बच्चों में जन्मजात हृदय रोग: प्रकार, लक्षण और उपचार | Kya Hai Bachon Mein Congenital Heart Disease

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कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज उन बीमारियों में शामिल है, जो जन्म से ही शरीर में घर कर जाती है। इसकी समस्या व्यक्ति या बच्चे में जन्म से पहले ही मौजूद होती ही। क्या है कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज और इसके कारण समझने में मॉमजंक्शन का यह लेख मदद करेगा। यहां बच्चों में जन्मजात हृदय दोष के लक्षण, रोकथाम व निदान के साथ ही उपचार की जानकारी भी दी गई है। साथ ही, बच्चों में जन्मजात हृदय दोष के प्रकार भी यहां बताए गए हैं।

सबसे पहले जानते हैं कि बच्चों को जन्मजात दिल की बीमारी होना क्या है।

बच्चों में कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज क्या है?

बच्चों में कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज (Congenital Heart Defects) को जन्मजात हृदय दोष कहा जाता है। यह हृदय की खराब संरचना से जुड़ी स्थिति है, जो बच्चे में जन्म से ही होती है। इस समस्या में हृदय की दीवारें सहित वाल्व, धमनियां और नसों की बनावट प्रभावित हो सकती है। इस वजह से ऑक्सीजन व रक्त का प्रवाह बहुत धीमा होने के साथ ही पूरी तरह से बंद भी हो सकता है या गलत दिशा व शरीर के गलत अंगों में भी प्रवाहित हो सकता है (1)।

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार, जन्म लेने वाले कुल शिशुओं में से प्रति 1.1% शिशु कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज (Congenital Heart Defects) के साथ पैदा होते हैं (2)। यहां तक कि बच्चों में होने वाले जन्मदोष में जन्मजात हृदय रोग का जोखिम सबसे आम माना जाता है (1)।

अब बच्चों को जन्मजात दिल की बीमारी के प्रकार को समझें।

बच्चो में जन्मजात हृदय दोष के प्रकार

बच्चों को होने वाली जन्मजात दिल की बीमारी के कई प्रकार हैं। यहां हम 5 सबसे सामान्य जन्मजात हृदय दोष के प्रकार के बारे में बता रहे हैं (3)।

1. वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (Ventricular Septal Defect)

इस समस्या में दिल के बीच की दीवार में एक छेद होता है। इस वजह से शरीर में ऑक्सीजन और रक्त प्रवाह प्रभावित हो जाता है, जिससे बच्चे की सांस फूल सकती है, दूध पीने में कठिनाई हो सकती है या फिर गंभीर स्थितियों में उसे निमोनिया होने व दिल रुकने का भी खतरा बढ़ सकता है।

2. ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट वेसेल्स (Transposition of The Great Vessels)

आमतौर पर हृदय के दाहिनी तरफ की खून की नली फेफड़ों में रक्त प्रवाहित करती है और बाएं तरफ की नली से शरीर के अन्य अंगों में रक्त का प्रवाह होता है। इस प्रकार के जन्मजात हृदय दोष में रक्त वाहिकाएं असामान्य होती है। धमनियां अपने स्थान से अलग हो सकती हैं। इस वजह से नसों में खून के प्रवाह में कमी और शरीर में रक्त का परिसंचारण प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिस वजह से त्वचा का रंग भी नीला पड़ जाता है।

3. संकुचित एओर्टा (Coarctation of The Aorta)

इस प्रकार के हृदय दोष में शरीर की सबसे बड़ी धमनी यानी महाधमनी (एओर्टा) सामान्य से बहुत पतली हो सकती है। इससे शरीर के निचले हिस्सों में रक्तचाप सामान्य से कम हो जाता है। बच्चे में इसके लक्षण जन्म के एक सप्ताह बाद ही दिखाई दे सकते हैं। इसकी वजह से सांस फूलना व सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। उपचार न करने पर शिशु को जान का खतरा हो सकता है।

4. टेट्रालॉजी ऑफ फैलो (Tetralogy of Fallot)

टेट्रालॉजी ऑफ फैलो की समस्या भी बच्चे को मां के गर्भाशय से ही हो सकती है। इस दौरान गर्भ में ही बच्चे के हृदय में चार दोष उत्पन्न हो जाते हैं। इनके चलते ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त हृदय के अंदर मिलते हैं, जिससे बच्चे का शरीर नीला (सायनोसिस) भी पड़ सकता है।

इस जन्मजात दिल की बीमारी होने पर हृदय में मुख्य ये चार दोष हो सकते हैंः

  • हृदय की दीवार में छेद होना
  • दाएं वेंट्रिकल से रक्त के प्रवाह में रुकावट होना
  • दाएं वेंट्रिकल की दीवार का ज्यादा मोटा होना
  • दाएं वेंट्रिकल की ओर महाधमनी का खिसना

5. हाइपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम (Hypoplastic Left Heart Syndrome)

इस स्थिति में, वाल्व व रक्त वाहिकाओं समेत हृदय का बायां हिस्सा पूरी तरह से अविकसित होता है। यह एक आपातकाल स्थिति होती है, जिसमें ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। इसकी सर्जरी हाई रिस्क होती है, जिसके चलते बच्चे के जीने की संभावना बहुत ही कम रह जाती है।

6. अन्य हृदय की जन्मजात समस्याएं

ऊपर बताई गई समस्याएं सबसे आम जन्मजात हृदय दोष हैं। इनके अलावा, भी बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी के अन्य प्रकार भी हो सकते हैं। अब हम आगे बिंदुओं के माध्यम से अन्य जन्मजात हृदय रोग से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं (4)।

  • पल्मोनरी एट्रेसिया (Pulmonary Atresia) – इस हृदय जन्म दोष में हृदय से फेफड़ों तक रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले वाल्व का निर्माण नहीं होता है। इस कारण शिशुओं के शरीर में ऑक्सीजन व रक्त प्रवाह प्रभावित होता है (5)।
  • टोटल एनॉमल्स पल्मोनरी वेनस रिटर्न (Total Anomalous Pulmonary Venous Return) – टोटल एनॉमल्स पल्मोनरी वेनस रिटर्न (TAPVR) वाले बच्चे में ऑक्सीजन युक्त रक्त फेफड़ों में पहुंच तो जाते हैं, लेकिन फिर दाएं से बाएं की तरफ वापस नहीं आता है। इसके बजाय ऑक्सीजन युक्त रक्त हृदय के दाहिनी ओर में ही वापस लौट आता है (6)।
  • ट्राइकसपिड एट्रेसिया (Tricuspid Atresia) – इसमें हृदय के बीच की दीवार में वाल्व का निर्माण सही से न होकर एक ठोस ऊतक के रूप में हो दाता है, जो रक्त के प्रवाह को प्रतिबंधित करता है (7)।
  • ट्रंकस आर्टेरियोसस (Truncus Arteriosus) – इस हृदय जन्म दोष में फेफड़ों से जुड़ी धमनी और महाधमनी होने की बजाय एक ही रक्त वाहिका होती है (8)।

अब हम बच्चों में हृदय रोग के कारण बता रहे हैं।

बच्चों में जन्मजात हृदय रोग के क्या कारण हो सकते है?

ऐसा माना जाता है कि लगभग 10 में से 8 मामलों में शिशुओं में जन्मजात हृदय दोष होने के पीछे की वजह अभी भी अज्ञात है। इसके अलावा, कुछ कारणों को पहचाना गया है, जिनमें जीन से लेकर पर्यावरणीय कारकों को इसकी वजह मानी गई है। इसके बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है (3) (9):

1. आनुवंशिक कारक – आनुवंशिक कारकों में ये शामिल हैं –

  • जीन – लगभग 20 प्रतिशत मामलों में बच्चों को जन्मजात हृदय रोग आनुवंशिक कारण से हो सकता है। अगर बच्चे के माता-पिता या उसके परिवार में पहले भी पहले भी किसी को जन्मजात हृदय रोग हुआ हो, तो यह भी बच्चे में इसका एक कारण हो सकता है।
  • जीन व क्रोमोसोम्स (Chromosomes) म्यूटेशन – क्रोमोसोम्स व जीन में बदलाव की वजह से भी बच्चे में जन्मजात हृदय रोग हो सकता है। ये मुख्य तौर पर दिल की बनावट को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के तौर पर जीन म्यूटेशन या क्रोमोसोम्स में बदलाव की वजह से अर्ट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (Atrial Septal Defect) का जोखिम बढ़ सकता है। इस बीमारी में दिल के उपरी चैंम्बर में जन्म से छेद रहता है (10)।

2. पर्यावरणीय कारक – पर्यावरणीय कारकों में भी कई बातें शामिल हैं, जिनकी वजह से शिशु को जन्मजात हृदय रोग हो सकता है।

  • मां को होने वाला रोग – गर्भावस्था के दौरान अगर मां को रूबेला जैसी कोई अन्य दुर्लभ बीमारी होती है, तो इससे शिशु में जन्मजात हृदय विकारों का जोखिम बढ़ सकता है।
  • गर्भावस्था में दवाओं का सेवन – गर्भावस्था के दौरान अगर मां ने बिना डॉक्टरी सलाह पर किसी तरह की दवा का सेवन किया हो-, तो इसकी वजह से भी होने वाले बच्चे में जन्मजात हृदय विकार का जोखिम बढ़ सकता है।
  • गर्भावस्था में मां का अल्कोहल पीना – गर्भावस्था के दौरान मां का शराब पीना या धूम्रपान करना भी शिशु में जन्मजात हृदय विकार का एक कारण बन सकता है।
  • मां का स्वास्थ्य – गर्भावस्था के दौरान मधुमेह होना या मां का अधूरा व खराब पोषण भी शिशु में जन्मजात हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा देते हैं।
  • गर्भवती की उम्र – ऐसा भी माना जाता है कि अगर महिला अधिक उम्र में गर्भवती होती है, तो उसके शिशु में जन्म से हृदय रोग होने का जोखिम भी बढ़ जाता है।

3. अन्य जन्म दोष होना – डाउन सिंड्रोम जैसे कुछ जन्म दोष की वजह से भी शिशु में जन्मजात हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है।

बच्चों में हृदय रोग के लक्षण जानने के लिए लेख को आगे पढ़ें।

बच्चों में जन्मजात हृदय रोग के लक्षण | Bachon Mein Janmajaat Dil Ki Bimari Ke Lakshan

कुछ मामलों में बच्चों में जन्मजात हृदय दोष के कोई संकेत या लक्षण नहीं दिखते हैं। हां, कुछ बच्चों में जन्मजात हृदय दोष होने पर निम्नलिखित लक्षण सामने भी आ सकते हैं, जिनमें शामिल हैं (1) (3) (9):

आगे पढ़ें जन्मजात हृदय रोग से होने वाले जोखिम की जानकारी।

बच्चों में जन्मजात हृदय रोग से होने वाले जोखिम

जन्मजात हृदय रोग से बच्चे में कई तरह के अन्य जोखिम भी हो सकते हैं। इनके बारे में आगे बिंदुओं के माध्यम से बताया गया है (12) (13):

  • बच्चे में शारीरिक और मानसिक विकास से जुड़ी समस्याएं होना
  • जन्मदोष के कारण पढ़ने-लिखने में अधिक परेशानी
  • बच्चे की विकासात्मक क्षमता कमजोर और धीमी होना
  • सीखने की क्षमता कमजोर होना।
  • ध्यान लगाने, खुद की देखभाल करने और अन्य शारीरिक गतिविधियां करने में कठिनाई
  • गंभीर स्थितियां, उचित उपचार न मिलने व दिल की धड़कन रुकने पर शिशु की मृत्यु होना
  • दिल की धड़कन अनियमित होना
  • खून के थक्के बनना
  • व्यवहार व भावनात्मक संबंधी समस्याएं यानी अवसाद, तनाव व चिंता जैसे मनोरोग होना
  • हृदय में सूजन होना
  • थायराइड होना
  • हड्डियां कमजोर होना
  • गुर्दे व लिवर की बीमारी होना
  • निमोनिया होना
  • जन्मजात हृदय दोष वाली बच्चियों को बड़े होकर गर्भावस्था और प्रसव में जटिलताएं होना
  • बढ़ती उम्र में उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, चयापचय रोग, स्ट्रोक और धमनी रोग का खतरा (2)

बच्चों को जन्मजात दिल की बीमारी की पुष्टि कैसे होती है, अब हम यह समझिए।

बच्चों के जन्मजात हृदय रोग का निदान

बच्चे को जन्मजात हृदय रोग का कितना जोखिम है, इसका पता गर्भावस्था के दौरान किए जाने वाले विभिन्न परीक्षण से लगाया जा सकता है। इसके अलावा, नवजात में जन्मजात ह्रदय संबंधी स्थितियों का पता लगाने के लिए निम्नलिखित परीक्षण भी किए जा सकते हैं (1):

  • शारीरिक परीक्षण – शारीरिक परीक्षण के दौरान डॉक्टर बच्चे के स्वास्थ्य की जांच करते हैं और उनमें दिखाई दे रहे लक्षणों के अधार पर इसकी पुष्टि कर सकते हैं (1)।
  • अल्ट्रासाउंड – इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography) व इकोकार्डियोग्राम (ECG) जैसे टेस्ट से भ्रूण के दिल की आकृति में कोई गड़बड़ी है या नहीं, उसका पता लगाया जा सकता है। यह एक तरह का अल्ट्रासाउंड होता है, जिसमें दिल की बनावट व आकृति की तस्वीर ली जाती है। गर्भावस्था में ये टेस्ट किए जाते हैं। कुछ मामलों में बच्चे के बड़े होने पर भी यह टेस्ट किए जा सकते हैं (9)।
  • एक्स-रे व अन्य स्क्रीन टेस्ट – बच्चे के हृदय के आकार को देखने के लिए उसके छाती का एक्स-रे से लेकर कार्डियक कैथीटेराइजेशन (Cardiac Catheterization) व एमआरआई भी किया जा सकता है (13)।
  • लैब टेस्ट – डॉक्टर जेनेटिक टेस्ट करने के लिए बच्चे के रक्त के नमूने का भी परीक्षण कर सकते हैं। इससे जन्मजात हृदय रोग के पीछे के कारण को समझने में भी मदद मिल सकती है (13)।
  • पल्स ऑक्सीमेट्री (Pulse Oximetry) – रक्त में ऑक्सीजन का स्तर जांचने के लिए डॉक्टर यह टेस्ट भी कर सकते हैं। इसमें एक छोटे सेंसर का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे शिशु के हाथ या पैर की उंगली पर लगाया जाता है (13)

बच्चों में जन्मजात हृदय रोग का उपचार जानने के लिए स्क्रॉल करें।

बच्चों में कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज का इलाज कैसे किया जाता है?

बच्चों में जन्मजात हृदय रोग का इलाज बच्चे की उम्र, बीमारी की स्थिति और प्रकार के आधार पर किया जाता है। उपचार की विधि में डॉक्टर दवाओं से लेकर सर्जरी तक की सलाह दे सकते हैं (1) (9)।

  • दवाएं – दिल की आकृति को काफी हद तक सही करने के लिए डॉक्टर बच्चे के लिए दवाओं की खुराक लिख सकते हैं।
  • कार्डिएक कैथीटेराइजेशन (Cardiac Catheterization) – यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसका उपयोग हल्के हृदय दोषों को ठीक करने के लिए किया जाता है। अगर दवाओं के सहारे दिल की दीवार या नसों में हुई गड़बड़ी ठीक नहीं होती, तो डॉक्टर इस प्रक्रिया की मदद से उसे ठीक कर सकते हैं।
  • सर्जरी – दिल में छेद या अन्य गंभीर स्थितियों के उपचार में डॉक्टर ओपन हार्ट सर्जरी कर सकते हैं। इस सर्जरी के दौरान टांके या पैच की मदद से दिल के छेद को बंद करना, खराब वॉल्व को ठीक करना या उसे बदलना, धमनियों को चौड़ा करना, रक्त वाहिकाओं को ठीक करना आदि किया जाता है।
  • ह्रदय प्रत्यारोपण – अगर शिशु का हृदय संबंधी दोष अधिक गंभीर है, जिसका इलाज नहीं किया जा सकता है, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर बच्चे के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट करने का भी फैसला कर सकते हैं।

बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी को रोकने के लिए क्या करें, अब यह भी जान लें।

बच्चों को जन्मजात हृदय रोग से कैसे बचाया जा सकता है?

बच्चे में किसी भी जन्मजात दोष को होने से नहीं रोका जा सकता। हां, गर्भावस्था के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए, तो इसके जोखिम को कम जरूर किया जा सकता है। गर्भवती महिलाएं व गर्भावस्था की योजना बना रही महिलाएं, बच्चों में जन्मजात हृदय संबंधी दोष से बचाव करने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रख सकती हैं (13)।

  • गर्भावस्था की प्लानिंग के दौरान या गर्भावस्था के दौरान खुद से कोई भी दवा लेने से बचें। हमेशा डॉक्टर द्वारा निर्धारित की गई दवा का ही सेवन करें।
  • अगर महिला को मधुमेह या फेनिलकेटोनुरिया जैसी वंशानुगत चयापचय विकार है, जो बेबी प्लानिंग से पहले इसका उचित उपचार कराएं। ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां बच्चे में जन्मजात दोषों का खतरा बढ़ा सकती हैं।
  • अगर पति या पत्नी को कोई जन्मजात हृदय रोग है, तो बेबी प्लानिंग करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। उनकी देखरेख में ही गर्भावस्था की योजना बनाएं।
  • गर्भावस्था के दौरान शराब या धूम्रपान का सेवन न करें।
  • गर्भवती होने से पहले रूबेला यानी जर्मनी खसरा का टीकाकरण जरूर करवाएं।
  • स्वस्थ आहार खाएं। आहार में विभिन्न पोषक तत्व जैसे – विटामिन व आयरन से समृद्ध आहार शामिल करें।
    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगर बच्चों को जन्मजात हृदय रोग है, तो क्या वो लम्बे समय तक जीवित नहीं रह सकते हैं?

नहीं, ऐसा नहीं है। सही समय पर सही उपचार मिलने से जन्मजात हृदय रोग का उपचार किया जा सकता है। ऐसे कई मामले देखे भी गए हैं, जिनमें जन्मजात हृदय रोग वाले बच्चे उपचार के बाद पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनकी वयस्कता भी स्वस्थ है (9)।

क्या कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज वाले बच्चे एक्टिव जीवन नहीं जी सकते हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जन्मजात हृदय रोग के सफल उपचार के बाद बच्चे एक्टिव जीवन जी सकते हैं। हालांकि, खेल-कूद जैसी गतिविधियों में उनका योगदान सामान्य स्वस्थ बच्चों से थोड़ा कम जरूर हो सकता है (2)।

बच्चों में जन्मजात हृदय रोग का उपचार करने में लंबा समय लगता है, धैर्य रखें और बच्चे का उचित उपचार कराएं। साथ ही उसके स्वास्थ्य में हो रहे हर तरह के बदलाव पर भी नजर बनाए रखें। बेशक जन्मजात हृदय रोग गंभीर व दुर्लभ है, लेकिन सही उपचार व देखरेख से इसका इलाज संभव हो गया है। एक और बात का ध्यान रखें कि अगर जन्मजात हार्ट डिजीज के साथ बच्चे के दांत निकल रहे हैं या अन्य शारीरिक बदलाव हो रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में भी काफी सतर्क रहें और डॉक्टर की सलाह लेते रहें।

संदर्भ (References)

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