बच्चों के लिए दुर्गा पूजा से जुड़ी 10+ परंपराएं व मान्यताएं | Facts And Traditions Related To Durga Puja For Kids In Hindi

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हिन्दू धर्म में नवरात्रि को विशेष दर्जा दिया गया है। इस दौरान हर कोई मां दुर्गा की आराधना में लीन रहता है। दरअसल, इस पर्व को मनाने के पीछे कई मान्यताएं हैं और मॉमजंक्शन के इस लेख में हम इसी बारे में जानकारी लाए हैं। यहां हम विस्तार से समझाएंगे कि आखिर नवरात्रि का त्योहार मनाया क्यों जाता है। इसके अलावा, यहां हम बच्चों के लिए दुर्गा पूजा से जुड़े कुछ रोचक तथ्य भी बताएंगे, जो उनके लिए जानना जरूरी है।

सबसे पहले जानते हैं कि नवरात्र क्यों मनाया जाता है।

नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

नवरात्रि देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग कारणों से मनाई जाती है। जहां उत्तर और पूर्वी भारत में यह पर्व दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है, जो राक्षस महिषासुर पर देवी दुर्गा के जीत का प्रतीक है। वहीं, देश के पश्चिमी भाग में भी गरबा और डांडिया के साथ ये त्योहार धूमधाम से देवी दुर्गा की आराधना के लिए मनाया जाता है। जबकि दक्षिण भारत में इसे आयुध पूजा के नाम से जाना जाता है।

आगे जानें नवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा।

बच्चों के लिए नवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा

एक समय की बात है, स्वर्गलोक में महिषासुर नामक दैत्य का आतंक फैला था। वह खुद को अमर करना चाहता था। इसके लिए उसने ब्रह्मदेव की कठिन तपस्या की। उसकी तपस्या से खुश होकर ब्रह्म देवता ने उससे उसकी मनोकामना पूछी। इस पर दैत्य महिषासुर ने खुद को अमर करने का वरदान मांगा।

तब ब्रह्मा जी ने कहा, “ये संभव नहीं है। इस संसार में हर किसी की मौत लिखी है। तुम कोई दूसरा वरदान मांग लो।” ब्रह्मा भगवान की बातें सुनकर दैत्य ने कहा, ” कोई बात नहीं। फिर आप मुझे यह आशीर्वाद दीजिए कि मेरी मौत न किसी देवता, न किसी राक्षस और न किसी इंसान द्वारा हो। मेरी मौत किसी महिला के द्वारा हो।” ब्रह्मा जी ने उसे वरदान पूरा होने का आशीर्वाद दिया और वहां से चले गए।

इसके बाद दैत्य महिषासुर ने अपना आतंक फैलाना शुरू कर दिया। यह देख सभी देवता भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा के पास पहुंचे और उस राक्षस का अंत करने की गुहार लगाई। इसके बाद तीनों देवता ने अपनी शक्ति से एक आदि शक्ति का निर्माण किया, जिसे दुर्गा का नाम दिया गया।

देवी दुर्गा जब महिषासुर से युद्ध करने गईं तो महिषासुर उन्हें देख मोहित हो गया और शादी का प्रस्ताव रखा। इस पर देवी ने कहा, “अगर तुम मुझसे युद्ध में जीत जाते हो तो मैं तुम्हारा प्रस्ताव स्वीकार कर लूंगी।” देवी की शर्त सुनकर महिषासुर युद्ध के लिए राजी हो गया। दोनों के बीच यह लड़ाई 9 दिनों तक चली और अगले दिन यानी दसवें दिन देवी दुर्गा ने उसे मार दिया। तभी से यह नवरात्रि का त्योहार मनाया जाने लगा।

चलिए अब हम आपको दुर्गा पूजा से जुड़ी मान्यता और कुछ परंपराओं के बारे में बताते हैं।

बच्चों के लिए दुर्गा पूजा से जुड़े 10+ परंपराएं व मान्यताएं | Facts And Traditions Related To Durga Puja For Kids In Hindi

नवरात्रि का त्योहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व के पीछे कई रोचक तथ्य और परंपरिक मान्यताएं हैं। यहां हम दुर्गा पूजा से जुड़े ऐसे ही कुछ रोचक तथ्यों और परंपराओं के बारे में बता रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:

  1. 9 देवियों की पूजा : बताया जाता है कि मां दुर्गा जब महिषासुर का वध कर रही थी तो उसके हर दैत्य रूप को मारने में 9 दिन लगे थे। इसके लिए मां दुर्गा ने हर दिन अपना अलग रूप धारण किया था और महिषासुर के सभी दैत्यों का अंत किया था। यही वजह है कि नवरात्रि 9 दिनों की होती है और हर दिन देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।
  1. मां दुर्गा की जन्म कहानी: पौराणिक कथाओं के मुताबिक, महिषासुर नामक राक्षस ने जब स्वर्ग लोग पर अपना कब्जा जमा लिया था तब वहां के सभी देवता अपनी समस्या की गुहार लेकर ब्रह्म देव, भगवान विष्णु और शिव जी के पास पहुंचे।

देवताओं के कष्टों को सुनने के बाद तीनों भगवान ने अपने शरीर में मौजूद ऊर्जा से एक आकृति का निर्माण किया, जिसमें तीनों ने अपनी शक्तियां उसमें डालीं और फिर उन्हें अपने-अपने शस्त्र भी दिए। इसके बाद उस आकृति को मां दुर्गा का नाम दिया गया। इस प्रकार से मां दुर्गा का जन्म हुआ।

  1. मां की तीन आंखें : बताया जाता है कि भगवान शिव की तीन आंखें थी। वहीं, मां दुर्गा को भी शिव का आधा रूप माना जाता है। यही वजह है कि मां दुर्गा की भी तीन आंखें होती हैं, जो सूर्य, चांद और अग्नि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए उन्हें त्र्यंबके भी कहा जाता है।
  1. 8 भुजाओं का कारण : मां दुर्गा को अष्ट भुजाओं वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है।  हालांकि, कुछ शास्त्रों में देवी दुर्गा के दस भुजाओं का जिक्र भी मिलता है। दरअसल, हमारे वास्तु शास्त्र में 8 दिशाओं का जिक्र मिलता है। जबकि, कुछ जगहों पर 10 दिशाओं का वर्णन भी है।

इनमें पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, नॉर्थ ईस्ट, साउथ ईस्ट, साउथ वेस्ट, नॉर्थ वेस्ट के अलावा, आकाश की ओर, पाताल की ओर की दिशा भी शामिल है। वहीं, हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक, मां दुर्गा अपने भक्तों की रक्षा हर दिशा में करती है। यही वजह है कि मां दुर्गा की 8 भुजाएं होती हैं और उन्हें अष्ट भुजाओं की देवी कहा जाता है।

  1. शेर की सवारी का कारण : शेर को मां दुर्गा की सवारी कहा जाता है। इसके पीछे की मान्यता है कि शेर के पास अद्वितीय शक्ति होती है और मां दुर्गा उस पर सवार होकर सभी राक्षसों का अंत करती हैं।
  1. उपवास का महत्व : नवरात्रि में लोग मां दुर्गा की आराधना के लिए उपवास भी रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान व्रत रखने से तन, मन और आत्मा शुद्ध हो जाती है। यह वजह है कि लोग अपने शुद्धिकरण के लिए नवरात्र में उपवास रखकर देवी दुर्गा की पूजा करते हैं।

वहीं, ग्रंथों में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि नवरात्रि का व्रत रखने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं। इसलिए कई लोग 9 दिन सिर्फ पानी पीकर रहते हैं, तो कुछ लोग सिर्फ फल खाकर। वहीं, कुछ लोग सिर्फ सात्विक भोजन ही करते हैं।

  1. मूर्ति बनाने के लिए मिट्टी: मां दुर्गी की प्रतिमा बनाने के लिए मिट्टी गंगा नदी के किनारे से ली जाती है। हिंदू धर्म में गंगा नदी को बहुत ही पावन माना जाता है और यही कारण है कि देवी मां की प्रतिमा के लिए गंगा की मिट्टी का उपयोग किया जाता है। गंगा नदी के किनारे की मिट्टी पुजारी के द्वारा लाई जाती है।
  1. 108 मंत्रों के जाप की मान्यता : दुर्गा पूजा को दशहरा के नाम से भी जाना जाता है, जो कि नवरात्रि के अंतिम दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। बताया जाता है कि भगवान राम ने रावण से लड़ाई करने से पहले देवी दुर्गी की पूजा-अर्चना की थी। इस दौरान उन्होंने मां दुर्गा को 108 नीलकमल अर्पित किए थे। तभी से 108 को एक शुभ अंक माना जाता है और यही वजह है कि दुर्गा पूजा में 108 मंत्रों का जाप किया जाता है।
  1. 9 कन्याओं का पूजन : हमारे देश में शुरू से ही कन्याओं को देवी का दर्जा दिया जाता रहा है। ऐसी मान्यता है कि छोटी बच्चियां खासकर कन्याओं के बाल रूप को बहुत पवित्र माना जाता है। विशेषकर तब तक, जब तक उनका मासिक धर्म शुरू नहीं होता। यही कारण है कि दुर्गा पूजा के नवमी के दिन 9 कन्याओं की पूजा की जाती है। इसके अलावा, यह भी मान्यता है कि देवी दुर्गा खुद में ऊर्जा की प्रतिक हैं, इसलिए कन्याओं को भी उन्हीं का ही रूप माना जाता है। इस वजह से भी नवरात्र के अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की जाती है।
  1. रावण दहन का कारण : नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके अंतिम दिन यानी दशहरा के दिन रावण को जलाया जाता है। दरअसल, ऐसी मान्यता है कि इस दौरान भगवान राम ने रावण का वध किया था। वहीं, रावण को बुराई का प्रतीक माना गया है। ऐसे में माना जाता है कि दशहरा के दिन रावण का पुतला दहन कर लोग अपने अंदर के अहंकार, लालच, क्रोध और अन्य प्रकार की बुराई को भी नष्ट कर देते हैं।
  1. नवरात्र से जुड़ा वैज्ञानिक तथ्य : ऊपर बताई गई मान्यताओं के अलावा, दुर्गा पूजा से जुड़े कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी हैं। ऐसा बताया जाता है कि पृथ्वी जब सूर्य के चक्कर काटती है तो इसमें एक साल लगते हैं, जिसमें कुल 4 संधियां होती हैं। इनमें मार्च और सितंबर के महीने में पड़ने वाली संधियों में वर्ष का दो प्रमुख नवरात्रि का त्योहार पड़ता है। यह ऐसा समय होता है जब संक्रमण फैलने का खतरा अधिक होता है। इस दौरान शरीर को स्वस्थ और शुद्ध रखने के लिए नवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है।
  1. मां के मायके आने का राज : बंगाल में ऐसी मान्यता है कि नवरात्र के समय देवी दुर्गा अपने बच्चों के साथ मायके आती हैं। इस वजह से भी इन दिनों को त्योहार के रूप में मनाया जाता है। शायद यहीं कारण भी है कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पूरे धूमधाम से मनाया जाता है।

चलिए अब जानते हैं, दुर्गा पूजा के दौरान किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

दुर्गा पूजा के दौरान बच्चों व बड़ों द्वारा किए जाने वाले कुछ नियम

नवरात्रि के दौरान कुछ खास बातों का ख्याल रखना जरूरी है। इसलिए यहां हम कुछ ऐसी ही बातें बता रहे हैं, जिसका नवरात्र के दौरान पालन करना जरूरी माना जाता है। तो नवरात्रि के दौरान भूल से भी न करें ये गलतियां:

  1. बाल न काटें : मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान बाल नहीं काटने चाहिए। इसके अलावा, दाढ़ी-मूछ बनवाने से भी परहेज करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से देवी दुर्गा रूठ जाती हैं। इसलिए नवरात्रि के दौरान बाल कटाने से बचने की कोशिश करें। इसके अलावा, अगर माता-पिता अपने बच्चे का मुंडन इस दौरान आयोजित करना चाहते हैं, तो ऐसा न करें।
  1. नाखून काटने से बचें : दुर्गा पूजा के दौरान नाखून काटने से भी परहेज करना चाहिए। दरअसल, नवरात्रि के दौरान नाखून काटना अशुभ माना जाता है। इसलिए, पूजा के दौरान नाखून न काटें। अगर संभव हो तो नवरात्र शुरू होने से पहले ही इस तरह के कार्य कर लें।
  1. कलश का अनादर न करें : नवरात्रि के दौरान जो लोग उपवास रखते हैं उनके घर में कलश की स्थापना की जाती है। इस दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है, जैसे – कलश को कभी भी अंधेरे में नहीं रखना चाहिए। इसके सामने हमेशा एक अखंड दीपक जलाते रहना चाहिए। इसके अलावा, बच्चों को इसे जैसे-तैसे छूने से मना करें।
  1. काले कपड़े न पहनाएं : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काले रंग को अशुभ कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि काले रंग से देवी दुर्गा क्रोधित हो जाती हैं। इसलिए, इस त्योहार के दौरान 9 दिनों तक काले रंग के वस्त्र पहनने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इसकी जगह चाहें तो लाल, गुलाबी, पीला, केसरिया, आदि जैसे रंगों के कपड़े पहन सकते हैं।
  1. नॉन वेज न खिलाएं : नवरात्रि के दौरान नॉनवेज का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि मांस के सेवन से राक्षस और भूत-प्रेत की पूजा करने वाले लोगों को बढ़ावा मिलता है। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि नवरात्र  के दौरान नॉनवेज का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, अगर वैज्ञानिक तथ्य देखा जाए तो मांसाहारी की तुलना में शाकाहारी लोग ज्यादा स्वस्थ होते हैं (1)।
  1. दिन में सोने से बचें : अगर संभव हो तो नवरात्रि के दौरान दिन में सोने से बचें। खासकर तब जब घर में कलश स्थापना हुई हो। लोक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा पूजा के दौरान दिन में सोने से अच्छे कार्य में कमी आ सकती है। इसलिए नवरात्रि के समय दिन में सोने से बचना चाहिए।

नवरात्र का पावन पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। इस दौरान लोग देवी दुर्गा की भक्ति में सराबोर रहते हैं। इस लेख में हमने नवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के बारे में विस्तार से बताया है। हम उम्मीद करते हैं कि इस लेख के माध्यम से हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अपने बच्चे को इस त्योहार का महत्व समझाने में मददगार साबित होंगी।

शुभ नवरात्रि!

References:

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