विक्रम बेताल की कहानी: पापी कौन है - बेताल पच्चीसी पहली कहानी

द्वारा लिखित March 30, 2020

Story of Vikram Betal Who is a sinner - Betal twenty five first story

कड़ी मेहनत के बाद राजा विक्रमादित्य ने एक बार फिर बेताल को पकड़ लिया। वह उसे अपने कंधे पर लादकर श्मशान की ओर ले चले। रास्ते में बेताल ने राजा को एक नई कहानी शुरू की और बेताल बोला…

एक बार की बात है काशी में एक राजा था, जिसका नाम प्रताप मुकुट था। उसकी एक संतान थी, जिसका नाम वज्रमुकुट थी। एक दिन वज्रमुकुट दीवान के बेटे के साथ शिकार करने जंगल गया। काफी घूमने के बाद उन दोनों को एक तालाब दिखा, जिसमें कमल खिले थे और हंस उड़ रहे थे। दोनों दोस्तों ने वहां रुककर तालाब के पानी से हाथ-मुंह धोया और पास ही बने महादेव के मंदिर में दर्शन करने चले गए। दोनों ने अपने घोड़े मंदिर के बाहर ही बांध दिए। फिर जब दोनों दोस्त दर्शन करके मंदिर से बाहर निकले, तो उन्होंने देख कि तालाब में एक राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ स्नान करने आई है।

राकुमारी को देखकर राजकुमार काफी खुश हुआ। राजकुमार और राजकुमारी दोनों एक-दूसरे को देखकर मोहित हो गए, जबकि दीवान का बेटा वहीं एक पेड़ के नीचे आराम करने लगा। राजकुमार को देखते ही राजकुमारी ने बालों में से एक कमल का फूल निकाला, कान से लगाया, दांतों से कुतरा, पैरों के नीचे दबाया और फिर अपने छाती से लगाकर अपनी सहेलियों के साथ चली गई।

उसके जाने के बाद राजकुमार काफी दुखी हुआ और अपने मित्र के पास लौटकर सारी बात बताई। राजकुमार बोला, “मैं राजकुमारी के बिना नहीं रह सकता हूं, लेकिन मुझे इस राजकुमारी के बारे में कुछ भी नहीं पता है। वह कहां रहती, उसका नाम क्या है?”

दीवान के बेटे ने सारी बातें सुनी और राजकुमार को दिलासा देते हुए बोला, “राजकुमार, आप घबराइए मत। राजकुमारी ने सबकुछ बताया है। आश्चर्यचकित होते हुए राजकुमार ने पूछा, “वो कैसे?”

दीवान के बेटे ने राजकुमार को बताना शुरू किया कि राजकुमारी ने कमल के फूल को बालों से निकालकर कानों से लगाया यानी राजकुमारी का कहना है कि वह कर्नाटक से है। दांत से फूल को कुतरा, मतलब उनके पिता का नाम दंतावट है। फूल को पांव से दबाने का मतलब था कि राजकुमारी का नाम पद्मावती है और फूल को सीने से लगाने का मतलब था कि अब आप उनके हृदय में बस चुके हैं।

यह सब सुनते ही राजकुमार बहुत ज्यादा खुश हो गया। खुश होते हुए राजकुमार ने दीवान के बेटे से कहा कि मुझे कर्नाटक जाना है मुझे वहां ले चलो। दोनों दोस्त कई दिनों तक घूमते-फिरते कर्नाटक पहुंचे। जब वो दोनों राजमहल के निकट पहुंचे, तो उन्हें एक चरखा चलाती बुजुर्ग महिला दिखी।

महिला को देखते ही दोनों घोड़े से उतरे और उसके पास जाकर कहा, “माई, हम दोनों व्यापारी हैं, हम बहुत दूर से आए हैं। हमारा सामान अभी तक आया नहीं है, कुछ दिनों में हमारा सामान भी पहुंच जाएगा। हम दोनों को बस रहने के लिए थोड़ी-सी जगह चाहिए।” उनकी बातें सुनकर बुजुर्ग महिला की ममता जाग उठी, उसने कहा, “बेटा इसे अपना ही घर समझो। जब तक मन करे यहां रह सकते हो।” इसके बाद दोनों उसके घर में रहने लगे। इसी बीच दीवान के बेटे ने उस महिला से पूछा, “आप क्या काम करती हैं माई? आपके यहां कौन-कौन रहता है? आप कैसे अपना गुजर-बसर करती हैं?”

इन सारे सवालों का जवाब धीरे-धीरे उस महिला ने देना शुरू किया। उसने कहा, “मेरा एक पुत्र है, जो राजा के यहां नौकरी करता है। मैं राजा की पुत्री पद्मावती की दासी थी। बूढ़ी हो गई हूं, इसलिए घर में ही रहती हूं। महाराज खाने को दे देते हैं और पूरे दिन में एक बार राजकुमारी से मिलने चली जाती हूं।”

इतना सुनते ही राजकुमार ने बूढ़ी औरत को कुछ धन दिए और राजकुमारी तक संदेशा पहुंचाने को कहा। राजकुमार ने उस बूढ़ी महिला को कहा, “माई, कल तुम जब राजकुमारी के पास जाओ, तो उनसे कहना कि जेठ सुदी पंचमी को तुम्हें नदी के पास जो राजकुमार मिला था, वो तुम्हारे राज्य में आ गया है।” अगले दिन वो बूढ़ी औरत राजकुमार का संदेश लेकर राजकुमारी के पास गई। उस महिला की बात सुनते ही राजकुमारी गुस्सा हो गई। उन्होंने हाथों में चंदन लगाकर उस महिला के गाल पर तमाचा मारते हुए कहा, मेरे घर से निकल जाओ।

बूढ़ी औरत ने घर लौटकर राजकुमार को सारी बातें बताई। महिला की बातें सुनकर राजकुमार चौंक गया। फिर राजकुमार के मित्र ने राजकुमार को धैर्य बंधाते हुए कहा, “राजकुमार आप चिंतित न हों। राजकुमारी की बातों को समझने की कोशिश करें। ध्यान दें कि राजकुमारी ने उंगलियों को सफेद चंदन में डुबोकर गाल पर मारा है। इसका मतलब अभी कुछ दिन चांदनी के हैं। उनके खत्म होने के बाद अंधेरी रात में मिलूंगी।”

कुछ दिनों बाद बूढ़ी महिला फिर राजकुमारी के पास संदेशा लेकर पहुंची। इस बार राजकुमारी ने केसरी रंग में तीन उंगलियां डुबोकर बूढ़ी महिला के मुंह पर मारते हुए कहा, “भागो यहां से।” फिर उस महिला ने आकर राजकुमार को सारी बातें बताई। राजकुमार यह सुनकर बहुत दुखी हुआ। इस पर दीवान के बेटे ने राजकुमार से कहा, “इसमें दुखी होने की कोई बात नहीं है राजकुमार। राजकुमारी ने कहा है कि अभी उसकी तबीयत ठीक नहीं है, तो इसलिए तीन दिन और रुक जाओ।”

तीन दिन बाद वो बूढ़ी महिला फिर राजकुमारी के पास जा पहुंची। इस बार फिर से राजकुमारी ने उस महिला को फटकारा और पश्चिम की खिड़की से बाहर जाने के लिए कहा। वो महिला फिर से राजकुमार के पास गई और सारी कहानी सुनाई। तब दीवान के बेटे ने राजकुमार को समझाते हुए कहा कि मित्र राजकुमारी ने आपको उस खिड़की की तरफ बुलाया है।

राजकुमार यह सुनते ही खुशी से उछल पड़ा। उसने बूढ़ी महिला के कपड़े पहनकर नारी का भेष धारण किया, इत्र लगाया और हथियार बांधकर राजकुमारी से मिलने चल पड़ा। राजकुमार महल पहुंचा और खिड़की के रास्ते राजकुमारी के कमरे में पहुंच गया। राजकुमारी वहां पर तैयार थी और राजकुमार का इंतजार कर रही थी। राजकुमार जैसे ही कमरे में गया, उसकी आंखें खुली की खुली रह गईं। राजकुमारी के कमरे में कई महंगी चीजें रखी थीं। रातभर राजकुमार और राजकुमारी साथ ही रहे। फिर जैसे ही दिन निकलने को आया राजकुमारी ने उस राजकुमार को सबसे छिपा दिया। जब रात होने लगती, तो राजकुमार बाहर आ जाता। इस तरह करते-करते कई दिन बीत गए। फिर अचानक राजकुमार को अपने दोस्त की याद आई। राजकुमार को अपने दोस्त की चिंता हुई कि पता नहीं उसका दोस्त कहां होगा, कैसा होगा और उसका क्या हाल हुआ होगा।

राजकुमार को दुखी देखकर राजकुमारी ने राजकुमार के दुःख का कारण पूछा। उसके बाद राजकुमार ने राजकुमारी को अपने मित्र के बारे में बताया। राजकुमार ने कहा, “वह मेरा बहुत अच्छा और चतुर दोस्त है। उसी के वजह से मैं तुमसे मिल पाया हूं।”

यह सुनने के बाद राजकुमारी ने राजकुमार को कहा, “मैं तुम्हारे दोस्त के लिए स्वादिष्ट भोजन बनवाती हूं। तुम उसे भोजन कराकर और उसे समझाकर वापस आ जाना।”

फिर राजकुमार खाना लेकर अपने दोस्त के पास पहुंचा। दोनों मित्र लगभग कई महीनों से नहीं मिले थे। मिलने के बाद राजकुमार ने अपने मित्र को सारी बातें बताई। राजकुमार ने कहा, “मैंने राजकुमारी को तुम्हारी चतुराई के बारे में बताया। राजकुमारी ने तुम्हारे लिए भोजन भिजवाया है।”

यह सब सुनकर दीवान का बेटा सोच में पड़ गया। उसने राजकुमार से कहा कि यह तुमने ठीक नहीं किया। राजकुमारी समझ गई है कि जब तक मैं तुम्हारे साथ हूं, तब तक वह आपको अपने बस में नहीं रख सकेगी। इसलिए, उन्होंने इस खाने में जहर डालकर भेजा है।

यह कहते ही दीवान के बेटे ने उस खाने से एक लड्डू लेकर सामने बैठे एक कुत्ते को दिया। लड्डू खाते ही कुत्ते की मृत्यु हो गई। यह देखते ही राजकुमार को बहुत बुरा लगा। उसने कहा कि ऐसी औरत से भगवान रक्षा करे। अब मैं उस राजकुमारी के पास नहीं जाऊंगा।

दीवान के बेटे ने राजकुमार से कहा, “नहीं, अब कुछ ऐसी तरकीब निकालनी चाहिए, जिससे कि हम उसे अपने साथ अपने घर ले जा सकें। आज रात तुम वहां जाओ और जब राजकुमारी सो रही हो, तब उसकी बाईं जांघ पर त्रिशूल का निशान बना देना। फिर उसके गहने लेकर आ जाना।

राजकुमार ने अपने मित्र की बात सुनी और उसके कहे अनुसार ही किया। फिर दीवान के बेटे ने योगी का भेष धारण कर लिया। उसने राजकुमार से कहा कि तुम इन गहनों को बाजार में बेच दो। अगर कोई पकड़े, तो कहना मेरे गुरु के पास चलो और उसे मेरे पास ले आना।

राजकुमार वो गहने महल के पास एक सुनार के पास ले गया। सुनार ने गहनों को देखते ही पहचान लिया और राजकुमार को कोतवाल के पास ले गया। कोतवाल ने राजकुमार से सवाल पूछे, तो राजकुमार ने कहा, “ये गहने मुझे मेरे गुरुजी ने दिए हैं। यह सुनने के बाद कोतवाल ने गुरु यानी दीवान के बेटे को भी पकड़ लिया और राजा के दरबार में ले गया।”

राजा ने पूछा, “योगी महाराज, आपको ये कीमती गहने कहां से मिले?”

योगी का भेष धारण किए हुए दीवान के बेटे ने कहा, “महाराज मैं श्मशान में काली चौदस को डाकिनी मंत्र प्राप्त कर रहा था कि मेरे सामने डाकिनी आई। मैंने उसके जेवर उतार लिए और उसकी बाईं जांघ पर त्रिशूल का छाप बना दिया।”

यह सुनते ही राजा महल में गया और उसने रानी को कहा कि पद्मावती की बाईं जांघ देखे कि कहीं राजकुमारी के जांघ पर त्रिशूल का छाप तो नहीं है। राजा की बात सुनते ही रानी ने देखा और सच में राजकुमारी की बाईं जांघ पर त्रिशुल का निशान था। यह जानकर राजा बहुत दुखी हुआ। फिर राजा योगी के पास गए और कहा कि योगी बताओ धर्म शास्त्र में बुरी औरतों के लिए क्या सजा है?

योगी ने उत्तर दिया – ब्राह्मण, राजा, गऊ, औरत, पुरुष और अपने राज्य में रहने वाले किसी से भी कोई बुरा काम हो जाए, तो उसे राज्य से बाहर निकाल देना जाना चाहिए। यह सुनते ही राजा ने पद्मावती को जंगल भेज दिया। वहां राजकुमार और दीवान का बेटा मौके के इंतजार में बैठे थे। राजकुमारी को अकेला पाकर दोनों उसे अपने नगर ले आएं और खुशी-खुशी रहने लगे।

कहानी खत्म हुई और हर बार की तरह एक बार फिर बेताल ने विक्रम से पूछा, “तो राजन बताओ इस कहानी में पापी कौन है? जल्दी बताओ राजन, वरना तुम्हारे सिर के टुकड़े-टुकड़े कर दूंगा ”

विक्रम ने उत्तर देते हुए कहा, “पापी राजा था, क्योंकि दीवान के पुत्र ने अपने मालिक का काम किया। कोतवाल ने राजा का कहना सुना और राजकुमार ने अपनी इच्छा पूरी की, लेकिन इस कहानी में राजा पापी था। उसने बिना सोचे-विचारे राजकुमारी को राज्य से बाहर निकाला दिया। विक्रम का इतना कहना ही था कि बेताल फिर उड़कर पेड़ पर जा लटका।

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