अलिफ लैला - शहजादा खुदादाद और दरियाबार की शहजादी की कहानी

द्वारा लिखित February 15, 2021

alif laila shahjada khushdad aur dariyabar ki shahjadi ki kahani

जैनुस्सनम की कहानी के बाद शहरजाद ने खलीफा को हैरन नगर के बादशाह की कहानी सुनाना शुरू किया।

शहरजाद ने बताया कि हैरन नगर का बादशाह अपने जीवन में काफी खुश था, लेकिन उसे इस बात का दुख था कि उसकी एक भी औलाद नहीं है। पचास रानियां होने के बाद भी एक भी बच्चा न होने की वजह से वो रोज ऊपर वाले से बच्चे की दुआ मांगता था। एक दिन उसके सपने में किसी ने आकर कहा कि अपने पास के माली के बाग में जाकर अनार खा लेना। ऐसा करने से तुम्हारे घर में बच्चे हो जाएंगे।

वह सुबह होते ही पास के माली के पास गया और उससे खाने के लिए अनार मांगने लगा। उसने चुपचाप बादशाह को अनार दे दिया। अनार मिलते ही बादशाह ने उसे छीलकर 50 दाने खा लिए, क्योंकि उसकी 50 बेगम थी। कुछ दिनों के बाद बादशाह की 49 पत्नियां गर्भवती हो गईं, लेकिन बेगम पिरोज को गर्भ नहीं ठहरा। इस बात से नाराज होकर बादशाह ने उस पत्नी को मारने का आदेश दे दिया।

आदेश मिलने के बाद मंत्री ने बादशाह को समझाया कि हो सकता है कि वो गर्भवती हों, लेकिन उनमें लक्षण नजर नहीं आ रहे हों। इसलिए, आप उन्हें मारने के लिए न कहें। इतना सुनकर बादशाह ने कहा, “मैं इस महिला को अपने सामने नहीं देखना चाहता हूं। इसे मेरे भतीजे के समरिया शहर भेज दो।” इतना कहकर बादशाह ने अपने भतीजे को एक खत लिखकर कहा कि मैं अपनी एक बेगम को तुम्हारे शहर भेज रहा हूं। अगर उसका बच्चा हो जाए, तो मुझे खबर कर देना।

नौ महीने के बाद बादशाह के भतीजे सुमेर ने बताया कि उनकी पत्नी को बेटा हुआ है। जवाब में बादशाह ने पत्र भेजकर कहा कि तुम उनका ख्याल रखो। यहां मेरी अन्य बेगमों को भी पुत्र हुआ है। मेरे बेटे का नाम खुदादाद रखना और उसे अच्छी शिक्षा देना। बादशाह का खत मिलने के बाद सुमेर ने सबका अच्छे से ख्याल रखा। खुदादाद जैसे-जैसे बड़ा हुआ, तो काफी बलवान बन गया। उसे घुड़सवारी और बाण चलाना भी बखूबी आता था।

वो इतना शक्तिशाली था कि उसके सामने लड़ने की किसी को भी हिम्मत नहीं आती थी। एक दिन खुदादाद को पता चला कि उसके पिता के राज्य हैरन पर दुश्मनों ने हमला कर दिया है। यह सुनकर वो हैरन जाने की तैयारी करने लगा, लेकिन उसकी मां ने उसे वहां जाने से रोक दिया। खुदादाद को उसकी मां ने कहा कि जब तक तुम्हें पिता से बुलावा न आए, तब तक उस राज्य में बिल्कुल मत जाना। मां की बात सुनकर वो रूक गया, लेकिन वो ज्यादा दिनों तक ऐसा नहीं कर पाया।

एक दिन वो शिकार पर जाने की बात कहकर अपनी मां से विदा लेकर हैरन के लिए निकल गया। वहां बादशाह के पास जाकर खुदादाद ने अपना सही परिचय नहीं दिया। उसने कहा कि मैं काहिरा से पूरा देश घूमने के लिए निकला हूं। मुझे पता चला कि इस राज्य को कुछ दुश्मनों ने घेर लिया। आप चाहें, तो मैं आपकी तरफ से दुश्मनों से लड़ सकता हूं।

यह सुनकर बादशाह को खुशी हुई। उन्होंने उसके बल की परीक्षा ली और खुदादाद से खुश होकर उसे सेना का सबसे बड़ा अधिकारी बना दिया। अधिकारी बनते ही खुदादाद ने पूरी सेना को परीक्षण दिया और सबको इतना काबिल बना दिया कि दुश्मन बादशाह की सेना से डरने लगे। बादशाह ने खुदादाद से खुश होकर उसे अपने बेटों को भी शिक्षा देने के लिए कहा।

रोजाना खुदादाद शहजादों को परीक्षण देता था। होते-होते राजा ने खुदादाद को इतनी ऊंचा पद दे दिया कि हर कोई उसकी इज्जत करने लगा। यहां तक की शहजादों को भी खुदादाद की आज्ञा लेकर ही कार्य करना होता था। समय बीतता गया और शहजादों को खुदादाद से जलन होने लगी। उन्होंने सोचा कि खुदादाद को किसी के हाथों मरवा दिया जाए, लेकिन फिर पकड़े जाने के डर से उन्होंने ऐसा नहीं किया।

कुछ दिनों बाद एक शहजादे ने कहा कि क्यों न खुदादाद से पूछकर हम शिकार में चले जाए। फिर लौटकर आएंगे ही नहीं। जब अब्बा को पता चलेगा कि उनके सारे बेटे गायब हैं, तो वो खुदादाद को मारने का आदेश दे देंगे। सभी शहजादों को यह तरकीब अच्छी लगी। सबने ठीक ऐसा ही किया। दिनभर अपने बेटों को महल में न देखकर बादशाह ने खुदादाद से उनके बारे में पूछा। खुदादाद ने बादशाह को बताया कि सभी शहजादे मुझसे पूछकर शिकार के लिए गए थे, लेकिन वो अबतक लौटकर नहीं आए हैं।

तीन दिन गुजरने के बाद बादशाह ने गुस्से में खुदादाद को कहा कि अगर मेरे बेटे सही सलामत नहीं लौटे, तो तुम्हें जान से मार दूंगा। जाओ जल्दी से उन्हें ढूंढकर ले आओ। खुदादाद भी डर के मारे अपने भाइयों को ढूंढने के लिए निकल गया। उसने कई दिनों तक जगह-जगह पर ढूंढा, लेकिन उसे कोई नहीं मिला। फिर वो एक घने जंगल में पहुंच गया।

जंगल के बीच में एक पत्थर की गुफा दिखी। वहां एक लड़की थी। उस लड़की ने खुदादाद को देखकर पूछा कि तुम यहां कैसे आ गए? तुरंत चलो जाओ इस गुफा से। यह गुफा एक राक्षस की है, जो इंसानी रूप में घूमता है। वो यहां रोज कई लोगों को पकड़कर लेकर आता और कैद करके रख देता है। जब भी उसे भूख लगती है, तो उनमें से किसी एक को खा जाता है। तुम चले जाओ वरना वो तुम्हें भी कैद कर देगा।

इतना सुनकर जैनुस्सनम ने उससे पूछा कि तुम यहां क्या कर रही हो। उस लड़की ने जवाब देते हुए कहा कि मुझे भी वो राक्षस पकड़कर ले आया है। वो मुझे अपनी पत्नी बनाना चाहता है।

जैनुस्सनम उसकी बातें सुन ही रहा था कि तभी इंसान के रूप में वो राक्षस आ गया। वो काफी बड़ा था और एक लंबी सी तलवार उसके हाथ में थी। उसने लड़की के साथ जैनुस्सनम को बातें करते हुए देखकर उसपर हमला कर दिया। जैनुस्सनम किसी तरह से उस वार से बच गया। उसके बाद जैनुस्सनम ने पास ही रखी एक तलवार से उस राक्षस के पैर पर वार किया। जैसे ही राक्षस लड़खड़ाया जैनुस्सनम ने उसे मार दिया।

उस लड़की ने राक्षस के मरते ही जैनुस्सनम से कहा कि उसके पास एक चाबी का गुच्छा है उससे पहले मेरा दरवाजा खोल दो और फिर दूसरे लोगों को भी छुड़वा लेना। जैनुस्सनम ने भी ठीक ऐसा ही किया। जब उसने सबसे बड़े कमरे का ताला खोला, तो वहां 100 से भी ज्यादा लोग कैद थे। उन सभी लोगों को बाहर निकालने के बाद जैनुस्सनम ने देखा कि उनमें से 49 लोग उसके ही भाई हैं।

जैनुस्सनम ने अपने सभी भाइयों को गले से लगाया और सबके खाने के लिए भोजन का इंतजाम किया। कैदी बने अन्य लोगों को भी जैनुस्सनम ने खाना दिया और राक्षस द्वारा उनका लूटा हुआ माल भी ढूंढकर उन्हें वापस दे दिया। सभी अपने घर को लौटने लगे। अपने 49 भाइयों के साथ जैनुस्सनम हैरन जा ही रहे थे कि उनकी नजर उस लड़की पर पड़ी।

जैनुस्सनम ने उससे पूछा कि तुम कहा कि रहने वाली हो बता दो। हम तुम्हें वहां पहुंचा देंगे। उस लड़की ने कहा कि मैं काहिरा के पास के द्वीप दरियाबार के बादशाह की बेटी हूं। आपने मेरी जान बचाई उसका धन्यवाद, लेकिन मैं बहुत अभागी हूं। एक इंसान ने मेरे अब्बा को मारकर पूरा राज्य लूट लिया। मेरे पिता को जिसने मारा उससे बचने के लिए मैं भागकर इस जंगल की तरफ आई। फिर इस राक्षस ने मुझे गुफा में कैद कर लिया।

इस बात को सुनकर खुदादाद और शहजादों ने उस लड़की की कहानी को विस्तार से सुनने की इच्छा जताई। उसके बाद वो शहजादी वहीं बैठकर सबको अपनी कहानी सुनाने लगी। इस कहानी को जानने के लिए स्टोरी का दूसरा अंश पढ़ें।

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