अलिफ लैला - शहजादा जैनुस्सनम और जिन्नों के बादशाह की कहानी

द्वारा लिखित February 11, 2021

Alif Laila - Shajada Jainussanam Aur Jinnon Ka Badshah

शहरजाद ने बादशाह शहरयार को अगली कहानी सुनाना शुरू किया। उसने बताया कि सालों पहले एक बादशाह बसरा में राज करता था। उसके पास सबकुछ था, लेकिन बच्चा न होने का दुख उसे हरदम सताता था। सालों तक ऊपर वाले से दुआ मांगने के बाद बादशाह को एक बेटा हुआ। उसका नाम सबने मिलकर जैनुस्सनम रखा। काफी इंतजार के बाद बेटा होने की वजह से सबने से उसे इतना लाड़-प्यार किया गया कि वो जिद्दी हो गया। वो किसी की भी नहीं सुनता था।

कुछ समय बाद बादशाह बीमार हो गए। तब उन्होंने अपने बेटे को कहा कि मेरे बाद राज गद्दी में तुमको ही बैठना है। अब तुम अपनी जिद को छोड़कर समझदारी से राज्य संभालना। इतना कहते ही बादशाह के प्राण चले गए।

कुछ दिनों का शोक करने के बाद जैनुस्सनम बादशाह बन गया। उसने खुले हाथों से राजमहल का सारा खजाना लुटाने लगा। उसने राज्य के बड़े पदों पर भी अपने दोस्तों को रखना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद खजाना खत्म हो गया और राज्य की हालत देखकर सैनिकों ने नौकरी छोड़ दी। राजमहल का ऐसा हाल देखकर नए बादशाह को दुख हुआ। उसने अपने सारे दोस्तों को बड़े पदों से हटा दिया और सभी अनुभवी लोगों को रखा। सबने बादशाह को उनकी गलतियों के बारे में बताया।

बादशाह को सबकुछ समझ तो आ गया था, लेकिन पैसे न होने की वजह से राज्य चला पाना मुश्किल था। दिन रात जैनुस्सनम यही सोचता था कि कैसे पैसों का इंतजाम करे। यह सोचते-सोचते एक दिन बादशाह की आंख लग गई। उसी वक्त उसने सपने में एक बूढ़े व्यक्ति को देखा। उसने जैनुस्सनम से कहा, “तुम जल्दी ही अमीर बन सकते हो। इसके लिए तुम्हें तुरंत मिस्र की राजधानी काहिरा अकेले जाना होगा। जैसे ही उसकी नींद टूटी उसने सपने के बारे में अपनी मां को बताया।

बादशाह की मां ने उसे इतनी दूर अकेले जाने से कई बार मना किया, लेकिन जैनुस्सनम जिद्दी था। उसने मां की एक नहीं सुनी। मां के हाथों में राज्य की जिम्मेदारी सौंपकर, वो चुपके से काहिरा के लिए निकल गया। कुछ दिनों की यात्रा करके जैनुस्सनम काहिरा पहुंचा। काफी थकान होने की वजह से वो सामने दिख रहे मस्जिद में जाकर सो गया। सोते ही उसे दोबारा वो बूढ़ा दिखा। उसने सपने में कहा कि तुम्हारे अंदर बहुत हिम्मत है। तुम यहां पहुंचे मुझे अच्छा लगा। अब तुम वापस बसरा चले जाओ। तुम्हें अपने राज्य में ही धन मिलेगा।

इतने में ही बादशाह की नींद खुल गई। उसके मन में हुआ कि मैं बेवकूफ बन गया। इतना सोचते हुए वो अपने राज्य लौटा। वहां पहुंचते ही उसने अपनी मां को सबकुछ बता दिया। मां ने उसे कहा, “ मैंने तुम्हें वहां जाने से मना किया था।” दुखी मन से इस बारे में सोचते हुए जैनुस्सनम सो गया। उसे दोबारा वो बूढ़ा इंसान दिखा। उसने सपने में कहा कि तुम्हारे पिता का अमुक इलाके में एक पुराना महल है। वहां पर खुदाई करोगे, तो तुम्हें काफी खजाना मिलेगा।

सुबह होते ही जैनुस्सनम की नींद टूटी, तो भागकर अपनी मां के पास गया। उसने मां को अपने सपने के बारे में दोबारा बताया। बादशाह की मां को उसकी बात पर हंसी आई। जैनुस्सनम ने कहा, “मां तुम हंस लो, लेकिन मैं उस पुराने महल में जा रहा हूं। इतना कहकर जैनुस्सनम अमुक महल में पहुंच गया।

वहां काफी देर तक खुदाई करने के बाद उसे फर्श के नीचे सीढ़ियां दिखीं। वहां कई सारी बड़ी-बड़ी सुराही रखी थी। उसके अंदर कई अशर्फियां थीं। वो मुट्ठी भर अशर्फी लेकर मां के पास दौड़ते हुए गया। मां उन्हें देखकर काफी खुश हुई और बादशाह के साथ उस पुराने महल में जाने के लिए कहने लगी।

बादशाह तुरंत अपनी मां के साथ उस महल में पहुंचा। उसने वहां करीब 40 सुराही देखी, जो अशर्फियों से भरी हुई थी। फिर बादशाह की मां के हाथ में एक सोने की चाबी लगी। बादशाह और उसकी मां दोनों मिलकर उस चाबी का ताला ढूंढने लगे। कुछ देर बाद एक बड़ा सा दरवाजा दिखा, जिसमें सोने का ताला लगा हुआ था। उसपर वो चाबी लगाते ही दरवाजा खुल गया। अंदर एक बड़ा-सा कमरा था, जो सोने की अशर्फियों से भरा हुआ था।

कुछ आगे बढ़ने पर दोनों को बेशकीमती आठ मूर्तियां दिखीं। उससे कुछ आगे एक खंभा था, जिसमें लिखा था कि आखिरी और सबसे बहुमूल्य मूर्ति पाने के लिए बेटा काहिरा चले जाओ। वहां मुबारक नाम का मेरा एक पुराना सेवक रहता है। वो एक प्रसिद्ध इंसान है, उसके घर पहुंचकर तुम्हें आखिरी मूर्ति मिल जाएगी। इस संदेश को पढ़ते ही बादशाह वहां मौजूद धन संपत्ति को भूलकर सीधे काहिरा पहुंचा गया। कुछ लोगों से मुबारक का पता पूछने पर वो लोग बादशाह को सीधे मुबारक के घर ले गए।

मुबारक ने उससे पूछा कि आप कौन हैं। यह सवाल सुनते ही जैनुस्सनम ने कहा, क्या आपने मुझे पहचाना नहीं। मैं बसरा बादशाह का बेटा हूं। पिता अब नहीं रहे और मैं यहां नवीं मूर्ति के बारे में पूछने के लिए आया हूं। मुबारक को यकीन नहीं हुआ कि वह बादशाह का बेटा है। तब जैनुस्सनम ने अपने सारे सपनों के बारे में बताया।

सबकुछ जानने के बाद मुबारक ने जैनुस्सनम से कहा कि मुझे आप पर पूरा यकीन हो गया है। अब आप कुछ देर आराम कीजिए। फिर हम एक लंबी यात्रा पर निकलेंगे। वहां आपको कई डरावनी चीजें दिखेंगी, लेकिन आप डरना मत। इतना कहकर मुबारक वहां से चला गया और रातभर बादशाह ने आराम किया।

सुबह होते ही मुबारक अपने सेवकों को लेकर बादशाह के साथ उस नवीं मूर्ति को लाने के लिए निकल पड़ा। कई दिनों तक घोड़े से यात्रा करने के बाद वो एक छोटे और संकरे रास्ते में पहुंच गए। फिर मुबारक ने सभी सेवकों को वहां इंतजार करने के लिए कहा और खुद बादशाह के साथ आगे बढ़ने लगा।

तभी वहां बड़ी सी नदी दिखी। उसे देखते ही जैनुस्सनम ने कहा कि इसे हम कैसे पार करेंगे। तब मुबारक ने बताया कि यहां एक जादुई नाव आएगी। उसमें अगर कुछ अजीब दिखे, तो न घबराना और न ही कुछ सवाल करना। अगर नाव में बैठकर आपने कुछ भी बोला, तो तुरंत नाव पानी में डूब जाएगी। तभी एक हाथी के सिर वाला आदमी चांदी की नाव लेकर आया। उसने जैनुस्सनम और मुबारक दोनों को एक-एक करके अपनी सूंड में उठाया और नाव पर बैठा दिया। कुछ घंटे की दूरी तय करने के बाद उसने अपनी सूंड से दोनों को उसी नदी के उस पार उतार दिया।

वहां पहुंचते ही मुबारक ने जैनुस्सनम को बताया कि ये जिन्न का इलाका है। हमें यहां सावधानी से रहना होगा। मैं मंत्र पढ़कर जिन्न के बादशाह को बुलाएंगे। बस उसके आते ही उसे सिर झुकाकर नमस्ते करना होगा। वो इंसान या राक्षस किसी के भी भेष में आ सकता है। तब मुबारक ने मंत्र पढ़कर एक चादर से खुद को और बादशाह को ढक लिया।

मंत्र के उच्चारण के बाद जोर से बादल गरजे और जिन्नों का बादशाह मनुष्य के रूप में आया। तभी जैनुस्सनम ने चादर हटाकर जिन्न को झुककर सलाम किया। जिन्न ने जैनुस्सनम के पास आकर कहा कि मैं जानता हूं कि तुम मेरे दोस्त के बेटे हो। वो जब भी मेरे पास आता था, तो मैं उसे हीरे की मूर्ति देता था। आठ मूर्ति देने के बाद मैंने नवीं मूर्ति तुम्हें देना का वादा किया था।

अब मैं तुम्हारे पिता को दिया हुआ वादा पूरा कर सकता हूंं। बस तुम्हें पहले मेरी एक इच्छा पूरी करनी होगी। तुम्हें एक सुंदर मन की लड़की को इस जिन्न नगरी में लाना होगा। तब जैनुस्सनम ने जिन्न के बादशाह से कहा कि मैं किसी का मन कैसे देख सकता हूं। हम इंसान किसी के मन में क्या चल रहा है, यह नहीं जान पाते हैं।

जिन्न के बादशाह ने कहा कि हम जिन्न भी इंसान की तरह ही किसी का मन नहीं पढ़ सकते। हां, मैं तुम्हें एक कांच दे सकता हूं। जिन्न ने आगे कहा कि यह एक जादुई कांच है। इसमें जिस भी लड़की की शक्ल सुंदर दिखे, तो समझ जाना कि उसका मन अच्छा है। इस शीशे की खासियत यही है कि इसमें किसी भी बुरे दिल वाले की शक्ल अच्छी नहीं दिखती है। बस ध्यान देना कि जबतक वो हमारे इस जिन्न राज्य में आए, तबतक उसका मन साफ ही होना चाहिए। अगर यहां पहुंचने पर उसका मन मैला दिखा, तो उसकी सजा तुम्हें मिलेगी।

जिन्न की बात सुनने के बाद जैनुस्सनम और मुबारक दोनों उसी नाव से नदी के दूसरी ओर पहुंच गए। दोनों वहां से उनका इंतजार कर रहे सेवकों के साथ काहिरा लौट आए। कुछ दिन आराम करने के बाद जैनुस्सनम एक अच्छे मन वाली लड़की ढूंढने के लिए बाहर जाने लगा। तब मुबारक ने बताया कि इस इलाके में कई सारी लड़कियां हैं। पहले इसी इलाके से लड़कियों को ढूंढते हैं। इतना कहते ही मुबारक ने एक बुढ़िया को लड़कियां ढूंढने का जिम्मा दे दिया।

कुछ ही दिन में वो बुढ़िया कई सारी लड़कियां मुबारक के घर लेकर आ गई। सारी लड़कियां दिखने में काफी खूबसूरत थी, लेकिन जादुई कांच में कोई भी सुंदर नहीं लग रही थी। शहर की सारी लड़कियां देखने के बाद मुबारक और जैनुस्सनम दोनों ही बगदाद चले गए।

मुबारक और जैनुस्सनम दोनों ने मिलकर बगदाद में अच्छे दिल वाली लड़की ढूंढना शुरू किया। कई दिनों तक कुछ न होने पर दोनों ने एक कमरा किराए पर ले लिया। उनके पड़ोस में मुराद नाम का आदमी रहता था। उसने एक दिन दोनों से बगदाद आने का कारण पूछा। मुबारक और जैनुस्सनम ने उसे बताया कि वो एक अच्छे मन की लड़की ढूंढ रहे हैं।

उन्होंने मुराद को यह नहीं बताया कि उन्हें लड़की को जिन्न के पास लेकर जाना है। ऐसे में मुराद को लगा कि जैनुस्सनम बादशाह खुद विवाह करने के लिए लड़की ढूंढ रहा है। यह सोचकर मुराद अपने साथ बादशाह को एक लड़की के घर लेकर गया और उसके पिता से बातचीत करने लगा। तभी उसकी बेटी वहां आई, तो मुराद ने उसे चेहरे से नकाब हटाकर सबको आदाब करने के लिए कहा। लड़की ने जैसे ही चेहरे से नकाब हटाया, तो जैनुस्सनम उसे देखता ही रह गया। उसके मन में हुआ कि यह लड़की, तो मेरी ही होनी चाहिए।

उसी दौरान मुराद ने जैनुस्सनम से उस लड़की की शादी की बात कर दी। लड़का बादशाह है जानते ही लड़की के पिता ने तुरंत शादी के लिए हां कह दिया। इस दौरान जैनुस्सनम उस लड़की को ही देख रहा था। तभी उसने जिन्न का दिया हुआ जादुई कांच निकला। वो लड़की उसमें भी बहुत सुंदर दिख रही थी। यह देखकर जैनुस्सनम बेहद खुश हुआ।

तब तक मुराद ने दोनों का निकाह भी तय कर दिया था। जैनुस्सनम शादी की बात सुनते ही डर गया, लेकिन उसे उस लड़की से प्यार हो गया था। इसलिए, दो दिन बाद उसने लड़की से निकाह कर लिया। जैनुस्सनम उससे प्यार करने लगा था, इसलिए चाहता था कि वो उसे अपने शहर लेकर जाए।

तभी मुबारक ने कहा कि तुम ऐसा बिल्कुल भी मत करना। वरना जिन्न तुम्हें बुरा दंड देगा। किसी तरह से अपने दिल पर पत्थर रखकर वो उस लड़की को जिन्न के शहर लेकर जाने लगा। रास्ते में मुबारक से जैनुस्सनम की पत्नी ने पूछा कि मेरे पति मेरी तरफ देखते भी नहीं हैं। क्या ये मुझे पसंद नहीं करते?

इसका जवाब देते हुए मुबारक ने बताया कि वो तुमसे बहुत प्यार करता है, लेकिन उसकी कुछ मजबूरी है। इतना कहकर उसने जिन्न का वो पूरा किस्सा सुना दिया। लड़की जोर-जोर से रोने लगी, लेकिन कोई उसकी मदद नहीं कर सकता था। कुछ ही देर में तीनों जिन्न के शहर पहुंच गए। जिन्नों का बादशाह लड़की को देखकर बहुत खुश हुआ। उसने मुबारक और जैनुस्सनम दोनों को अपने राज्य वापस लौटने के लिए कह दिया। फिर उसने जैनुस्सनम को कहा कि तुम्हें वो नवीं मूर्ति अपने उसी महल में मिल जाएगी।

इतना सुनकर दोनों वापस आ गए। जैनुस्सनम उस लड़की की याद में रोता रहा, लेकिन कुछ कर नहीं पाया। वो वापस काहिरा आया और मां को सबकुछ बता दिया। मां ने कहा कि अब तो वो मूर्ति वहां आ गई होगी, चलो उसे चलकर देख लेते हैं। मां की जिद को देखते हुए जैनुस्सनम उस महल में चला गया, लेकिन उसके मन में वही लड़की थी। जैसे ही वो महल पहुंचा उसे आठवीं मूर्ति के बगल में वो लड़की मूर्ति की तरह खड़ी दिखी।

उस लड़की को देखकर जैनुस्सनम काफी खुश हो गया। लड़की ने बादशाह से कहा कि तुमने तो मुझे जिन्न के हाथों मरने के लिए छोड़ दिया था। अब मुझे यहां देखकर तुम्हें बहुत दुख हो रहा होगा। जैनुस्सनम ने कहा कि मैं तुम्हें अपने दिल का हाल नहीं बता सकता हूं। मैं हर वक्त यही चाहता था कि तुम मुझे वापस मिल जाओ।

तभी वहां जिन्न का बादशाह आया और कहा कि जैनुस्सनम मैं तुम्हारी परीक्षा ले रहा था। तुम उसमें पास हुए। इस लड़की को मैंने मारने के लिए या अपने लिए नहीं, बल्कि तुम्हारे लिए ही चुनने के लिए कहा था। अब तुम्हें इस लड़की के साथ ही वो नवीं मूर्ति भी मिल जाएगी। बस मैं चाहता था कि तुम सूझबूझ वाले इंसान बन जाओ। अब तुम्हें यह सच्चे मन की लड़की हरदम अच्छी राह दिखाएगी और कई चीजें अबतक के सफर में तुम समझ भी गए होंगे।

इतना कहकर जिन्न का बादशाह अदृश्य हो गया। उसके बाद जैनुस्सनम ने अपने निकाह की शानदार दावत दी और पूरे नगर के लोगों को मिठाई व उपहार दिए। इसके बाद वो अपनी पत्नी के साथ खुशी-खुशी रहने लगा।

आगे बादशाह शहरयार को शहरजाद क्या कहानी सुनाती है, जानने के लिए मॉमजंक्शन की वेबसाइट पर दूसरी स्टोरी पढ़ें।

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