भूत की कहानी : भूतनी का घर | Bhootni ka Ghar Story In Hindi

द्वारा लिखित July 27, 2021

Bhootni ka Ghar Story In Hindi

बहादुरगढ़ नाम के शहर में एक बेहद पुराना घर था। उस घर को सब लोग भूतिया और अपशकुनी कहते थे, क्योंकि जो भी वहां रहने आता उनकी किसी न किसी कारण से मृत्यु हो जाती। इसलिए वो घर खरीदने के लिए कोई भी तैयार नहीं होता था।

एक बार विजय नाम के शख्स ने उस घर को बहुत ही सस्ते दाम में खरीद लेता है और अपने बेटे मोनू के साथ सारा सामान लेकर वहां रहने आ जाता है। घर में शिफ्ट होने के 1-2 दिन में ही विजय को अपने आसपास अजीबो-गरीब घटनाएं घटित होने का एहसास होने लगा। पहले तो वह इसे नजरअंदाज करता रहा, लेकिन जब उसे घर में किसी की मौजूदगी का एहसास होने लगा तो वह सतर्क हो गया।

एक दिन मोनू दौड़ता हुआ विजय के पास आया और कहने लगा कि वॉशरूम में पानी अचानक बंद हो गया और उसने वहां सफेद कपड़े में एक औरत को देखा। इतना कहते-कहते मोनू अचानक चुप हो गया और विजय की ओर उंगली दिखाते हुए कहने लगा, “पापा, वो औरत आपके पीछे खड़ी है।” इतना कहकर मोनू ने डर से चीखने लगा। विजय मोनू को गोद में उठा कर उसी वक्त घर से बाहर निकल गया।

मोनू बहुत सहम गया था तो उसका डर भगाने के लिए विजय ने उसके लिए एक कुत्ता खरीदा और उसे साथ लेकर तीनों घर वापस आ गए। एक रात बहुत तेज बरसात में जब अचानक घर की बिजली चली गई। विजय ने घर से झांक कर देखा तो आसपास के सभी घरों में बिजली थी सिवाय उनके घर के तो उसे लगा की जरूर पावर सप्लाई में कुछ गड़बड़ी हुई होगी।

इतने में विजय को मोनू के जोर से चिल्लाने की आवाज आती है। विजय दौड़ता हुआ टॉर्च लेकर उसके पास जाता है। मोनू को दोबारा से घर में वह औरत दिखाई देती है। मोनू को सहमा देखकर विजय उसे अपने साथ बिजली ठीक करने के लिए पावर हाउस ले जाता है। उनका कुत्ता भी यहां-वहां देखते हुए जोर-जोर से भौंकने लगता है। विजय को आभास होता है कि कोई उनके पीछे-पीछे आ रहा है।

पावर हाउस का दरवाजा खोलते ही विजय को सामने एक लाश दिखाई देती है। लाश देखकर मोनू भी डर के मारे चिल्लाने लगता है। विजय अपने बेटे को लेकर तुरंत दरवाजा खोलकर घर से बाहर भागने की कोशिश करने लगता है। घर से बाहर निकलते हुए अचानक विजय का पांव दरवाजे के पास बनी लकड़ियों की सीढ़ियों में फंस जाता और बहुत कोशिश करने पर भी वह पांव बाहर नहीं निकाल पाता।

मोनू अपने पापा को बाहर खींचने की कोशिश करता है, लेकिन काफी प्रयास करने पर भी वह विजय को बाहर नहीं निकाल पाता। कोई उपाय न सुझने पर मोनू अपने कुत्ते को लेकर वापस घर के अंदर चला जाता है और दरवाजा खुद ब खुद बंद हो जाता है।

वहां विजय भी करीब 15 मिनट तक मशक्कत करने के बाद अपना पांव बाहर निकालने में सफल हो जाता है। विजय दौड़ता हुआ घर के अंदर जाता है और चारों ओर मोनू की तलाश करता है, लेकिन उसे ना तो मोनू और ना ही कुत्ते का कुछ पता चल पाता है। बहुत ढूंढने पर भी जब दोनों नहीं मिलते, तो विजय हार मान लेता है और उनके दोबारा मिलने की आस में वहीं रहने लगता है।

कुछ दिन बाद विजय बिजली की लाइन को ठीक करने के लिए एक इलेक्ट्रिशियन को बुलाता है, लेकिन घर में दाखिल होने से पहले ही वह दरवाजे से ही उल्टे पैर भाग जाता है। विजय के पूछने पर वह कहता है कि आपके घर में एक औरत, एक बच्चा और एक कुत्ते का भूत दिखाई दे रहा है। इलेक्ट्रिशियन की बात सुनकर विजय उदास हो जाता है। उसे एहसास हो जाता है कि अब उसका बेटा कभी लौटकर नहीं आएगा, जिसके बाद विजय वह घर छोड़कर चला जाता है और कभी लौटकर नहीं आता।

कहानी से सीख :

किसी भी चीज पर अपना समय व धन निवेश करने से पहले जांच पड़ताल कर लेनी चाहिए

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