25 अच्छी और आदर्श मां बनने के टिप्स | How To Be A Good Mother In Hindi

How To Be A Good Mother In Hindi

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‘मां’ ये सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि हर किसी के लिए पूरी दुनिया है। मां बनने का एहसास खास होने के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण भी होता है। एक मां बच्चे को चलना, बोलना, उठना-बैठना सबकुछ सिखाती है। मां बच्चे की सबसे पहली गुरु और दोस्त भी होती है। हालांकि, कई बार मां बनना मुश्किल भी हो जाता है। ऐसे में एक मां होने के नाते अगर आप सोच रही हैं कि आप खुद में ऐसे कौन से बदलाव लाएं या बच्चों के सामने किन-किन बातों का ध्यान रखें कि वो कोई बुरा आचरण न अपनाएं, तो यह लेख उपयोगी हो सकता है। मॉमजंक्शन के इस लेख में हम आपके लिए एक अच्छी व आदर्श मां बनने के सबसे बेहतरीन 25 टिप्स लेकर आए हैं, जिन्हें आजमाकर आप चिंता मुक्त हो सकती हैं।

तो पढ़ना शुरू करें अच्‍छी मां बनने के तरीके या टिप्स के बारे में।

25 टिप्स एक अच्छी और आदर्श मां बनने के लिए | Tips to become a good mother in hindi

इसमें कोई शक नहीं है कि हर मां अच्छी होती है और अपने बच्चे का भला चाहती है व उसे एक बेहतर इंसान बनाना चाहती है। हालांकि, कभी-कभी मां खुद को और बेहतर करने के लिए काफी जतन करती है, ताकि उनके बच्चे को बेहतर भविष्य व परवरिश मिले। ऐसे में यहां बताए गए टिप्स आपको और अच्छी व आदर्श मां बनने में सहायता कर सकते हैं, ये टिप्स कुछ इस प्रकार हैं:

1. दूसरी मांओं से अपनी तुलना ना करें

हर मां अपने बच्चों के लिए दुनिया की बेस्ट मदर होती है। मां को पता होता है कि अपने बच्चे को किस तरह से हैंडल किया जाना चाहिए। इसलिए कभी भी अपनी तुलना दूसरी मांओं से ना करें। हो सकता है आपके आसपास की मांएं कुछ वर्किंग हों, तो कुछ हाउस वाइफ हों। हर मां अपने बच्चों की परवरिश में अपना 100 प्रतिशत देती है, इसलिए अगर आप वर्किंग लेडी हैं तो ये ना सोचें कि आप बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहीं। अगर आप हाउस वाइफ हैं तो दूसरी वर्किंग मांओं को देखकर बिल्कुल निराश न हों। हर मां अपने में खास होती है।

2. खुद के ऊपर भी ध्यान दें

अक्सर महिलाएं मां बनने के बाद खुद पर ध्यान देना तो जैसे भूल ही जाती हैं। उनकी पूरी दुनिया बस उनके बच्चों के इर्द-गिर्द ही घूमने लगती है। इसमें कोई शक नहीं है कि मां बनना एक औरत के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, लेकिन जिंदगी सिर्फ यहीं पर आकर थम नहीं जाती। इसलिए, एक आदर्श मां बनने के लिए आपको खुद के ऊपर भी ध्यान देना चाहिए व अपने लिए भी समय निकालना चाहिए।

3. बच्चों को बाहर ले जाएं

बढ़ते बच्चों को घर के साथ-साथ बाहरी परिवेश से भी अवगत करवाना जरूरी होता है। इसलिए बच्चों को समय-समय पर बाहर ले जाएं व अपने परिवार और रिश्तेदारों से उसका परिचय करवाएं। बड़ों के सामने किस तरह से पेश आते हैं, उनकी इज्जत करना और समाज से रूबरू होना बच्चे इसी प्रकार सीखते हैं। बच्चे की ओवरऑल ग्रोथ के लिए ये बहुत जरूरी है कि बच्चा घर के अलावा बाहर के परिवेश से भी अवगत हो।

4. परफेक्शन की होड़ में ना रहें

बच्चों पर जरूरत से ज्यादा सख्ती ना बरतें। बच्चा हर चीज में अव्वल रहे ऐसा हर मां चाहती है, लेकिन ये संभव नहीं है। ऐसे में आपको अपने बच्चे को समझना चाहिए। हर एक बच्चा अपने आप में स्पेशल होता है, इसलिए कभी भी परफेक्शन की होड़ में ना रहें। परफेक्शन की होड़ में बच्चे पर आवश्यकता से अधिक दबाव डालना उन पर गलत प्रभाव भी डाल सकता है।

5. संयम से काम लें

बच्चों से साथ हमेशा संयम से पेश आएं। बढ़ते बच्चे अपनी उम्र के अनुसार जिंदगी के कई पड़ावों से गुजर रहे होते हैं। ऐसे में कई बार बच्चे गलत चीजों की ओर आसानी से आकर्षित हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में उनके साथ हमेशा संयम से पेश आएं, क्योंकि अगर आप बच्चों से अधिक कठोरता से पेश आएंगी तो हो सकता है वो आपसे बातें छिपाने लगे। सख्ती का नकारात्मक प्रभाव बच्चे पर पड़ सकता है।

6. बच्चे की दोस्त बनें

एक अच्छी व आदर्श मां बनने के लिए बच्चों से बात करना बेहद जरूरी होता है। एक मां को पता होना जरूरी है कि उसका बच्चा क्या सोचता है व उसके मन में क्या चल रहा है। कई बार बच्चे डर या झिझक के कारण बड़ों से बातें शेयर नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में आपको उनसे बातचीत करनी चाहिए व कोशिश करनी चाहिए कि आपका बच्चा आपके सामने खुलकर अपने विचार रख सके। इसलिए, बच्चे की दोस्त बनने की कोशिश करें, ताकि वो खुलकर अपनी हर बात आप से शेयर कर सके। इससे आप आसानी से उनकी समस्याओं का समाधान कर सकती हैं।

7. अपने सभी बच्चों पर बराबर ध्यान दें

अगर आप एक से अधिक बच्चों की मां हैं, तो एक अच्छी मां बनने के लिए ये बेहद जरूरी है कि आप अपने सभी बच्चों पर बराबर ध्यान दें। बच्चों का मन बेहद कोमल होता है और वो कई बार छोटी-छोटी बातें भी दिल से लगा लेते हैं। कई बार छोटे भाई-बहन के आने पर बड़े बच्चों में असुरक्षा की भावना आ जाती है। हो सकता है आपको इस बात का अंदाजा भी ना हो, लेकिन कई बार बच्चे इस कारण अपने मन में कुंठा पाल लेते हैं। इसलिए, अपने हर बच्चे को समान प्यार दें और अपने बच्चों की आपस में तुलना न करें।

8. उनके बुरे बर्ताव की वजह जानने की कोशिश करें

अगर आपके बच्चे का बर्ताव बुरा हो रहा है और वह अक्सर चिड़चिड़ा रहता है, तो उसका कारण जानने का प्रयास करें। उनका बुरा बर्ताव करने से अगर आप उन्हें डांटने फटकारने लगेंगी तो वह आपसे दूरी बना लेंगे। बढ़ते बच्चे जब बाहरी दुनिया में कदम रखते हैं, तो उन्हें कईं परिस्थितियों का सामना अकेले करना पड़ता है। हो सकता है कि बच्चा किसी घटना व अन्य कारणों के चलते मानसिक तनाव में हो जिसके कारण वह सबसे दूरी बना रहा हो। कई बार यह बच्चे में डिप्रेशन का कारण भी बन सकता है। ऐसे में उसके बर्ताव का कारण जानना व समस्या को हल करना एक आदर्श मां होने के नाते आपकी जिम्मेदारी बन जाती है।

9. अपनी इच्छाएं उन पर ना थोपें

एक अच्छी मां होने के नाते आपको कभी भी अपनी इच्छाओं को अपने बच्चों पर नहीं थोपना चाहिए। हो सकता है आप जो चाहती हैं उससे बिल्कुल विपरीत आपके बच्चे की इच्छा हो। ऐसे में उस पर अपनी इच्छाओं का बोझ ना लादें और अपने पति को भी ऐसा करने से रोकें। हर माता-पिता अपने बच्चे के लिए बेहतर भविष्य चाहतें हैं, लेकिन अगर उसकी इच्छा के विरुद्ध आप जबरन उसे अपनी इच्छा के अनुसार बदलना चाहेंगे तो वो ना तो कभी खुश रह पाएगा और ना ही अपना बेस्ट दे पाएगा।

10. उन्हें हार का सामना करना सिखाएं

हर मां चाहती है कि उसका बच्चा हर मुकाम में जीत हासिल करे, लेकिन वह कभी हारे ही नहीं ऐसा भी संभव नहीं है। एक मां होने के नाते अगर अपने बच्चे को जीत के लिए प्रेरित करना आपका कर्तव्य है तो हारने पर उस स्थिति का सामना किस तरह से करना है ये बताना भी आपको आना चाहिए। बच्चों का मन बेहद कोमल होता है, इसलिए कई बार हार से सामना होने पर वे गलत कदम उठा लेते हैं। एक आदर्श मां होने के नाते आपको उन्हें बताना चाहिए कि जिंदगी में हारना भी उतना ही सामान्य है जितना की जीतना।

11. बच्चे की इज्जत करें

हर रिश्ते में इज्जत जरूरी है, चाहे मां और बच्चे का ही रिश्ता क्यों न हो। एक आदर्श मां होने के नाते आपको अपने बच्चों से भी इज्जत से पेश आना चाहिए। बच्चे घर के माहौल में जो देखते हैं, वही सीखते हैं। वो उनके व्यवहार व आदतों का हिस्सा बन जाता है। इसलिए बच्चों से हमेशा सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए। कई बार आपके द्वारा मजाक में व उन्हें चिढाने के लिए कहे गए वाक्य उनके आत्मविश्वास को तोड़ सकते हैं। कहते हैं ना कि अगर आप अपनी उम्र से छोटे से इज्जत की उम्मीद करते हैं, तो बड़ों को भी उन्हें इज्जत देनी चाहिए।

12. बच्चों के साथ समय बिताएं

एक आदर्श मां होने के नाते आपको बच्चों के साथ भरपूर समय बिताना चाहिए। एक मां अपने बच्चों के सबसे करीब होती है। अगर साफ शब्दों में कहें तो मां ही बच्चों की पहली बेस्ट फ्रेंड होती है। इसलिए बच्चों के साथ अपने बॉन्ड को मजबूत रखने के लिए आपको उनके साथ समय बिताना चाहिए। हो सकता है बढ़ती उम्र के साथ बच्चे अपने-अपने कामों में व्यस्त हो जाएं, लेकिन फिर भी समय निकालकर आपको बच्चों के लिए स्पेशल मदर-डॉटर बॉन्ड या मदर-सन ‘वी टाइम’ निकाल लेना चाहिए।

13. अपनी गलतियां भी स्वीकारें

ये जरूरी नहीं कि गलतियां हमेशा बच्चे ही करते हैं। कई बार बड़ों से भी गलतियां हो जाती है। अगर आप चाहती हैं कि आपका बच्चा अपनी गलतियां स्वीकार करे तो इसके लिए सबसे पहले आपको स्वयं गलतियों को कुबूल करने की आदत को अपनाना होगा। अगर आप बेझिझक गलतियां स्वीकारेंगी तो बच्चा भी आपको देखकर गलतियों को स्वीकारने में सहज होगा।

14. झूठ ना बोलें

कई बार बड़े लोग बच्चों के सामने आसानी से झूठ बोल देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है। एक आदर्श मां होने के नाते आपको कभी भी अपने बच्चों से या फिर उनके सामने झूठ नहीं बोलना चाहिए। बच्चे अक्सर बड़ों को देखकर ही अधिकतर आदतें सीखते हैं। ऐसे में अगर आप उनके सामने झूठ बोलेंगी तो उन्हें लगेगा कि झूठ बोलना सामान्य बात है और देखते ही देखते वो भी झूठ बोलना शुरू कर देंगे।

15. उन्हें जिम्मेदार बनाएं

एक आदर्श मां बनने के लिए जरूरी है कि आप बच्चों को उनकी जिम्मेदारी लेना व उसे निभाना सिखाएं। कई बार बड़े लोग भी अचानक से जिम्मेदारी आने पर पैनिक हो जाते हैं व गलतियां कर बैठते हैं। ऐसे में ये जरूरी है कि छोटी उम्र से ही बच्चों को धीरे-धीरे उनकी आयु के अनुसार जिम्मेदारियों से अवगत करवाएं व उनकी महत्वता को समझाएं, ताकि समय आने पर वे जिम्मेदारी लेने के काबिल बन सकें। बच्चों को जिम्मेदार बनाने के लिए आप छोटी-छोटी चीजों से शुरुआत कर सकती हैं। जैसे कि पौधों को पानी देना, अपने कमरे को साफ रखना, खाने के लिए अपनी प्लेट खुद लगाना व अपना बेड ठीक करना आदि।

16. उनकी हॉबी व स्किल को बढ़ावा दें

हर एक बच्चे की अपनी एक अलग खूबी होती है। कोई बच्चा अगर पढ़ने में अच्छा होता है, तो कोई खेल में। वहीं किसी बच्चे को अगर पेंटिंग करना पसंद होता है, तो किसी को नाचना-गाना। एक आदर्श मां होने के नाते आपका फर्ज बनता है कि आप अपने बच्चे की हॉबी व स्किल को पहचानें व उसे बढ़ावा दें। अगर आपका बच्चा अपनी हॉबी या स्किल को सामने लाने से डरता है या शर्म महसूस करता है, तो उसकी झिझक दूर करना और उन्हें प्रोत्साहित करना आपका कर्तव्य है।

17. उनके व्यक्तित्व का सम्मान करें

हर एक बच्चा स्पेशल होता है। एक आदर्श मां होने के नाते आपको अपने बच्चे के व्यक्तित्व का सम्मान करना चाहिए। अगर अपनी पर्सनैलिटी को लेकर आपके बच्चे के मन में झिझक है, व वह दुनिया के सामने आने से कतराता है, तो उसका विश्वास जीतने की कोशिश करें। उसे विश्वास दिलाएं कि वो जैसे भी हैं आप उनका सम्मान करती हैं व आपको उन पर पूरा भरोसा है।

18. उन्हें सही और गलत के बीच का फर्क समझाएं

बढ़ती उम्र में अक्सर बच्चे सही और गलत के बीच फर्क नहीं कर पाते व जिसके चलते कई बार वे बड़ी गलतियां कर बैठते हैं या मुसीबत में फंस जाते हैं। ऐसे में एक अच्छी व आदर्श मां वही है, जो अपने बच्चों को सही और गलत के बीच फर्क करना समझाएं। ऐसी स्थिति में हो सकता है कि कई बार बच्चे आपसे असहमति जताएं व विरोध करें, लेकिन आपको संयम से काम लेकर उन्हें समझाना है।

19. उन्हें जीवन में अनुशासन का महत्व समझाएं

इंसान के जीवन में अनुशासन बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए, बच्चों को बचपन से ही अनुशासन में रहना व इसका महत्व समझाना जरूरी होता है। समय पर उठना, समय पर खाना व सोना, बोलचाल का सलीका, व्यायाम आदि, कई ऐसे छोटे-छोटे कार्यों में अनुशासन हमारे जीवन को सुगम बनाने में सहायक होते हैं। ऐसे में इन बातों को प्यार से बच्चे को समझाएं। ध्यान रहे अनुशासन का मतलब कड़ाई या डांट-फटकार बिल्कुल नहीं है।

20. उन्हें गलती का एहसास होने दें

एक आदर्श मां होने के नाते आपको अपने बच्चों को गलती करने से रोकने के साथ ही उन्हें गलती का एहसास दिलाना भी जरूरी होता है। माता-पिता अक्सर बच्चों की हर छोटी-बड़ी गलती माफ कर देते हैं, जिसके चलते कई बार बच्चे जान बूझकर भी गलतियां दोहराते रहते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को ये एहसास दिलाना जरूरी होता है कि इंसान से भूल होना गलत नहीं है, लेकिन जान बूझकर गलती करना व अपनी गलती का एहसास ना होना गलत है।

21. खुद को अपडेट रखें

इस बदलते दौर में बच्चे काफी एडवांस हो गए हैं। इसलिए बच्चों के लिए आपको एक आदर्श मां बनना ही काफी नहीं है। इसके लिए आपको सुपर मॉम बनना होगा। अपने बच्चों को बेहतर तरीके से समझने के लिए आपको उनके परिवेश व परिस्थितियों को समझना होगा, जिसके लिए आपको हर क्षेत्र में अप टू डेट रहने की जरूरत होगी। अगर आप अपडेटेड रहेंगी तो ही अपने बच्चों के मनोभाव को बेहतर तरीके से समझ पाएंगी और उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल पाएंगी।

22. बच्चों के सामने लड़ाई झगड़ा न करें

घर के माहौल का बच्चों की मनोस्थिति पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। इसलिए एक आदर्श मां होने के नाते आपका फर्ज बनता है कि आप अपने बच्चे को बेहतरीन माहौल दें व उसके सामने किसी तरह का लड़ाई झगड़ा आदि ना करें। अक्सर देखा गया है कि वे बच्चे जिनके घर का माहौल सही नहीं होता, उनके ओवर ऑल परफॉर्मेंस पर इसका असर पड़ सकता है। इसलिए, घर का माहौल शांत रखें, किसी भी प्रकार से चिल्लम-चिल्ला न करें।

23. आत्मविश्वास बढ़ाएं

एक आदर्श मां होने के नाते आपका कर्तव्य बनता है कि आप अपने बच्चे को आत्मविश्वासी बनाएं, ताकि वह अपनी हर बात मुखरता से रख सके। बच्चे के मन की झिझक को दूर करना व उनके व्यक्तित्व को निखारना एक अच्छी मां का फर्ज होता है।

24. उनकी केवल जायज इच्छाएं पूरी करें

अक्सर मां-बाप लाड़-प्यार में बच्चे की मुंह से निकली हर फरमाइश को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ते हैं, जो कि गलत है। ऐसा करने से बच्चों को किसी भी चीज की अहमियत का एहसास नहीं होता। इसलिए एक आदर्श मां वही होती है जो अपने बच्चे की केवल जायज इच्छाएं ही पूरी करे। बच्चे की केवल उतनी ही फरमाइशें पूरी हों जितनी उनकी आवश्यकता है। साथ ही बच्चे के तुरंत किसी चीज की मांग करते ही उसे पूरा न करें, क्योंकि ऐसा करने से बच्चे की आदत बिगड़ सकती है। बच्चे जिद्दी हो सकते हैं, इसलिए बच्चे की फरमाइश को पूरा करने में भी थोड़ा वक्त लें।

25. उनके साथ पलों को यादगार बनाएं

अपने बच्चों के साथ पलों को यादगार बनाएं। बचपन एक बार गुजर जाए तो लौट कर नहीं आता है, इसलिए कोशिश करें कि आपके बच्चे का बचपन बहुत सी खूबसूरत यादों से भरा हो। इसके लिए आप उसे समय-समय पर ट्रिप पर ले जाना, उनके बर्थडे को स्पेशल बनाना, उनके साथ खेलना, कहानियां सुनाना व और भी कईं नई व क्रिएटिव चीजें ट्राय कर सकती हैं।

एक आदर्श मां बनना सबसे मुश्किल काम हो सकता है और सबसे आसान भी। छोटी उम्र में बच्चे उस गीली मिट्टी के समान होते हैं, जिन्हें आप जो आकार देंगी वो उसी में ढल जाएंगे। मां बच्चों के दिल के सबसे करीब होती है, इसलिए अक्सर बच्चे अपनी मां की हर गतिविधियों को ध्यान से देखते हैं और उन्हें अपनाने की कोशिश करते हैं। इसलिए, मां के साथ-साथ घर के हर सदस्य को खुद को बेहतर करना चाहिए। उम्मीद है यहां बताए गए अच्छी मां बनने के टिप्स आपके लिए उपयोगी साबित होंगे। इनमें से कुछ टिप्स सिर्फ अच्छी मां ही नहीं, बल्कि अच्छे पिता बनने में भी मददगार हो सकते हैं। तो इसे अन्य पेरेंट्स के साथ जरूर शेयर करें।