गर्भ में लड़की या लड़का होने के लक्षण - Garbh Me Ladka Ya Ladki Hone Ke Lakshan

गर्भ में लड़की या लड़का होने के लक्षण

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जब एक औरत गर्भ धारण करती है, तो उसके साथ-साथ उसका पूरा परिवार एक सुनहरा ख़्वाब बुनने लगता है। घर में आने वाले नन्हें मेहमान के स्वागत के लिए तरह-तरह की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। लेकिन, आने वाला मेहमान नन्हा राजकुमार होगा या राजकुमारी, यह बात डिलीवरी के समय तक राज़ ही रहती है।

दरअसल, भारत में जन्म से पहले बच्चे का लिंग पता करना अपराध है। भारतीय कानून किसी भी तकनीक या मशीन की मदद से जन्म से पहले भ्रूण के लिंग परीक्षण की इजाज़त नहीं देता है। हमारे देश में सही जानकारी के अभाव में काफ़ी कम ही लोगों को पता है कि माँ के गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग प्रकृति कैसे तय करती है।

मॉमजंक्शन के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि प्रकृति मनुष्य के लिंग का निर्धारण कैसे करती है। साथ ही हम आपको उन प्रचलित और पारंपरिक नुस्खों के बारे में भी बताएंगे, जिनकी मदद से बच्चे के लिंग का अनुमान लगाया जाता रहा है।

लड़का या लड़की कैसे पैदा होती है

जीव विज्ञान के मुताबिक, महिलाओं और पुरुषों में दो तरह के यौन गुणसूत्र (सेक्स क्रोमोसोम) पाए जाते हैं। महिला के अंडाशय में XX क्रोमोसोम और पुरुष के शुक्राणु में XY क्रोमोसोम होता है। XX क्रोमोसोम लड़की और XY क्रोमोसोम लड़के का लिंग निर्धारित करते हैं। जब पुरुष के शुक्राणु का Y क्रोमोसोम महिला के अंडाशय के X क्रोमोसोम से निषेचित होता है, तो लड़का पैदा होता है। इसी तरह, अगर पुरुष के शुक्राणु का X क्रमोसोम महिला के अंडाशय के X क्रोमोसोम से निषेचित होता है, तो लड़की पैदा होती है। [1]

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गर्भ में लड़का होने के लक्षण – Garbh Me Ladka Hone Ke Lakshan

गर्भ में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की, इसका 100% सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। हालाँकि, नीचे दिए गए कुछ सामान्य लक्षणों के आधार पर लोग गर्भ में लड़का होने की भविष्यवाणी करते रहे हैं:

1. पेट का आकार

अगर गर्भवती महिला का पेट भारी और नीचे की ओर झुका हुआ है, तो इसे गर्भ में लड़के की मौजूदगी के लक्षण के तौर पर देखा जाता है।

2. त्वचा में बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान त्वचा में बदलाव आना एक आम बात है। फिर भी ऐसा माना जाता है कि अगर गर्भ में लड़का है, तो गर्भवती महिला के चेहरे पर दाने, मुंहासे और दाग ज़्यादा दिखने लगते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिला का चेहरा भी मुरझाया हुआ सा दिखने लगता है।

3. स्तन के आकार में बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान एक महिला के शरीर में हार्मोन की वजह से बहुत सारे बदलाव होते हैं। इस दौरान औरत के स्तन का आकार बढ़ता है, जिससे वह स्तनपान के लिए तैयार होती है। हालांकि, दोनों स्तनों के आकार में थोड़ा फर्क होता है। अगर दायां स्तन, बाएं स्तन से बड़ा और भारी हो, तो इसे गर्भ में लड़का होने का लक्षण माना जाता है।

4. ठंडे पैर और रूखे हाथ

प्रेगनेंसी के दौरान पैरों का ठंडा रहना और हाथों का रूखा रहना गर्भ में लड़के की मौजूदगी की निशानी माना जाता है।

5. चटपटा भोजन करने की इच्छा होना

वैसे तो प्रेगनेंसी में कई तरह की चीजें खाने की इच्छा होती है, मगर गर्भ में लड़का होने पर चटपटी और नमकीन चीज़ें खाने की इच्छा ज़्यादा होती है।

6. दिल की धड़कन

गर्भ में पल रहे बच्चे का दिल एक मिनट में लगभग 140 बार धड़कता है। चूंकि लड़कों के दिल की धड़कन धीमी होती है, इसलिए अगर बच्चे का दिल एक मिनट में 140 बार से कम धड़के, तो इसे गर्भ में लड़का होने का लक्षण माना जाता है।

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लड़का पैदा करने के लिए क्या करें

  1. जैसा कि हम आपको बता चुके हैं, बच्चे का लिंग Y क्रोमोसोम के व्यवहार पर निर्भर करता है। Y क्रोमोसोम वाले शुक्राणु छोटे होते हैं और ज़्यादा तेज़ होते हैं। अगर ओव्यूलेशन के आखिरी दिन या उसके अगले दिन संभोग किया जाए तो लड़का पैदा होने की संभावना अधिक होती है। ओव्यूलेशन के दिन योनी से होने वाला रिसाव चिकना और गाढ़ा होता है। रिसाव के इस लक्षण के आधार पर ओव्यूलेशन के दिन की पहचान की जा सकती है।
  1. गर्भ के लिंग निर्धारण के अध्ययन से जुड़ी शटल पद्धति 1960 के दशक से प्रचलित है। विवाहित जोड़े इसके 75% सफल होने का दावा करते हैं। शटल पद्धति के अनुसार, भ्रूण का लिंग तय करने में संभोग की अवस्था ( पोज़ीशन) काफ़ी अहम भूमिका निभाती है। लड़का पैदा करने के लिए, संभोग से समय स्त्री और पुरुष के शरीर की स्थिति ऐसी होनी चाहिए जिससे कि पुरुष के शुक्राणु महिला के अंडे में गहराई तक निषेचित हो सकें। जैसे कि महिला का पुरुष के ऊपर बैठकर संभोग करने से लड़का पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, शटल विधि के तहत भी लड़का पैदा करने के लिए ओव्यूलेशन के आसपास के दिनों में संभोग करने की सलाह दी जाती है। [2]
  1. ऐसा विश्वास है कि पुरुष का बॉक्सर या शॉर्ट्स पहनना नर शुक्राणु को बढ़ाने के लिए अच्छा होता है। शॉर्ट्स या बॉक्सर पहनने से अंडकोष (स्क्रोटम) का तापमान नियंत्रित रहता है। इससे अंडकोष में पर्याप्त मात्रा में शुक्राणुओं का उत्पादन होता है। ज़्यादा तंग अंडरवियर पहनने से अंडकोष का तापमान बढ़ जाता है और इससे शुक्राणुओं के उत्पादन में कमी आ सकती है।

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लड़के को गर्भ में धारण करने के लिए आहार

अलकालाइन गुणों वाला आहार और पोटाशियम युक्त आहार नर शुक्राणुओं को स्वस्थ रखता है। नीचे कुछ ऐसी खाने-पीने की चीजों के नाम बताए गए हैं, जिनके सेवन से लड़के को गर्भ में धारण करने की संभावना बढ़ जाती है:

  1. केला: केला पोटेशियम का अच्छा स्रोत होता है। पोटेशियम लंबे समय तक नर शुक्राणुओं को जीवित और स्वस्थ रखता है। इससे शुक्राणुओं के अंडे में निषेचित होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही यह गर्भ में लड़का धारण करने के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
  1. नींबू वंश (साइट्रस) के फलों का सेवन: नींबू वंश के फलों में प्रचूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। अगर आप लड़का पैदा करने की इच्छा रखते हैं, तो आपको नींबू वंश के फल, जैसे कि अंगूर, संतरा, आदि का सेवन ज़्यादा करना चाहिए।.
  1. मशरूम : मशरूम मे विटामिन-डी, पोटाशियम और सेलेनियम के अलावा भी बहुत सारे पौष्टिक तत्व होते हैं। इसलिए, मशरूम को नर शुक्राणुओं की सेहत के लिए लाभदायक माना जाता है।
  1. ज़िंक (जस्ता) से भरपूर आहार: ऑयस्टर, कद्दू और मांस जैसे आहार में ज़िक प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। यह किसी महिला के गर्भ धारण करने की संभावना को बढ़ा देता है। पोषण विशेषज्ञ (न्यूट्रिशनिस्ट) बृजेट स्विनी के अनुसार, ज़िंक ना केवल टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाता है, बल्कि नर शुक्राणुओं को स्वस्थ रखते हुए उनकी संख्या में वृद्धि भी करता है।
  1. ग्लूकोज़ से भरपूर आहार: ज़्यादा कैलोरी वाले भोजन में काफ़ी अधिक मात्रा में ग्लूकोज़ मौजूद होता है। ऐसा माना जाता है कि शरीर में ग्लूकोज़ का स्तर ज्यादा होने से लड़का पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है।

ध्यान रखें कि ऊपर बताई गई किसी भी खाद्य सामग्री का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

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जड़ी-बूटी और पूरक आहार की सहायता से लड़का पैदा करने के उपाय

संतुलित और पौष्टिक आहार के अलावा, आप कुछ खास जड़ी-बूटियों और पूरक आहार (हर्ब्स एंड सप्लीमेंट) की सहायता से लड़का होने की संभावना को बढ़ा सकती हैं। ऐसी ही कुछ जड़ी बूटियों और पूरक आहारों के नाम नीचे दिए गए हैं:

1. एंथोसायनिन

एंथोसायनिन एक तरह का फ्लेवोनॉइड होता है, जिसमें प्रचूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। यह लाल, नीले और बैंगनी रंग के फलों और सब्जियों में पाया जाता है। जैसे- लाल प्याज, बैंगन, अंगूर, जामुन, टमाटर, राजमा, अनार, आदि। एंथोसायनिन योनि को आंतरिक रूप से स्वस्थ रखता है, जिससे नर शुक्राणुओं को तेज़ी के साथ अंडाशय में निषेचित होने का मौका मिलता है।

2. एलाजिक एसिड

यह अम्लीय यौगिक खासतौर पर फलों, जैसे- स्ट्रॉबेरी,अनार और ब्लूबेरी में पाया जाता है। यह एसिड नर शुक्राणुओं को योनि में ज़्यादा दिनों तक जीवित रखता है।

3. गुआइफेनेसिन

प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला यह पूरक आहार शरीर को निषेचन के अनुकूल बनाता है। यह पूरक आहार योनि ग्रीवा की घात (जिसे हम म्यूकस भी कहते हैं) को ज़्यादा चिकना और पतला बनाता है। घात के चिकना और पतला होने पर नर शुक्राणु आसानी से अंडाशय में पहुंच जाते हैं, जिससे लड़का पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है।

4. कौलिस सार्जेंटोडॉक्स

यह एशियाई देशों में पाए जाने वाली एक प्राकृतिक जड़ी-बूटी है। यह योनि और प्रजनन अंगों को निषेचन प्रक्रिया के लिए पूरी तरह से तैयार करती है। इससे नर शुक्राणुओं को ज़्यादा दिनों तक जीवित रहने और आगे बढ़ने का पूरा मौका मिलता है। इसके अलावा यह लड़का पैदा होने की संभावना को भी बढ़ाता है।

5. आर्जिनाइन

यह भी एक प्राकृतिक पूरक आहार है। बीज वाली चीजों, जैसे- अखरोट, बादाम और पीकन्स में आर्जिनाइन प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। आर्जिनाइन भी नर शुक्राणुओं को अंडाशय में निषेचित करने में मदद करता है।

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गर्भ में लड़की होने के लक्षण – Garbh Me Ladki Hone Ke Lakshan

जिस तरह से गर्भ में लड़के की मौजूदगी का अनुमान लगाया जा सकता है, ठीक उसी तरह से गर्भ में लड़की की मौजूदगी का अनुमान भी लगाया जा सकता है। गर्भ में लड़की की मौजूदगी के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

1. दिल की तेज़ धड़कन

गर्भ में लड़के की तुलना में लड़की की दिल की धड़कन तेज़ होती है। अगर अल्ट्रासाउंड स्कैन से पता चलता है कि गर्भ में मौजूद बच्चे का दिल एक मिनट में 140 से अधिक बार धड़क रहा है, तो इसे गर्भ में लड़की होने का लक्षण माना जाता है।

2. जी मिचलाना और उबकाई आना

शोधकर्ताओं के अनुसार, सुबह के समय जी मिचलाने और मितली की समस्या का ज़्यादा होना, गर्भ में लड़की होने का संकेत माना जा सकता है।

3. पेट का आकार

अगर गर्भवती होने पर आपका पेट गोलाकार और ऊपर उठा हुआ है, तो इसे गर्भ में लड़की होने का संकेत माना जा सकता है।

4. मनोदशा में बदलाव

गर्भ में लड़की होने पर महिलाओं की मनोदशा बदलती रहती है। उनमें गुस्सा, चिड़चिड़ापन, तनाव और अवसाद की भावना ज़्यादा नज़र आने लगती है।

5. स्तन के आकार में बदलाव

गर्भावस्था के दौरान अपने स्तन को ध्यान से देखें, इससे बच्चे का लिंग जानने में मदद मिल सकती है। अगर आपके बाएं स्तन का आकार दाएं स्तन से बड़ा है, तो इसे गर्भ में लड़की होने का लक्षण माना जा सकता है।

6. लहसुन से परीक्षण

गर्भवती होने पर लहसुन खाने के बाद अगर आपके शरीर की गंध बदलती नहीं है, तो समझिए कि गर्भ में लड़की है। दरअसल, गर्भ में लड़का होने पर शरीर के रोम छिद्रों में से गंध आने लगती है।

7. मीठी चीज़ें खाने की इच्छा

अगर गर्भवती महिला को अचानक से मीठी चीज़ें (मिठाई, चॉकलेट, आदि) खाने की इच्छा होने लगे, तो इसे गर्भ में लड़की होने का लक्षण माना जाता है।

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लड़की पैदा करने के लिए क्या करें

अगर आप लड़की पैदा करने की इच्छा रखती हैं, तो नीचे दिए गए इन तरीकों का इस्तेमाल कर सकती हैं:

  • लिंग निर्धारण के अध्ययन से संबंधित शटल पद्धति के मुताबिक, लड़की पैदा करने की इच्छा रखने वाले जोड़ों को ओव्यूलेशन के दो-चार दिन पहले संभोग करना चाहिए। इस दौरान मादा शुक्राणुओं के अंडाशय में निषेचित होने की सम्भावना बहुत ज़्यादा होती है। ऐसे जोड़ों को ओव्यूलेशन के आसपास (जब योनि की घात बहुत चिकनी और पतली हो) संभोग करने से बचना चाहिए।
  • लड़की पैदा करने की चाहत रखने वाले जोड़े वीलन पद्धति का सहारा भी ले सकते हैं। इस पद्धति का संबंध भी लिंग निर्धारण के अध्ययन और शोध से है। इस पद्धति को 57% सफल माना जाता है। वीलन पद्धति के अनुसार, लड़की पैदा करने के लिए ओव्यूलेशन के दो-तीन दिन पहले संभोग करना चाहिए। याद रखें कि वीलन और शटल पद्धतियों की सफलता का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
  • संतान के रूप में लड़की की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों को संभोग के लिए कोई ख़ास समय निर्धारित करने के बजाए ज़्यादा से ज़्यादा संभोग करना चाहिए। इससे X क्रोमोसोम (मादा क्रोमोसोम) को अंडे में निषेचित होने के ज़्यादा अवसर मिलते हैं।
  • अगर आप लड़की पैदा करने की इच्छा रखती हैं, तो आपको पोटैशियम और नमक सीमित मात्रा में लेना चाहिए। आपको ओव्यूलेशन से पहले कम नमक वाला आहार लेना चाहिए और संभोग करना चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें, तो आपको खाना पकाने में कम से कम नमक का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा ऐसी चीज़ों से परहेज करना चाहिए, जिनमें अधिक मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है। जैसे- ब्रेड, ऑलिव्स, सी-फ़ूड, आदि।
  • ऐसा माना जाता है कि अगर संभोग से पहले पुरुष गर्म पानी स्नान करे, तो लड़की पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है। दरअसल, Y क्रोमोसोम (नर क्रोमोसोम) गर्म तापमान को सहन नहीं कर पाते और नष्ट हो जाते हैं। इससे X क्रोमोसोम (मादा क्रोमोसोम) को अंडे मे निषेचित होने के ज़्यादा मौके मिलते हैं।
  • कोई महिला अपने शरीर में पीएच के स्तर को बढ़ाकर भी लड़की पैदा करने की संभावना को बढ़ा सकती है। अनानास, टमाटर और ऐसी चीज़ें अधिक खाकर जिनमें फ़ॉलिक एसिड प्रचूर मात्रा में होता है, शरीर में पीएच के स्तर को बढ़ाया जा सकता है।
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, कम कैलोरी वाली चीज़ें खाने से लड़की पैदा होने सम्भावना बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि शरीर में ग्लूकोज़ का स्तर कम होने से Y क्रोमोसोम जल्द नष्ट हो जाते हैं।

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लड़की को गर्भ में धारण करने के लिए आहार

नीचे कुछ ऐसी खाने-पीने की चीजों के नाम बताए गए हैं, जिनके सेवन से लड़की को गर्भ में धारण करने की संभावना बढ़ जाती है:

  1. अंडा: अंडों में प्रचूर मात्रा में कैल्शियम और अम्लीय एसिड मौजूद होता है। नियमित रूप से अंडे खाने वाली महिलाओं के शरीर में पीएच का स्तर बढ़ जाता है। पीएच का यह बढ़ा हुआ स्तर नर क्रोमोसोम के लिए नुकसानदेह और मादा क्रोमोसोम के लिए फ़ायदेमंद होता है।
  1. हरी पत्तेदार सब्जियां: हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में बहुत सारे पोषक तत्व और विटामिन्स होते हैं। ये पोषक तत्व और विटामिन्स मादा क्रोमोसोम को स्वस्थ रखते हैं और उन्हें आगे बढ़ने में मदद करते हैं।
  1. अंकुरित और साबूत अनाज: अंकुरित और साबूत अनाज में पाए जाने वाले मैगनीशियम और सेलेनियम जैसे खनिज न केवल हमारी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाते हैं, बल्कि लड़की पैदा करने की संभावना में भी वृद्धि करते हैं।
  1. बीन्स: कई तरह के बीन्स, जैसे- राजमा, सेम, सोयाबीन, आदि खाने से भी लड़की होने की संभावना बढ़ती है।

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जड़ी-बूटी और पूरक आहार की सहायता से लड़की पैदा करने के उपाय

गर्भ धारण करते समय कई औरतों के मन में यह शंका होती है कि उन्हें अभी पूरक आहार लेना चाहिए या नहीं। सही जानकारी के अभाव में कई बार वे पूरक आहार लेने से कतराती हैं। जबकि, कुछ खास तरह के पूरक आहार लेना गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ज़रूरी होता है।

डॉक्टर से सलाह लेने के बाद अपने पूरक आहारों, जैसे- विटामिन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन, फोलिक एसिड आदि के सेवन की मात्रा तय करें। इनके नियमित सेवन से आपकी प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ेगी ही, साथ ही लड़की के जन्म की आशा रखने वाले जोड़ों को सकारात्मक परिणाम भी मिल सकता है।

इसके आलावा, क्रैनबेरी के रस के साथ एसिडोफ़िलस लेना अच्छा होता है। यह यीस्ट संक्रमण को रोकता है और शरीर में पीएच के स्तर को कम करता है। इससे लड़की को गर्भ में धारण करने में मदद मिलती है।

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लिंग जानने के अन्य तरीके

गर्भ में लड़का या लड़की की मौजूदगी से जुड़े लक्षणों के बारे में हम आपको ऊपर बता चुके हैं। आइए, अब हम आपको लिंग परीक्षण के उन पारंपरिक तरीकों के बारे में बताते हैं, जिनका इस्तेमाल लोग लंबे अरसे से कर रहे हैं। हालांकि, इन परीक्षणों के नतीजे 100% सही नहीं होते हैं।

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1. बेकिंग सोडा से लिंग परीक्षण

यह गर्भ में मौजूद बच्चे का लिंग जानने की एक घरेलू विधि है। इस परीक्षण से एक दिन पहले गर्भवती महिला को दिन भर अधिक मात्रा में पानी पिलाएं। इसके बाद, अगले दिन गर्भवती महिला के सुबह के पहले पेशाब का नमूना लें और उसमें बराबर मात्रा में बेकिंग सोडा मिला दें। अगर इस मिश्रण में झाग बनने लगे (जिस तरह के झाग पानी में ईनो मिलाने पर बनते हैं), तो मान लिया जाता है कि गर्भ में लड़का है। लेकिन, अगर बेकिंग सोडा मिलाने के बाद भी मिश्रण में कोई हलचल नहीं हो, तो मान लिया जाता है कि गर्भ में लड़की है।

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2. शादी की अंगूठी के साथ बच्चे का लिंग जानना

यह परीक्षण एक मज़ेदार खेल की तरह होता है और इसके सही होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इस परीक्षण को करने के लिए सबसे पहले बिस्तर पर सीधे लेटें और अपनी शा्दी की अंगूठी को धागे से बांधकर पेट के ऊपर लटकाइए। ऐसा करने के लिए आप परिवार के किसी दूसरे सदस्य की मदद भी ले सकती हैं। अब बिना किसी बाधा के अंगूठी को हिलने दें। कहते हैं कि अगर अंगूठी गोल-गोल घूमती है, तो लड़की और अगर एक दिशा से दूसरी दिशा में जाती है, तो लड़का होता है।

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3. चीनी चंद्र कैलेंडर की मदद से लिंग जानना

इस कैलेंडर के ज़रिए की जाने वाली गणना के सही होने का भी कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हालांकि, यह देखा गया है कि इससे मिलने वाले नतीजे 50% सही होती हैं।

इस परीक्षण को करने के लिए, चीनी चंद्र कैलेंडर में दिए गए कैलकुलेटर में गर्भवती महिला के जन्म की तारीख और उसके गर्भधारण करने की तारीख डालें। अगर गर्भ धारण करने की तारीख याद ना हो, तो डॉक्टर की ओर से बताई गई डिलीवरी की तारीख डालें। इसके बाद कैलकुलेटर गणना करके बता देगा कि लड़का होगा या लड़की। अगर गर्भवती महिला की जन्म तिथि और चंद्र महीने की तारीख, दोनों समान हैं, तो उसके गर्भ में लड़की है। लेकिन, अगर ये दोनों तारीखें अलग-अलग हैं, तो गर्भ में लड़का है। [3]

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4. भ्रूण के सिर के आकार से लिंग का अनुमान लगाना

अल्ट्रासाउंड स्कैन में भ्रूण के सिर की रूपरेखा को देखकर होने वाले बच्चे के लिंग का अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि, सही अनुमान केवल ऐसे अनुभवी लोग ही लगा सकते हैं, जिन्हें लड़की और लड़के के सिर की आकृतियों का फ़र्क मालूम हो। इस तरह का अनुमान लगाने के लिए, भ्रूण की उम्र कम से कम 12 हफ़्ते होनी चाहिए।

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5. नब लिंग परीक्षण

प्रेगनेंसी के शुरुआती 11 से 13 हफ्तों तक भ्रूण के पैरों के बीच ट्यूबरकल नाम का एक जननांग मौजूद होता है। इस जननांग को नब कहते हैं। यही जननांग भ्रूण का लिंग निर्धारित करता है। अगर नब का कोण रीढ़ की हड्डी से 30 डिग्री अधिक हो, तो यह गर्भ में लड़के की मौजूदगी का संकेत है। इसी तरह, अगर नब का कोण रीढ़ की हड्डी से 30 डिग्री से कम है, तो गर्भ में लड़की की मौजूदगी का संकेत है।

नब लिंग परीक्षण के ज़रिए बच्चे का लिंग जानने के लिए गर्भवती महिला के अल्ट्रासाउंड स्कैन की ज़रूरत पड़ती है। स्कैन से मिली तस्वीर में बच्चे का लिंग जानने के लिए उसकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से से नब का कोण मापना चाहिए। [4]

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. लड़की को गर्भ में धारण करने के लिए पीएच का स्तर कितना होना चाहिए?

लड़की को गर्भ में धारण करने के लिए 4 से 4.5 के बीच का पीएच स्तर सबसे अच्छा माना जाता है।

2. ओव्यूलेशन को कैसे ट्रैक करें?

ओव्यूलेशन को ट्रैक करने के लिए इन तरीकों का इस्तेमाल करें:

  • पिछले मासिक धर्म की अवधि के पहले दिन (LMP) को ध्यान में रखकर आप ओव्यूलेशन को मैन्युअल रूप से ट्रैक कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी महीने की 1 तारीख आपकी LMP का दिन है, तो 14 तारीख आपके ओव्यूलेशन का दिन होगा। इस महीने की 10 तारीख से लेकर 17 तारीख तक की अवधि को आपके प्रजनन दिनों के रूप में गिना जाएगा। यह गणना ऑनलाइन ओव्यूलेशन कैलकुलेटर की मदद से भी की जा सकती है।
  • अपने शरीर के तापमान की निगरानी करके भी आप ओव्यूलेशन को ट्रैक कर सकते हैं। इसके लिए आपको रोज़ सुबह उठकर थर्मामीटर से अपने शरीर का तापमान मापना होगा। रोज़ाना के इस आंकड़े को किसी डायरी में नोट करते जाएं। इसके बाद एक महीने के आंकड़े को देखकर पता लगाएं कि आपके शरीर का तापमान किस दिन सामान्य से अधिक रहा है। चूंकि ओव्यूलेशन के दिन शरीर का तापमान सबसे अधिक होता है, इसलिए आप इस विधि से आसानी से ‘ओव्यूलेशन डे’ का पता लगा सकते हैं।
  • अपनी योनि ग्रीवा की घात (जिसे हम म्यूकस भी कहते हैं) की जांच करके भी ओव्यूलेशन के दिन का पता लगा सकते हैं। ओव्यूलेशन के दिन यह घात सबसे अधिक गाढ़ी और चिकनी होती, जबकि सामान्य दिनों में यह घात पतली होती है।
  • आपका शरीर कई दूसरे संकेतों के ज़रिए भी आपको ओव्यूलेशन के दिन की जानकारी देता है। जैसे कि मासिक चक्र के बीच योनि से ऊपरी हिस्से में दर्द होना, स्तनों का नाज़ुक होना (जैसा कि हार्मोनल बदलाव क समय होता है), आदि। ये लक्षण बताते हैं कि आपका ओव्यूलेशन का समय चल रहा है।
  • इसके अलावा, ओव्यूलेशन के दिन का पता लगाने के लिए आप दवा दुकानों पर मिलने वाले ओव्यूलेशन टेस्ट किट का इस्तेमाल भी कर सकती हैं।

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याद रखें कि बच्चे कुदरत का तोहफ़ा होते हैं और तोहफ़े हर रूप में स्वीकार किए जाने चाहिए। अगर आप भी होने वाले बच्चे के लिंग का अनुमान लगाने का कोई रोचक तरीका जानती हों, तो कमेंट बॉक्स में हमें उसके बारे में ज़रूर बताएं। इसके अलावा घर में नन्हें राजकुमार या नन्हीं परी के आगमन की तैयारी कर रहे अपने दोस्तों और परिचितों के साथ इस लेख को साझा करना न भूलें।

नोट : गर्भावस्था के दौरान लिंग-पूर्वानुमान को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। मॉमजंक्शन, सदैव लैंगिक समानता में विश्वास रखता है और लिंग निर्धारण जैसे अनैतिक कृत्य को प्रोत्साहित नहीं करता है। साथ ही ऐसे प्रश्नों से परहेज करता है, जिनमें जन्म पूर्व लिंग जानने के संबंध में पूछा जाता है।

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