अलिफ लैला - अमात्य की कहानी

February 5, 2021 द्वारा लिखित

Alif Laila Amatya Vajeer story

बादशाह ग्रीक के कहने पर मंत्री ने उसे ‘अमात्य की कहानी’ सुनाने हुए कहा कि प्राचीन समय में एक राजा था जिसका इकलौता बेटा था। राजकुमार को शिकार पर जाने का बहुत शौक था और राजा भी उसकी हर इच्छा पूरी करने से कभी पीछे नहीं हटता। एक बार राजकुमार ने घने जंगल में शिकार पर जाने की इच्छा जताई, तो राजा ने जंगल के सभी रास्तों की जानकारी रखने वाले अमात्य को बुलवाया और उसे आखेट के दौरान हर पल राजकुमार के साथ रहने का आदेश दिया।

राजा से आज्ञा लेकर अमात्य और कुछ सैनिकों को साथ लेकर राजकुमार घोड़े पर सवार होकर शिकार करने जंगल पहुंचा। कुछ देर तक शिकार को ढूंढने के बाद राजकुमार को सामने एक बारहसिंगा दिखाई दिया और वह उसका शिकार करने के लिए घोड़े से उसका पीछा करने लगा। अमात्य को लगा कि राजकुमार बारहसिंगे का शिकार कर लेगा, इसलिए वह उसके पीछे नहीं गया, लेकिन राजकुमार बारहसिंगा का पीछा करते हुए बहुत दूर तक निकल गया और रास्ता भटक गया। राजकुमार ने वापस अमात्य और सिपाहियों के पास लौटने की कोशिश की, लेकिन तब तक बेहद देर हो चुकी थी और वह उस घने जंगल में गुम हो गया था।

जंगल में अकेले यहां-वहां भटकते हुए राजकुमार ने देखा कि एक सुंदर महिला एक जगह पर अकेली बैठी रो रही थी। महिला को घने जंगल में देखकर राजकुमार को पहले तो अचंभा हुआ, फिर वह उसके पास पहुंचा और उससे पूछा कि वह जंगल में अकेली क्या कर रही है और उसके रोने का क्या कारण है? महिला ने राजकुमार को रोते हुए बताया कि वह अपने घोड़े पर सवार होकर घर जा रही थी, लेकिन रास्ते में उसे नींद आ गई और वह घोड़े से नीचे गिर गई और घोड़ा भी वहां से भाग गया। महिला ने कहा कि काफी देर से वह जंगल में भटक रही है, लेकिन उसे अब तक यहां से बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला।

राजकुमार को महिला की स्थिति पर दया आ गई। राजकुमार के पूछने पर महिला ने बताया कि उसे अपनी राजधानी का रास्ता पता है। महिला के कहने पर राजकुमार उसे अपने घोड़े पर बैठाकर उसके बताए रास्ते पर उसकी राजधानी की ओर चल पड़ा। कुछ दूर तक जाने के बाद दोनों एक गुफा के पास पहुंचे। वहां पहुंचते ही महिला ने जोर से आवाज लगाई, “बच्चों जल्दी बाहर आ जाओ, मैं तुम्हारे खाने के लिए एक तंदुरुस्त और मांसल आदमी लेकर आई हूं।” गुफा के भीतर से बच्चों ने उत्तर दिया, “मां, उसे जल्दी से हमारे पास लेकर आओ, हमें बहुत भूख लगी है।”

महिला और उसके बच्चों की बातें सुनकर राजकुमार बहुत डर गया। राजकुमार को यह समझने में क्षण भर का भी समय नहीं लगा कि वह स्त्री जरूर नरभक्षी वनवासियों की प्रजाति से है, जो इंसानों को खाते हैं। अपनी जान पर आई आफत से भयभीत होकर राजकुमार ने ईश्वर को याद करते हुए प्रार्थना की, “हे प्रभु, तू अगर सर्वशक्तिमान है, तो मुझे इस मौत के मुंह से बचा ले और मुझे इस घने जंगल से निकलने का रास्ता दिखा।” राजकुमार के इतना कहते ही वह महिला कहीं गायब हो गई और उसके बच्चों की भी कोई आवाज नहीं सुनाई दी।

नरभक्षी महिला से बचकर राजकुमार जंगल से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढने लगा और खुशकिस्मती से उसे मार्ग मिल भी गया। राजकुमार जंगल से निकलकर सीधे महल पहुंचा और अपने पिता को घटना की पूरी जानकारी दी। राजकुमार की बातें सुनकर राजा को अमात्य पर बहुत गुस्सा आया और उसने अपने सेवकों को सीधा अमात्य को मौत के घाट उतारने का फरमान सुनाया।

बादशाह ग्रीक को ‘अमात्य की कहानी’ सुनाने के बाद मंत्री ने कहा कि उसने गुप्त सूत्रों के जरिए पता लगा है कि हकीम दूबां आपके दुश्मनों का गुप्तचर है और वह मौका पाकर आपको मारने की फिराक में है। मंत्री ने बाहशाह के मन में हकीम दूबां के प्रति संशय पैदा कर दिया। बादशाह ने मंत्री से कहा, “हो सकता है कि तुम ठीक बोल रहे हो और हकीम मुझे अभी निरोग करने के बाद मुझे धीरे-धीरे कष्ट देकर दर्दनाक मौत दे।”

मंत्री ने बादशाह के मन को भांप लिया और उसने सोचा कि इससे पहले कि बादशाह अपना इरादा बदल दे उसे हकीम दूबां को लेकर अपनी योजना आगे बढ़ानी चाहिए। मंत्री ने कहा, “यह हकीम कभी भी आपकी जान के लिए खतरा बन सकता है, इसलिए बादशाह आप उसे मारने का जल्द से जल्द फरमान सुनाएं।” मंत्री की बाद सुनकर बादशाह ने कहा कि ठीक है मैं अभी उसे बुलावा भेजता हूं।

मौत का फरमान सुनने के बाद जब हकीम को यकीन हो गया कि अब बादशाह उसकी एक नहीं सुनेगा, तो उसे पछतावा होने लगा कि उसने क्यों बादशाह का इलाज कर उसे कुष्ठ रोग से मुक्त किया होगा। हकीम ने बादशाह से कहा, “आप किसी की कही बातों में आकर मुझ निर्दोष को मार रहे हैं, लेकिन याद रखिए इस हत्या का बदले ईश्वर आपको सबक जरूर सिखाएगा।”

हकीम को मारने के लिए जैसे ही जल्लाद ने उसकी आंखों पर पट्टी बांधी, तो हकीम ने बादशाह से कहा कि मेरे प्राण लेने से पहले मुझे इतना समय दीजिए कि मैं घर जाकर अपनी वसीयत लिख लूं और अपनी चिकित्सकीय उपचार से संबंधित किताबें किसी ऐसे व्यक्ति को सौंप सकूं, जो उसका हकदार हो। साथ ही मेरे पास ऐसी किताब है, जिसे आप अपने पुस्तकालय में रख सकते हैं। हकीम ने कहा, “उस किताब में कई औषधियां व जड़ी-बूटियां हैं और कई बीमारियों का उपचार लिखा है। साथ ही उस पुस्तक के छठे पन्ने के बाएं ओर के पेज की तीसरी पंक्ति में कुछ ऐसा लिखा है, जिसे पढ़कर तुम्हारे हर सवालों का जवाब मेरा कटा सिर देगा।”

हकीम की बात सुनकर बादशाह को हैरानी हुई और उसने सैनिकों को आदेश दिया कि वे कड़े पहरे में हकीम को उसके घर लेकर जाएं और जब वह अपना काम निपटा ले, तो वह किताब लेकर हकीम को वापस ले आएं। हकीम ने रातभर अपना काम किया और दूसरे दिन रेशमी कपड़े में लिपटी एक मोटी-सी किताब लेकर सैनिकों के साथ वापस महल लौट आया।

हकीम ने मृत्यु दंड से पहले बादशाह से कहा, “मुझे मारने के बाद एक सोने की थाल प किताब पर लिपटे कपड़े को बिछा कर मेरे कटे हुए सिर को उसके ऊपर रख दें जिससे खून बहना बंद हो जाएगा और मेरे कहे अनुसार वो पंक्तियां पढ़ने पर मेरा कटा सिर हर सवाल का जवाब देगा।” इसके बाद बादशाह ने जल्लाद को हुक्म दिया कि वह उसका सिर कलम कर दे।

जल्लाद ने आदेश मिलते ही हकीम दूबां का सिर कलम कर दिया और हकीम के कहे अनुसार उसका कटा सिर थाल में कपड़े के ऊपर रखवा दिया। थाल में कटा सिर रखते ही सच में खून बहना बंद हो गया और कुछ देर बाद हकीम के कटे सिर ने आंखें खोल दी। हकीम के सिर ने बादशाह को कहा, “वह किताब के छठे पन्ने को खोले और बाएं पेज की तीसरी पंक्ति को पढ़े।” बादशाह ने किताब के पन्नों को पलटना शुरू किया, लेकिन पुस्तक के पन्ने आपस में चिपके होने के कारण बादशाह बार-बार उंगलियों पर थूक लगाकर पन्नों को अलग करना पड़ा।

बादशाह जब हकीम के कहे अनुसार उस पन्ने पर पहुंचा, तो वह लाइन खाली थी। इसे देखकर बादशाह गुस्से से झन्ना उठा। बादशाह की ऐसी स्थिति देखकर हकीम ने उसे बताया कि उसने हर एक पन्ने पर जहर लगाया हुआ था और उंगली पर लगे थूक से वह बादशाह के शरीर में प्रवेश कर चुका है। कुछ देर बाद ही बादशाह पर जहर का असर होने लगा और वह लड़खड़ा कर जमीन पर गिर गया और कुछ देर बाद प्राण त्याग दिए। इस तरह से बादशाह ग्रीक को उसकी करनी का फल मिल गया।

मछुवारे ने गागर में कैद राक्षस को “ग्रीक बादशाह और हकीम दूबां’ की कहानी सुनाने के बाद उससे कहा कि अगर बादशाह ग्रीक हकीम दूबां को नहीं मरवाता, तो उसे भी ऐसी मौत न मिलती। इसी प्रकार अगर तू इतने वर्षों तक गागर में कैद होकर बाहर निकलने के बाद भी मुझे मारने की इच्छा जाहिर नहीं करता, तो तुझे दोबारा इस गागर में कैद न होना पड़ता।”

मछुवारे की बात सुनकर राक्षस ने कहा, “हे भले इंसान, मैं गलत था और मुझे इस बात का एहसास हो गया है। मैं अब बाहर निकल कर तुझे मारने का प्रयास तो दूर विचार तक मन में नहीं लाऊंगा।” राक्षस ने कहा कि अगर मैं बुरा हूं, तो तुझे भलाई करनी चाहिए। तुझे भी मेरे साथ कुछ ऐसी ही भलाई करनी चाहिए जैसी इम्मा ने अतीका के साथ की थी।”

राक्षस की बात सुनकर मछुवारे ने कहा, “मैंने तो ऐसी किसी कहानी के बारे में नहीं सुना, क्या तुम मुझे ये कहानी सुनाओगे?” राक्षस ने कहा, “हां जरूर, लेकिन कहानी सुनने के लिए तुझे पहले मुझे आजाद करना होगा और अगर तुने मुझे गागर से निकाल दिया, तो मैं तुझे और भी बहुत सारी कहानियां सुनाऊंगा और धनी होने का उपाय भी बताऊंगा।” इस बार मछुवारे के मन में भी लालच आ गया और उसने राक्षस को अपनी बात से न पलटने की कसम दिलवाकर गागर का ढक्कन खोल दिया।

गागर का ढक्कन खुलते ही राक्षस धुएं के रूप में बाहर निकल गया और विशाल रूप लेकर सबसे पहले गागर को नदी में गिरा दिया। यह देखकर मछुवारा डर गया और उसे अपना वादा निभाने की दुहाई देने लगा। मछुवारे को डरा हुआ देख राक्षस ने कहा, “डर मत, मैं तुझे नहीं मारूंगा और मैं अपना वादा भी निभाऊंगा। अब तू बस अपना सामान समेट और मेरे पीछे आ जा।”

राक्षस के कहने पर मछुवारा आपना सामान लेकर उसके पीछे-पीछे चल पड़ा। दोनों एक पहाड़ की चोटी पर चढ़कर एक महल में पहुंचे, जिसके साथ ही चार ऊंचे चट्टानों से घिरा एक तालाब था। तालाब के पास राक्षस ने मछुवारे से तालाब में अपना जाल डालकर मछलियां पकड़ने के लिए कहा। पहली बार में जाल फेंकते ही मछुवारे के जाल में 4 मछलियां फंस गई। चारों मछलियों का रंग अलग-अलग था उनमें से एक लाल, दूसरी सफेद, तीसरी पीली और एक काली मछली थी।

राक्षस ने मछुवारे से कहा, “ये मछलियां बहुत बेशकीमती हैं। तू इन्हें यहां के बादशाह के पास लेकर जा। इन मछलियों के बदले बादशाह तुझे बहुत सारा धन देगा, जिससे तू अपनी इच्छाएं व जरूरतों को पूरा कर सकता है।” राक्षस ने कहा, “बस तुझे इतना ध्यान रखना है कि तालाब में जाल एक दिन में केवल एक बार ही डालना।” इतना कहते ही राक्षस दोबार धुएं में तब्दील हो गया और जमीन में समा गया।

राक्षस के कहे अनुसार मछुवारा उन 4 मछलियों को लेकर बादशाह के दरबार में पहुंचा। बादशाह मछलियों को देखकर बहुत खुश हुआ और अपने मंत्री से कहकर उसने तुरंत अपने बावर्चियों को इससे स्वादिष्ट पकवान बनाने का आदेश दिया। बादशाह ने प्रसन्न होकर मछुवारे को थैली भर कर सोने की मोहरें इनाम में दीं, जिसे पाकर वह खुशी-खुशी दरबार से लौट आया।

बादशाह के आदेश अनुसार मंत्री उन चारों मछलियों को लेकर महल के सबसे गुणी महिला बावर्ची के पास पहुंचा। बावर्चिन ने मछलियों का पकवान बनाने के लिए जैसे ही उन्हें काटकर गर्म तेल में भुनने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन तभी अचानक से रसोई की दीवार फट गई और उसके अंदर से सोने-चांदी के जेवरातों से सुसज्जित हाथ में बेहद कीमती छड़ी पकड़े एक सुंदर महिला बाहर निकली।

उस महिला को देखकर महिला बावर्ची हैरान हो गई और एक टक उसे देखती रही। उस सुंदर महिला ने छड़ी से एक मछली को छुआ और कहा, “हे मछली, क्या तुम्हें अपनी प्रतिज्ञा याद है और क्या तुम अब भी उस पर कायम हो?” महिला के ऐसा कहते ही मछलियां जीवित हो उठीं और एक स्वर में बोलने लगीं, “हमें अपनी प्रतिज्ञा याद है, अगर तुम हमारा कर्ज उतारोगी, तो हम भी तुम्हारा कर्ज उतारेंगे।” यह सुनते ही महिला ने कड़ाही को पलट दिया और मछलियां आग में जलकर राख हो गईं। इसके बाद वह महिला दोबारा दीवार में समा गई।

यह सब देखकर महिला बावर्ची अचंभित होकर होश खो बैठी और कुछ देर बात होश आने पर उसे ध्यान आया कि बादशाह मछलियों का सेवन करने के लिए इंतजार कर रहे हैं। बावर्चिन को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे और परेशान होकर माथा पकड़े रसोईघर के एक कोने में बैठ गई। जब कुछ देर बाद मंत्री मछलियों का पकवान लेने पहुंचा, तो बावर्चिन ने उसे पूरी आप बीती सुनाई। मंत्री को बावर्चिन की बात पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन बावर्चिन का हाल देखकर उसने उसकी शिकायत करना भी उचित नहीं समझा। इसके बाद मंत्री ने बहाना बनाते हुए बादशाह से कहा कि वह मछलियां खराब हो गई थीं और उसने मछुवारे को बुलाकर दोबारा वैसी ही मछलियां पकड़ कर लाने का आदेश दिया।

दूसरे दिन मछुवारा दोबारा तालाब से वैसी ही 4 मछलियां पकड़कर लाया और महल से अपना इनाम लेकर लौट गया। इस बार मंत्री ने बावर्चिन से अपने सामने मछलियों का पकवान बनाने के लिए कहा, लेकिन इस बार भी ठीक वैसे ही दीवार से सुंदर महिला निकली और मछलियों को उनकी प्रतिज्ञा याद दिलाकर कढ़ाई को आग में पलट कर चली गई। अपने आंखों के सामने सब कुछ होता देख मंत्री भी हक्का बक्का रह गया। इस बार उसने यह पूरी बात बादशाह को बता दी।

मंत्री से पूरी बात सुनने के बाद बादशाह को भी विश्वास नहीं हुआ, इसलिए उसने एक बार फिर मछुवारे को बुलवाया और अधिक सोने की मोहरें देकर दोबारा मछलियां पकड़ कर लाने को कहा। इस बार मछुवारे ने बादशाह से कहा कि वह आज ही के दिन मछलियां नहीं ला सकता, क्योंकि वह दिन में सिर्फ एक बार ही वैसी मछलियां पकड़ सकता है। पहले तो बादशाह ने ऐतराज जताया, लेकिन बाद में वह मछुवारे की बात से सहमत हो गया।

अगले दिन जब मछुवारा तीसरी बार पहले जैसी ही 4 मछलियों को पकड़ कर लाया, तो इस बार बादशाह खुद रसोई घर में पहुंचा और बावर्चिन को अपने सामने मछलियां पकाने का आदेश दिया। इस बार जब बावर्चिन मछलियों को पकाने लगी, तो फिर दीवार फटी, लेकिन इस बार महिला नहीं, बल्कि एक बलवान पुरुष निकला। बलवान ने भी महिला की भांति मछलियों से वही सवाल पूछा और फिर कढ़ाई पलटकर मछलियों को आग में गिरा दिया और खुद दीवार में गुम हो गया।

अपनी आंखों से सबकुछ देखने के बाद बादशाह ने फिर से मछुवारे को बुलाया और उससे मछलियों का रहस्य पूछा। पहले तो मछुवारा बादशाह के सवालों को टालने की कोशिश करने लगा, लेकिन जब बादशाह ने जोर देकर पूछा, तो उसने महल के पास तालाब की पूरी बात बादशाह को बता दी। बादशाह ने मछुवारे को उसे तालाब के पास ले जाने के लिए कहा और मछुवारे ने भी उसे वहां ले जाने की हामी भर दी।

मछलियों का रहस्य जानने की उत्सुकता से बादशाह अगले ही दिन मछुवारे के साथ अपने दरबार के कुछ मंत्रियों और सैनिकों को लेकर पहाड़ की ओर निकल पड़ा। चार ऊंचे चट्टानों से घिरे तालाब के पास पहुंचते ही बादशाह ने देखा कि तालाब में उसी प्रकार की अनेक मछलियां थीं, जिसे मछुवारा दरबार में लेकर आया था। बादशाह को आश्चर्य हुआ कि नगर से अधिक दूरी पर न होने के बावजूद आज तक किसी ने इस तालाब और महल को कैसे नहीं देखा।

बादशाह ने फैसला लिया कि वह तालाब और इन मछलियों का रहस्य जाने बिना वहां से नहीं जाएगा। इसलिए, उसने अपने साथ आए मंत्रियों व सैनिकों को वहीं आसपास डेरा डालने का आदेश दिया। रात होने पर भी जब बादशाह तालाब के रहस्य के बारे में कुछ जान नहीं पाया, तो उसने अपने एक विश्वासपात्र मंत्री को बुलवाया और उससे कहा कि वह अकेले ही रहस्य को उजागर करना चाहता है और अगली सुबह वह सभी दरबारियों व सैनिकों को वापस महल भेज दे।

मंत्री को आदेश देकर बादशाह ने अपने राजवस्त्र उतार कर एक आम सैनिक के कपड़े पहन लिए और हाथ में तलवार लेकर तालाब के पास पहाड़ पर चढ़ना शुरू कर दिया। पहाड़ चढ़ते-चढ़ते ही सुबह होने लगी और राजा को दूर जंगल में एक भवन दिखाई दिया। राजा को लगा कि वहां रहने वालों को जरूर तालाब का रहस्य पता होगा और इसी आस में वह भवन की ओर चल पड़ा।

कुछ देर बाद ही बादशाह जंगल के बीच काले पत्थरों से बने भवन के पास पहुंचा। बादशाह ने देखा कि भवन का मुख्य द्वार खुला हुआ था। फिर भी बादशाह ने शिष्टाचार के नाते दरवाजा खटखटाया और किसी के बाहर आने का इंतजार करने लगा। जब काफी देर तक कोई बाहर नहीं निकला, तो बादशाह को क्रोध आ गया और उसने सीधा भवन के अंदर प्रवेश करना ही बेहतर समझा। बादशाह ने देखा कि अंदर से भवन सोने, चांदी व हीरों से सजा हुआ है और फल व फूलों के बड़े-बड़े बाग व सजावटी फव्वारे भवन की शोभा बढ़ा रहे हैं, लेकिन वहां कोई मौजूद नहीं है। काफी देर तक भवन में घूमने के बाद बादशाह थक कर एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा।

बादशाह ने आराम करने के लिए आंखें बंद ही की थी कि उसे किसी के दर्द में कराहने की आवाज सुनाई दी। ध्यान से सुनने पर बादशाह ने पाया कि आवाज भवन के एक कमरे से आ रही थी और लग रहा था जैसे कोई शख्स दर्द में रो रहा है। बादशाह आवाज को सुनते हुए उस कमरे में पहुंचा जहां से विलाप की आवाज आ रही थी। बादशाह जैसे ही कमरे के अंदर पहुंचा उसने देखा कि सिंहासन पर राजवस्त्र पहने एक नौजवान युवक बैठा हुआ है दर्द में रोए जा रहा है।

बादशाह ने युवक को सलाम किया, तो जवाब में उसने भी बादशाह का अभिवादन करते हुए स्वागत में खड़े न हो पाने के लिए खेद जताया। बादशाह ने युवक से उसके दर्द में कराहने का कारण जानना चाहा और पूछा कि क्या वह उसकी कोई मदद कर सकते हैं? बादशाह की बात सुनकर नौजवान और जोरों से रोने लगा और रोते हुए उसने अपनी गोद व टांगों को ढकने वाले कपड़े को उठाया। जिसे देखकर बादशाह अचंभित रह गया।

बादशाह ने देखा कि नौजवान का कमर से ऊपर का शरीर इंसानों का है जबकि उसकी कमर से नीचे का भाग काले पत्थर का बना है। अपने को कुछ संभालते हुए बादशाह ने युवक से पूछा कि उसका यह हाल कैसे हुआ और क्या इसका संबंध उस रहस्यमयी तालाब की रंग बिरंगी मछलियों से है? बादशाह के सवाल को सुनकर नौजवान ने कहा कि वैसे तो जब भी मैं अपनी दशा के बारे में किसी को भी बताता हूं, तो मेरी हालत और भी बदतर हो जाती है, लेकिन अगर तुम जानना ही चाहते हो, तो मैं तुम्हें यह बता सकता हूं। अगले भाग में पढ़ें, युवक की कहानी।

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