बच्चों में फ्लैट फुट (सपाट तलवे): कारण, लक्षण व इलाज | Flat Feet In Children In Hindi

Flat Feet In Children In Hindi

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हर माता-पिता अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को लेकर चिंतित रहते हैं। ऐसा होना स्वाभाविक भी है, क्योंकि छोटे बच्चे को अगर कोई परेशानी हो, तो वो इस बारे में बता नहीं पाता। ऐसी ही एक समस्या है “फ्लैट फुट”। मॉमजंक्शन के इस आर्टिकल में हम इसी मुद्दे पर बात करेंगे। अब ये समस्या क्या है और इसके बारे में कैसे जानें? ये सब पता करने के लिए आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।

आइए, लेख के शुरुआत में हम फ्लैट फुट की परिभाषा के बारे में जानते हैं।

फ्लैट फुट (सपाट तलवे) किसे कहते हैं?

पंजा और एड़ी का बीच वाला भाग उठा हुआ होता है, जिसे आर्च बोला जाता है। जब तलवे का आर्च वाला हिस्सा सपाट होता है, तो उसे फ्लैट फुट यानी सपाट पैर कहा जाता है (1)। यह सामान्य समस्या है, जो एक या दोनों पैरों में नजर आ सकती है। जन्म के बाद हर शिशु का पैर फ्लैट होता है, लेकिन जैसे-जैसे शिशु का विकास होता है, उनकी एड़ी और पंजे के बीच आर्च बनने लगता है। 5 से 6 वर्ष का होने तक बच्चों के पैरों में आर्च बन जाता है। वहीं, कुछ बच्चों में आगे चलकर भी तलवे सपाट ही रहते हैं (2)।

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की साइट पर पब्लिश एक रिसर्च पेपर में इस बारे में विस्तार से बताया गया है। इस रिसर्च पेपर में कहा गया है कि 3 से 6 वर्ष तक के करीब 44 प्रतिशत बच्चों को यह समस्या रहती है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ-साथ यह समस्या कम होती जाती है। यह रिसर्च कहती है कि जहां 3 वर्ष के करीब 54 प्रतिशत बच्चे इससे ग्रस्त होते हैं, तो वहीं 6 वर्ष का होने तक सिर्फ 24 प्रतिशत बच्चों को ही यह समस्या रहती है (3)।

फ्लैट फुट के विभिन्न प्रकार जानने के लिए आप लेख का अगला भाग जरूर पढ़ें।

बच्चों में सपाट तलवे के प्रकार

वैसे तो सपाट तलवे के कई प्रकार माने गए हैं, लेकिन यहां हम इनमें से मुख्य प्रकारों के बारे में बता रहे हैं-

  1. फ्लेक्सिबल फ्लैट फुट : इसे सबसे आम प्रकार माना गया है। इस स्थिति में पैरों में आर्च तभी दिखाई देता है, जब पैर को जमीन से उठाया जाता है। साथ ही जब पैर को जमीन पर रखा जाता है और तलवा पूरी तरह से जमीन के साथ स्पर्श करता है। यह समस्या बचपन से ही होती है, लेकिन इस कारण से कोई दर्द नहीं होता। समय के साथ-साथ यह समस्या बढ़ती जाती है, जिस कारण पैर के टिश्यू खिंच सकते हैं या फट सकते हैं (4)।
  1. टाइट एक्लीस टेंडन : पैर में एक्लीस टेंडन होते हैं, जो एक प्रकार के टिश्यू होते हैं। ये एड़ी की हड्डी को पिंडली यानी काल्फ की मांसपेशियों से जोड़ते हैं। जब ये सख्त हो जाते हैं, तो चलते और दौड़ते समय पैर में दर्द होता है। ऐसे में बच्चे एड़ी को उठाकर चलने लगते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर कम से कम 6 महीने स्ट्रेचिंग और दूसरे ट्रीटमेंट से बच्चों को ठीक कराने की सलाह दे सकते हैं। अगर फिर भी ठीक न हो, तो सर्जिकल ट्रीटमेंट के लिए कह सकते हैं (5)।
  1. पोस्टीरियर टिबियल टेंडन डिसफंक्शन : आमतौर पर यह प्रकार बड़े बच्चों में देखा जाता है। इसमें एड़ियों से होते हुए पंडलियों से जुड़ने वाले पैर के टिश्यू या तो नष्ट हो जाते हैं या फिर उनमें सूजन आ जाती है। इससे तलवे पर आर्च सही प्रकार से नहीं बनता। साथ ही पैर व एड़ियों में अंदर की तरफ दर्द होती है (6)।
  1. कंजेनिटल वर्टिकल टेलस : जो बच्चे बर्थ डिफेक्ट से ग्रस्त होते हैं, उन्हें वर्टिकल टेलस का सामना करना पड़ सकता है। एड़ी एक प्रकार की हड्डी को टेलस कहा जाता है। इसमें एक या फिर दाेनों पैर प्रभावित हो सकते हैं। वर्टिकल टेलस पैर में आर्च को बनने से रोकते हैं। इसमें टेलस नामक हड्डी गलती दिशा में आ जाती है और पैर रॉकिंग चेयर जैसा लगता है। इसलिए, इसे रॉकर बॉटम फुट भी कहते हैं (7)।

आइए, अब जानते हैं कि बच्चे में सपाट तलवे की समस्या को कैसे पहचाना जाए।

बच्चों में सपाट तलवे के लक्षण | Flat feet and fallen arches symptoms in hindi

अमूमन फ्लैट फुट के कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए माता-पिता के लिए इस समस्या का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए, यहां हम कुछ ऐसे लक्षण बता रहे हैं, जिससे इस समस्या की पहचान करना आसान हो सकता है (1)।

  • अगर किसी बच्चे के पैरों में नियमित रूप से दर्द रहता है, खासकर एड़ी और तलवे में।
  • अगर बच्चा पैर की उंगलियों पर भार नहीं दे पा रहा है।
  • पीठ या पैर में लगातार दर्द रहता हो।
  • पैर के तलवे में सूजन हो।
  • जूते पहने में किसी तरह की समस्या हो।
  • किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि में भाग लेने पर जल्दी थकान हो जाए।

फ्लैट फुट होने की वजह जानने के लिए लेख का अगला भाग जरूर पढ़ें।

बच्चों में फ्लैट फुट होने के कारण

वैसे तो जन्म से ही सभी बच्चों के तलवे सपाट होते हैं, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ ये आकार में आने लगते हैं। अगर उम्र बढ़ने के साथ भी तलवे सपाट रहें, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं (1) (2) (4)।

  • पैरों को जोड़ने वाले टिश्यू के ढीले होने की वजह से फ्लैट फीट की समस्या होती है। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, टिश्यू कसते हैं और एक आर्च बनाते हैं। बच्चे के 2-3 साल के होने तक ऐसा होता है। अधिकतर लोगों में वयस्क होने तक ऐसा होता है।
  • कुछ दुर्लभ केस में पैर की 2 या उससे अधिक हड्डियों के एक साथ बढ़ने या आपस में जुड़ने से भी यह समस्या हो सकती है।

फ्लैट फुट से संबंधित और जानकारी के लिए पढ़ते रहें यह लेख।

सपाट तलवे के चलते बच्चे को किस तरह की समस्याएं हो सकती हैं?

अगर उम्र बढ़ने के साथ भी फ्लैट फुट की समस्या खत्म नहीं होती है, तो बच्चे का विकास प्रभावित हो सकता है। इससे वह कई रोगों से ग्रसित हो सकता है, जो इस प्रकार है (1) (8)।

अब जानते हैं कि बच्चों में फ्लैट फीट की समस्या की जांचे कैसे की जाए।

बच्चों में फ्लैट फीट का निदान

बच्चों के पैरों में आर्च बनने के लिए शुरू के 10 साल काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान पता चल जाता है कि बच्चे को किस प्रकार का फ्लैट फुट परेशान कर रहा है। डॉक्टर इसकी जांच के लिए कई तरह की विधि इस्तेमाल कर सकते हैं, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है (9)।

1. विजुअल एग्जामिनेशन : इसमें डॉक्टर बच्चे को खड़ा करके कुछ टेस्ट करते हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है:

  • जूतों की जांच : अगर पैर सपाट होते हैं, तो जूतों के तलवे बीच में ज्यादा घिसे होते हैं, खासकर एड़ी वाले भाग पर। यह देखकर डॉक्टर अंदाजा लगा सकते हैं।
  • उंगलियों की गिनती : डॉक्टर मरीज के पीछे खड़े होते हैं और चेक करते हैं कि बाहर की तरफ कितनी उंगलियां नजर आ रही हैं। इस अवस्था में जहां सामान्य व्यक्ति की सिर्फ सबसे छोटी उंगली नजर आती है, वहीं फ्लैट फुट वाले की करीब 3 उंगलियां नजर आ सकती हैं।

2. इमेजिंग एग्जामिनेशन : अगर बच्चे को पैरों में ज्यादा दर्द होता है, तो डॉक्टर निम्नलिखित टेस्ट करवा सकते हैं:

  • एंथ्रोपोमेट्रिक असेसमेंट : इस पद्धति के जरिए आर्च की ऊंचाई, एंगल व रियरफुट कोण का माप करके बीमारी का पता लगाया जाता है।
  • एक्स रे और सीटी स्कैन : इस तकनीक का उपयोग कर पैर की हड्डियों की तस्वीर ली जाती है। फिर तस्वीरों के जरिए डिफेक्ट पता किया जाता है। फिर उसी के अनुसार इलाज शुरू किया जाता है।
  • एमआरआई टेस्ट : इसके जरिए हड्डियों और टिशू की साफ-साफ इमेज मिल सकती है, जिससे डॉक्टर को पता चल सकता है कि समस्या कहां है।

फ्लैट फुट की जांच घर में भी की जा सकती है। आइए, इसका तरीका जानते हैं।

फ्लैट फुट पता करने के लिए खुद से कैसे जांच करें?

फ्लैट फुट का खुद से भी पता लगाया जा सकता है, जो इस प्रकार है (9):

  • इसके लिए बस बच्चे को पैरों को गीला करें और उसे समतल सतह पर खड़ा करवा दें।
  • इसके बाद उसे वहां से हटा लें।
  • अगर उसके पैर का निचला हिस्सा पूरा दिखाई देता है, तो यह फ्लैट फुट की और इशारा हो सकता है।
  • वहीं, जिनके पैर में आर्च होता है, उनके सिर्फ पंजे और एड़ी का हिस्सा ही दिखाई देता है।

बच्चों में फ्लैट फीट का इलाज जानने लिए आगे जरूर पढ़ें।

बच्चों में फ्लैट फीट का इलाज | Flat feet treatment in kids in hindi

फ्लैट फीट के इलाज के लिए 2 तरह के ट्रीटमेंट इस्तेमाल किए जाते हैं। सर्जिकल और नॉन सर्जिकल। यहां हम पहले जानते हैं कि नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट में क्या-क्या ऑप्शन हैं (9)।

1. नॉन सर्जिकल ट्रीटमेंट

  • दवाइयां और यंत्र : डॉक्टर बच्चों में दर्द को कम करने के लिए दवा दे सकते हैं। साथ ही पैरों की स्थिति के हिसाब से जूते पहनने की सलाह दे सकते हैं। यहां ध्यान देने की जरूरत है कि बच्चों में यह परेशानी धीरे-धीरे खत्म होती है। ऐसे में संयम के साथ बच्चे की प्रैक्टिस कराएं।
  • फिजिकल थेरेपी : स्ट्रेचिंग ऐसे बच्चों के लिए अच्छी एक्सरसाइज होती है, जिससे काफी हद तक दर्द से राहत मिलती है। डॉक्टर फिजिकल थेरेपी का सेशन रखकर बच्चों की एक्सरसाइज कराते हैं। पैरंट्स को ध्यान देना होगा कि उनकी प्रैक्टिस न रुके। इस दौरान उन्हें सपोर्ट और प्यार दें।
  • ऑर्थोटिक डिवाइस : कुछ ऐसे डिवाइस जो पैरों की बनावट और आर्च को सपोर्ट करने में मदद करते हैं, ऐसे ऑर्थोटिक डिवाइस उपयोग करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ऐसे डिवाइस स्थायी इलाज नहीं होते, लेकिन दर्द को कम करने में मदद जरूर कर सकते हैं।

2. सर्जिकल ट्रीटमेंट : अगर समस्या गंभीर है, तो डॉक्टर सर्जरी कराने की सलाह देते हैं। सर्जरी के दौरान डॉक्टर टखने में एक या एक से अधिक हड्डियों को जोड़ते हैं। साथ ही टेंडन को लंबा या बदलना हो, तो कर सकते हैं। ध्यान रहे कि डॉक्टर सर्जरी को हमेशा आखिरी विकल्प के रूप में अपनाते हैं। इससे पहले नॉन सर्जिकल तरीकों के जरिए ही इलाज करने का प्रयास किया जाता है।

लेख के अंतिम भाग में बताया गया है कि इस समस्या को घर में ही कैसे ठीक किया जा सकता है।

सपाट पैरों के लिए घरेलू उपचार

कुछ ऐसे तरीके हैं, जिनकी मदद से इस समस्या को कुछ हद तक खुद से ठीक किया जा सकता है। बस ध्यान रहे कि कोई भी घरेलू उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें (9) (10)।

1. जूता : बच्चे के पैर के साइज के अनुसार ही जूता पहनें।

2. सिकाई : सपाट तलवे वाले बच्चे को दर्द की समस्या ज्यादा होती है, जिसकी वजह से वो चल और खेल नहीं पाते। ऐसे में जब भी दर्द हो वहां बर्फ की सिकाई करें।

3. एक्सरसाइज : कुछ स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज हैं, जिन्हें अपनाकर फ्लैट फुट की समस्या को दूर किया जा सकता है। यहां जानते हैं कि ये एक्सरसाइज कौन-कौन सी हैं (11):

  • पैर के अंगूठे का व्यायाम : इसमें एक कपड़ा जमीन पर फैलाकर अंगूठे की मदद से कपड़े को पकड़ा और छोड़ा जाता है।
  • टेनिस बॉल या केन रोलिंग : केन या टेनिस बॉल रोलिंग की प्रक्रिया 1 मिनट में 3 बार करें। फ्लैट पैर वालों में प्लांटार फासिसाइटिस होने की आशंका अधिक हो सकती है। ऐसे में यह एक्सरसाइज फायदेमंद हो सकती है। पैर के निचले हिस्से में बैंड की तरह मोटा टिशू होता है, जिसे प्लांटर फेसियस कहा जाता है। इस टिशू में सूजन आने को प्लांटार फासिसाइटिस कहा जाता है।
  • टॉवेल कर्ल : तौलिये को पैर में लपेट कर आर्च को अपनी ओर खींचें। 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें और कुछ देर आराम करके ऐसा फिर से करें।
  • आर्च लिफ्टिंग : इस व्यायाम में बच्चे को चेयर पर बैठने को बोलें। दाएं पैर को बाईं जांघ पर रखें। दाएं पैर पर बैंड बांधें और उसका दूसरा सिरा बाएं पैर के नीचे दबा दें। अब हाथ की मदद से दाएं पैर को ऊपर की ओर खींचें। कुछ देर ऐसा करने के बाद यही प्रक्रिया दूसरे पैर से करें। ऐसा एक दिन में 3-4 बार किया जा सकता है।

4. योगासन : बच्चों के लिए योगासन भी सपाट तलवे के दर्द को कुछ कम कर सकते हैं। इसमें उत्कटासन, त्रिकोणासन, वीरभद्रासन और ताड़ासन से फायदा हो सकता है। बस ध्यान रहे कि शुरुआत में ये योगासन अच्छे ट्रेनर की देखरेख में ही किए जाएं।

5. संतुलित वजन: जिन बच्चों में मोटापे की समस्या होती है, उनके पैरों में ज्यादा दर्द होता है। ऐसे में मोटापा कम कर फ्लैट फुट की समस्या से राहत मिल सकती है।

इस लेख से ये तो स्पष्ट होता है कि बच्चों में सपाट पैर आम समस्या है, जो वक्त के साथ अपने आप ठीक हो सकती है। अगर ऐसा न हो, तो इसका इलाज सही समय पर करवाना चाहिए। बस माता-पिता को अपने बच्चे के शारीरिक बदलाव पर पैनी नजर रखनी चाहिए। जागरूकता से फ्लैट फुट की समस्या से समय रहते छुटकारा पाया जा सकता है। उम्मीद है कि इस लेख को पढ़कर आपके मन में उठ रहे सवाल और भ्रम को दूर करने में सहायता मिली होगी।

संदर्भ (References):

  1. Flat feet
    https://medlineplus.gov/ency/article/001262.htm
  2. Pes Planus
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK430802/
  3. Prevalence of flat foot in preschool-aged children
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/16882817/
  4. Flexible flatfoot
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5175026/
  5. Is there a relationship between functional at foot and prevalence of non-insertional achilles tendinopathy in joggers? – a pilot study
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/29263457/
  6. Acquired Flat-foot in a Child (Report of a Case)
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5974681/
  7. Congenital vertical talus: Treatment by reverse ponseti technique
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2739479/
  8. Pes Planus
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/28613553/
  9. Pediatric Flexible Flatfoot; Clinical Aspects and Algorithmic Approach
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3684468/
  10. Plantar fasciitis
    https://medlineplus.gov/ency/article/007021.htm
  11. Effects of Short-Foot Exercises on Foot Posture, Pain, Disability, and Plantar Pressure in Pes Planus
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/30860412/
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