विक्रम बेताल की चौबीसवीं कहानी: रिश्ता क्या हुआ?

द्वारा लिखित May 25, 2021

vikram betal maa beti rishta kya hua

विक्रम और बेताल रिश्ता क्या हुआ, बेताल पच्चीसी – चौबीसवीं कहानी

राजा विक्रमादित्य कई प्रयासों के बाद बेताल को एक बार फिर पकड़ लेते हैं और श्मशान की ओर चल लेते हैं। हर बार की तरह इस बार भी बेताल नई कहानी सुनाना शुरू करता है। बेताल कहता है….

बहुत समय पहले की बात है। एक राज्य पर मांडलिक नामक का राजा का शासन था। उसकी एक सुन्दर पत्नी और लड़की थी। राजा की पत्नी का नाम चडवती और बेटी का नाम लावण्यवती था। जब लावण्यवती बड़ी हुई और उसके विवाह का समय हुआ, तो राजा मांडलिक के करीबियों ने चुपके से उसका राज्य हड़प लिया और राजा को उसके परिवार के साथ राज्य से बाहर कर दिया।

राजा अपनी पत्नी और बेटी के साथ मालव देश की ओर चल दिया, जो उसकी पत्नी चडवती के पिता का राज्य था। चलते-चलते जब रात हो चली, तो उन्होंने वन में ही रात गुजारने का फैसला किया। राजा ने पत्नी और बेटी से कहा कि तुम जाकर कहीं छिप जाओ, क्योंकि यहां पास में भीलों का इलाका है। वह रात को तुम लोगों को परेशान कर सकते हैं। राजा की बात पर पत्नी चडवती और बेटी लावण्यवती वन में जाकर छिप जाती हैं। उसी समय भील राजा पर हमला कर देते हैं। राजा बड़ी बहादुरी से भीलों से लड़ता है, लेकिन अंत में मारा जाता है।

भीलों के जाने के बाद जब पत्नी चडवती और बेटी लावण्यवती बाहर आती है, तो वो राजा को मरा हुआ पाती हैं। राजा के शव को देख दोनों बहुत दुखी होती हैं। दोनों मां-बेटी राजा की मौत का शोक मनाते हुए एक तलाब के किनारे जा पहुंचती हैं।

तभी चंडसिंह नाम का एक साहूकार अपने बेटे के साथ वहां से गुजरता है। उसे रास्ते में दो महिलाओं के पैरों के निशान दिखाई देते हैं। यह देखकर साहूकार ने अपने बेटे से कह, “अगर ये स्त्रियां मिल जाएं, तो जिससे चाहो तुम शादी कर लेना।”

पिता की यह बात सुनकर बेटा कहता है, “पिता जी छोटे पैर वाली उम्र में भी कम होगी। इसलिए, मैं छोटे पैर वाली से ही शादी करूंगा। आप बड़े पैर वाले से शादी कर लेना।”

साहूकार की शादी करने की इच्छा नहीं थी, लेकिन बेटे के बार-बार जोर देने पर वह राजी हो जाता है। वो दोनों उत्सुकता से उन पैरों के निशान वाली महिलाओं को ढूंढने में जुट जाते हैं।

दोनों जब स्त्रियों को ढूंढते-ढूंढते तलाब के पास पहुंचते हैं, तो उन्हें वो सुन्दर स्त्रियां दिखाई देती हैं। साहूकार आगे बढ़कर स्त्रियों से उनका परिचय पूछता है, तो रानी चडवती सारी आप बीती साहूकार को बता देती हैं। रानी की कहानी सुनकर साहूकार दोनों स्त्रियों को सहारा देने के लिए अपने घर ले आता है।

संयोग से रानी चडवती के पैर छोटे और बेटी लावण्यवती के पैर बड़े थे। इसलिए, साहूकार का बेटा रानी चडवती से और साहूकार बेटी लावण्यवती से शादी कर लेता है। उन दोनों की आगे चलकर कई संतान पैदा होती हैं।

बेताल पूछता है, “बता विक्रम अब इन दोनों की संतानों का आपस में रिश्ता क्या होगा?”

इस सवाल से विक्रम भी सोच में पड़ जाता है। लाख सोचने के बाद भी उसे सही जवाब नहीं सूझता। इसलिए, वह चुपचाप आगे बढ़ता रहता है।

ये देखकर बेताल कहता है, “राजन, अगर तुम्हें इसका जवाब नहीं पता, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। मैं तुम्हारे पराक्रम और धीरज से बहुत खुश हूं। मैं इस मुर्दे से निकल जाता हूं और तुम इस मुर्दे को अपने वादे के अनुसार योगी के पास ले जा सकते हो, लेकिन याद रहे जब योगी तुम्हें सिर झुकाकर इस मुर्दे को प्रणाम करने को कहे, तो तुम उनसे कहना कि पहले आप करके दिखाएं कि कैसे करना है। जब योगी सिर झुकाएं, तो तभी अपनी तलवार से उसका सिर काट लेना। उसका सिर काटकर तुम पूरी पृथ्वी के चक्रवर्ती सम्राट बन जाओगे। वहीं, अगर तुमने उसका सिर नहीं काटा, तो योगी तुम्हारी बलि दे देगा और सिद्धि प्राप्त कर लेगा।”

इतना कहते ही बेताल ने मुर्दे का शरीर छोड़ दिया और राजा विक्रम मुर्दे का शरीर लेकर योगी के पास पहुंच जाते हैं। इसी प्रकार रिश्ता क्या हुआ विक्रम और बेताल की एक अद्भूत कथा समाप्त होती है।

कहानी से सीख :

बिना तथ्य को जाने किसी भी फैसले को नहीं लेना चाहिए। इससे आगे चलकर परेशानी हो सकती है।

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