श्री कृष्ण और पूतना वध की कहानी | Shri Krishna Putna Vadh

February 14, 2020 द्वारा लिखित

krishna putna vadh

कंस का अंत नजदीक आ चुका था। उसे इस बात का पता चल चुका था कि उसकी मृत्यु उसके ही भांजे कृष्ण के हाथों होने वाली है। फिर क्या था, बाल गोपाल को मारने के लिए कंस कई तरह के हथकंडे अपनाने लगा। वह कृष्ण को मारने के लिए शक्तिशाली दानवों को भेजता, लेकिन नटखट कन्हैया की बाल लीला के आगे किसी की नहीं चली।

एक बार कंस ने पूतना नाम की राक्षसी को बाल कृष्ण का वध करने के लिए भेजा। जैसे ही पूतना गोकुल पहुंची, उसने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कर लिया। स्त्री का रूप धारण कर पूतना घर-घर जाकर कृष्ण की तलाश करने लगी। कृष्ण की खोज में पूतना को जो भी बालक मिलता, वो उसे अपने विष वाले दूध को पिलाकर मार देती।

जब पूतना कृष्ण के घर पहुंचती है, तब भगवान कृष्ण को पता चल जाता है कि वह एक राक्षसी है। पूतना कृष्ण को गोदी में उठाकर अपना विषैला दूध पिलाने लगती है। कृष्ण को दूध पीते देखकर पूतना सोचने लगती है कि अब यह मर जाएगा। भगवान कृष्ण कुछ देर बाद दूध पीते-पीते ही राक्षसी के प्राण खींचने लगते हैं। दर्द के कारण राक्षसी पूतना कृष्ण को आसमान की ओर लेकर उड़ जाती है और पास के जंगल में कान्हा सहित गिर जाती है। थोड़ी देर बाद ही राक्षसी के प्राण निकल जाते हैं। इस तरह भगवान कृष्ण राक्षसी पूतना का वध कर देते हैं।

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