बच्चों के लिए आयोडीन क्यों है जरूरी व कमी के लक्षण | Iodine Deficiency In Children In Hindi

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बच्चों को शारीरिक व मानसिक विकास के लिए कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जिनमें से एक आयोडीन भी है। वैसे तो आयोडीन की जरूरत इंसान को जीवन के हर स्तर पर होती है, लेकिन बच्चों में इसकी मात्रा का खास ध्यान रखना चाहिए। यही कारण है कि मॉमजंक्शन के इस लेख में हम बच्चों के लिए आयोडीन की जरूरत के बारे में विस्तार से जानेंगे। साथ ही बच्चों में आयोडीन की कमी से संबंधित जरूरी जानकारी भी साझा करेंगे। इसलिए, आप यह आर्टिकल अंत तक जरूर पढ़ें।

सबसे पहले हम जानेंगे कि बच्चों के लिए आयोडीन आवश्यक है या नहीं।

बच्चों के लिए आयोडीन क्यों जरूरी है?

आयोडीन वाले आहार खिलाकर आप अपने बच्चों को कई तरह की बीमारियों से बचा सकते हैं। नीचे हम लेख में कुछ बिंदुओं के माध्यम से शिशुओं में आयोडीन के महत्व के बारे में बता रहे हैं।

  • घेंघा रोग से बचने के लिए भी आयोडीन जरूरी है (2)।
  • भोजन को ऊर्जा में बदलने के लिए कोशिकाओं को आयोडीन की जरूरत पड़ती है (3)।
  • आयोडीन थायराइड हार्मोन, थायरोक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) के उत्पादन के लिए आवश्यक है, जो भ्रूण और शिशुओं के विकास में प्रमुख भूमिका निभाते हैं (4)।

अब जानते हैं कि बच्चों को प्रतिदिन खाने में कितनी मात्रा में आयोडीन देना चाहिए।

बच्चों को कितनी मात्रा में आयोडीन लेना चाहिए?

नीचे हम टेबल के जरिए बता रहे हैं कि बच्चों को किस उम्र में कितना आयोडीन देना सही होता है। ये तथ्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसीन की ओर से किए गए शोध के आधार पर दिए गए हैं (5)।

बच्चे की उम्रआयोडीन की मात्रा
6 महीने से कम110 माइक्रोग्राम
7-12 महीने130 माइक्रोग्राम
1-8 साल90 माइक्रोग्राम
9-13 साल120 माइक्रोग्राम
14-19 साल150 माइक्रोग्राम

आइए,अब उन लक्षणों के बारे में बात करते हैं, जिनके जरिए बच्चे में आयोडीन की कमी का पता लगाया जा सकता है।

बच्चों में आयोडीन की कमी के संकेत

आयोडीन की कमी होने पर सबसे पहले थायराइड ग्रंथी प्रभावित होती है। इससे बच्चे को हाइपोथायरायडिज्म की समस्या हो सकती है। इसकी पहचान नीचे दिए गए लक्षणों से की जा सकती है। ये लक्षण महिला, पुरुष व बच्चों में एक समान नजर आते हैं, जिनके बारे में हम नीचे बता रहे हैं (6) (7) (8)।

  • वजन में बदलाव : हाइपोथायरायडिज्म होने पर शरीर कैलोरी का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इससे शरीर में कैलोरी चर्बी के रूप में इकट्ठा होने लगती है और परिणामस्वरूप बच्चे का वजन बढ़ने लगता है।
  • थकान : हाइपोथायरायडिज्म की समस्या होने पर मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। इससे शरीर में ऊर्जा की कमी होने लगती है और मांसपेशियां ठीक से काम नहीं कर पाती हैं। ऐसी स्थिति में थकान महसूस होने लगती है।
  • रूखी त्वचा झड़ते बाल : थायराइड हार्मोन का निर्माण कम होने से बालों को विकास ठीक तरह से नहीं होता, जिस कारण बच्चों के बाल झड़ना शुरू हो सकते हैं। साथ ही हार्मोन की कमी के चलते कोशिकाएं भी प्रभावित हो सकती है। इसके चलते बच्चों की त्वचा में रूखापन आ सकता है। इससे त्वचा पर पपड़ी जैसी बननी शुरू हो सकती है।
  • ठंड लगना: आयोडीन की कमी से मेटाबॉलिक रेट कम हो सकता है। इसके कारण शरीर में ऊर्जा की कमी हो सकती है। जिस वजह से कमजोरी महसूस हो सकती है और यह इसके कारण दूसरों के मुकाबले बच्चों को ठंड ज्यादा लग सकती है।
  • गले में सूजन: गले में सूजन नजर आना आयोडीन की कमी का सबसे अहम लक्षण माना गया है। थायराइड हार्मोन के ठीक तरह से न बनने के कारण थायराइड ग्रंथि को पर्याप्त मात्रा में आयोडीन प्राप्त नहीं होता है। यह ग्रंथि गर्दन में स्थित होती है। ऐसी अवस्था में यह ग्रंथि खाद्य पदार्थों से ज्यादा मात्रा में आयोडीन लेने की कोशिश करती है, जिस कारण इसमें सूजन आ जाती है।

आयोडीन बच्चों के लिए किस प्रकार फायदेमंद है, यह जानने के लिए लेख का अगला भाग जरूर पढ़ें।

बच्चों के लिए आयोडीन के फायदे

आयोडीन की सही मात्रा लेने से इसके अनेक फायदे देखने को मिल सकते हैं। हम शिशुओं के लिए आयोडीन के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।

  1. मानसिक विकास : बच्चे के लिए आयोडीन कितना फायदेमंद है, इसको लेकर कई शोध किए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठ (WHO) के अनुसार, आयोडीन बच्चे के मानसिक विकास के लिए सबसे जरूरी है (9) (10)। एक अन्य रिसर्च के मुताबिक, शिशु के मस्तिष्क के लिए आयोडीन एक जरूरी न्यूट्रिएंट है (11)। इसकी कमी से शिशु मानसिक रूप से अपंग तक हो सकता है। इसलिए, कहा जाता है कि प्रत्येक महिला को गर्भावस्था के समय पर्याप्त मात्रा में आयोडीन का सेवन करना चाहिए।
  1. हाइपोथायरायडिज्म से बचाव : आयोडीन की कमी से हाइपोथायरायडिज्म की समस्या हो सकती है (3)। लेख में ऊपर बताया गया है कि जब थायरायड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायराइड हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती है, तो हाइपोथारायडिज्म की समस्या हो सकती है। इसके कारण बच्चे को थकान, मांसपेशियों में दर्द व रूखी त्वचा आदि का सामना करना पड़ सकता है (12)। इसलिए, इन सभी समस्याओं से बचने के लिए शरीर में आयोडीन जरूरी माना गया है।
  1. हाइपरथायरायडिज्म से बचाव: थायराइड हार्मोन के अधिक उत्पादन के कारण होने वाले हाइपरथायरायडिज्म का इलाज एंटीथायरॉइड दवाओं द्वारा किया जा सकता है। इसमें रेडियोएक्टिव आयोडीन मुख्य रूप से इस्तेमाल की जा सकती है (13)। इसी आधार पर कहा जा सकता है कि हाइपरथायरायडिज्म से बचाव के लिए आयोडीन जरूरी माना जा सकता है।
  1. शारीरिक विकास : पर्याप्त आयोडीन के सेवन से बच्चे का शारीरिक विकास बेहतर तरीके से हो सकता है। डाइट में आयोडीन को शामिल करने से बच्चे की सुनने की क्षमता बेहतर हो सकती है। साथ हड्डियों के निर्माण में भी मदद मिल सकती है (14)।
  1. घेंघा से बचाव: आयोडीन की कमी से घेंघा रोग होने की आशंका होती है। इसमें गले में मौजूद थायराइड ग्रंथि में सूजन आ जाती है। इसलिए, आयोडीन युक्त भोजन का सेवन करने से बच्चे को इस रोग से बचाया जा सकता है (15)
  1. थायरॉइड कैंसर: आयोडीन की कमी से थायराइड कैंसर होने की आशंका भी होती है। ऐसे में आयोडीन को आहार में शामिल कर इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बता दें कि थायरॉइड कैंसर के इलाज के लिए रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरिपी का इस्तेमाल किया जाता है (16)।
  1. कॉग्निटिव फंक्शन: बच्चों में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा कॉग्निटिव फंक्शन को बढ़ावा देने में मददगार हो सकती है। बच्चे में सोचने, समझने, सीखने, निर्णय लेने और ध्यान लगाने की क्षमता को बढ़ाने के लिए आयोडीन लाभकारी हो सकता है (9)।
  1. जन्म के समय वजन: मेडिकल रिसर्च की मानें, तो गर्भावस्था में आयोडीन की जरूरत करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसलिए, गर्भवती महिला को पर्याप्त मात्रा में आयोडीन लेना चाहिए। इससे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास सही प्रकार से हो सकता है। साथ ही जन्म के समय वजन भी सही रहता है (17)।

अब हम लेख में ज्यादा आयोडीन लेने से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

बच्चों को अधिक मात्रा में आयोडीन देने का नुकसान

एक तरफ आयोडीन की कमी बच्चों के मानिसक व शारीरिक विकास में रुकावट बनती हैं। वहीं, इसकी अधिकता भी बच्चों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। यहां हम कुछ ऐसे ही दुष्प्रभावों के बारे में बता रहे हैं (18) (19)।

  • उल्टी
  • दस्त
  • बुखार
  • गले व मुंह में जलन महसूस होना
  • पेट दर्द
  • कोमा की स्थिति (गंभीर मामलों में)
  • खांसी आना
  • लार आना
  • शरीर में सूखे खून के धब्बे नजर आना

अब लेख के अगले भाग में जानेंगे कि किस प्रकार शरीर में आयोडीन की कमी का पता लगाया जा सकता है।

आयोडीन की कमी होने पर किए जाने वाले निदान

शरीर में आयोडीन की कमी है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए डॉक्टर निम्न टेस्ट करवा सकते हैं (20)।

  1. मेडिकल हिस्ट्री: डॉक्टर सबसे पहले बच्चों के माता-पिता के उसकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछ सकते  हैं (21)।
  1. गले की जांच: डॉक्टर बच्चे में आयोडीन की कमी की पता लगाने के लिए उनके गले को टटोल सकते हैं। इससे बच्चे के थायराइड ग्रंथि के आकार का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके अलावा अल्ट्रासांउड द्वारा भी इसकी जांच की जा सकती है (20)।
  1. यूरिन टेस्ट : डॉक्टर आयोडीन की कमी की जांच करने के लिए बच्चे का यूरिन टेस्ट कर सकते हैं। इस टेस्ट में बिल्कुल भी समय नहीं लगता है। इसमें मरीज के यूरिन की जांच की जाती है (22) (20)।
  1. थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन टेस्ट (टीएसएच): आयोडीन की कमी की जांच करने के लिए डॉक्टर टीएसएच जांच करने की सलाह दे सकते हैं। इस टेस्ट में बल्ड की जांच की जाती है, जिसमें हार्मोन की मात्रा का पता लगाया जाता है (23)।
  1. थायरोग्लोबुलीन परीक्षण: थायरोग्लोबुलीन एक प्रकार का प्रोटीन है, जोकि थायरॉइड ग्रंथि में ही पाया जाता है। आयोडीन की कमी होने पर ये खून में प्रवाह होने लगता है। इस टेस्ट में खून में मौजूद थायरोग्लोबुलीन की मात्रा की जांच की जाती है। इससे शरीर में आयोडीन की कमी की गंभीरता का अनुमान लगाया जा सकता है (20)।

नीचे लेख में जानते हैं बच्चों में आयोडीन की कमी से कौन-कौन से रोग हो सकते हैं।

बच्चों में आयोडीन की कमी से होने वाले रोग

बच्चों में आयोडीन की कमी के कारण निम्न रोग हो सकते हैं (24) (14) (25) (26):

  • गॉइटर यानी गले से संबंधित रोग हो सकता है।
  • मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।
  • शारीरिक विकास में देरी हो सकती है।
  • आयोडीन की कमी से हाइपोथायराइड होने की आशंका सबसे ज्यादा हो सकती है।
  • सोचने, समझने व सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • गंभीर मामलों में जान जाने तक का जोखिम हो सकता है।

आगे आप जानेंगे कि किन-किन खाद्य पदार्थों से आयोडीन मिल सकता है।

आयोडीन के अच्छे स्त्रोत क्या हैं?

बच्चों में आयोडीन की कमी को दूर करने के लिए आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थ फायदेमंद हो सकते हैं, जो इस प्रकार से हैं (14) (3):

  • आयोडीन सॉल्ट: यह आयोडीन का मुख्य स्त्रोत है।
  • डेयरी प्रोडक्ट्स: आयोडीन की कमी के लिए बच्चों को डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे दूध, पनीर व दही आदि का सेवन करा सकते हैं।
  • सीफूड: सीफूड भी आयोडीन का अच्छा स्त्रोत माना जाता है। इसके लिए कॉड, पर्च मछली (रानी मछली) और हैडॉक मछली का सेवन किया जा सकता है।
  • आयोडीन युक्त मिट्टी में उगाए गए पौधों में भी आयोडीन मौजूद होता है।

लेख के अंतिम भाग में जानिए आयोडीन की कमी के उपचार के बारे में।

आयोडीन की कमी का उपचार कैसे किया जाता है?

  • आयोडीन सप्लीमेंट्स: आयोडीन की पूर्ति के लिए दवाईयां या इंजेक्शन के रूप में आयोडीन की खुराक को दिया जा सकता है (27)।
  • आयोडीन आहार का सेवन: आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों को रोकने के लिए आयोडीन युक्त नमक, आयोडीनयुक्त ब्रेड, आयोडीन युक्त पानी दिया जा सकता है (27)। स्तनपान करने वाले बच्चों की मां इन आहार का सेवन कर बच्चे को दूध के द्वारा आयोडीन की पूरक मात्रा दे सकती हैं (28)।

इस लेख के माध्यम से आपने जाना कि बच्चों में आयोडीन की कमी किन समस्याओं को पैदा कर सकती है। साथ ही यहां बच्चों में आयोडीन की कमी के लक्षण, निदान, इलाज व बचाव से जुड़ी जानकारी भी दी गई है। तो अब, बच्चों में आयोडीन की कमी से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि समय रहते इसके लक्षणों की पहचान कर अपने बच्चे को समय पर इलाज दिलाकर उन्हें सुरक्षित रखें। बस एक बात का खास ख्याल रखें कि बच्चे में आयोडीन की कमी की समस्या को हल्के में न लें, वरना यह स्थिती गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए, खुद को सतर्क रखने के साथ बच्चे को सेफ रखें।

References:

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