़ने से पहले जान लेते हैं कि किसे काजल कहा जाता है।

काजल क्या है?

काजल एक सौंदर्य प्रसाधन है, जिसे सुंदरता को निखारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह काले रंग का होता है, जिसे धुएं की कालिख में घी की कुछ बूंदों को मिलाकर बनाया जाता है। हालांकि, बाजार में इस पारंपरिक काजल के कई आधुनिक विकल्प आ गए हैं, जिन्हें विभिन्न ब्यूटी कंपनियां अपने तरीके से बनाती हैं।

आइए, अब नीचे जानते हैं कि काजल शिशुओं के लिए कितना सुरक्षित है।

क्या बेबी की आंखों में काजल लगाना सुरक्षित है? | Baccho Ka Kajal Lagana

नहीं, बच्चों की आंखों में काजल लगान बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। कई वैज्ञानिक अध्ययन भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि काजल लगाने से शिशुओं की आंखें खराब हो सकती हैं (1)। वहीं, अगर मान्यताओं की बात करें, तो भारत में बच्चों की आंखों में काजल लगाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि काजल बच्चों के चेहरे की खूबसूरती बढ़ाता है, लेकिन ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जो इस बात को सही साबित कर सके।

आइए, अब नीचे जान लेते हैं कि शिशुओं के लिए काजल अच्छा क्यों नहीं है?

शिशुओं के लिए काजल अच्छा क्यों नहीं है?

बच्चों की आंखों में काजल लगाना घातक साबित हो सकता है, जिसके पीछे निम्नलिखित कारणों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है (1), (2)

  • बाजार में बिकने वाले काजल के निर्माण में लेड यानी सीसा का प्रयोग किया जाता है, जो शिशु के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। लेड शिशु के मस्तिष्क और शरीर के कई अंगों को क्षतिग्रस्त कर सकता है।
  • शिशु की आंखों में काजल लगाने के दौरान अगर आपके हाथ गंदे हैं, तो हाथों पर जमे बैक्टीरिया शिशु की आंख में प्रवेश कर सकते हैं। इसके अलावा, उंगलियों से काजल लगाने से बच्चे की आंखों में चोट भी आ सकती है
  • नहाने के दौरान बच्चे की आंखों में लगा काजल बहकर नाक की नलियों में आ सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है।
  • काजल लगाने से बच्चे को आंखों में एलर्जी हो सकती है, आंखों में पानी आ सकता है और आंखों में खुजली हो सकती है। गंभीर स्थिति में शिशु की दृष्टि प्रभावित हो सकती है।

शिशुओं के लिए काजल से जुड़ी और जानकारी के लिए पढ़ते रहें यह लेख।

क्या घर का बना काजल शिशुओं की आंखों के लिए सुरक्षित है?

नहीं, शिशु की आंखों में काजल लगाने के पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, मॉमजंक्शन भी इसकी पुष्टि नहीं करता है। फिर भी घर के बड़े-बुजुर्ग पुरानी मान्यताओं के आधार पर काजल लगाने पर जोर देते हैं, जो पूरी तरह से मिथक हैं। आइए, जानते हैं उन कारणों के बारे में :

  • बुजुर्गों का मानना है कि आंखों में काजल लगाने से शिशु की आंखे बड़ी और चमकदार होती हैं।
  • बुजुर्गों को मानना है कि काजल लगाने से आंखों को आराम मिलता है।
  • घर के बड़ों का यह भी मानना है कि शिशु की आंखों में काजल लगाने से वे बुरी नजर से दूर रहते हैं।
  • काजल को लेकर एक मान्यता यह भी है कि आंखों में काजल लगाने से शिशु अधिक समय तक सोता है।

अब आगे जानिए कि बाजार में बिकने वाला काजल बच्चों के लिए कितना सुरक्षित है।

क्या बाजार में बिकने वाला काजल इस्तेमाल करना सुरक्षित है?

नहीं, बाजार में बिकने वाले काजल शिशुओं के लिए जोखिम भरे होते हैं। एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार, काजल को बनाने में लेड का प्रयोग ज्यादा किया जाता है। अगर गलती से मुंह और नाक के माध्यम से काजल बच्चे के शरीर में चला जाता है, तो निम्नलिखित गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं (1), (2):

  • मस्तिष्क और अस्थि मज्जा (Bone Marrow) से जुड़ी समस्या
  • एनीमिया
  • किडनी डैमेज
  • हृदय रोग
  • न्यूरोलॉजिकल डैमेज (कोमा और मौत)
  • रक्त कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कर सकता है

नीचे जानिए शिशुओं को काजल लगाने से संबंधित सच्चाई और मिथक।

काजल को बच्चे की आंखों में लगाना – मिथक और सच्चाई

बच्चों को काजल लगाने से जुड़ी कई मान्यताएं जुड़ी हैं, जिनके बारे में नीचे बताने जा रहे हैं :

1.काजल को बच्चे की आंखों पर लगाने से उसकी आंखें चमकदार और आकर्षक हो जाएंगी।

यह सिर्फ मिथक है, क्योंकि इससे संबंधित कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

2. एक नवजात की आंखों में काजल लगाने से बुरी नजर दूर हो जाएगी।

काजल लगाने से बुरी नजर दूर होती है, ऐसी मान्यताओं को मिथक माना जाना चाहिए, क्योंकि इस बात का कोई भी वैज्ञानिक आधार मौजूद नहीं है।

3. काजल लगाने से लंबी नींद आने में मदद मिलेगी

ऐसी मान्यताओं को भी मिथक माना जाना चाहिए, क्योंकि इस बात का भी कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

4. घर का बना काजल सुरक्षित है।

यह बात तो सही है कि बाजार में बिकने वाले काजल के मुकाबले घर के बने काजल में किसी प्रकार का केमिकल इस्तेमाल नहीं किया जाता, लेकिन यह शिशु के लिए सुरक्षित है, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इसलिए, अगर आप शिशु को काजल लगाना चाहते हैं, तो पहले डॉक्टर से पूछ लें।

अंत में जानिए बच्चों के लिए काजल का विकल्प क्या हो सकता है।

शिशु के लिए काजल का क्या विकल्प है?

आप काजल को बच्चे की आंखों में लगाने की जगह उसके माथे पर या तलवों पर लगा सकते हैं। भारतीय माताओं की ऐसी मान्यता है कि इससे बच्चा बुरी नजर से दूर रहता है।

अब तो आप जान गए होंगे कि काजल किस प्रकार शिशु की आंखों के लिए घातक हो सकता है। जैसा कि आपको लेख में बताया गया है कि आप काजल को आंखों की जगह शिशु के माथे और तलवों पर लगा सकते हैं। ध्यान रहे कि काजल और सुरमा में अंतर होता है, लेकिन काजल के साथ सुरमा का प्रयोग भी बच्चों के लिए बिल्कुल न करें। सुरमा बच्चों की आंखों के लिए हानिकारक माना जाता है। हमें उम्मीद है कि इस विषय से जुड़ी आपकी सभी शंकाएं वैज्ञानिक प्रमाण सहित दूर हो गई होंगी।

References:

MomJunction's articles are written after analyzing the research works of expert authors and institutions. Our references consist of resources established by authorities in their respective fields. You can learn more about the authenticity of the information we present in our editorial policy.

 

The following two tabs change content below.

    ताज़े आलेख