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शिशुओं और बच्चों में सोरायसिस (छाल रोग) : कारण, लक्षण व उपचार | Psoriasis In Babies In Hindi

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बच्चों की सही देखभाल के बावजूद भी उन्हें कई बार त्वचा संबंधी समस्याएं हो जाती हैं। जब बात त्वचा संबंधी समस्या की हो, तो सोरायसिस (छाल रोग) का जिक्र होना भी जरूरी है। अक्सर लोग जानकारी के अभाव में सोरायसिस को आम एलर्जिक रिएक्शन समझ लेते हैं, लेकिन ऐसा है नहीं। सोरायसिस रोग क्या है और यह कितना आम है, यह समझने के लिए मॉमजंक्शन का यह आर्टिकल पढ़ें। यहां हमने सोरायसिस (छाल रोग) क्यों होता है, बच्चों में सोरायसिस होने के लक्षण के साथ ही इसके उपचार की भी जानकारी दी है।

इस लेख के पहले भाग में हम बताएंगे कि सोरायसिस क्या है।

सोरायसिस (छाल रोग) क्या है?

सोरायसिस एक प्रकार का चर्म रोग है। इस स्थिति में त्वचा का रंग लाल, पपड़ीदार दिखाई देने लगता है। साथ ही स्किन में मोटी परत बनती है और उसमें जलन महसूस होती है। इसे प्लाक सोरायसिस के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल, सोरायसिस होने पर स्किन सेल्स यानी कोशिकाएं हर 14 दिन में बनकर स्किन के ऊपर दिखाई देने लगती हैं, जबकि सामान्य स्थिति में कोशिकाएं बनने में एक महीने का समय लगता है। तेजी से कोशिकाएं बनने के कारण यह त्वचा की ऊपरी सतह पर डेड स्किन और पपड़ीदार त्वचा के रूप में दिखाई देता है (1)

आगे पढ़िए, शिशुओं और बच्चों में सोरायसिस के कितने प्रकार नजर आते हैं।

शिशुओं और बच्चों में सोरायसिस के प्रकार

शिशुओं और बच्चों को होने वाले सोरायसिस यानी छाल रोग को इसकी प्रवृत्ति के आधार पर विभाजित किया जा सकता है। इसमें ये शामिल हैं (1) (2) :

  • डायपर सोरायसिसयह बच्चों में डायपर की वजह से होने वाला सोरायसिस है। इस स्थिति में डायपर वाले भाग में लाल उभरे हुए चकत्ते दिखाई दे सकते हैं। बताया जाता है कि इसके इलाज में थोड़ी मुश्किलें आ सकती हैं।
  • क्रोनिक प्लाक सोरायसिस यह सोरायसिस का सबसे आम प्रकार होता है। सोरायसिस के इस प्रकार में त्वचा मोटी, धब्बेदार व लाल हो जाती है। इसके अलावा, त्वचा पर सफेद पपड़ी उभरने लगती है। यह मुख्य रूप से स्कैल्प, चेहरे, कोहनी और घुटने वाले भाग पर होता है।
  • गटेट सोरायसिससोरायसिस के इस प्रकार के पीछे स्ट्रेप इंफेक्शन को जिम्मेदार माना जाता है। इस स्थिति में त्वचा पर लाल और गुलाबी रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं।
  • पस्टुलर सोरायसिस पस्टुलर सोरायसिस में त्वचा पर छाले हो जाते हैं, जिनमें पीले रंग का मवाद यानी पस भर जाता है।
  • अन्य प्रकार सोरायसिस के अन्य प्रकार में इनवर्स सोरायसिस, पामोप्लांटर सोरायसिस, आइसोलेटेड फेशियल सोरायसिस, लीनियर सोरायसिस और एरि‍थ्रोडर्मिक सोरायसिस शामिल हैं। सोरायसिस के यह प्रकार बहुत कम बच्चों में नजर आते हैं।

चलिए, अब जान लेते हैं कि बच्चों में सोरायसिस होने के पीछे क्या कारण होते हैं।

बच्चों में सोरायसिस होने के कारण

बच्चों में सोरायसिस होने के दो प्रमुख कारण होते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं।

  1. इम्यून सिस्टम सोरायसिस होने का प्रमुख कारण इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा प्रणाली को माना जाता है (2)। दरअसल, प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी समस्या के कारण टी-हेल्पर लिम्फोसाइट्स नामक वाइट ब्लड सेल्स, ओवर एक्टिव यानी अति सक्रिय हो जाते हैं। इससे साइटोकिन्स (प्रोटीन का समूह) अधिक मात्रा में बनने लगता है, जिससे कि त्वचा और अन्य अंगों में सूजन की समस्या हो जाती है। इससे त्वचा पर पपड़ी उभरना और सोरायसिस की समस्या भी हो सकती है (3)।
  1. आनुवंशिक (Genetic)- सोरायसिस होने का एक कारण जेनेटिक यानी आनुवंशिक भी हो सकता है। सोरायसिस से जूझ रहे लगभग 40% लोगों के परिवार में किसी-न-किसी को यह रोग जरूर होता है। इसी वजह से इसके पीछे की एक वजह जेनेटिक को भी माना जाता है (4)

ऊपर बताए गए कारण के अलावा कुछ जोखिम कारक और ऐसी बातें भी हैं, जिससे यह समस्या बढ़ती है। इन्हें आगे पढ़ें (2):

  • सोरायसिस के कारण किसी बच्चे को तनाव है, तो इससे सोरायसिस गंभीर हो सकता है।
  • सोरायसिस ट्रिगर होने के पीछे संक्रमण भी जिम्मेदार होते हैं।
  • अगर किसी बच्चे का वजन अधिक है, तो सोरायसिस बढ़ सकता है।
  • इस समस्या को ट्रामा या त्वचा की जलन की वजह से भी बढ़ावा मिल सकता है।
  • कुछ दवाइयां जैसे लिथियम और बीटा-एड्रेनर्जिक एंटागोनिस्ट्स भी सोरायसिस को बढ़ा सकते हैं।
  • शुष्क हवा और रूखी त्वचा के कारण यह समस्या बढ़ सकती है।
  • त्वचा पर चोट लगना, कीट के काटने और चकत्ते होने से यह समस्या गंभीर हो सकती है।
  • कम धूप या ज्यादा धूप सोरायसिस को बढ़ाने का कारण बन सकता है।
  • अब हम आगे बच्चों में सोरायसिस होने के लक्षण के बारे में बता रहे हैं।

बच्चों में सोरायसिस होने के लक्षण | Bachoo Mein Psoriasis Ke Lakshan

बच्चों में सोरायसिस होने कै दौरान कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। इन संकेतों को ध्यान में रखकर सोरायसिस को गंभीर होने से पहले सावधानी बरती जा सकती है (1):

  • त्वचा पर लाल रंग का मोटा पैच दिखाई देना
  • स्किन पर जलन महसूस होना
  • त्वचा में खुजली और दर्द होना
  • सफेद परत दिखाई देना
  • ड्राई यानी रूखी और फटी-फटी स्किन
  • उंगली, हाथ व पैर के जोड़ में सूजन
  • उठी हुई और मोटी त्वचा
  • नाखून के आकार और रंग में परिवर्तन
  • स्कैल्प में गंभीर रूसी की समस्या होना

बच्चों में सोरायसिस होने पर स्किन कैसी दिखती है, जानने के लिए लेख को आगे पढ़ें।

बच्चों में सोरायसिस किस तरह दिखता है?

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बच्चों के त्वचा में सोरायसिस होने पर लाल चकत्ते युक्त उभरी हुई त्वचा दिखाई देती है। इस चकत्ते के ऊपर सफेद या सिल्वर रंग की पपड़ी भी नजर आ सकती है। कुछ सोरायसिस छिले हुए घाव जैसे भी लगते हैं। साथ ही कुछ सोरायसिस छाले की तरह दिखते हैं। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि बच्चे को किस प्रकार का सोरायसिस हुआ है (2)

लेख के अगले भाग में बच्चों में सोरायसिस के निदान पर एक नजर डाल लेते हैं।

बच्चों में सोरायसिस का निदान व पहचान

बच्चों में सोरायसिस का निदान व पहचान करने के लिए विशेषज्ञ कुछ तरीकों को अपना सकते हैं, जिनमें ये शामिल हैं (1) (2):

  • फिजिकल एग्जामिनेशनकिसी भी समस्या के लिए डॉक्टर सबसे पहले शारीरिक परीक्षण करते हैं। सोरायसिस के लिए भी फिजिकल एग्जामिनेशन किया जाता है। इस दौरान डॉक्टर त्वचा के चकत्ते को देखने के साथ ही इससे संबंधित लक्षण के बारे में बच्चे या उसके अभिभावक से पूछते हैं।
  • बायोप्सीइस परीक्षण के दौरान डॉक्टर त्वचा के कुछ ऊतक निकालते हैं। फिर उन ऊतक को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाता है। इसके परिणाम से पता चलता है कि बच्चे को सोरायसिस है या नहीं।
  • डर्मोस्कोपी इस तकनीक को त्वचा रोग का निदान करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। जरूरत पड़ने पर कई बार इससे भी सोरायसिस का निदान किया जाता है। डर्मोस्कोपी की मदद से सोरायसिस और अन्य त्वचा रोगों में अंतर का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, आम तौर पर इसका उपयोग सोरायसिस के निदान के लिए नहीं होता है।

लेख में आगे बच्चों में सोरायसिस के उपचार से जुड़ी जानकारी दी जा रही है।

बच्चों में सोरायसिस का उपचार

अगर किसी बच्चे को सोरायसिस की समस्या है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से उपचार करना चाहिए। डॉक्टर सोरायसिस के उपचार कुछ इस प्रकार कर सकते हैं (2)

  1. टॉपिकल ट्रीटमेंट सोरायसिस से ग्रसित अधिकांश बच्चों का टोपिकल ट्रीटमेंट किया जा सकता है। इसे सोरायसिस की फर्स्ट लाइन थेरेपी भी कहा जाता है। इस उपचार में क्रीम, फोम, जेल और लोशन का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, टॉपिकल ट्रीटमेंट में कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स हार्मोन संबंधित दवाई और विटामिन-डी को शामिल किया जाता है। डॉक्टर दो साल से कम उम्र के बच्चों को विटामिन डी लेने की सलाह नहीं देते हैं।
  1. फोटोथेरेपी कुछ अध्ययनों में बताया गया है कि सोरायसिस के उपचार के लिए फोटोथेरेपी भी की जाती है। इस थेरेपी में नैरो बैंड अल्ट्रावायलेट बी लाइट का उपयोग किया जाता है। इस उपचार की सलाह डॉक्टर बच्चे में सोरायसिस की गंभीरता और उम्र को देखकर ही देते हैं।
  1. सिस्टमिक एंड बायोलॉजिक ट्रीटमेंट बच्चों में सोरायसिस के इलाज के लिए सिस्टमिक ट्रीटमेंट की भी मदद ली जा सकती है। हालांकि, बच्चों को अधिकतर सिस्टमिक ट्रीटमेंट न देने की सलाह दी जाती है। हां, अगर डॉक्टर को लगता है कि यह ट्रीटमेंट जरूरी है, तो वो अपनी रेखदेख में इसकी प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

अब जानिए बच्चों को सोरायसिस होने के बाद किस तरह की परेशानियां हो सकती हैं।

छोटे बच्चों में सोरायसिस होने पर होने वाली परेशानियां

बच्चों को सोरायसिस होने के बाद समय रहते इसका इलाज न कराया जाए, तो इससे दूसरी समस्याएं हो सकती है। इससे होने वाली परेशानियां कुछ इस प्रकार हैं।

  • जुवेनाइल सोरायटिक अर्थराइटिस सोरायसिस की समस्या के कारण बच्चों को सोरायटिक अर्थराइटिस की समस्या हो सकती है। इस वजह से जोड़ों में दर्द और सूजन हो सकती है (5)
  • यूवाइटिस सोरायसिस होने पर बच्चों को यूवाइटिस की समस्या हो सकती है। यह आंखों के मध्य परत से संबंधित सूजन होती है (6)
  • हृदय रोगसोरायसिस की समस्या के कारण धमनी रोग और स्ट्रोक के जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। ये दोनों हृदय से जुड़ी समस्याएं हैं (3)
  • अन्य परेशानियांसोरायसिस से जूझ रहे बच्चों को मोटापा, डायबिटीज मेलिटस, उच्च रक्तचाप,  क्रोहन रोग (पाचन तंत्र संबंधी समस्या) और मनोरोग संबंधी परेशानियां हो सकती हैं (5)

आइए, आगे जानते हैं कि शिशुओं व बच्चों को सोरायसिस से कैसे बचाया जा सकता है।

क्या शिशुओं व बच्चों में सोरायसिस को होने से रोका जा सकता है?

हां, सोरायसिस होने के जोखिम कारक से खुद को बचाकर इससे कुछ हद तक बचा जा सकता है। लेकिन, आनुवंशिक सोरायसिस से बचना मुश्किल है। हम नीचे सोरायसिस की गंभीरता को बढ़ाने वाले कारक और जोखिम से बचने के कुछ तरीके बता रहे हैं (2) (7)

  • बच्चों की त्वचा को मॉइस्चराइजर रखें
  • शिशु को तनाव से बचाएं
  • बढ़ते वजन को नियंत्रित करना
  • उन्हें स्वस्थ आहार देना
  • इंफेक्शन से स्किन को बचाना
  • धूप में ज्यादा बैठने या बिल्कुल धूप में न निकलने से बचना
  • बच्चों के शरीर को साफ रखने के लिए उन्हें समय-समय पर नहलाना
  • अगर किसी गर्भवती को सोरायसिस की समस्या है, तो बच्चे के जन्म लेने से पहले इलाज कराना चाहिए। इससे बच्चे को सोरायसिस से प्रभावित होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

अब हम बच्चों में सोरायसिस से जुड़े कुछ सवालों के जवाब दे रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या सोरायसिस दर्दनाक होता है?

जी हां, सोरायसिस के कारण दर्द महसूस हो सकता है (8)

2. शिशु को सोरायसिस है या एक्जिमा इसका पता कैसे चलेगा?

सोरायसिस और एक्जिमा दोनों त्वचा संबंधी समस्या है, इसलिए कई बार दोनों के बीच में अंतर बता पाना मुश्किल हो जाता है। एक्जिमा को सोरायसिस का एक प्रकार भी कहा जाता है (9)। इन दोनों के लक्षण भी काफी हद तक एक जैसे होते हैं (1) (10)। हां, ऐसा माना जाता है कि सोरायसिस में ज्यादा क्षेत्र प्रभावित होता है। ऐसे में इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होगा। वो शिशु के लक्षण देखकर या फिर बायोप्सी और डर्मोस्कोपी के जरिए इसका पता लगा सकते हैं।

बच्चों को सोरायसिस होना काफी आम है (9)। इसके लक्षण पहचान कर तुरंत इससे संबंधित उपचार कराने से किसी तरह की समस्या नहीं होती है। साथ ही लेख में बताए गए टिप्स पर भी ध्यान देकर इसके जोखिम कारक से बचा जा सकता है। इसे सामान्य एलर्जी समझकर नजरअंदाज बिल्कुल न करें। ऐसा करने से लेख में बताई गई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जी हां, इस छाल रोग को हल्के में लेने से कॉम्प्लिकेशन भी हो सकते हैं। सतर्क रहें और अपने शिशु को सुरक्षित रखें।

संदर्भ (References):

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