10+ बच्चे के शर्मीलेपन को कम करने के टिप्स | Tips For Dealing With Kids Shyness In Hindi

10+ बच्चे के शर्मीलेपन को कम करने के टिप्स | Tips For Dealing With Kids Shyness In Hindi

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हर माता-पिता की इच्छा होती है कि उनका बच्चा दूसरों के सामने शर्माए या हिचकिचाए नहीं। किसी भी विषय पर वह बेझिझक अपनी बात रखे, लेकिन कुछ बच्चे इससे विपरित व्यवहार के होते हैं। यदि आपके बच्चे का व्यवहार शर्मीला है और वह लोगों के बीच असहज महसूस करता है, तो मॉमजंक्शन का यह आर्टिकल आपकी मदद कर सकता है। इस लेख में हम बच्चे के शर्मीले व्यवहार के कारण व उसमें कैसे सुधार लाया जाए, इससे जुड़ी टिप्स शेयर करेंगे।

सबसे पहले जानते हैं कि बच्चों में शर्मीलापन कितना आम है।

क्या बच्चों में शर्मीला व्यवहार सामान्य है?

हां, बच्चों के शुरुआती सालों में शर्मीले व्यवहार को सामान्य माना जा सकता है (1)। वैसे भी कहा जाता है कि हर बच्चा अपने आप में अलग होता है। अब वो शर्मीला है या सभी के साथ घुल-मिल जाने वाला, ये उसके व्यवहार पर निर्भर करता है। अगर बच्चा शर्माता है, तो इसे गलत नहीं माना जा सकता। ऐसे लोगों को इंट्रोवर्ट (Introvert) कहा जाता है। आगे चलकर इनमें से कुछ बच्चों के व्यवहार में बदलाव भी आ सकता है। हां, अगर बच्चा कुछ ज्यादा ही शर्माता है और बिल्कुल भी बात नहीं करता है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जिनके बारे में लेख में आगे विस्तार से चर्चा करेंगे।

लेख के इस भाग में जानेंगे कि बच्चों के शर्मीले व्यवहार के पीछे क्या-क्या कारण हो सकते हैं।

बच्चों में शर्मीलेपन के कारण

बच्चों के शर्मीला होने का कोई एक कारण नहीं होता। इसके पीछे कई परिस्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं, जिनके बारे में क्रमानुसार नीचे बता रहे हैं (2):

  1. माता-पिता का व्यवहार- कई बच्चे भावनात्मक रूप से संवेदनशील होते हैं। अभिभावक द्वारा बात-बात पर डांटने या डराने पर ऐसे बच्चों का व्यवहार आगे चलकर शर्मीला हो सकता है।
  1. आनुवांशिक- बच्चे के शर्मीले व्यवहार के पीछे अनुवांशिक कारण भी हो सकता है। माता-पिता में से किसी एक का शर्मीला व्यवहार बच्चे में भी दिखाई दे सकता है।
  1. आसपास देखकर सीखना- बच्चे अपने आसपास देखकर जल्दी सीखते हैं। पेरेंट्स बच्चों के रोल मॉडल होते हैं। कई बार बच्चे उन्हें देखकर वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं।
  1. असफल होने का डर-  कई अभिभावक अपनी इच्छाएं बच्चों पर थोपने लगते हैं। उनपर अव्वल आने और सबसे आगे रहने के लिए इतना दबाव बनाते हैं कि उन पर माता-पिता की उम्मीदों पर खरे न उतर पाने का डर सताने लगता है। कई बार बच्चे का यह डर शर्मीलेपन व्यवहार का रूप ले सकता है।   
  1. पेरेंट्स का प्रोटेक्टिव होना- कई बार अभिभावक बच्चों को लेकर इतने केयरिंग हो जाते हैं कि उसके सारे काम खुद करने लग जाते हैं। ऐसे में बच्चों में आत्मविश्वास की कमी आ सकती है। उन्हें हर स्थिति में अपने माता-पिता आसपास चाहिए होते हैं। ऐसे बच्चों का सामाजिक विकास प्रभावित होने की आशंका अधिक होती है।
  1. पेरेंट्स से रिश्ता- जिन बच्चों को माता-पिता का ज्यादा ध्यान नहीं मिल पाता, उन बच्चों में आगे चलकर आत्मविश्वास की कमी देखी जा सकती है।
  1. सामाजिक संवाद की कमी- आजकल बच्चे आउटडोर गेम्स खेलने की बजाए इनडोर गेम्स में उलझे रहते हैं। यही वजह है कि बच्चे बाहर कम निकलते हैं और दूसरे बच्चों से ज्यादा नहीं मिलते। इससे उनका सामाजिक विकास प्रभावित हो सकता है। यह भी बच्चे के शर्मीले व्यवहार के मुख्य कारणों में से एक है।
  1. हमेशा गलत होने का एहसास दिलाना- बच्चे को जाने-अनजाने में बार-बार यह एहसास दिलाना कि वह गलत है, उनके आत्मविश्वास को कम कर सकता है। ऐसे बच्चे अपनी बात रखने से कतराने लग सकते हैं। इससे भी बच्चों का व्यवहार शर्मीला हो सकता है।

 अब सवाल ये उठता है कि बच्चों में शर्मीलेपन की वजह से क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं।

बच्चों में शर्मीलेपन की वजह से होने वाली जटिलता

बच्चे को शर्मीले व्यवहार के कारण कई तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है, जो कुछ इस प्रकार हैं (3) (4):

  • बच्चा अगर शर्म की वजह से अपनी बात नहीं रख पाएगा, तो तरक्की का मौका हाथ से गंवा सकता है।
  • दोस्तों का साथ व्यक्तित्व के विकास के लिए बहुत जरूरी है। देखा गया है कि शर्मीले बच्चों को दोस्त बनाने में मुश्किल आती है।
  • ऐसे बच्चों में आत्मविश्वास की कमी देखी जा सकती है। अकेलापन से जूझने लगते हैं और उनमें अवसाद की समस्या हो सकती है।
  • भीड़ को देखकर बच्चे किसी खेल व एक्टिविटी में भाग लेने से कतराने लग सकते हैं।
  • एंग्जायटी का जोखिम अधिक हो सकता है।
  • कई बार सोशल दबाव के डर के कारण सब कुछ आते हुए बच्चा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता है।
  • बच्चे में आत्मसम्मान में कमी बढ़ सकती है।

शर्मीलापन का निदान जानना चाहते हैं, तो लेख में अंत तक बने रहें।

शर्मीलापन का निदान कैसे किया जाता है?

बच्चे के शर्मीलापन के मामूली मामलों में थोड़ा इंतजार करना बेहतर होगा। यदि बच्चे के व्यवहार में किसी तरह का सुधार नहीं हो रहा है, तो ऐसे में बच्चों की मनोस्थिति को समझते हुए मनोवैज्ञानिक से परामर्श कर सकते हैं, जो निम्न तरीकों से उपचार कर सकते हैं (4) (5):

  1. बातचीत- बच्चे के शर्मीले व्यवहार का पता लगाने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत है। इसमें चिकित्सक बच्चे के मौजूदा स्थिति और पूर्व में हुई घटनाओं को जानकार शर्मीले व्यवहार की वजह जानने की कोशिश कर सकते हैं।
  1. सेल्फ-रिपोर्ट उपकरण- इसमें प्रश्नावली के माध्यम से बच्चे की सामाजिक गतिविधि, एक्टिविटी और व्यवहार का आंकलन किया जाता है। इसके बाद बच्चे से बात करके उसके डर या हिचक को दूर करने का प्रयास किया जाता है।
  1. मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन (साइकोलॉजिकल इवेलुएशन)- इसमें चिकित्सक बच्चे के व्यवहार, सोच और भावनाओं से जुड़े प्रश्न करते हैं। इसके बाद बच्चे द्वारा दिए गए सवालों के जवाब के आधार पर यह पता लगाया जाता है कि बच्चा किसी मानसिक रोग से जूझ रहा है या नहीं।

स्क्रॉल करके जानिए कि बच्चे का शर्मीला व्यवहार किन परेशानियों का कारण बन सकता है।

किसी बच्चे का शर्मीलापन कब उसके लिए समस्या पैदा कर सकता है ?

बच्चे में शर्मीलापन नीचे दी गई परेशानियों का कारण बन सकता है (3):

  • अगर बच्चा हमेशा अपने पेरेंट्स या घर के सदस्यों के आसपास घूमता रहता हो।
  • किसी अजनबी या रिश्तेदार के पास जाने या बात करने से कतराए।
  • बाहर जाने पर किसी बच्चे से न मिले। बच्चों के ग्रुप में भी अकेला रहना पसंद करे।
  • स्कूल या ग्रुप एक्टिविटी में हिस्सा लेने से घबराए।
  • ज्यादा लोगों के बीच जाने पर एंग्जायटी की परेशानी हो सकती है।
  • अकेलापन महसूस होने के बावजूद दूसरे बच्चों से बात न करता हो।
  • सारे उत्तर जानते हुए कक्षा में टीचर के प्रश्न का जवाब न दे पाना।
  • शर्म के कारण किसी भी गेट टुगेदर में हिस्सा न लेना।

आइए जानते हैं कि कैसे बच्चे के शर्मीलेपन को कम किया जा सकता है।

बच्चे के शर्मीलेपन को कम करने के 10+  टिप्स | Tips For Dealing With Kids Shyness In Hindi

 बच्चों में शर्मीलापन कम करने के लिए माता-पिता उन्हें बेहतर माहौल देकर सहायता कर सकते हैं। नीचे हम इससे जुड़े कुछ टिप्स साझा कर रहे हैं:

  1. आत्मविश्वास बढ़ाएं: बच्चे का आत्मविश्वास जगाने में उनकी सहायता करें। इसके लिए उन्हें हमेशा कोशिश करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। साथ ही माता-पिता को बच्चे को फेल होने पर निराश होने से बचाना चाहिए।
  1. चिढ़ाएं नहीं: बच्चे पर शर्मीला होने का टैग न लगाएं। दूसरों को बताएं कि दूसरे बच्चों की अपेक्षा उनके बच्चे को सोशल होने में वक्त लगता है। बच्चा लोगों से घुलने-मिलने में हिचकिचाता है, तो उनकी इस आदत को सुधारने के लिए छोटे ग्रुप से शुरुआत करें। लोगों से मिलवाएं और उन्हें बोलने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे बच्चों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
  1. सोशल होना सिखाएं: बच्चे पर बिना दबाव बनाए उन्हें सोशल होने के लिए प्रेरित करें। किसी तरह की जोर जबरदस्ती न दिखाएं। बच्चे को पूरा समय देना चाहिए। उसके साथ खेलें, बात करें और अपनी बात रखना सिखाएं।
  1. डर दूर करें:  बच्चे को सिखाएं कि अनजान लोगों से डरे नहीं। बच्चे को हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार करें। ऐसा करने से बच्चा धीरे-धीरे लोगों से खुलने की कोशिश करने लगता है।
  1. टीचर से बात करें: बच्चे के विकास में दोस्तों व टीचर का अहम योगदान होता है। अगर बच्चा ज्यादा शर्माता है, तो उसके दोस्तों और टीचर से बात करें। पता करें कि उनके साथ वह कैसा व्यवहार करता है। साथ ही उसे ग्रुप डिस्कशन के लिए प्रेरित करें।
  2. खुद का उदाहरण दें: बच्चे के शर्मीलेपन को दूर करने के लिए उन्हें अपना उदाहरण देते हुए बताएं कि खुद को इससे बाहर कैसे निकाला। साथ ही उन्हें सबके साथ आसानी से घुलने-मिलने के फायदों के बारे में बताएं। जब कभी बच्चा किसी अनजान व्यक्ति से अच्छे से मिलता है व बात करता है, तो उनकी सराहना करें।
  1. तुलना न करें: कभी भी बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से न करें। हर बच्चे का व्यवहार और आदतें भिन्न होती हैं। ऐसे में उन्हें बताएं वे खास हैं और कुछ काम दूसरों की अपेक्षा अच्छे से करते हैं।
  1. बेहतर माहौल दें: पेरेंट्स बच्चे के व्यवहार को सुधारने के लिए घर में भी बेहतर माहौल देने की कोशिश करें। बच्चों को दादा-दादी और रिश्तेदारों के साथ वक्त बिताने का मौका दे। बच्चे उनके साथ घुलेंगे-मिलेंगे, तो इससे भी उनके व्यवहार में सुधार हो सकता है।
  1. मदद करना सिखाएं: ऐसे बच्चे को दूसरों की मदद करना सिखाएं। इससे उन्हें अच्छा लगेगा और उनकी तारीफ होगी, जिससे उनके व्यवहार में सुधार की गुजांइश बढ़ेगी।
  1. मजाक न उड़ाएं: अगर बच्चा कोई बात शेयर करता है, तो उसे अपने तक ही सीमित रखें। दूसरों को बताकर उसका मजाक न उड़ाएं। इससे बच्चा भविष्य में कोई बात शेयर करने में यह सोचकर डरेगा कि लोग उस पर हंसेंगे।
  1. गुस्सा न करें: बच्चे को किसी सोशल पार्टी में लेकर जा रहे हैं, तो उसके शर्मीले व्यवहार के कारण उसे गुस्सा न करें। उन पर लोगों से बात करने का दबाव न बनाएं। शुरुआत में बच्चे को छोटी-छोटी गेट टूगेदर पार्टी में लेकर जाएं। शर्मीले बच्चे के साथ बहुत ही सावधानी से व्यवहार करने की जरूरत होती है। पेरेंट्स की आज की थोड़ी कोशिश उनके बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकती है।

शर्मीलापन एक सामान्य व्यवहार है, जिसका अधिकांश बच्चे कभी न कभी जरूर अनुभव करते हैं। मामूली मामलों में बच्चों का शर्मीला व्यवहार समय के साथ सही हो जाता है। ऐसे में हर माता-पिता को बच्चे की मनोस्थिति को समझते हुए बेहतर माहौल देने की जरूरत होती है। लेख में बच्चे के इस बर्ताव को बदलने के लिए कुछ टिप्स दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर बच्चे के शर्मीलेपन को दूर किया जा सकता है।

References:

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  1. Development of Shyness: Relations With Children’s Fearfulness Sex and Maternal Behavior
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2791465/
  2. Causes of Social Anxiety among Elementary Grade Children
    https://files.eric.ed.gov/fulltext/EJ1210246.pdf
  3. Temperament in infancy and behavioral and emotional problems at age 5.5: The EDEN mother-child cohort
    https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5310866/
  4. Children and shyness
    https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/healthyliving/shyness-and-children#complications-of-shyness
  5. Issues in the diagnosis and assessment of anxiety disorders in children and adolescents
    https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/10832549/
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