अलिफ लैला - दूसरे फकीर की कहानी

द्वारा लिखित December 4, 2020

Alif Laila second Fakeer story

पहले फकीर की कहानी सुनकर सब लोग हैरान थे। तभी जुबैदा ने दूसरे फकीर को अपना किस्सा सुनाने को कहा। दूसरे फकीर सुकेब ने बताया कि मैं भी एक बादशाह का बेटा हूं। बचपन से ही मैं पढ़ने में अच्छा था, इसलिए कई शिक्षक मुझे घर में ही पढ़ाने आते थे। बहुत कम उम्र में मैंने सारे धर्म की किताबों में जो भी लिखा था उसे याद कर लिया था। मेरे दिमाग और ज्ञान की वजह से मुझे सभी पसंद करते थे। गणित, इतिहास जैसे सभी विषयों पर मेरी अच्छी पकड़ थी।

मेरी तारीफ सुनकर एक दिन हिंदुस्तान के बादशाह ने मुझे मिलने के लिए बुलाया। पिता के राजमहल में बादशाह ने खूब सारे मोती और बेशकीमती चीजें भेजकर मेरे लिए बुलावा भिजवाया था। यह सब देखकर मेरे पिता खुश थे, उन्हें लगा कि हिंदुस्तान के बादशाह से मेलजोल बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि आगे चलकर अपना राजमहल मुझे ही चलाना है। इसी सोच के साथ पिता जी ने मुझे बादशाह के महल भेज दिया।

कुछ सेवक के साथ बादशाह के लिए भेट और रास्ते के लिए खाने-पीने की चीजें लेकर मैं हिंदुस्तान के बादशाह से मिलने के लिए रवाना हो गया। तीन दिनों की यात्रा के बाद किसी जंगल के पास करीब 10 से 20 लुटेरों ने गहने से लदे मेरे घोड़े रोककर सारा सामान छीन लिया। यह सब देखकर मैंने उनसे कहा कि मैं हिंदुस्तान का बादशाह का का रिश्तेदार हूं, लेकिन वो डरे नहीं और सब लोगों पर हमला करने लगे। बहुत देर तक उनसे लड़ने के बाद मैं किसी तरह से उनसे बचकर घोड़े पर बैठकर निकल गया।

कुछ दूर जाते ही घोड़ा घायल होने की वजह से मर गया और मैं भी चोट लगने के कारण चल नहीं पाया। प्यास और भूख के मारे मेरी हालत खराब थी और यह डर भी लग रहा था कि कहीं गुंडे फिर मुझे न पकड़ ले। तभी मैंने अपने कपड़े को फाड़कर अपने घाव पर पट्टी बांधी और कुछ दूर चला। तभी एक गुफा दिखाई दी। शाम हो चुकी थी, इसलिए मैं उसी गुफा में चला गया और वहां रात बिताई। आसपास पेड़ थे, तो मैंने फल खाकर अपनी भूख भी मिटा ली।

अब सुबह होते ही कुछ फलों को लेकर मैं दोबारा आगे चलने लगा। चलते-चलते एक नदी मिली, जहां मैंने पानी पिया। पास ही एक राज्य दिखा, तो मैं काम की तलाश में उधर चला गया। मैं कुछ दिन वहां रुका और आसपास घूमने लगा। मेरे पांव फटे हुए थे, बाल व दाढ़ी बढ़ गई थी और कपड़े गंदे होने के साथ ही फट गए थे। सबने मुझे फकीर समझकर कुछ खाने को दे दिया।

एक-दो दिन बाद मैं एक सरकारी क्लर्क के पास गया और कहा कि मैं आपके हिसाब-किताब के काम में मदद कर सकता हूं। जब सरकारी क्लर्क ने मुझसे मेरे बारे में पूछा, तो मैंने सब कुछ बताया दिया। यह सुनकर वह बहुत डर गया और उसने कहा कि भले ही तुमने मुझे सच बता दिया हो, लेकिन इसके बारे में किसी और को बिल्कुल मत बताना। तुम बादशाह के पास नहीं पहुंचे थे, इसलिए अब वो तुम्हारा और तुम्हारे पिता का दुश्मन बन गया है। इस राज्य में सभी लोग बादशाह को खूब मानते हैं और उनके लिए कुछ भी कर सकते हैं। अगर किसी को पता चला कि तुम सुकेब हो, जिसे बादशाह ने बुलाया था और तुम वहां गए नहीं, तो वो तुम्हें छोड़ेंगे नहीं।

मैंने उस व्यक्ति का धन्यवाद करते हुए कहा कि मैं अपने बारे में अब किसी को भी नहीं बताऊंगा। मुझे भूखा और थका हुआ देखकर उसने कुछ खाने को दिया और कुछ देर आराम करने के लिए जगह दी। अच्छे से आराम करने
के बाद उसने मुझसे पूछा कि मुझे क्या-क्या काम आता है। तब मैंने उसे अपने सारे कौशल और विद्या के बारे में बता दिया।

यह सब सुनकर उसने कहा कि ऐसी विद्या और कौशल का मुझे कोई काम नहीं है। हां, तुम दिखने में हट्टे-कट्टे लगते हो, तो तुम जंगल में जाकर लकड़ियां ला सकते हो, जिसका बाजार में अच्छा दाम मिलेगा। मुझे लकड़ी काटने का काम नहीं आता था, लेकिन जिंदा रहने के लिए कुछ काम करना जरूरी था। मैं काम के लिए तैयार हो गया। उसने मुझे कुल्हाड़ी व रस्सी देकर जंगल जाने को कहा और कुछ लकड़हारों से मुलाकात करवा दी।

मैं रोज लकड़हारों के साथ जंगल लकड़ियां काटने के लिए जाता और उसे लाकर शहर में बेच देता था। हर बार लकड़ी बेचने पर मुझे स्वर्ण मुद्रा मिलती थी। कुछ समय बाद मेरे पास बहुत सारे सोने के सिक्के हो गए। उसके बाद मैंने उस सरकारी क्लर्क के पास जाकर सही राह दिखाने के लिए सोने के सिक्के दे दिए। फिर इसी तरह से लकड़ी काटते-काटते एक साल से ज्यादा समय हो गया।

एक दिन मैं लकड़ी काटने के लिए जंगल गया और वहां मुझे एक अच्छा पेड़ दिखा। तभी उससे आगे एक और घना जंगल दिखा, तो मैं उधर बढ़ गया। वहां जाकर मैंने लकड़ी काटनी शुरू की। तब मुझे एक लोहे का कड़ा दिखा। मैंने मिट्टी हटाकर देखा, तो वो लोहे के दरवाजे से लगा हुआ था। मैंने उसे ऊपर की ओर उठाया, तो वहां मुझे सीढ़ी दिखी। मैं वहां अपनी रस्सी और कुल्हाड़ी लेकर उतर गया। उस जगह में एक बड़ा सा मकान था, जिसके खंभे सोने के बने हुए थे। वहां एक सुंदर सी लड़की बैठी हुई थी।

मुझे देखते ही उस लड़की ने पूछा कि तुम इंसान हो या जिन्न? मैंने बताया कि मैं इंसान हूं। यह सुनते ही उसने कहा कि तुम्हारी जान यहां खतरे में आ जाएगी, जल्दी से चले जाओ। उसकी आवाज सुनकर जैसे मुझपर जादू चल गया। मैं कुछ देर चुपचाप वही खड़ा रहा। उसके बाद मैंने उस लड़की से कहा कि तुम इस जगह पर बिल्कुल भी खुश नहीं लग रही हो, क्या बात है। मेरी बात सुनकर उसने कहा कि यह जादुई जगह है और यहां सारी सुख-सुविधा है, लेकिन मुझे ये जगह बिल्कुल अच्छी नहीं लगती।

फिर मैंने उससे पूछा कि वो यहां कैसे पहुंची? उसने बताया कि वो आबनूस द्वीपों के बादशाह अबू तैमूरस की बेटी है। मेरे पिता ने मेरी शादी एक राजकुमार से कराई थी। जब मैं उसके साथ शादी के बाद घर जा रही थी, तभी एक जिन्न मुझे रास्ते से उठाकर यहां लेकर आ गया। वो हर दस दिन में यहां आता है और मुझे उसकी सेवा करनी होती है।

इतना सब बताने के बाद उसने मुझे अच्छा खाना खिलाया और आराम करने को कहा। कुछ देर बाद मैंने उस लड़की से कहा कि अगर वो खुश नहीं है, तो उसे मेरे साथ बाहर चलना चाहिए। तब उस युवती ने कहा कि देखो,मैं यहां से बाहर गई, तो जिन्न मुझे मार डालेगा। अगर तुम चाहो, तो यहां जिन्न के जाने बाद आ सकते हो। वो हर दस दिन में यहां आता है, तुम बाकी के नौ दिन इस गुफा में आ सकते हो। यह सुनकर मैं खुश हो गया और नहाने के लिए बाथरूम में चला गया। फिर लड़की ने मुझे शाही कपड़े पहनने के लिए दिए। मैंने उसके साथ पूरा एक दिन बिताया।

इस बीच मुझे उस लड़की से लगाव हो गया, जिस वजह से मैं उससे गुफा के बाहर चलने की जिद करता रहा। उसने दोबारा मना करते हुए बताया कि वो जिन्न बहुत ताकतवर है और यहां उसने एक लैंप रखा है, जिसे छूने पर वह जिन्न आ जाता है। लड़की बात पूरी सुने बिना ही मैंने गुस्से में वो लैंप छू दिया और मैं जिन्न को मारने की योजना बनाने लगा।

उसे छूते ही भूकंप आने लगा और वहां अंधेरा छा गया। उस युवती ने मुझे समझाकर वहां से बाहर जाने को कहा। इधर, मैं डरकर बाहर उसी सीढ़ी में पहुंच गया, जहां से अंदर आया था। उधर, वह जिन्न अंदर पहुंच गया। उसने लड़की से पूछा कि उसने लैंप छूकर उसे क्यों बुलाया। तभी जिन्न ने वहां मेरी कुल्हाड़ी और रस्सी देख ली, जिसे मैं हड़बड़ाहट में अंदर ही छोड़ आया था।

तभी मैं डरकर वहां से भागा और उसी क्लर्क के पास पहुंच गया, जिन्होंने मुझे लकड़ी काटने का काम दिया था। वह मुझे देखकर खुश हो गया और पूछा कि मैं पूरा एक दिन कहा था। मैं डरा हुआ था, इसलिए मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया। मैं नहाया और खाना खाकर सो गया।

कुछ देर बाद एक व्यक्ति उस क्लर्क के घर मेरी कुल्हाड़ी और रस्सी लेकर पहुंचा। मैं समझ गया कि यह वही जिन्न है, लेकिन सच जानने के लिए अपना रूप बदलकर आया है। डर के मारे कुछ ही देर में मैं बेहोश हो गया और वो मुझे बेहोशी की हालत में ही उठाकर अपने साथ लेकर एक पहाड़ में चला गया। तभी मुझे होश आया और मैं खुद को इतनी ऊंचाई में देखकर डर गया। तभी उस जिन्न ने एक पैर मारा और मैं उसी घर में पहुंच गया जहां वह युवती थी।

मैंने वहां देखा कि वो लड़की जमीन पर गिरी हुई और दर्द के मारे रो रही थी। तब जिन्न ने मुझे कहा कि तू यही आया था न अब मैं तुझे मार डालूंगा। इतना सुनते ही उस लड़की ने कहा कि नहीं मैं इन्हें नहीं जानती हूं जिन्न, तुम इसे क्यों मार रहे हो। मैंने इसे पहली बार यहां देखा है। यह सुनकर जिन्न को और गुस्सा आया और उसने लड़की के हाथ में मेरी कुल्हाड़ी देकर कहा कि तू इसे नहीं जानती है, इसलिए अब तू ही इसे जान से मारेगी।

लड़की ने मुझे मारने से मना कर दिया, जिससे जिन्न का शक यकीन में बदल गया। जिन्न ने कहा कि जब तू इसे जानती ही नहीं है, तो इसे मार क्यों नहीं देती। उसके बाद जिन्न ने मुझे कहा कि अगर तू इस लड़की को नहीं पहचानता है, तो कुल्हाड़ी उठाकर इसे मार दे। मैं परेशान हो गया और तभी युवती ने मेरी तरफ इशारा करके कहा कि मुझे मारकर अपनी जान बचा लो। वैसे भी यह जिन्न मुझे मार ही डालेगा।

लड़की का इशारा मिलने के बाद भी मैं उसे मार नहीं पाया। मेरे मन में हुआ कि मेरी वजह से ही यह इतनी परेशानी में घिर गई है और मैं ही इसे मार दू, यह तो पाप होगा। उसके बाद मैंने जिन्न से कहा कि मैं किसी भी स्त्री पर हाथ नहीं उठाता हूं। तुम मुझे किसी को जान से मारने के लिए कह रहे हो, यह मैं बिल्कुल नहीं करूंगा। तुमने इसका वैसे ही बुरा हाल कर रखा है और यह तुम्हारी स्त्री है, तो इसके साथ जो भी करना है तुम करो। मुझे इन सब से दूर ही रखो।

जिन्न गुस्से में बोला कि तुम दोनों को पता नहीं है कि मैं कितना शक्तिशाली हूं। ऐसा कहते ही उसने लड़की के दोनों हाथ काट दिए। वो लड़की जमीन में गिर गई और मैं भी बेहोश हो गया। जब मुझे होश आया, तो जिन्न ने कहा कि इस लड़की को मैंने धोखे की सजा दे दी है, लेकिन मुझे यह नहीं पता कि यहां तुम ही आए थे या कोई दूसरा। इसी वजह से मैं तुम्हें जान से नहीं मारूंगा, लेकिन तुम्हें इंसान भी रहने नहीं दूंगा। जादू से अभी जानवर बना दूंगा। बताओ, तुम्हें कौन सा जानवर बनना पसंद है।

तब मैंने उनसे कहा कि मुझपर दिया करो और जानवर न बनाएं। यह सुनकर जिन्न ने बताया कि यह उसकी दुनिया का नियम है, इसलिए वो मुझे जानवर जरूर बनाएगा।

यह बात सुनकर मैंने कहा, “जिन्नों के सरताज मुझ पर कृपा करो। ठीक उसी तरह जैसे एक भले आदमी ने अपने साथ बुरा करने वाले पर उपकार किया था, उसकी जैसी दया दिखाकर मुझे छोड़ दो।” मेरी बात सुनने के बाद जिन्न ने पूछा कि कौन है भला आदमी और उसकी कहानी क्या है?

दूसरे फकीर सुबेर ने जिन्न को भले आदमी की कहानी सुनना शुरू किया। आप इस कहानी को जानने के लिए हमारी दूसरी स्टोरी पढ़ें।

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