भूत की कहानी : भूतिया कुर्सी | Bhootiya Kursi Story In Hindi

July 27, 2021 द्वारा लिखित

Bhootiya Kursi Story In Hindi

सालों पहले रामनगर गांव के पास के घने जंगल में राजू नामक तांत्रिक रहता था। उसे अपनी विद्या और ज्ञान पर खूब घमंड था। उसका कहना था कि वो चाहे तो सभी को अपने काबू में कर सकता है। साथ ही तंत्र विद्या की मदद से किसी को जान से मारने की कला भी उसे खूब आती थी।

उसी दौरान रामनगर गांव के युवा एक-एक करके गायब हो रहे थे। कुछ समय बाद ग्रामीणों को समझ आया कि सभी जवान लोगों को तांत्रिक अपनी विद्या से काबू करके खत्म कर रहा है। इस बात से परेशान होकर सभी ग्रामीणों ने चर्चा की और यह फैसला लिया कि वो सब मिलकर तांत्रिक को मार देंगे।

अपनी इस योजना को अंजाम देने के लिए एक दिन सभी ग्रामीण मिलकर तांत्रिक के घर पहुंच गए। उस समय तांत्रिक किसी पूजा में बैठा हुआ था। इसे अच्छा मौका समझते हुए सभी ने उसे एक कुर्सी से बांध दिया और उसपर आग लगाकर वहां से चले आए। ग्रामीणों के मन में हुआ कि तांत्रिक उसी आग की लपटों में झुलस जाएगा और उससे उनका पीछा छूटेगा। हुआ भी ऐसा ही। करीब चार से पांच साल तक सभी लोग अपने गांव में हंसी-खुशी रहने लगे।

अचानक एक दिन चार लड़के अपने शहर से घूमने के लिए कहीं जा रहे थे। तभी बीच में रामनगर गांव पड़ा। रात बहुत हो चुकी थी, तो उन्हें लगा कि थोड़ा वक्त यही गुजार लिया जाए।

चारों लड़के रामनगर के जंगल में ही रूक गए। उन्हें जंगल में कुछ घूमने का मन हुआ तो वो आगे बढ़ने लगे और बढ़ते-बढ़ते तांत्रिक जहां रहता था वहां पहुंच गए। पूरे घर में मकड़ी के जाल लगे हुए थे। तभी एक लड़के को आधी जली हुई कुर्सी नजर आई और वो बिना कुछ सोचे-समझे उसपर बैठ गया। बैठते ही उसके अंदर तांत्रिक की आत्मा घुस गई। अब लड़का जोर-जोर से चिल्लाकर कहने लगा कि अब मैं सबसे बदला लूंगा। पूरे गांव में आग लगाकर सबको जला दूंगा।

अपने दोस्त को इस तरह का बर्ताव करते देख अन्य तीन लड़के डर गए और वहां से गांव की तरफ बढ़ने लगे। सुबह होते ही उन्होंने सरपंच से मुलाकात की और सारा किस्सा सुना लिया। सबसे पहले तो सरपंच ने उन तीनों लड़कों पर खूब गुस्सा किया। उन्होंने पूछा कि तुम लोगों को किसने कहा था वहां जाने के लिए?

सरपंच को गुस्सा करते देख लड़कों ने कहा कि आप हमें माफ कर दीजिए, लेकिन हमें अपने दोस्त को बचाना है। कुछ तरकीब बताइए।

थोड़ी देर सोचने के बाद सरपंच ने कहा, “अगर वो लड़का कुर्सी से उठता है और खुद को आग लगा लेता है, तो शायद तांत्रिक की आत्मा उसे छोड़ दे। सरपंच ने ये बात कही ही थी कि जिस लड़के पर तांत्रिक का भूत घुसा था वो कुर्सी के साथ उड़ता हुआ गांव पहुंच गया।

अपने दोस्त को इस हालत में देख उन तीनों लड़कों ने  सबसे पहले जाकर उन लोगों से मुलाकात की, जिन्होंने तांत्रिक की कुर्सी पर आग लगाई थी। उनसे बात करके सभी लड़के उन्हें अपने दोस्त के पास लेकर चले गए। जैसे ही उनके दोस्त के अंदर बैठे तांत्रिक ने कुर्सी पर आग लगाने वालों को अपने सामने देखा, उसे बहुत गुस्सा आया। गुस्से में तांत्रिक कुर्सी से उठा और  उन लोगों पर हमला करने लगा।

तभी उन तीनों लड़कों ने तांत्रिक की उस कुर्सी पर आग लगा दी। कुर्सी पर आग लगते ही तांत्रिक उनके दोस्त के शरीर को छोड़कर चला गया।

कहानी से सीख – जीवन में हर काम सोच-समझकर करना चाहिए। साथ ही दूसरों की सलाह पर अच्छे से काम किया जाए, तो समस्या से मुक्ति मिल सकती है।

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