बच्चों में आत्म-नियंत्रण को विकसित करने के 10+ टिप्स | Tips To Teach Self-Control In Children In Hindi

Tips To Teach Self-Control In Children In Hindi

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आजकल के बच्चे बात-बात पर गुस्सा करने लगते हैं। घर हो या सड़क वे कहीं भी चिल्लाना शुरू कर देते हैं। इस वजह से उनके माता-पिता को कई बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। पेरेंट्स की इन्हीं परेशानियों को देखते हुए हम मॉमजंक्शन के इस लेख में बच्चों में आत्म-नियंत्रण विकसित करने के टिप्स लेकर आए हैं। साथ ही यहां हम सेल्फ कंट्रोल क्या है और बच्चों के लिए यह क्यों जरूरी है, इस बारे में भी जानकारी दी गई है।

लेख में सबसे पहले हम आत्म नियंत्रण की परिभाषा समझ लेते हैं।

आत्म-नियंत्रण क्या है और ये बच्चों के लिए कितना मायने रखता है?

सेल्फ कंट्रोल यानी आत्म-नियंत्रण ऐसी चीज है, जो इंसान को बुरे काम करने से रोकने में मदद करती है। ‘विश्वास और आत्म-नियंत्रण’ पर हुए एक शोध से जानकारी मिलती है कि जिन लोगों में आत्म-नियंत्रण नहीं होता वो थोड़े आक्रामक हो सकते हैं। साथ ही वो दूसरों की मदद करने से भी हिचकते हैं, जबकि जिन लोगों में आत्म-नियंत्रण होता है वो काफी शांत होते हैं और हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे आते हैं (1)।

बच्चों में सेल्फ कंट्रोल निम्नलिखित कारणों से मायने रखता है (2) :

  • अगर छोटी उम्र में बच्चों को सेल्फ कंट्रोल करना सिखाया जाए, तो ये उनके आगे के जीवन के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके जरिए बच्चों में बौद्धिक सुधार देखने को मिल सकता है।
  • खुद पर नियंत्रण स्थापित कर बच्चे स्वयं को गलत कार्यों से दूर रख सकते हैं।
  • इसके अलावा, आत्म-नियंत्रण के माध्यम से बच्चे अपनी पढ़ाई को भी बेहतर कर सकते हैं और शैक्षिक उपलब्धियों को हासिल कर सकते हैं।
  • यही नहीं, जीवन में रिश्तों की समझ और आपसी खुशी के लिए बच्चों के लिए सेल्फ कंट्रोल मायने रखता है।

लेख के इस हिस्से में हम जानेंगे सेल्फ कंट्रोल की कमी के लक्षणों के बारे में।

बच्चों में सेल्फ कंट्रोल की कमी के लक्षण

बच्चों में सेल्फ कंट्रोल की कमी को कैसे पहचानें, इसे लेकर अधिकतर पेरेंट्स परेशान रहते हैं। इसलिए, यहां हम कुछ ऐसे लक्षण बताने जा रहे हैं, जिनके जरिए आसानी से पता लगाया जा सकता है कि किन बच्चों में सेल्फ कंट्रोल की कमी है :

  • उदास रहना- अगर बच्चे में सेल्फ कंट्रोल की कमी है, तो वह ज्यादातर समय उदास रह सकता है। इस बात की जानकारी इस विषय से जुड़े एक रिसर्च पेपर में भी मिलती है। इस पेपर में बताया गया है कि जो बच्चे खुद पर आत्म नियंत्रण नहीं रख पाते, वो अधिकतर उदास ही नजर आते हैं (3)।
  • बात-बात पर गुस्सा करना- सेल्फ कंट्रोल की कमी होने पर बच्चा बात-बात पर गुस्सा कर सकता है। वह थोड़ा चिड़चिड़ा भी हो सकता है। किसी भी बात को समझे बिना वह अपना गुस्सा जाहिर कर सकता है और माता-पिता से लड़ सकता है (4)।
  • नखरे दिखाना- आत्म नियंत्रण से बाहर होने पर बच्चा हर चीज में नखरे दिखा सकता है। वह ज्यादा शरारती व उद्दंड व्यवहार कर सकता है। एक अध्ययन में भी इस बात का जिक्र मिलता है कि लगभग 80 प्रतिशत से अधिक बच्चे दुर्व्यवहार के कारण नखरे दिखाते हैं (4)।
  • दोस्तों को परेशान करना-  खुद के अंदर आत्म नियंत्रण की कमी के कारण बच्चे अपने दोस्तों को भी परेशान कर सकते हैं, उन्हें चिढ़ा सकते हैं। ऐसा भी हो सकता है कि वे स्कूल में बहुत बदमाशी करें। अगर बच्चे ऐसी हरकतें करने लगें, तो इसे भी सेल्फ कंट्रोल की कमी का संकेत माना जा सकता है।
  • दूसरों की बातचीत में बाधा पहुंचाना- जब पेरेंट्स किसी से बात कर रहे हों या कोई भी दो लोग आपस में बात कर रहे हों और बच्चा बीच में जाकर वहां रुकावट डालता है, तो यह भी सेल्फ कंट्रोल की कमी के लक्षण हो सकते हैं।
  • दूसरों का मजाक उड़ाना या कमी निकालना- अगर बच्चा अपने दोस्तों या भाई-बहनों का हमेशा मजाक उड़ाता है और उनमें कमी निकालकर उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तो इसे भी सेल्फ कंट्रोल की कमी का लक्षण माना जा सकता है।

आगे हम जानेंगे की बच्चे कब नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं।

कब बच्चे नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं?

बच्चा अगर आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है, तो इसके लिए माता-पिता को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि बच्चा ऐसा क्यों कर रहा है। तो चलिए, फिर समझते हैं कि बच्चे किन परिस्थितियों में नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं:

  • अगर बच्चे के मन में यह बात बैठ जाए कि उसके माता-पिता उससे प्यार नहीं करते और उसके लिए समय नहीं निकालते हैं, तो ऐसे में बच्चा खुद को अकेला महसूस करने लगता है और अपना गुस्सा निकालने के लिए वह कुछ भी कर सकता है।
  • कई बार बच्चे अपने ऊपर लागू अधिक रोक-टोक के कारण भी आत्म-नियंत्रण खोने लगते हैं। उन्हें ऐसा लगने लगता है कि उनकी आजादी छिन गई है, जिस वजह से वो चिड़चिड़े हो सकते हैं।
  • बच्चे के दोस्त, भाई-बहन या फिर कोई रिश्तेदार उसका हद से ज्यादा मजाक उड़ाते हैं, तो इस स्थिति में भी बच्चा आत्म नियंत्रण से बाहर हो जाता है।
  • अगर बच्चों की बातों को नहीं सुना जाता है या फिर उसकी बात नहीं मानी जाती है, तो इस कारण भी बच्चे अपना सेल्फ कंट्रोल खोने लगते हैं।

क्या आप जानते हैं कि बच्चों में आत्म नियंत्रण कैसे विकसित करें, अगर नहीं तो आगे पढ़ें।

बच्चों में आत्म-नियंत्रण को विकसित करने के 10+ टिप्स | Tips to teach self-control in children in hindi

सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अनुशासित और समझदार हो। इसके लिए जरूरी है कि उन्हें खुद पर नियंत्रण रखना आता हो। इसलिए, यहां हम कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं, जो बच्चों में आत्म-नियंत्रण विकसित करने में मदद कर सकते हैं :

  1. सही दिनचर्या बनाएं – बच्चों को आत्म नियंत्रित करने के लिए सबसे जरूरी चीज है कि माता-पिता उसके लिए एक सही दिनचर्या बनाएं और सख्ती से उसका पालन कराएं। ऐसा करने से बच्चे को अनुशासन में रहने की आदत हो जाएगी और वह अपने हर काम को समय के साथ पूरा करना सीख सकेगा। ये चीजें उसके अंदर आत्म नियंत्रण विकसित करने में काफी मददगार साबित हो सकती हैं।
  1. रोल मॉडल बनें – ऐसा माना जाता है कि बच्चे के पहले गुरु उसके माता-पिता ही होते हैं। इसलिए वे जिन  आदतों को अपनाएंगे उनका बच्चा भी उसी आदत को अपनाएगा। अगर माता-पिता ही खुद को नियंत्रण में नहीं रख पाते हैं और बात-बात पर गुस्सा और बहस करते हैं, तो बच्चे भी इसी चीज को सीखेंगे। इसलिए, अगर बच्चे को नियंत्रण में रहना सिखाना है, तो इसके लिए माता-पिता को ऐसे कार्य करने होंगे, जिससे बच्चे उन्हें अपना आदर्श मानें।
  1. कहानियां सुनाएं – बच्चों को प्रॉब्लम सॉल्विंग बनाने के लिए कहानियों की मदद ली जा सकती है। दरअसल, बच्चों की कहानियों में बहुत रूचि होती है और वे इसके माध्यम से बहुत कुछ सीख सकते हैं। इसलिए, माता-पिता बच्चों में सेल्फ कंट्रोल की भावना को स्थापित करने के लिए उन कहानियों की मदद ले सकते हैं, जिसे कोई सीख मिलती हो।
  1. समय-समय पर इनाम दें – छोटे बच्चों को गिफ्ट्स और चॉकलेट बहुत पसंद होते हैं। इसलिए, जब भी बच्चा खुद पर नियंत्रण स्थापित करे, उसे इनाम के तौर पर उनकी पसंद की कोई चीज दें। इससे उन्हें काफी खुशी मिलेगी और आगे से वो ऐसी चीजें करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इसके साथ ध्यान रखें कि बच्चों को इसकी आदत न लगे।
  1. भावनाओं को समझें – आमतौर पर बच्चे जब नखरे दिखाएं और माता-पिता की बात न सुनें, तो ऐसी स्थिति की वजह अक्सर सहानुभूति और आत्म नियंत्रण की कमी होती है। बच्चे की भावनाओं को पकड़ने में चूक उसके चिड़चिड़ेपन की वजह बन सकती है। बच्चों को ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए बातचीत का तरीका सिखाएं, जो उसके आत्म नियंत्रण को विकसित करने में मदद करें और बच्चा अपनी भावनाएं बेहतर ढंग से बता सके।
  1. गुस्से व निराशा पर नियंत्रण – अक्सर बच्चे यह नहीं समझ पाते हैं कि गुस्सा या निराश होने पर क्या करना है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले उन्हें यह सिखाना जरूरी है कि कैसे शांत रहें। इसके लिए कुछ तरकीबों को अपनाया जा सकता है, जैसे – ठंडा पानी घूंट-घूंट कर पिएं। एक से 20 तक गिनती गिने आदि। वहीं, निराश होने की स्थिति में बच्चों को एक बार अपने किसी खास, जैसे- मम्मी-पापा, भाई-बहन या दोस्तों से बात करने की सलाह देनी चाहिए। ऐसा करने से मन हल्का होता है और निराशा खत्म हो जाती है।
  1. प्रोत्साहित करना न भूलें –  बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों पर उन्हें प्रोत्साहित करना न भूलें। खासकर तब, जब बच्चा आत्म नियंत्रण के बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता हो। उसे विशेष रूप से इसके लिए शाबाशी दें। ऐसा करने से बच्चे का मनोबल बढ़ेगा और वह आगे भी इस तरह के कार्य करने के लिए उसे प्रोत्साहन मिलेगा।
  1. खेलों के जरिए – बच्चों के अंदर आत्म नियंत्रण विकसित करने के लिए कुछ खास प्रकार के खेलों की मदद ली जा सकती है। उदाहरण के लिए, बच्चे के हाथ में एक गेंद दें और उसे बताएं कि ’गो’ कहने पर उसे गेंद को फेंकना है और फिर उसी तरह ‘कम’ कहने पर गेंद को कैच करना है।

बच्चा जब धीरे-धीरे इस नियम को समझ जाए, तो फिर उस नियम को थोड़ा उलट दें, जैसे- गो कहने पर बॉल कैच करना और कम कहने पर फेंकना है। इस खेल की मदद से बच्चा खुद पर नियंत्रण स्थापित करना सीख सकता है।

  1. पेरेंट्स का खुद पर कंट्रोल : बच्चों में आत्मनियंत्रण विकसित करने के लिए माता-पिता को खुद पर भी नियंत्रण रखना जरूरी है। अगर माता-पिता बच्चे के सामने ही अपना आत्म नियंत्रण खोते हैं, तो बच्चे भी इसी व्यवहार को अपना सकते हैं। इसलिए, जरूरी है कि माता-पिता खुद पर कंट्रोल रखें, ताकि बच्चे भी उनके अच्छे गुणों को अपना सकें।
  1. दबाव न डालें : माता-पिता कभी भी बच्चे पर किसी भी चीज के लिए दबाव न डालें। इससे बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं और बातों को मानने से इनकार कर सकते हैं। यह उनके व्यवहार के लिए अच्छा नहीं होगा। इसलिए, माता-पिता को चाहिए कि वह अपने बच्चे पर किसी भी चीज के लिए दबाव न डालें और उसकी इच्छा को ध्यान में रखकर फैसले लें।
  1. टाइम आउट जोन : अगर बच्चा पेरेंट्स की बात नहीं माने, तो उसे टाइम आउट जोन में भेजा जा सकता है। बता दें कि टाइम आउट जोन एक पेरेंटिंग तकनीक है, जो बच्चों को उन चीजों को करने से रोकने में मदद करती है, जिसे उनके माता-पिता पसंद नहीं करते हैं। इसके जरिए बच्चों के अंदर शांत व्यवहार और आत्म नियंत्रण सिखाया जा सकता है (5)।

बच्चों में सेल्फ कंट्रोल की कमी उनके विकास में बाधा डाल सकती है। इसलिए माता-पिता के लिए यह जरूरी है कि उनके अंदर आत्म-नियंत्रण विकसित करें। इसके लिए लेख में हमने शानदार टिप्स भी बताए हैं। इसके अलावा, लेख में सेल्फ कंट्रोल की कमी के लक्षणों के बारे में भी बताया गया, जिसके माध्यम से यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि बच्चे को कब समझाने की जरूरत है। बच्चों के विषय से जुड़ी ऐसी ही जानकारी पाने के लिए पढ़ते रहें मॉमजंक्शन।

References:

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  1. Trust and self-control: The moderating role of the default
    http://journal.sjdm.org/11/11719/jdm11719.pdf
  2. The ‘Operational’ Definition of Self-Control
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6058080/
  3. Delay of gratification, psychopathology, and personality: is low self-control specific to externalizing problems?
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/8656312/
  4. Behavioural and emotional disorders in childhood: A brief overview for paediatricians
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5803568/
  5. Discipline in children
    https://medlineplus.gov/ency/article/002211.htm
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