शिशुओं व बच्चों में दूध (Milk Allergy) से एलर्जी | Bachoo Me Dudh Se Allergy Hona

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बच्चों के खानपान का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि कई बार दिए जा रहे खाद्य पदार्थ बच्चों में एलर्जी का कारण बन सकते हैं। इसमें दूध से एलर्जी भी शामिल है, जो बच्चों में कई शारीरिक परेशानियों का कारण बन सकती है। इसलिए, समय रहते इसकी पहचान करना और जरूरी उपचार करवाना जरूरी है। यही वजह है कि मॉमजंक्शन के इस लेख में हम बच्चों में मिल्क एलर्जी के कारण, लक्षण और संबंधित उपचार बताने जा रहे हैं, ताकि आपके बच्चे की देखभाल में कोई कमी न आए। पूरी जानकारी के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

तो चलिए, सबसे पहले मिल्क एलर्जी के विषय में जान लेते हैं।

दूध से एलर्जी क्या है?

बच्चा जब दूध पीता है, तो उसमें पाए जाने वाले प्रोटीन से जो एलर्जिक प्रतिक्रिया होती है, उसे ही दूध से एलर्जी कहते हैं। यह मिल्क एलर्जी, स्तनपान करने वाले बच्चे और फॉर्मूला बेस्ड मिल्क का सेवन करने वाले बच्चों में भी देखी जा सकती है (1)। दरअसल, इम्यून सिस्टम इस प्रोटीन के खिलाफ आक्रामक हो जाता है और उसे सामान्य करने का प्रयास करने लगता है, जिससे शरीर हिस्टामाइन (ऐसा कंपाउड जो एलर्जी का कारण बनता है) जैसे रसायन छोड़ने लगता है और यही एलर्जी का कारण बनता है।

बता दें कि अगर किसी बच्चे को दूध से एलर्जी है, तो उसकी मां को चीज, दही और मक्खन समेत दूध के प्रोटीन से बने सभी खाद्य पदार्थ के सेवन करने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि गाय के दूध के प्रोटीन स्तन के माध्यम से बच्चे तक पहुंच सकते हैं, जिससे एलर्जी का खतरा बरकरार बना रह सकता है (2)

अब हम लैक्टोज इनटॉलेरेंस और दूध से एलर्जी के बीच का अंतर समझा रहे हैं।

क्या लैक्टोज इनटॉलेरेंस व दूध से एलर्जी दोनों एक ही हैं?

कई लोग लैक्टोज इनटॉलेरेंस और दूध से एलर्जी दोनों को एक मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। लैक्टोज इनटॉलेरेंस और दूध से एलर्जी दोनों अलग हैं। नीचे विस्तार से हम इसकी जानकारी दे रहे हैं (2) (3)

लैक्टोज इनटॉलेरेंस दूध से एलर्जी
यह पाचन से संबंधित समस्या है।यह इम्यून सिस्टम से संबंधित समस्या है।
इसमें छोटी आंत लैक्टेज (एक प्रकार का इंजाइम, जो लैक्टोज के पाचन में मदद करता है) को नहीं बना पाती है, जिससे शरीर लैक्टोज (दूध में मौजूद एक प्रकार का शुगर) का पाचन ठीक से नहीं पाता है।इसमें इम्यून सिस्टम दूध में मौजूद प्रोटीन के खिलाफ प्रतिक्रिया देता है। इसके बाद शरीर द्वारा हिस्टामाइन नामक रसायन रिलीज होता है, जो एलर्जी का कारण बनता है।
इसमें पेट में ऐंठन, गैस, मतली और दस्त की समस्या हो सकती है।इसमें उल्टी, पेट में ऐंठन, त्वचा पर चकत्ते, दस्त आदि समस्याएं हो सकती हैं।

चलिए अब जान लेते हैं कि शिशुओं में दूध से एलर्जी कितनी आम है।

शिशुओं में दूध से एलर्जी कितनी आम है?

शिशुओं में दूध की एलर्जी एक आम खाद्य एलर्जी है। यह लगभग 2 से 3 प्रतिशत बच्चों को प्रभावित कर सकती है। (4)। वहीं, एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर मौजूद एक रिसर्च पेपर के अनुसार, गाय के दूध से एलर्जी बच्चों में होने वाली सबसे आम एलर्जी है। यह विकसित देशों में 0.5 प्रतिशत से लेकर 3 प्रतिशत बच्चों (एक साल के) को प्रभावित कर सकती है (5)

लेख के इस हिस्से में हम दूध से होने वाली एलर्जी के लक्षणों की जानकारी दे रहे हैं।

नवजात शिशुओं व बच्चों में दूध से एलर्जी होने के लक्षण

जिन बच्चों को दूध से एलर्जी होती है, उनमें दूध पीने के बाद उसके लक्षण तुरंत सामने दिखने लगते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (2) :

  • हाइव्स (त्वचा पर लाल और खुजलीदार चकत्ते)
  • घरघराहट करना
  • मुंह या होंठ के आसपास खुजली या झुनझुनी महसूस होना
  • होंठ, जीभ या गले में सूजन
  • बच्चों में खांसी होना
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • बच्चों में उल्टी होना
  • एनाफिलेक्सिस (गंभीर एलर्जी)

इसके अलावा, दूध से एलर्जी के कुछ अन्य लक्षण भी हैं, जो धीरे-धीरे सामने आ सकते हैं, वो सभी कुछ प्रकार हैं :

  • दस्त होना
  • हेमेटोचेजिया (गुदा मार्ग से मल के साथ रक्तस्राव)
  • पेट में ऐंठन
  • बच्चों में कॉलिक (शिशुओं का घंटों रोना)

मिल्क एलर्जी के लक्षण जानने के बाद इसके कारणों को भी जान लें।

बच्चों में दूध से एलर्जी होने के कारण

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि इम्यून सिस्टम जब गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन के खिलाफ प्रतिक्रिया देता है, तो इसके बाद शरीर द्वारा हिस्टामाइन नामक रसायन रिलीज होता है और यही रसायन एलर्जी का कारण बनता है (2)। इसके अलावा, एक रिपोर्ट के अनुसार जिन बच्चों को गाय के दूध से एलर्जी है, उन्हें बकरी का दूध या फिर भेड़ और भैंस के दूध से भी एलर्जी हो सकती है (6)। इसके अलावा, यह समस्या आनुवंशिक भी हो सकती है (7)

यहां हम दूध के एलर्जी के निदान की जानकारी दे रहे हैं।

बच्चों में दूध से एलर्जी का परीक्षण

रिसर्च की मानें, तो दूध से एलर्जी का पता लगाने के लिए कोई खास परीक्षण नहीं है। हालांकि, कुछ ऐसे उपाय हैं, जिसकी मदद से डॉक्टर इसका निदान कर सकते हैं। हम नीचे क्रमवार तरीके से उन्हीं उपायों की चर्चा कर रहे हैं (2) (8) :

  • डॉक्टर शिशु के माता पिता से बच्चे में दिखने वाले लक्षण और स्वास्थ्य समस्या के बारे में पूछ सकते हैं।
  • इसके बाद डॉक्टर स्किन प्रिक टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। इसमें डॉक्टर त्वचा की जांच करते हैं। इसके लिए त्वचा पर मिल्क प्रोटीन का एक छोटा सा हिस्सा रखा जाता है, फिर त्वचा पर एक हल्की सी खरोंच दी जाती है। अगर बच्चे की त्वचा इसके प्रति प्रतिक्रिया देती है, तो वहां पर हल्की सूजन पड़ सकती है।
  • इसके अलावा डॉक्टर बच्चे का ब्लड टेस्ट भी कर सकते हैं।
  • बच्चे के मल की जांच भी की जा सकती है।
  • अगर किसी बच्चे में मिल्क एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे एक महीने तक गाय के दूध के प्रोटीन से मुक्त आहार दिया जा सकता है। अगर उसके लक्षणों में सुधार होता है, तो इसे मिल्क एलर्जी की समस्या कहा जा सकता है।

लेख के अगले भाग में हम दूध से एलर्जी के कारण होने वाली परेशानियों का जिक्र कर रहे हैं।

बच्चों को मिल्क एलर्जी से होने वाली परेशानियां

बच्चों में दूध से एलर्जी के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियां हो सकती है। इसमें पेट में ऐंठन व दस्त के अलावा, कई अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें निम्नलिखित को शामिल किया जा सकता है (2) :

  • हेमेटोचेजिया : गाय के दूध से एलर्जी के कारण बच्चों के गुदा मार्ग से रक्तस्राव (मल के साथ) की समस्या हो सकती है।
  • सांस लेने में तकलीफ : गाय के दूध से एलर्जी के कारण बच्चे को सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है।
  • विटामिन-डी की कमी : एनसीबीआई की साइट पर मौजूद एक रिसर्च के अनुसार, जिन बच्चों को दूध से एलर्जी होती है, उनमें विटामिन-डी की कमी हो सकती है (9)
  • कैल्शियम की कमी : बच्चों को अगर अधिक दिनों तक दूध का सेवन नहीं कराया जाता है, तो उस कारण बच्चों में कैल्शियम की भी कमी हो सकती है। इस कारण उन्हें रिकेट्स (बच्चों की हड्डियों का नरम और कमजोर होना) हो सकता है (10)
  • एनाफिलेक्सिस : मिल्क एलर्जी से होने वाली समस्याओं में एनाफिलेक्सिस भी शामिल है। यह एक गंभीर प्रकार की एलर्जी है, जो पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है (11)। इससे प्रभावित बच्चे को पेट में दर्द के साथ दस्त, सांस लेने में परेशानी व त्वचा पर लाल चकत्ते जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है (12)

स्क्रॉल करके पढ़ें बच्चों में दूध से एलर्जी का इलाज।

बच्चों में दूध से एलर्जी का इलाज

बच्चों में दूध से एलर्जी का इलाज कई तरीकों से किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक रिसर्च पेपर के मुताबिक, अगर किसी बच्चे को दूध-मुक्त आहार दिया जाता है, तो इसके लिए बच्चे को दूध में पाए जाने वाले पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, विटामिन डी और राइबोफ्लेविन के लिए सप्लीमेंट लेने की आवश्यकता हो सकती है (2)। इसके अलावा, नीचे दिए गए उपाय भी किए जा सकते हैं :

  • स्तनपान : जिन नवजात को दूध से एलर्जी का जोखिम ज्यादा होता है, उन बच्चों को स्तनपान की सलाह दी जाती है। इसके लिए मां को चीज, दही और मक्खन समेत दूध के प्रोटीन से बने सभी खाद्य पदार्थों को अपने आहार से हटाने की सलाह दी जाती है।
  • हाइपोएलर्जेनिक फॉर्मूला : दूध से एलर्जी के इलाज के लिए इस फॉर्मूले की भी सलाह दी जा सकती है। इनमें वो मिल्क प्रोटीन मौजूद होता है, जिन्हें पहले से ही छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है, ताकि दूध बच्चों में एलर्जी का कारण न बने (13)। यह वैसे बच्चों को दिया जाता है, जिन्हें दूध प्रोटीन से एलर्जी होती है। हालांकि, यह फॉर्मूला अन्य फॉर्मूला की तुलना में थोड़े महंगे होते हैं (14)
  • एक्यूट ट्रीटमेंट : अगर लाख बचाव के बाद भी बच्चा दूध का सेवन कर लेता है और उसे एलर्जी हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में एंटीहिस्टामाइन दवाइयों की सलाह दी जा सकती है। ये दवाइयां एलर्जी के रिएक्शन को कम करने में मदद कर सकती हैं।
  • एपिनेफ्रीन इंजेक्शन : यह एक प्रकार का इंजेक्शन होता है। इसका उपयोग गंभीर एलर्जी की समस्या के दौरान डॉक्टर द्वारा किया जा सकता है।
    लेख के अंत में हम जानेंगे कि इस समस्या के लिए डॉक्टर से कब मिलना चाहिए।

डॉक्टर से कब मिले

लेख के शुरुआत में ही हमने दूध से एलर्जी के लक्षणों के बारे में बताया है, अगर बच्चों में दूध पीने के बाद इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए डॉक्टर के पास जाना चाहिए। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि अपनी मर्जी से किसी भी तरीके की दवा का सेवन बच्चों को न कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. दूध से एलर्जी वाले बच्चे को क्या दें?

जिन बच्चों को दूध से एलर्जी है, उन्हें डॉक्टरी परामर्श पर विटामिन-डी युक्त और बिना फ्लेवर वाला सोया मिल्क, ट्री नट मिल्क (बादाम, नारियल, काजू या अन्य) और राइस मिल्क का सेवन कराया जा सकता है (15)। वहीं, अगर शिशु बहुत छोटा है, तो उसके लिए स्तनपान की सलाह दी जाती है। वहीं, मां को स्तनपान के दौरान इस बात का ध्यान रखना होगा कि वो दूध व दूध उत्पाद का सेवन न करें। वहीं, इस विषय पर डॉक्टर से भी बात जरूर करें।

2. मिल्क एलर्जी वाले बच्चे के लिए सबसे अच्छा फॉर्मूला मिल्क क्या है?

दूध से एलर्जी वाले बच्चों के लिए हाइपोएलर्जेनिक फॉर्मूला (जिनमें मिल्क प्रोटीन को पहले से ही छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है) एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है (14)। इसके अलावा, अमीनो एसिड फॉर्मूले की सलाह गंभीर मामलों में दी जा सकती है (16)

इस लेख में हमने बच्चों में मिल्क एलर्जी के विषय में विस्तार से बताया है। हम उम्मीद करते हैं कि आप मिल्क एलर्जी के विषय में बहुत कुछ जान गए होंगे। जैसा कि हमने लेख में बताया कि यह समस्या गंभीर परेशानियों का कारण भी बन सकती है, इसलिए समय रहते इसके लक्षणों की पहचान जरूर करें और जरूरी इलाज करवाएं। वहीं, मिल्क एलर्जी के दौरान बच्चों के सही खान-पान से जुड़ी जानकारी भी डॉक्टर से जरूर लें। हम आशा करते हैं कि यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा।

हैप्पी पैरेंटिंग।

संदर्भ (References) :