बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर: कारण, लक्षण,इलाज व टिप्स | Separation Anxiety Disorder In Kids In Hindi

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बच्चे काफी नाजुक होते हैं, शरीर के साथ-साथ उनका मन भी बहुत कोमल होता है। ऐसे में छोटी सी बात या घटना भी उनके मन में बैठ सकती है। खासतौर से अपने चाहने वालों से अलग होने का डर कई बार उनके दिल और दिमाग पर असर कर सकता है। इसी का नतीजा हो सकता है सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर। हो सकता है कि कई पेरेंट्स को बच्चे में होने वाली इस स्थिति के बारे में ज्यादा जानकारी न हो। इसलिए मॉमजंक्शन के इस लेख में हम बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। यहां आप बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर, इसके संकेत और इससे जुड़ी कई जरूरी जानकारियां पढ़ेंगे।

सबसे पहले पढ़ें बच्चों में अलगाव का डर होना क्या है।

बच्चों में अलगाव का चिंता विकार क्या है?

सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर (Separation Anxiety Disorder) बच्चे के विकास से जुड़ी एक अवस्था है। दरअसल, शुरुआती विकास में बच्चा अपने आस-पास रहने वाले लोगों, जैसे – माता-पिता, केयर टेकर और अन्य सदस्यों को पहचानने लगता है, ऐसे में बच्चे के मन में उनसे दूर होने या अलग होने का डर पनप सकता है। बच्चे में पनपती इसी भावना को अलगाव का डर या सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर कहते हैं (1)

आंकड़ों की बात करें, तो एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 3 से 4 फीसदी बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर (SAD) हो सकता है (2)। एनसबीआई की एक अन्य स्टडी में बताया गया है कि बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर होना सामान्य हो सकता है। इसकी समस्या 6 से 12 माह के बच्चे में शुरू हो सकती है, जो 3 साल की उम्र में अपने चरम पर हो सकती है, यानी इसके लक्षण बच्चे में साफ तौर पर दिखाई दे सकते हैं। इस स्टडी के अनुसार, इसके कारण न सिर्फ बच्चे का मानसिक व शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है, बल्कि बच्चे में चिंता, नींद, खराब सामाजिक व्यवहार, कमजोर शैक्षणिक प्रदर्शन और खराब शारीरिक स्तर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं (3)

बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारणों को समझने के लिए आगे पढ़ें।

बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण

ऐसे कई आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारक हैं, जो बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर के कारण हो सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (3):

  • बचपन में माता-पिता से बच्चे का अलग होना, जैसे – माता-पिता का तलाक होना, मृत्यु होना या किसी अन्य कारण से बच्चे से अलग होना।
  • माता-पिता का बच्चे के साथ न रहना, जैसे – नौकरी या व्यवसाय के कारण माता-पिता का बच्चे से दूर रहना।
  • माता-पिता में चिंता या एंग्जाइटी होना, खासतौर पर उन्हें पैनिक डिसऑर्डर होना।
  • माता-पिता का शराब का सेवन करना, आंकड़ों के अनुसार ऐसे पेरेंट्स के लगभग 14% बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर हो सकता है।
  • माता-पिता के रिश्ते में तनाव होना, जैसे – एक-दूसरे को अपशब्द कहना या लड़ाई-झगड़ा करना
  • घर की स्थितियों में बच्चे को शामिल न करना।
  • बच्चे के पालन-​​पोषण संबंधी देखभाल में लापरवाही या कमी होना।
  • व्यवसाय या नौकरी के चलते बार-बार किसी दूसरे क्षेत्र या शहर में शिफ्ट होना।
  • गर्भावस्था में स्मोकिंग या ड्रिंकिंग करना।
  • आंकड़ों के अनुसार, लड़कों की तुलना में लड़कियों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर अधिक हो सकता है। इस आधार पर ऐसा माना जा सकता है कि बच्चे का लड़की या महिला होना भी इसका एक कारण हो सकता है।

अब हम बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी के संकेत बता रहे हैं।

अलगाव चिंता विकार के लक्षण

बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी के लक्षण कई तरह के हो सकते हैं। अगर नीचे बताए गए निम्नलिखित सामाजिक, शैक्षणिक या व्यावहारिक तौर पर बच्चे में कम से कम तीन लक्षण दिखाई देते हैं, जो चार सप्ताह से अधिक रहते हैं, तो यह बच्चे में अलगाव का डर होना प्रदर्शित कर सकता है (1) (2) (3)। तो ये लक्षण कुछ इस प्रकार हैं:

मानसिक और सामाजिक तौर पर बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी के लक्षण:

  • बच्चे का लगातार घर से बाहर निकलने के लिए मना करना, जैसे – स्कूल, पार्क या अन्य जगहों पर जाने से इनकार करना।
  • बार-बार बुरे सपने आना।
  • बच्चे का बहुत ज्यादा चिंतित रहना।
  • बच्चे का खराब सामाजिक व्यवहार या संपर्क।
  • बच्चे की देखभाल करने वाले या पेरेंट्स से दूर जाने में बच्चे का इंकार करना।
  • अपहरण या खो जाने का डर होना।
  • घर में अकेले रहने का डर होना, जिस वजह से बच्चा अकेले रहने से बचने के लिए बहाने बनाता हो।
  • किसी काम में ध्यान लगाने में परेशानी होना।
  • चिड़चिड़ापन होना।
  • माता-पिता या मुख्य केयर टेकर के बिना सोने से मना करना।

शारीरिक तौर पर बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी के लक्षण:

  • सीने में दर्द होना।
  • मतली होना।
  • उल्टी करना।
  • सांस लेने में कठिनाई होना।
  • चक्कर आना।
  • आसामान्य रूप से हृदय गति का तेज होना।

आगे पढ़ें बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर होने के जोखिम क्या हैं।

अलगाव चिंता विकार के जोखिम कारक

बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर होने का जोखिम बढ़ाने के पीछे निम्नलिखित कारक हो सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (2) :

  • आनुवंशिक स्थिति यानी परिवार में चिंता या अवसाद का पारिवारिक इतिहास होना।
  • बच्चे का शर्मीला स्वाभाव होना।
  • सामाजिक या आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ होना।
  • बच्चे की परवरिश या देखभाल में कमी होना।
  • पारिवारिक या सामाजिक तौर पर कोई गंभीर घटना होना।
  • माता-पिता का तलाक लेना।
  • नए घर में शिफ्ट होना।
  • परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु होना।
  • शैक्षणिक तौर पर तनाव होना।
  • माता-पिता का बच्चे का बहुत ज्यादा देखभाल करना।

बच्चों में अलगाव का डर है या नहीं, इसका पुष्टि करने के तरीके नीचे पढ़ें।

बच्चे में सेपेरशन एंग्जायटी डिसऑर्डर का निदान कैसे किया जाता है?

बच्चे में सेपेरशन एंग्जायटी डिसऑर्डर का निदान करने के लिए कोई मेडिकल टेस्ट या परीक्षण नहीं किया जाता है, क्योंकि आमतौर पर यह सामान्य और मानसिक स्थिति से जुड़ी हो सकती है (1)। इसलिए, सेपरेशन एंग्जायटी अवॉइडेंस इन्वेंटरी (Separation Anxiety Avoidance Inventory) नामक एक थेरेपी विधि को अपनाकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चे में सेपेरशन एंग्जायटी डिसऑर्डर का निदान कर सकते हैं। इस दौरान बच्चे से जुड़े कई तरह की स्थितियों का आंकलन किया जा सकता है, जैसे (2) :

  1. बच्चे में एंग्जायटी के लक्षणों के आधार पर : अगर लेख में बताए गए विभिन्न मानसिक और शारीरिक लक्षणों में से बच्चे में चार से अधिक लक्षण दिखाई देते हैं, तो इसके आधार पर बच्चे में सेपेरशन एंग्जायटी डिसऑर्डर की पुष्टि की जा सकती है।

मानसिक लक्षण :

  • डिप्रेशन होना।
  • ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD) होना।
  • ओपोजिशनल डिफिएंट डिसऑर्डर (ODD) होना यानी बच्चे का गुस्सैल और अड़ियल बर्ताव होना।
  • बच्चे में भोजन विकार होना, जैसे – एनोरेक्सिया नर्वोसा (खाना खाने से बचने की आदत होना), एनोरेक्सिया बुलिमिया (खाने से संबंधित विकार), आदि।
  • कंडक्ट डिसऑर्डर होना, एक मानसिक विकार जिसकी वजह से बच्चे का सामाजिक स्तर प्रभावित हो सकता है। इसमें बच्चा चिड़चिड़ा या आक्रामक हो सकता है।

शारीरिक लक्षण :

  • बच्चे के सिर, पेट या सीने में दर्द होना।
  • बच्चे को दमा की समस्या होना।
  • बच्चे को मतली, उल्टी, चक्कर आना या सांस लेने में कठिनाई होना।
  • बच्चे की हृदय गति का आसामान्य रूप से तेज होना, आदि।
  1. लक्षणों के समय के आधार पर : अगर बच्चे में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर के विभिन्न लक्षण 4 सप्ताह से अधिक समय के लिए बने रहते हैं, तो यह बच्चे के मन में अलगाव के डर की पुष्टि कर सकते हैं। इस आधार पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चे में सेपेरशन एंग्जायटी डिसऑर्डर का निदान कर सकते हैं।
  1. मातापिता या केयर टेकर से बातचीत के आधार पर : स्वास्थ्य विषेशज्ञ बच्चे के पेरेंट्स और उसके अन्य अभिभावकों से भी बच्चे की निजी और सामाजिक व्यवहार के बारे में बातचीत कर सकते हैं। इससे बच्चा किस तरह की हरकते करता है, उसके व्यवहार का रवैया कैसा है, इन सब बातों को जानने में मदद मिल सकती है। जिस आधार पर बच्चे में सेपेरशन एंग्जायटी डिसऑर्डर का निदान करने में मदद मिल सकती है।
  1. बच्चे के एकाग्रता और निर्णय लेने की स्थिति के आधार पर : इस समस्या की वजह से अक्सर बच्चे को ध्यान केंद्रित करने या कोइ निर्णय लेने में कठिनाई का अनुभव हो सकता है। इसलिए, स्वास्थ्य विषेशज्ञ बच्चों के इस क्षमता को भी परख सकते हैं।

नोट : यह थेरेपी या स्क्रीन टेस्ट 6-7 साल से बड़ी उम्र के बच्चों के लिए की जा सकती है, क्योंकि इससे छोटी उम्र के बच्चों के बोलने और बातचीत करने की क्षमता अभी भी विकसित हो रही होती है।

बच्चे में अलगाव चिंता विकार के इलाज की प्रक्रिया क्या है, यह जानने के लिए इस भाग को पढ़ें।

अलगाव चिंता विकार का इलाज कैसे किया जाता है?

बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर का इलाज उनके लक्षणों और उसकी गंभीरता के आधार पर किया जा सकता है, जिसमें निम्नलिखित तरीके शामिल हो सकते हैं (3):

  1. बच्चे को प्रोत्साहन देना : बच्चे के मन से अलग होने का डर दूर करने के लिए उसे बातचीत के जरिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इससे बच्चे को स्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है और वे धीरे-धीरे अपने मन के इस डर को कम कर सकते हैं।
  1. संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (Cognitive Behaviour Therapy) : एनसीबीआई के अनुसार, संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी बच्चे के मन से अलग होने का डर कम करने में मदद कर सकती है (3)। इस थेरेपी के दौरान विभिन्न तरीकों से बच्चे के विचारों और भावनाओं में बदलाव लाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है। इससे बच्चे के मन में हो रही चिंता और अवसाद के लक्षण दूर करके उनमें सकारात्मक बदलाव लाई जा सकती है (4)
  1. सेलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर (Selective Serotonin Reuptake Inhibitors) : यह एक तरह का एंटीडिप्रेसेंट ड्रग थेरेपी है, जो 6 साल से बड़े बच्चों के लिए किया जा सकता है (3)। इस उपचार की विधि में अवसाद जैसे कई अन्य मानसिक स्थितियों के इलाज के लिए दवाओं की खुराक दी जा सकती है। हालांकि, इस ड्रग थेरेपी को शुरू करने से पहले स्वास्थ्य विषेशज्ञ बच्चे में इसके शुरुआती लाभ और दुष्प्रभाओं की भी निगरानी कर सकते हैं (5)
  1. पेरेंट चाइल्ड इंटरेक्शन थेरेपी (Parent–Child Interaction Therapy) या फैमिली थेरेपी : यह थेरेपी भी बच्चे में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर के इलाज में प्रभावकारी हो सकती है (1)। इस थेरेपी में बच्चे और परिवार के सदस्यों के बीच बातचीत और व्यवहार को बेहतर बनाए जाने का प्रयास किया जाता है, जो बच्चे को पेरेंट्स या अन्य सदस्यों के साथ घुलने-मिलने में मदद कर सकता है। इसके दो चरण होते हैं, जिनमें शामिल है (6) :
  • चाइल्ड डायरेक्ट इंटरेक्शन (Child-Directed Interaction) : बच्चे में एंग्जायटी दूर करने के लिए इस थेरेपी में माता-पिता और बच्चे के बीच के निजी संबंधों को परखा जाता है और उन्हें बेहतर बनाने का प्रयास किया जाता है। यह थेरेपी 6 चरणों में पूरी की जाती है। इस दौरान बच्चे के खेलने के तरीके से लेकर माता-पिता के साथ उनके अन्य व्यवहार में सकारात्मकता लाने का प्रयास किया जाता है (7)
  • पेरेंट डायरेक्ट इंटरेक्शन (Parent-Directed Interaction) : पहले चरण को पूरा करने के बाद इस दूसरे चरण को किया जाता है। इस चरण में बच्चे के प्रति माता-पिता के कड़े या नकारात्मक व्यवहार को अच्छा बनाने का प्रयास किया जाता है।
  1. ब्रेवेरी डायरेक्ट इंटरेक्शन (Bravery-Directed Interaction): इस थेरेपी में माता-पिता को उन कारकों को समझने के लिए शिक्षित किया जाता है, जिनकी वजह से बच्चा एंग्जायटी महसूस करता है। साथ ही, बच्चे के एंग्जायटी के लक्षणों को कैसे कम किया जाए व उसका प्रबंधन कैसे किया जाए, इस बारे में भी पेरेंट्स को ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अलावा, माता-पिता किस तरह बच्चे के किसी ब्रेवेरी या प्रोत्साहन से भरे व्यवहार को बढ़ावा दे सकते हैं, इस बारे में भी पेरेंट्स को ट्रेनिंग दी जाती है। इस दौरान माता-पिता को यह भी बताया जाता है कि वो बच्चे को निडर बनने और अपने डर का सामना करना सिखाने के लिए प्रोत्साहित करें (6)

नोट : इन थेरेपी से बच्चे के सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर की स्थिति में कितना सुधार हुआ है, इसका पता लगाने के लिए स्वास्थ्य चिकित्सक सेपरेशन एंग्जायटी अवॉइडेंस इन्वेंटरी की प्रक्रिया को दोबारा से शुरू कर सकते हैं। ऐसा करने से वो बच्चे की स्थिति में हुए सुधार का पता आसानी से लगा सकते हैं।

बच्चे के मन में अलग होने का डर रोकने के लिए क्या करें, यह भी यहां पढ़ सकते हैं।

बच्चे में अलगाव चिंता विकार को कैसे रोकें?

बच्चे के मन में अलग होने का डर पनपने से कैसे रोका जा सकता है, इस बारे में कोई विशेष तरीका या जानकारी उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विषेशज्ञों के अनुसार, अगर बच्चे में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षण दिखाई देते हैं, तो कुछ बातों पर गौर कर सकते हैं, जो इसकी रोकथाम करने में सहायक हो सकते हैं, जैसे (2):

  • जल्द से जल्द बच्चे में इसके लक्षणों की पुष्टि करनी चाहिए, ताकि समय रहते इसके लक्षणों को कम करके उनकी रोकथाम की जा सके।
  • अगर बच्चे के लक्षण गंभीर हो रहे हैं, तो स्वास्थ्य चिकित्सक की मदद लें।
  • अगर बच्चे में डिप्रेशन या अन्य मानसिक समस्याएं हैं, तो उसका उचित उपचार कराएं।
  • बच्चे को आत्मनिर्भर बनाएं। साथ ही घर के मामलों में भी उसकी भागीदारी को शामिल करें।
  • जितना हो सके बच्चे से बातचीत करें। ऐसा करने से माता-पिता पर बच्चे का भरोसा बढ़ सकता है, जिससे आसानी से वह अपने मन की बात बता सकता है।
  • बच्चे के मन में अगर किसी तरह का डर बन रहा है, तो उसे कम करने का प्रयास करें।

लेख में आखिरी में पढ़ें बच्चों में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर रोकने के लिए कुछ मददगार टिप्स।

अलगाव चिंता विकार से निपटने में बच्चे की मदद करने के लिए टिप्स

जैसा लेख में बताया गया है कि अलगाव चिंता विकार आमतौर पर मानसिक स्थिति और भावनाओं से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में बच्चे के मन में माता-पिता या किसी अन्य करीबी से दूर होने से जुड़े भय को दूर करके इसे रोकने में मदद मिल सकती है। इसके लिए माता-पिता या केयर टेकर निम्नलिखित बातों का ध्यान रख सकते हैं, जैसे :

  • बच्चे को घर में सुरक्षित महसूस कराएं।
  • बच्चे को माता-पिता या केयर टेकर के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों पर भी भरोसा करना सिखाएं।
  • बच्चे को बताएं कि अगर वह घर से बाहर जा रहे हैं, तो कुछ ही देर या समय में वापस आ जाएंगें।
  • शुरुआत में पेरेंट्स थोड़े ही समय के लिए बच्चे को अकेला छोड़ें। धीरे-धीरे जब बच्चा अन्य सदस्यों के साथ भी रहना सीख लेता है, तो जरूरत के अनुसार इस समय को बढ़ा सकते हैं।
  • बच्चे को अगर पहली बार किसी अंजान जगह या लोगों के बीच लेकर जा रहे हैं, तो ज्यादा से ज्यादा उसके साथ या उसके करीब रहें, ताकि बच्चे के मन में अलग होने का डर न हो।
  • अगर किसी बीमारी के कारण बच्चा अस्पताल में भर्ती है, तो वहां पर भी माता-पिता को बच्चे के साथ रहना चाहिए।
  • बच्चे के मन से माता-पिता या केयर टेकर से अलग होने का डर कम करें।
  • उम्र के अनुसार बच्चे को घर की विभिन्न गतिविधियों में शामिल करें। इससे बच्चा घरवालों के साथ आसानी से घुल मिल सकता है।
  • स्कूल से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में शामिल होने के लिए बच्चे को प्रोत्साहित करें।
  • बच्चे को बहादुरी से अपने डर का सामना करना सिखाएं।
  • बच्चे को दूसरों की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करें।

तो ये थे बच्चे में सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां। बड़े लोगों की तरह उनकी मानसिक स्थिति इतनी विकसित नहीं हुई होती है कि वो हर तरह के हालात को समझ सकें। इसलिए, जितना हो सके बच्चे से प्यार भरा व्यवहार करें। माता-पिता का प्यार भरा व्यवहार न सिर्फ बच्चे को सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर से बचा सकता है, बल्कि इसकी रोकथाम करने में भी मदद कर सकता है। साथ ही, उम्र के अनुसार बच्चे में हो रहे मानसिक और शारीरिक बदलावों की निगरानी रखें। सेपरेशन एंग्जायटी डिसऑर्डर या किसी अन्य डिसऑर्डर या रोग के लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टरी सलाह लें। इस लेख को अन्य लोगों के साथ शेयर जरूर करें। हो सकता है कोई बच्चा इससे पीड़ित हो, लेकिन जानकारी के अभाव में उसे इलाज न मिल पा रहा हो। इसलिए इस विषय में ज्यादा से ज्यादा जागरूकता बढ़ाएं।

References:

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