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बच्चों में क्लब फुट (पैर मुड़े होना) की समस्या: इलाज व जटिलताएं | Clubfoot In Babies In Hindi

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शिशुओं से जुड़ी कुछ समस्याएं ऐसी भी हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना बच्चे के भविष्य को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। ‘क्लब फुट’ एक ऐसी ही समस्या है, जिसका समय रहते इलाज करवाना जरूरी होता है। अगर आप अभी तक बच्चों से जुड़ी इस शारीरिक समस्या से अपरिचित हैं, तो मॉमजंक्शन का यह लेख जरूर पढ़ें। यहां क्लब फुट के कारण, लक्षण और इसके इलाज के विषय में विस्तार-पूर्वक जानकारी दी गई है।

चलिए, लेख में सबसे पहले जानते हैं कि आखिर क्लब फुट होता क्या है।

क्लब फुट क्या है? | Clubfoot In Babies In Hindi

क्लब फुट एक जन्मजात (जो जन्म से उपस्थित रहे) समस्या है, जो बच्चों के पैर को प्रभावित करती है। इस समस्या में जन्म के समय से बच्चे के पैर का निचला भाग अंदर की ओर मुड़ा हुआ होता है। वहीं, क्लब फुट की समस्या माइल्ड यानी हल्की से लेकर गंभीर भी हो सकती है। इसलिए, माता-पिता को इस विषय में सही जानकारी होना बहुत जरूरी है (1)

स्क्रॉल करके जानिए बच्चों में क्लब फुट कितना आम है।

बच्चों में क्लब फुट कितना आम है?

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में इसे एक आम जन्मजात समस्या माना गया है। शोध में यह बताया गया है कि यह समस्या 1000 जन्मे बच्चों में एक या दो को प्रभावित कर सकती है (2)। ऐसे में इस आंकड़े के अनुसार इसे बच्चों में आम समस्या कहा जा सकता है।

आइये, क्लब फुट के प्रकार के विषय में जानकारी हासिल कर लेते हैं।

क्लब फुट के प्रकार

अध्ययनों में क्लब फुट के दो प्रकारों का जिक्र मिलता है, जिसके बारे में हम नीचे विस्तारपूर्वक जानकारी दे रहे हैं (3):

  • इडियोपैथिक क्लब फुट: यह हड्डियों की असामान्य स्थिति (Skeletal Anomaly) से जुड़ा है। इसमें पैर के सबसे निचले भाग (Foot) के मध्य भाग की हड्डी सामान्य की जगह वक्र (Arch) का आकार ले लेती है, यानी थोड़ा घुमावदार। वहीं, सामने वाला भाग भी सामान्य की जगह मुड़ा हुआ होता है (4)
  • नॉन-आइडियोपैथिक क्लब फुट: क्लब फुट का यह प्रकार किसी आनुवंशिक विकार, ज्ञात-अज्ञात न्यूरोलॉजिकल विकार या न्यूरोमस्कुलर बीमारी (जो मांसपेशियों के साथ नर्व को प्रभावित करती हैं) से जुड़ा हो सकता है (5)

लेख में आगे जानिए बच्चों में क्लब फुट के लक्षण।

बच्चों में क्लब फुट के लक्षण

बच्चों में क्लब फुट के लक्षण नीचे बताए जा रहे हैं (1):

  • एक या दोनों पैरों के आकार में बदलाव।
  • जन्म के समय बच्चे के निचले पैर का अंदर की ओर मुड़ा हुआ होना।
  • पिंडली (Calf) की मांसपेशियों और निचले पैर के आकार का सामान्य से कम होना।

आइये, जानते हैं बच्चों में क्लब फुट की समस्या होने के क्या कारण हैं।

बच्चों में क्लब फुट के कारण

बच्चों में क्लब फुट की समस्या के कारण का अभी स्पष्ट रूप से पता नहीं चल पाया है। वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या अपने आप हो सकती है या फिर इसके होने के पीछे का कारण आनुवंशिक हो सकता है (1)। फिलहाल, इस संबंध में अभी और सटीक शोध की आवश्यकता है।

चलिए जान लेते हैं कि क्लब फुट का परीक्षण किस तरह किया जा सकता है।

क्लब फुट का परीक्षण

क्लब फुट की जांच के लिए डॉक्टर निम्नलिखित तरीके अपना सकता है(1):

  • फिजिकल चेकअप: डॉक्टर नवजात के पैरों की जांच कर क्लब फुट की पहचान कर सकता है। इसके बाद डॉक्टर क्लब फुट की स्थिति के अनुसार इलाज को आगे बढ़ा सकता है।
  • एक्स-रे: क्लब फुट का परीक्षण करने के लिए प्रभावित पैर का एक्स-रे भी किया जा सकता है। इससे प्रभावित हड्डी की असामान्य स्थिति का सही तरीके से पता लगाया जा सकता है।
  • अल्ट्रासाउंड: यह एक जन्म दोष है, इसलिए गर्भावस्था के पहले 6 महीनों के दौरान अल्ट्रासाउंड की मदद से भी इस समस्या का पता लगाया जा सकता है।

अब हम आगे क्लब फुट के इलाज से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं।

क्लब फुट का इलाज

बच्चे में क्लब फुट की जांच के बाद इसका सही इलाज करना भी जरूरी है, ताकि प्रभावित पैर को सामान्य स्थिति में लाया जा सके। इसके लिए आर्थोपेडिक सर्जन यानी हड्डियों का डॉक्टर पोनसेटी मेथड (Ponseti Method) को अपना सकता है। इसके दो चरण होते हैं, एक कास्टिंग फेज और दूसरा ब्रेसिंग फेज। इन्हें नीचे विस्तारपूर्वक बताया गया है (6):

  • कास्टिंग फेज: कास्टिंग फेज में एक मजबूत पट्टी (जो प्लास्टर या फाइबर ग्लास से बनी हो सकती है) बच्चे के जन्म के एक या दो हफ्ते बाद लगाई जा सकती है। इसके बाद, सर्जन हफ्ते में एक बार बच्चे को लाने को कह सकता है, ताकि वो पैरों की स्ट्रेचिंग और कास्टिंग कर सके। यह प्रक्रिया कब तक जारी रहेगी, यह डॉक्टर पर निर्भर करता है।
  • ब्रेसिंग फेज: कास्टिंग फेज के बाद ब्रेसिंग फेज की बारी आती है। कास्टिंग से जब बच्चे के पैर की दिशा सही हो जाती है, तब डॉक्टर प्रभावित पैर पर ब्रेस (एक तरह का सपोर्ट, जो मेटल या हार्ड प्लास्टिक से बना हो सकता है) पहना देते हैं। इससे बहुत हद तक पैरों की स्थिति में सुधार हो सकता है।
  • सर्जरी: गंभीर स्थितियों में सर्जरी का सहारा भी लिया जा सकता है (1)। हालांकि, यह पूरी तरीके से डॉक्टर पर निर्भर करता है।

नोट : इसका उपचार लंबे वक्त तक चल सकता है, इसलिए उपचार के दौरान माता-पिता को धैर्य रखने की आवश्यकता है। वहीं, डॉक्टरों का यह भी कहना है कि हो सकता है, उपचार के बाद भी बच्चे में क्लब फुट की समस्या थोड़ी बहुत रहे।

आगे जानिए क्लब फुट की वजह से बच्चे को किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

बच्चों में क्लब फुट से जुड़ी जटिलताएं

क्लब फुट वाले बच्चों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जिनमें ये शामिल हैं (1) (7):

  • उपचार न कराया गया, तो बच्चों को खड़े होने में और चलने या दौड़ने में परेशानी हो सकती है।
  • उपचार न कराने की स्थिति में टखने में कठोरता, गठिया और प्रभावित पैर की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं (8)
  • कास्टिंग की वजह से पैरों की उंगलियों में सूजन या खून निकल सकता है।

क्लब फुट से बचाव से जुड़ी जानकारी नीचे दी गई है।

बच्चों में क्लब फुट से बचाव

जैसा कि हमने पहले ही बता दिया है कि क्लब फुट एक जन्म-दोष है और इसके होने की वजह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। फिर भी गर्भावस्था के दौरान कुछ चीजों को पालन करके इस प्रकार के जन्म दोष के जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है (9):

  • गर्भावस्था के समय शरीर में फोलिक एसिड की जरूरी मात्रा को बरकरार रख जन्म दोष के जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
  • प्रेगनेंसी के समय शराब, धूम्रपान और अन्य नशीले पदार्थ से दूर रहें।
  • बिना डॉक्टरी परामर्श के किसी भी दवा का सेवन न करें।
  • नियमित रूप से डॉक्टरी जांच करवाते रहें।
  • संलुतित आहार को बनाए रखें।
  • किसी भी तरह के संक्रमण से बचने के लिए खुद को और अपने कमरे को साफ रखें।
  • प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी प्रकार की शारीरिक समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

नीचे जानिए क्लब फुट से जुड़ी कौन सी स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डॉक्टर से कब परामर्श करें

क्लब फुट के इलाज के बाद निन्मलिखित परिस्थितियों में डॉक्टर से संपर्क जरूर करें (1):

  • कास्टिंग के बाद बच्चे के प्रभावित पैर की उंगलियों में सूजन या ब्लीडिंग।
  • कास्टिंग के बाद प्रभावित पैर में दर्द का बने रहना।
  • कास्ट (प्रभावित पैर पर लगाई गई मजबूत पट्टी) का अपनी जगह से हट जाना।
  • इलाज के बाद पैरों का फिर से क्लब फुट की स्थिति में आ जाना।

अगर बच्चे को क्लब फुट की समस्या है, तो माता-पिता ज्यादा परेशान न हों। बच्चे का सही डॉक्टरी इलाज करवाएं और बच्चे का अच्छी तरह से ध्यान रखें। इससे बच्चे के बड़े होने तक पैरों का आकार ठीक हो सकता है। हम उम्मीद करते हैं कि इस लेख में दी गई सभी जानकारी पाठक के लिए मददगार साबित होंगी। बच्चों और गर्भवतियों से जुड़ी जरूरी जानकारी के लिए जुड़े रहें मॉमजंक्शन के साथ।

संदर्भ (References):