एग फ्रीजिंग क्या है? फायदे, जोखिम व प्रक्रिया | Egg Freezing Meaning & Process In Hindi

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एग फ्रीजिंग, एक नई आर्टिफिशियल प्रेगनेंसी तकनीक है। इस तकनीक में महिला के अंडे को फ्रीज किया जाता है, जिसे भविष्य में महिला गर्भधारण के लिए उपयोग कर सकती है (1)। अन्य आर्टिफिशियल प्रेगनेंसी से एग फ्रीजिंग प्रक्रिया कैसे अलग है और इसके फायदे व नुकसान क्या हैं, समझाने के लिए मॉमजंक्शन यह लेख लेकर आया है। यहां हम एग फ्रीजिंग से जुड़े आपके हर संशय को दूर करने के लिए रिसर्च के आधार पर जानकारी दे रहे हैं।

सबसे पहले जानें कि एग फ्रीजिंग करवाना चाहिए या नहीं।

क्या एग फ्रीजिंग करवाना सुरक्षित है?

हां, एग फ्रीजिंग करवाना सुरक्षित होता है (1)। इसकी पुष्टि एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) द्वारा भी की गई है। इस रिसर्च के अनुसार, अगर महिला को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिससे उसकी प्रजनन क्षमता कमजोर हो सकती है, तो वह भविष्य में सुरक्षित गर्भधारण करने के लिए एग फ्रीजिंग का विकल्प अपना सकती है (2)। एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया को औसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन (Oocyte Cryopreservation) भी कहा जाता है (1)।

अब पढ़ें कि अंडे को फ्रिज क्यों किया जाता है।

अंडे को फ्रिज क्यों करते हैं?

एग फ्रीजिंग कराने के पीछे कई वजह हैं। इनमें चिकत्सकीय व सामाजिक दोनों ही कारण शामिल हैं (3)। इनके बारे में नीचे विस्तर से पढ़िए।

  1. भविष्य के लिए – सबसे पहले तो यह समझें कि हर महिला के गर्भ में प्रजनन आयु में अंडे बनने लगते हैं। इन्हीं अंडों के जरिए भविष्य में वह गर्भधारण करती है। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ने लगती है, इन अंडों की संख्‍या भी कम होने लगती है। ऐसे में महिला की फर्टिलिटी क्षमता कमजोर होने लगती है। यही वजह है कि महिलाओं के लिए अधिक उम्र में गर्भावस्था के चरण जोखिम भरे माने जाते हैं। ऐसे में महिला अपने अंडों को फ्रीज करा कर भविष्य में अधिक उम्र होने पर भी गर्भवती होने की संभावना को सुरक्षित रख सकती है (1)।
  1. गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर – अगर महिला को ऐसी कोई स्वास्थ्य परेशानी व बीमारी है, जो उसकी प्रजनन क्षमता को कमजोर कर सकती है, तो भी महिला एग फ्रीजिंग करा सकती है। फिर उस बीमारी से निजात पाने के बाद फ्रीज किए हुए अंडों से भविष्य में सुरक्षित गर्भधारण किया जा सकता है (2)।
  1. आईवीएफ (IVF) के लिए – आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन को आर्टिफिशियल प्रेगनेंसी भी कहा जा सकता है। जब महिला किसी कारणवश गर्भधारण नहीं कर पाती, तो वो आईवीएफ की प्रक्रिया से मां बनने का सपना साकार कर सकती है (4)। आईवीएफ तकनीक में भी एग फ्रीजिंग को कारगर पाया गया है (5)। मतलब आईवीएफ के जरिए महिला स्वंय अपने अंडे को फ्रीज करा कर गर्भधारण कर सकती है या किसी दूसरी महिला को एग डोनेट करके गर्भधारण करने में मदद कर सकती है।

एग फ्रीजिंग के लिए सही उम्र क्या है, आगे इसके बारे में पढ़ें।

किस उम्र में कराना चाहिए एग फ्रीजिंग?

एग फ्रीजिंग के लिए 20 से 30 वर्ष की उम्र सबसे उचित हो सकती है। दरअसल, इस उम्र के बीच महिलाओं को सबसे अधिक स्वस्थ माना जाता है। उनके गर्भ में अंडों की संख्या भी अधिक होती है, जिस वजह से इस दौरान उनकी प्रजनन क्षमता भी काफी अच्छी होती है। ऐसे में उनके अंडे को फ्रीज करके उससे सुरक्षित गर्भावस्था की संभावना को 70% तक बढ़ाया जा सकता है (1)।

एनसीबीआई भी इसकी पुष्टि करता है कि कम उम्र में एग फ्रीजिंग कराना बहुत लाभकारी होता है। रिसर्च पेपर में बताया गया है कि 34 वर्ष की आयु तक एग को फ्रीज कराया जा सकता है। साथ ही शोध में इस बात का भी जिक्र मिलता है कि 37 साल की उम्र में कराई गई एग फ्रीजिंग प्रक्रिया से भी स्वस्थ गर्भावस्था की संभावना रहती है (6)।

एग फ्रीजिंग के लिए कितने अंडों की जरूरत होती है, आगे हम इसकी भी जानकारी दे रहे हैं।

प्रेगनेंसी के लिए कितने एग फ्रीज किए जाते हैं?

Egg Freezing Meaning & Process In Hindi 1

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बढ़ती उम्र के साथ महिला के अंडाशय पर विकसित होने वाले अंडों की संख्या व गुणवत्ता घटने लगती है। इसी वजह से भविष्य में गर्भावस्था के लिए कितने अंडे फ्रीज कराने चाहिए, यह पूरी तरह से महिला के स्वास्थ्य व उम्र पर निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर, 30 की उम्र की शुरुआत के बाद महिला के पास 15 से 20 अंडे हो सकते हैं, जो 40वें दशक में आमतौर पर कम हो जाते हैं। ऐसे में उम्र के अनुसार, एग फ्रीज करने की संख्या कितनी होनी चाहिए, यह नीचे पढ़िए (1)।

  • 35 वर्ष या उससे कम उम्र की महिला को कम से कम 10 अंडे स्टोर करने चाहिए।
  • इससे अधिक आयु की महिला को भविष्य में गर्भवती होने के लिए 20 अंडे फ्रीज कराना जरूरी है।
  • अगर 40 वर्ष की आयु में महिला ऐसा करना चाहती है, तो इसके लिए उसे 35 अंडे स्टोर करने की आवश्यकता होती है।

दरअसल, बढ़ती उम्र में फ्रीज किए गए अंडों की गुणवत्ता घट चुकी होती है। ऐसे में अंडों की संख्या बढ़ाकर गर्भावस्था को सफल बनाया और गर्भपात के जोखिम को घटाया जा सकता है (1)।

लेख में आगे बढ़ते हुए समझिए एग फ्रीजिंग के फायदे।

एग फ्रीजिंग करवाने के फायदे

लेख में हम यह बता ही चुके हैं कि एग फ्रीजिंग तकनीक से भविष्य की गर्भावस्था को कई तरह से सुरक्षित बनाया जा सकता है। इस आधार पर एग फ्रीजिंग कराने के कुछ फायदे भी देखे गए हैं, जिनका जिक्र हम आगे कर रहे हैं।

  1. एग फ्रीजिंग कराने पर महिला भविष्य में व अधिक उम्र में मां बनने की चिंता से मुक्त हो सकती है। महिला आसानी से अधिक उम्र में अपने ही अंडों से गर्भवती हो सकती है।
  1. फ्रीज किए हुए अंडों से इस प्रक्रिया को अपनाने वाली महिला खुद गर्भधारण करने के साथ ही गर्भवती होने की इच्छा रखने वाली दूसरी महिलाएं को अपने अंडे दान कर सकती है।
  1. बिना शारीरिक संबंध बनाए भी महिला फ्रीज किए हुए अंडों से गर्भधारण कर सकती है। इसके लिए उन्हें बस पुरुष साथी या डोनर के शुक्राणुओं को अंडों से निषेचित यानी फर्टिलाइज कराना होगा।
  1. अगर कोई महिला कैरियर या शैक्षिक योजनाओं के चलते गर्भवती नहीं होना चाहती, तो वह स्टोर किए अंडों से अपनी इच्छानुसार भविष्य में कभी भी गर्भवती होने की योजना बना सकती है।
  1. महिला इम्यूनिटी संबंधी परेशानी या कैंसर जैसी किसी गंभीर बीमारी से जूझ व उसका इलाज करवा रही है, तो उसकी प्रजनन क्षमता कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में महिला एग फ्रीज करा सकती है (2)। फिर स्वस्थ होने के बाद वह उन अंडों से स्वस्थ गर्भधारण कर सकती है।

चलिए, आगे औसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन यानी एग फ्रीजिंग से होने वाले जोखिम भी जान लेते हैं।

एग फ्रीजिंग करवाने के क्या जोखिम हो सकते हैं?

औसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन के जहां इतने सारे फायदे हैं, वहीं इसकी प्रक्रिया में कुछ जोखिम भी शामिल हैं। क्या हैं वो जोखिम नीचे पढ़ें।

1. ओवेरियन हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम – अंडों को स्टोर करने से पहले अंडाशय में उन्हें उत्तेजित किया जाता है। इसके लिए एक अनुपात में प्रजनन दवाओं का इस्तेमाल होता है। अगर इन दवाओं की खुराक ज्यादा हो जाए, तो ओवेरियन हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम हो सकता है। इससे महिला को रक्तस्राव के साथ ही प्रतिस्थापित किए गए अंडे में संक्रमण होने का जोखिम हो सकता है (1)।

2. गर्भपात होना – एग फ्रीजिंग को भविष्य में मां बनने में मददगार माना गया है। हालांकि, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि इसके जोखिम में गर्भपात की आशंका भी शामिल है (6)। खासकर तब जब महिला अधिक उम्र में फ्रीजिंग एग से गर्भधारण करे (3)।

3. डोनेट करने से मना करना – एग फ्रीजिंग से आईवीएफ की तकनीक भी जुड़ी है (5)। एक अध्ययन में शामिल 15% महिलाओं ने साफ तौर पर एग डोनेशन के लिए मना किया है (3)। मतलब अगर किसी महिला ने एग डोनेशन के उद्देश्य से एग फ्रीजिंग कराई है, तो वह भविष्य में अपना इरादा बदल भी सकती है।

4. गर्भावस्था की जटिलाएं होना – अधिक उम्र में एग फ्रीजिंग से गर्भावस्था धारण करने पर महिलाओं में प्री-एक्लेमप्सिया, उच्च रक्तचाप और गर्भकालीन मधुमेह जैसी गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं के होने का जोखिम भी हो सकता है (3)।

5. इमोशनल रिस्क – वैसे तो कम उम्र में की गई एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया अधिकतर मामलों में सफल मानी गई है। इसके अलावा, एनसीबीआई के अनुसार, 38 वर्ष के अंदर की गई एग फ्रीजिंग भी 2-12% तक सफल हो सकती है (5)। ऐसे में कई बार महिला की यह उम्मीद असफल भी हो सकती है। मतलब किसी भी कारण से एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया अगर असफल होती है, तो इससे महिला को भावनात्मक शोक का सामना करना पड़ सकता है।

अब हम बता रहे हैं कि एग फ्रिजिंग के फायदे पाने के लिए महिलाएं खुद को कैसे तैयार करें।

एग फ्रीजिंग के लिए खुद को कैसे तैयार करें?

अगर चाहती हैं कि एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया सुरक्षित रहे, तो इसका फैसला सोच-विचार कर पूरी तैयारी के साथ ही करें। इसके लिए किस तरह की तैयारी करनी चाहिए, इसकी हम नीचे विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

  • एग फ्रीजिंग कराने से पहले साथी व परिवार से इस बारे में बात करें।
  • एग फ्रीजिंग क्यों करवाना चाहती हैं, इसे स्पष्ट करें। उदाहरण के लिए, क्या ऐसा किसी पुरानी बीमारी या लंबे समय से हो रहे इलाज की वजह से कराना चाहती हैं या पढ़ाई व अन्य निजी फैसलों की वजह से।
  • अगर भविष्य के लिए एग फ्रीजिंग कराना चाहती हैं, तो इसके लिए सही उम्र क्या होनी चाहिए और स्टोर किए हुए अंडों से कब गर्भधारण करें, इसके बारे में फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से सलाह लें।
  • एग फ्रीजिंग से भविष्य में बच्चे की प्लानिंग कितनी सफल होगी, इसकी जानकारी भी फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से लें।
  • अपनी सभी पुरानी व मौजूदा स्वास्थ्य स्थितियों के साथ ही एग फ्रीजिंग कराने की वजह भी फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट को जरूर बताएं।
  • विशेषज्ञ द्वारा बताए गए हार्मोन्स, रक्त व अन्य लैब टेस्ट के साथ ही अल्ट्रासाउंड भी जरूर कराएं। साथ ही उनके द्वारा निर्धारित की गई दवाओं का कोर्स भी पूरा करें (1)।
  • अंडे की प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से हेल्दी डाइट प्लान बनवाकर उसे फॉलो करें।

स्क्रॉल करें और पढ़ें एग फ्रीजिंग प्रक्रिया कैसे की जाती है।

एग फ्रीजिंग करने की क्या प्रक्रिया होती है?

एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में पूरी की जाती है, जिनमें ये शामिल हैं (1)।

  • पहला चरण – सबसे पहले फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट या डॉक्टर इस प्रक्रिया के बारे में महिला व उसके साथी को बताएंगे। इसकी प्रक्रिया के साथ ही इससे जुड़े फायदे, जोखिम, गर्भावस्था के सफल होने की संभावना व उसकी लागत आदि से जुड़ी जानकारी देंगे। अगर इस दौरान किसी तरह की शंका बनी रहती है, तो काउंसलिंग भी करा सकते हैं।
  • दूसरा चरण – इसके बाद अगर एग फ्रीजिंग करने का विचार बना चुकी हैं, तो डॉक्टर महिला का एचआईवी और हेपेटाइटिस बी व सी जैसे अन्य संक्रामक रोगों की जांच करेंगे। इसके लिए वे जरूरी रक्त व अन्य जांच कराने के सकते हैं।
  • तीसरा चरण – सभी जरूरी टेस्ट के परिणाम से संतुष्ट होने के बाद डॉक्टर महिला के अंडाशय में अंडों को उत्तेजित करने के लिए प्रजनन दवाओं का एक कोर्स निर्धारित करते हैं। इस बीच वे फॉलिकल्स यानी अंडे में भरे तरल पदार्थों की निगरानी भी करते रहते हैं। इसके लिए अल्ट्रासाउंड या रक्त परीक्षण किया जाता है।
  • चौथा चरण – जब महिला के अंडाशय में अंडे पूरी तरह से परिपक्व यानी फर्टिलाइज हो जाएंगे, तब उन्हें महिला के अंडाशय से निकालकर फर्टिलिटी क्लीनिक में स्टोर कर दिया जाता है।

भविष्य में गर्भाधारण करने में एग फ्रीजिंग प्रक्रिया कैसे काम करती है, यह पढ़ें।

एग फ्रीजिंग कैसे काम करता है?

जैसा एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया में बताया गया है कि सबसे पहले महिला के अंडाशय में ही अंडों को उत्तेजित किया जाता है। इसके बाद उसे मेडिकल प्रोसेस से महिला के अंडाशय से निकाल कर तरल नाइट्रोजन में जमा दिया जाता है। फिर गर्भ धारण करने के समय उन्हें पिघलाकर उनमें पुरुष का शुक्राणु निषेतिच यानी फर्टिलाइज किया जाता है। इसके बाद महिला के अंडे को गर्भ में स्थानांतरित कर दिया जाता है (1)।

अब जानिए कि एग फ्रीजिंग प्रक्रिया के बाद क्या होता है।

एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया के बाद क्या होता है?

एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भविष्य में कभी भी महिला गर्भधारण कर सकती है। इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले फ्रीज किए अंडों को पिघालते हैं, फिर उसमें पुरुष का शुक्राणु निषेचित करते हैं। इसके बाद निषेचित यानी फर्टिलाइज अंडे को महिला के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया जाता है (1)।

लेख के अंत में कुछ सवालों के जवाब भी बताए गए हैं, जो एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया का काफी अहम हिस्सा हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  1. भारत में एग फ्रीजिंग करवाने पर कितना खर्च होता है?

एग फ्रीजिंग प्रक्रिया पूरी तरह से क्लीनिक पर निर्भर करती है। इस प्रक्रीया में पहले अंडों को निकाला जाता है, फिर उसे स्टोर किया जाता है। उसके बाद उसे वापस से गर्भ में स्थाननांतरित किया जाता है। ऐसे में गर्भ से अंडों को निकालने की प्रक्रिया में 50,000 से 1,00,000 रुपये तक का खर्च आ सकता है। एग फ्रीज होने के बाद फर्टिलिटी क्लीनिक में इन्हें स्टोर करने का सालाना खर्च 15,000 से 30,000 रुपये तक हो सकता है। ध्यान रखें कि यह लागत क्लीनिक, शहर और विषेशज्ञ के निजी अनुभव के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

  1. औसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन (Frozen Egg) कब तक रह सकते हैं?

मौजूदा जानकारी के अनुसार, अनिश्चित काल तक एग को फ्रीज करके सुरक्षित रखा जा सकता है (1)। मतलब सालों-साल तक फ्रीज किए गए अंडों में फर्टिलिटी गुण बना रह सकता है।

औसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन यानी एग फ्रीजिंग तकनीक ने कई महिलाओं के गर्भधारण के सपने को साकार किया है। इस तकनीक से महिलाएं अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को देखते हुए गर्भावस्था की योजना बना सकती हैं। बस ध्यान रखें कि गर्भावस्था एक नाजुक दौर है, इसलिए एग फ्रीजिंग करने से पहले व एग फ्रीजिंग के बाद गर्भधारण करने पर भी अपने स्वास्थ्य की देखभाल करें। किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

संदर्भ (Sources) :

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