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डिलीवरी के बाद मूत्र असंयमितता : कारण, इलाज व व्यायाम | Urine Incontinence After Delivery In Hindi

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गर्भावस्था के दौरान शारीरिक बदलावों के कारण एक गर्भवती कई समस्याओं का सामना करती है। वहीं, कुछ समस्याएं डिलीवरी के बाद भी महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। इसमें एक नाम पेशाब असंयमितता का भी है, यानी प्रसव के बाद यूरिन पर नियंत्रण न रख पाना। आइये, मॉमजंक्शन के इस लेख में जानते हैं प्रसव के बाद पेशाब असंयमितता के कारण, प्रकार और इससे निजात पाने के उपाय। साथ ही अन्य जरूरी जानकारी भी यहां साझा की गई हैं।

आइये, सबसे पहले डिलीवरी के बाद पेशाब असंयमितता को समझते हैं।

प्रसव के बाद पेशाब असंयमितता होना क्या है?

आसान शब्दों में समझें, तो पेशाब असंयमितता वह स्थिति होती है, जब पेशाब को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है और वह मूत्रमार्ग से बाहर निकलने लगता है (1)। यह समस्या डिलीवरी के बाद भी एक महिला को हो सकती है। दरअसल, पेशाब किडनी द्वारा बनाया जाता है, जो मूत्राशय में जमा होता है। जब किसी को पेशाब करने की आवश्यकता पड़ती है, तो मूत्राशय में मौजूद मांसपेशियां टाइट हो जाती हैं, जिससे पेशाब मूत्रमार्ग के माध्यम से बाहर निकलता है। इस दौरान मूत्रमार्ग के चारों तरफ फैली स्फिंक्टर मांसपेशियां आराम करती हैं, ताकि मूत्र का रिसाव ठीक से हो।

वहीं, प्रसव के बाद पेशाब असंयमितता की स्थिति तब पैदा हो जाती है, जब मूत्राशय की मांसपेशियां अचानक टाइट हो जाती हैं और स्फिंक्टर मांसपेशियां इतनी मजबूत नहीं रहतीं कि वो मूत्रमार्ग को बंद कर सकें। इसके परिणामस्वरूप मूत्र का रिसाव होने लगता है। यह रिसाव हंसने, छींकने या व्यायाम करने के समय भी हो सकता है (2)

नीचे जानिए डिलीवरी के बाद पेशाब असंयमितता होने के कारण।

डिलीवरी के बाद पेशाब असंयमितता के कारण | Delivery Ke Baad Urine Leakage Problem In Hindi

प्रसव के दौरान मूत्राशय या यूरिन पास करने में मदद करने वाली मांसपेशियां और नसें कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे मूत्र को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है (2)। इसके अलावा और भी कई कारण हैं, जिनकी वजह से डिलीवरी के बाद यह स्थिति पैदा हो सकती है :

  • अधिक वजन : अधिक वजन होने से मूत्राशय पर दबाव पड़ता है, जो समय के साथ मांसपेशियों को कमजोर कर सकता है और एक कमजोर मूत्राशय अधिक मूत्र नहीं जमा कर पाता है। इससे पेशाब असंयमितता की स्थिति पैदा हो सकती है।
  • कब्ज : पेशाब असंयमितता की समस्या कब्ज के कारण भी हो सकती है। दरअसल, क्रॉनिक कब्ज (लंबे समय से चला आ रहा) के कारण मूत्राशय और पेल्विक फ्लोर (पेल्विक के तल में पाई जाने वाली मांसपेशियों का समूह) की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है। इससे मूत्र को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और यूरिन लीकेज हो सकता है।
  • तंत्रिका क्षति : मूत्राशय से जुड़ी तंत्रिकाएं (नर्व) अगर क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो इससे भी पेशाब असंयमितता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। दरअसल, प्रसव या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं जैसे मधुमेह और मल्टीपल स्केलेरोसिस (तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्या, जो मस्तिष्क और रीढ़ को नुकसान पहुंचाती है) के कारण मूत्राशय, मूत्रमार्ग और पेल्विक फ्लोर से जुड़ी तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, इससे मूत्राशय तक पहुंचने वाला सिग्नल बाधित हो सकता है या गलत समय पर पहुंच सकता है।
  • सर्जरी : ऐसी कोई भी सर्जरी जिसमें महिला का प्रजनन अंग शामिल हो, जैसे हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय को हटाने के लिए एक सर्जरी) पेल्विक फ्लोर की सहायक मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकती है। खासकर, जब गर्भाशय को हटा दिया जाता है। अगर पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, तो मूत्राशय की कार्यप्रणाली बाधित हो सकती है, जिससे यूरिन लीकेज की स्थिति पैदा हो सकती है।

कभी-कभी पेशाब असंयमितता केवल थोड़े समय के लिए भी हो सकता है, जिसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं (2) :

  • कुछ दवाएं : पेशाब असंयमितता कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण भी हो सकता है, जैसे – मूत्रवर्धक। जब इस दवा का सेवन करना बंद कर देते हैं, तो यह समस्या ठीक हो सकती है।
  • कैफीन : कैफीन युक्त पेय पदार्थों के सेवन से मूत्राशय जल्दी भर सकता है, जिससे मूत्र रिसाव हो सकता है। माना जाता है कि जो महिलाएं दिन में दो कप से ज्यादा कैफीन युक्त पेय पदार्थ का सेवन करती हैं, उनमें इस समस्या का जोखिम बढ़ सकता है।
  • संक्रमण : मूत्राशय और मूत्र पथ में संक्रमण के कारण भी थोड़े समय के लिए मूत्र के रिसाव की समस्या हो सकती है। संक्रमण के खत्म हो जाने पर स्थिति पहले जैसे हो सकती है।

नीचे जानिए मूत्र असंयमितता के जोखिम से जुड़ी जानकारी।

डिलीवरी के बाद मूत्र असंयमितता का जोखिम किसे ज्यादा होता है?

डिलीवरी के बाद मूत्र असंयमितता होने का जोखिम निम्नलिखित महिलाओं में ज्यादा हो सकता है :

  1. नॉर्मल डिलीवरी : एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर उपलब्ध एक शोध की मानें, तो नॉर्मल डिलीवरी कराने वाली महिलाओं में स्ट्रेस इनकॉन्टीनेंस (मूत्र असंयमितता का एक प्रकार) का जोखिम उन महिलाओं की तुलना में 2 से 3 गुना अधिक हो सकता है, जिन्होंने अभी तक बच्चे को जन्म नहीं दिया है (3)
  1. सिजेरियन सेक्शन : वहीं, सिजेरियन सेक्शन द्वारा प्रसव करने वाली महिलाओं में स्ट्रेस इनकॉन्टीनेंस का जोखिम 50 प्रतिशत अधिक हो सकता है (3)
  1. मोटापा : वहीं, डिलीवरी के बाद मोटापे की समस्या और अधिक वजन से जूझ रही महिलाओं में भी मूत्र असंयमितता का जोखिम बना रहता है (4)
  1. 37 से 54 वर्ष की महिलाएं : वहीं, उम्र के हिसाब से बात करें, तो 37 से 54 वर्ष की महिलाओं में मूत्र असंयमितता का खतरा ज्यादा होता है (5)

अब हम पेशाब असंयमितता के प्रकारों की चर्चा करेंगे।

डिलीवरी के बाद पेशाब असंयमितता के प्रकार

महिलाओं में पेशाब असंयमितता के प्रकार निम्नलिखित हैं (2) :

  • स्ट्रेस इनकॉन्टीनेंसयह पेशाब असंयमितता का सबसे आम प्रकार है। स्ट्रेस इनकॉन्टीनेंस तब होता है, जब कमजोर पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मूत्राशय और मूत्रमार्ग पर दबाव डालती हैं, जिससे उन्हें ज्यादा काम करना पड़ता है। इस स्थिति में खांसने या हंसने से यूरिन लीकेज हो सकता है।
  • अर्ज इनकॉन्टीनेंस : यह वो स्थिति होती है, जब महिला में अचानक बहुत ज्यादा ही यूरिन पास करने की इच्छा उत्पन्न हो जाती है। ऐसी स्थिति में महिलाएं समय पर तो बाथरूम जा पाती हैं, लेकिन दिन भर में उन्हें आठ से अधिक बार यूरिन पास करने की इच्छा महसूस हो सकती है। वहीं, बाथरूम जाने के बाद वह ज्यादा यूरिन पास नहीं कर पाती हैं। इसे ‘ओवरएक्टिव ब्लैडर’ भी कहा जाता है।
  • मिश्रित असंयम : यह वो स्थिति होती है, जिसमें महिलाओं को स्ट्रेस इनकॉन्टीनेंस और अर्ज इनकॉन्टीनेंस की समस्या एक साथ होती है।

नीचे जानिए पेशाब असंयमितता के लक्षण।

डिलीवरी के बाद पेशाब असंयमितता के लक्षण

पेशाब असंयमितता के लक्षण कुछ इस प्रकार सामने आ सकते हैं (2) :

  • पेल्विक (श्रोणि) क्षेत्र में दबाव या ऐंठन के कारण अचानक पेशाब करने की इच्छा उत्पन्न होना।
  • सामान्य से अधिक बार बाथरूम जाना (दिन में आठ बार या रात में दो बार से अधिक)।
  • सोते समय (बिस्तर पर) पेशाब करना।
  • खांसने, छींकने या हंसने पर मूत्र का रिसाव।

नीचे जानिए डिलीवरी के बाद पेशाब असंयमितता की स्थिति कब तक बनी रह सकती है।

प्रसव के बाद कितने समय तक मूत्र असंयमितता की समस्या बनी रहती है?

एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिसर्च से पता चलता है कि प्रसव के 6 महीने बाद तक महिलाओं में पेशाब असंयमितता की स्थिति बनी रह सकती है (6)। हालांकि, महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार यह समय कम-ज्यादा भी हो सकता है। चाहें, तो इस विषय में डॉक्टर से बात कर सकते हैं।

यहां हम बताएंगे कि पेशाब असंयमितता का इलाज किस प्रकार किया जा सकता है।

मूत्राशय पर नियंत्रण के लिए इलाज

मूत्राशय पर नियंत्रण का उपचार उसके प्रकार और कारण पर निर्भर करता है। वहीं, डॉक्टर इसका इलाज करने से पहले घर में ही कुछ बातों का ध्यान रखने का सुझाव दे सकता है, जो कुछ इस प्रकार हैं (7) :

मूत्र के रिसाव को कम करने के लिए जीवनशैली से जुड़े सुझाव : 

  •  सही समय पर और सही मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन
  •  शारीरिक रूप से सक्रिय रहना
  •  वजन नियंत्रित रखना
  •  कब्ज से बचाव
  • धूम्रपान नहीं करना

ब्लैडर ट्रेनिंग : इसमें डॉक्टर, ब्लैडर डायरी के अनुसार महिला से मूत्र के रिसाव के लिए एक समय सूची बनवाता है, जिसका पालन महिला को नियमित रूप से करना होता है। ऐसा करने से यूरिन को रोके रखने में मदद मिल सकती है।

पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए व्यायाम : दरअसल, कमजोर पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की तुलना में मजबूत पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां यूरिन को अधिक देर तक रोककर रख सकती हैं। इसलिए, यूरिन फ्लो को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियों को आराम दिलाने और उन्हें मजबूत करने के लिए कीगल एक्सरसाइज की जा सकती है। इसे करने का तरीका आगे बताया गया है।

अगर ऊपर बताए गए उपचार काम नहीं करते हैं, तो डॉक्टर निम्नलिखित दवाइयों का सुझाव दे सकते हैं :

  • कुछ ऐसी दवाइयां, जो मूत्राशय की मांसपेशियों को आराम दें और मूत्राशय की ऐंठन को रोकने में मदद कर सकें।
  • इसके अलावा, नर्व (तंत्रिका) के संकेतों को रोकने के लिए भी कुछ दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है, जो बार-बार और किसी भी समय यूरिन पास करने का कारण बनती हैं।

मूत्राशय पर नियंत्रण के लिए कुछ उपकरणों के उपयोग की सलाह डॉक्टर दे सकते हैं

  • कैथेटर का उपयोग : यह शरीर से मूत्र को बाहर ले जाने वाला एक ट्यूब होता है। इसका उपयोग दिन में एक बार या जब जरूरत लगे तब किया जा सकता है।
  • टैम्पोन जैसे उपकरण का उपयोग : इसे योनि में प्रवेश कराया जाता है। इसकी मदद से यूरिन लीकेज को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • बल्किंग एजेंट्स : इसे ब्लैडर नेक और मूत्रमार्ग के ऊतकों में इंजेक्ट किया जाता है, ताकि उन्हें मोटा किया जा सके। यह मूत्राशय को मुंह को छोटा करने में मदद कर सकता है, ताकि मूत्र का रिसाव कम हो सके।
  • सर्जरी : अगर ऊपर बताए गए किसी भी इलाज से आराम नहीं मिलता है, तो सर्जरी का सहारा लिया जा सकता है। इसके माध्यम से मूत्राशय को अपनी सामान्य स्थिति लाया जाता है।

नीचे जानिए मूत्राशय पर नियंत्रण के लिए व्यायाम।

पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों के लिए कीगल व्यायाम

कीगल व्यायाम को पेल्विक फ्लोर मसल्स ट्रेनिंग भी कहा जाता है। यह पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों के लिए एक व्यायाम है, जो स्ट्रेस इनकॉन्टीनेंस को रोकने या कम करने में मदद कर सकता है। यहां हम इस व्यायाम को करने का सही तरीका बता रहे हैं (2) :

  • कीगल व्यायाम को करने के लिए सबसे पहले लेट जाएं। लेटकर करने से इस व्यायाम को सही तरीके से करना आसान हो जाता है। वहीं, अभ्यस्त होने के बाद इसे लेट कर करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • अब अपने जननांग क्षेत्र की मांसपेशियों को ठीक वैसे ही दबाएं जैसे मूत्र या गैस के प्रवाह को रोकने के लिए दबाव बनाते हैं। इस समय ध्यान रखें कि पेट और पैर की मांसपेशियों में दबाव न बने। यह दबाव केवल पेल्विक की मांसपेशियों के लिए ही होना चाहिए।
  • तीन सेकंड आराम करें। इसके बाद फिर से वैसे ही मांसपेशियों पर दबाव बनाएं और 3 सेकंड इसी स्थिति में बने रहें। फिर 3 सेकंड के लिए आराम करें। प्रत्येक दिन इसे 10 बार इसके 3 सेट करें।
  • इस व्यायाम को कहीं भी कर सकते हैं। जब मांसपेशियां मजबूत हो जाएं, तो इस एक्सरसाइज को बैठकर या फिर खड़े होकर करने की कोशिश करें। इसका अभ्यास किसी भी समय कर सकते हैं, जैसे बैठकर काम करने के दौरान या खाना बनाते वक्त। बस ध्यान रहे कि पेशाब करते समय इस व्यायाम को न करें। ऐसा करने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।

आगे जानिए कि डिलीवरी के बाद पेशाब असंयमितता से कैसे बचा जा सकता है।

डिलीवरी के बाद पेशाब असंयमितता से बचाव के तरीके

प्रसव के बाद पेशाब असंयमितता से बचाव के लिए नीचे बताए गए तरीकों को अपनाया जा सकता है (8) (1) :

  • तरल पदार्थ का खूब सेवन करें।
  • शारीरिक गतिविधियां करते रहें।
  • शौचालय की अच्छी आदतों को अपनाएं।
  • स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं।
  • कब्ज से बचने के लिए मल त्याग को नियमित रखें।
  • खांसी और मूत्राशय की जलन को कम करने के लिए धूम्रपान छोड़ें। बता दें कि धूम्रपान मूत्राशय के कैंसर का जोखिम बढ़ा सकता है।
  • अल्कोहल और कैफीन युक्त पेय पदार्थों (कॉफी) के सेवन से बचें। ये मूत्राशय को उत्तेजित कर सकते हैं।
  • वजन को नियंत्रित रखें।
  • उन खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों के सेवन से बचें, जो मूत्राशय में जलन पैदा कर सकते हैं। इनमें मसालेदार भोजन, कार्बोनेटेड पेय और खट्टे फल और रस शामिल हैं।
  • अगर किसी को मधुमेह है, तो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने की कोशिश करें।
  • मूत्र के रिसाव को सोखने के लिए पैड का इस्तेमाल करें।

लेख के अंत में जानिए डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए।

डॉक्टर से कब परामर्श करें

निम्नलिखित स्थितियों के सामने आने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें (1) :

  • अगर चलने या बोलने में कठिनाई हो रही हो।
  • नजर कमजोर होने लगे।
  • भ्रम की स्थिति।
  • मल त्याग पर नियंत्रण न रहने पर।

इसके अलावा, इन लक्षणों के दिखने पर भी डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए :

  • पेशाब का रंग धुंधला होना या फिर उसमें खून का आना।
  • ड्रिब्लिंग (पेशाब का बूंद-बूंद टपकना)।
  • बार-बार या तुरंत पेशाब करने की आवश्यकता।
  • पेशाब करने पर दर्द या जलन।
  •  मूत्र प्रवाह को शुरू करने में परेशानी।

प्रसव के बाद महिलाओं में पेशाब असंयमितता की समस्या हो सकती है, लेकिन इसे लेकर बिल्कुल भी न घबराएं, बल्कि अपने डॉक्टर से बात करें। इसके अलावा, इस समस्या के जोखिम को कम करने के लिए महिलाएं लेख में बताए गए बचाव के तरीकों को अपना सकती हैं। इस बात का ध्यान रखें कि आपकी जागरूकता ही प्रसव के बाद पेशाब असंयमितता की गंभीरता को कम कर सकती है। हम उम्मीद करते हैं कि यहां साझा की गई जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। इस तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए मॉमजंक्शन के साथ बने रहें।

संदर्भ (References) :

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