खतना क्या है व क्यों किया जाता है? | Male Circumcision Meaning In Hindi

Male Circumcision Meaning In Hindi
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विश्वभर में कई तरह की सर्जिकल प्रक्रियाएं होती हैं, जिनमें से एक खतना भी है। कुछ लोग इसे धार्मिक दृष्टिकोण के चलते कराने का फैसला लेते हैं, तो कुछ खतना के स्वास्थ्य लाभ को देखते हुए। कारण चाहे जो भी हो, लेकिन खतना करवाने से पहले इससे जुड़ी हर तरह की जानकारी हासिल कर लेना जरूरी है। खासकर, उन माता-पिता को इस सर्जिकल प्रक्रिया के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में पता होना चाहिए, जो अपने बच्चे का खतना कराने की सोच रहे हैं। इसी वजह से मॉमजंक्शन के इस लेख में हम विभिन्न अध्ययनों के आधार पर खतना के चिकित्सकीय महत्व और जोखिम के बारे में बता रहे हैं। साथ ही यहां लड़के का खतना कराने की सही उम्र और इससे जुड़ी सावधानियों पर भी चर्चा की जाएगी।

लेख शुरू करते हैं मुख्य विषय और सबसे अहम सवाल के साथ।

खतना क्या है? | Male Circumcision Meaning In Hindi

मेल सर्कमसीजन यानी लड़कों का खतना एक सर्जिकल प्रक्रिया है। इस दौरान शिशु के लिंग की बाहरी त्वचा के कुछ हिस्से या पूरी त्वचा को निकाल दिया जाता है। लिंग की इस ऊपरी त्वचा को फोरस्किन और प्रीप्यूस (Prepuce) भी कहते हैं। इसे दुनिया की सबसे आम प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है (1)

आगे समझिए कि खतना किन-किन कारणों से किया जाता है।

खतना क्यों किया जाता है? | Khatna kyu jaruri hai

खतना को कई कारणों से करने का फैसला लिया जाता है। इनमें से चिकित्सकीय, धार्मिक और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को मुख्य कारण माना गया है (1)। कुछ मेडिकल कंडीशन के कारण भी शिशुओं का खतना किया जाता है, जो कुछ इस प्रकार हैं।

  • लिंग से जुड़ी सूजन संबंधी समस्या (पेनाइल इंफ्लेमेटरी स्किन डिसऑर्डर), जैसे – बैलेनाइटिस (Balanitis) और पोस्टहाइटिस (Posthitis) होने पर (2)
  • फिमोसिस (लिंग के आगे यानी बाहरी त्वचा का पीछे न होना) (3)
  • बैलेनोपोस्थाइटिस  (Balanoposthitis) लिंग की बाहरी त्वचा और ग्लांस (टिप) में सूजन (4)
  • पैराफिमोसिस (Paraphimosis) होने पर भी खतना किया जाता है। इस स्थिति में लिंग की फोरस्किन पीछे जाकर वहीं फंसी रहती है। इसके कारण ऊतक का एक कसा हुआ बैंड जैसा बना जाता है, जिससे लिंग ग्लांस (टिप व हेड) और त्वचा में सूजन आ जाती है (4)
  • फोरस्किन में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होने पर भी खतना किया जाता है। इसे ट्यूमर के रूप में भी जाना जाता है। ये ट्यूमर कैंसर पैदा करने वाला या सामान्य भी हो सकता है (5)

खतना की सही उम्र क्या होती है, यह आगे जानिए।

लड़कों का खतना कराने की सही उम्र क्या है? | Khatna Kon Si Umar Me Hota Hai

एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, खतना बच्चे के पैदा होने के जितना हो सके उतनी जल्दी करना चाहिए। अगर लड़के का खतना दो महीने की उम्र के बाद करते हैं, तो इसे देरी से किया गया खतना कहा जाता हैं (6)

एक अन्य शोध के अनुसार, लड़कों का खतना कराने की सबसे सही उम्र एक साल से कम होती है। एक साल से पहले बच्चे का खतना कराने से जटिलताओं से बचा जा सकता है। अगर धर्म के आधार पर खतना की उम्र की बात करें, तो कुछ में लड़के के जन्म के तुरंत बाद ही यह सर्जिकल प्रक्रिया की जाती है और कुछ में बच्चे के छह माह के होने के बाद खतना किया जाता है (7)

कुछ परिस्थितियों में खतना कराने से बचना भी चाहिए।

शिशु का खतना कब नहीं करना चाहिए?

खतना कराने की सही उम्र के बारे में ही नहीं, बल्कि खतना किन स्थितियों में नहीं करवाना चाहिए, इस बात की जानकारी होना भी जरूरी है। इन सबसे खतना के बारे में अच्छे से समझने में मदद मिल सकती है।

1. अनस्टेबल शिशु

खतना सिर्फ स्टेबल शिशु यानी स्वस्थ शिशु का ही करना चाहिए। पैदा होने के बाद नवजात में किसी तरह की शारीरिक समस्या नजर आती है, तो उसका खतना करने की सलाह बिल्कुल भी नहीं दी जाती है (8)। इसलिए, अस्वस्थ शिशु का खतना कराने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए।

2. कम वजन

पैदा होने के बाद शिशु का वजन कम होने पर उसका खतना नहीं किया जाता है। रिसर्च के अनुसार, प्रीमैच्योर बच्चे का भी खतना तभी किया जाता है, जब बच्चे का वजन कम-से-कम 2.26 किलोग्राम (5lb) होता है (8)

3. जननांग-मूत्र संबंधी जन्मजात असामान्यताएं

अगर किसी बच्चे को मूत्र संबंधी जन्मजात समस्या है, तो उसका खतना नहीं करवाना चाहिए। खासकर, ऐसी समस्याएं जिन्हें सर्जिकल रिपेयर की आवश्यकता हो। इसमें बरिड पेनिस (त्वचा से छिपा हुआ लिंग) और हाइपोस्पेडियस (ऐसी स्थिति जिसमें लिंग का द्वार सिरे के बजाय नीचे की ओर हो) जैसी समस्याएं शामिल हों (9)

4. रक्त संबंधी विकार

नवजात को रक्त संबंधी विकार है या नहीं, यह पता लगाना मुश्किल होता है। इसलिए, शिशु के माता-पिता या परिवार के अन्य लोगों में किसी तरह का रक्त विकार है या नहीं, यह पता करने के बाद ही बच्चे का खतना करना चाहिए। एक रिसर्च में बताया गया है कि कुछ मामलों में शिशु का खतना करने के बाद लगातार रक्तस्राव होता रहा। बाद में पता चला कि उसे रक्त संबंधी विकार था और उसके परिवार में भी लोग रक्त विकार से ग्रस्त थे (10)

आगे खतना के फायदे पढ़िए।

खतना के फायदे | Benefits of Circumcision in Hindi

खतना उन सर्जिकल प्रक्रियाओं में से एक है, जिसे चिकित्सकीय और धार्मिक कारणों के चलते हजारों सालों से किया जा रहा है। कई रिसर्च खतना के फायदों का जिक्र करते हैं और उसका समर्थन भी करते है। इस संबंध में उपलब्ध शोध के बारे में हम आगे बता रहे हैं।

1. यूटीआई से बचाव

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की एक पब्लिकेशन में लिखा है कि खतना करवाने से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के जोखिम को कम किया जा सकता है (4)। एक रिसर्च में बताया गया है कि खतना न कराने वाले बच्चों को पूरे जीवनकाल में मूत्र पथ संक्रमण यानी यूटीआई होने का 23.3 प्रतिशत जोखिम होता है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि यूटीआई के खतरे को खतना कम कर सकता है (11)

2. सिफलिस से बचाव

एक रिसर्च के हिसाब से लड़कों का खतना करवाने से सिफलिस (Syphilis) जैसे यौन संचारित संक्रमण से बचा जा सकता है। इस विषय से जुड़े अध्ययन के हिसाब से खतना सिफलिस के जोखिम को 33 प्रतिशत तक कम कर सकता है। इसी संबंध में हुए एक अन्य रिसर्च की मानें, तो खतना करवाने वालों में सिफलिस होने का खतरा 42 प्रतिशत कम होता है (12)

शोध में यह भी बताया गया है कि लड़कों का खतना करने से उनकी महिला पार्टनर को भी सिफलिस के जोखिम से 59% तक बचाया जा सकता है (12)। यह रोग आगे बढ़कर मस्तिष्क और तंत्रिका संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। इससे आंखों की समस्या भी होती है, जो आगे चलकर अंधेपन का रूप भी ले सकता है। यही नहीं, सिफलिस से एचआईवी संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ सकता है (13)

3. एचआईवी का रिस्क कम करें

खतना को लेकर हुई रिसर्च यह भी कहती है कि इस प्रक्रिया को करवाने से एचआईवी होने का खतरा 50 से 60 प्रतिशत तक कम हो सकता है। साथ ही सिफलिस से बचाव करके भी एचआईवी का खतरा 62 प्रतिशत तक कम हो सकता है (12)

4. पैपिलोमावायरस (Papillomavirus) व कैंसर से बचाव

खतना के फायदे में पैपिलोमावायरस से बचाव को भी गिना जाता है। खतना करवाने वाले लड़कों के साथ ही उनके लाइफ पार्टनर को भी शारीरिक संबंध स्थापित करते समय इस वायरस के खतरे से बचाने में मदद मिल सकती है। इन सभी बातों का उल्लेख खतना के फायदे से संबंधित एक वैज्ञानिक रिसर्च में भी मिलता है (12)। इस पैपिलोमावयरस के कारण महिलाओं में सर्वाइकल और योनि कैंसर के साथ-साथ पुरुषों में गुदा व लिंग कैंसर का खतरा बढ़ सकता है (14)

5. पेनाइल इंफ्लेमेटरी डिजीज

फोरस्किन संबंधी समस्याओं से बचाव में भी खतना फायदेमंद हो सकता है। इस सर्जिकल प्रक्रिया को करवाने से बैलेनाइटिस और पोस्टहाइटिस जैसी समस्याएं नहीं होती हैं। इन समस्याओं के दौरान लिंग की बाहरी त्वचा पर सूजन और छाले जैसे घाव (Lesion) बनने लगते हैं (2)

6. जेनिटल हर्पिस और अल्सर से बचाव

खतना करवाने से जननांग में होने वाले हर्पिस और अल्सर के खतरे से बचा जा सकता है। इस विषय पर हुए दो परीक्षणों में सामने आया है कि लड़कों का खतना करने से जेनिटल हर्पीस का जोखिम 28% से 34% तक कम हो सकता है। साथ ही जननांग में अल्सर के रिस्क को करीब 47% कम किया जा सकता है (15)। जननांग के आसपास घाव या फफोले को हर्पिस कहते हैं। अल्सर में भी जननांग में घाव होता है।

7. वेसिकोयूरेटरल रिफ्लक्स (VUR)

खतना करने का लाभ वेसिकोयूरेटरल रिफ्लक्स से बचाव भी है (16)। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें पेशाब वापस मूत्राशय से एक या दोनों मूत्रवाहिनी (यूरेटर्स) और कभी-कभी गुर्दे तक पीछे की ओर बहने लगता है (17)। इसके अलावा, खतना नवजात को होने वाले हाइड्रोनफ्रोसिस यानी किडनी की सूजन के जोखिम को भी कम कर सकता है (16)। यह सूजन यूरिन के गुर्दे में जमने के कारण होती है। इससे एक या दोनों किडनी प्रभावित हो सकती हैं।

खतना करने के फायदे के बाद इससे होने वाले नुकसान जान लेना भी जरूरी है।

खतना के नुकसान

हर सर्जिकल प्रक्रिया के कुछ-न-कुछ नुकसान जरूर होते हैं। किसी के गंभीर और किसी के सामान्य। कुछ नुकसान जिंदगी भर के और कुछ क्षण भर या एक-दो दिन में ठीक होने वाले होते हैं। खतना के नुकसान गंभीर हैं या नहीं और क्या-क्या इसके नुकसान में शामिल हैं, आगे जानिए।

1. ब्लीडिंग

ऑपरेशन के बाद कुछ देर तक लिंग से रक्तस्राव हो सकता है। यह खतना का एक सामान्य नुकसान है। हर सर्जिकल प्रक्रिया में रक्तस्राव होना आम है। कुछ देर बाद यह ब्लीडिंग रुक जाती है। कई बार सामान्य से ज्यादा रक्तस्राव हो सकता है। ऐसा होने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है (18)

2. संक्रमण

खतना करने के बाद ऑपरेशन किए गए हिस्से में घाव होना और घाव में संक्रमण होने का खतरा रहता है। अगर खतना कराने के बाद ऐसा कुछ होता है, तो उस स्थिति में डॉक्टर दवाओं से यह समस्या को दूर कर सकते हैं। समस्या की गंभीरता के आधार पर यह परेशानी कुछ दिनों में ठीक हो सकती है (18)

3. सेकंडरी फिमोसिस

खतना कराने का नुकसान सेकंडरी फिमोसिस भी है। रिसर्च भी इस बात की पुष्टि करते हैं (18)। शोध बताते हैं कि खतना एक मामूली सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसके नुकसान व जोखिम न के बराबर होते हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों में सेकंडरी फिमोसिस हो सकता है। इसे ऑपरेशन के दौरान होने वाली तकनीकी त्रुटि यानी टेक्निकल एरर कहा जाता है। यह लिंग की बाहरी परत (फोरस्किन) की पर्याप्त मात्रा को न हटाने के कारण होता है। इसे ठीक करने के लिए दोबारा से खतना की प्रक्रिया की जाती है (19)

4. यूरेथ्रल या ग्लैड्यूलर इंजरी

खतना करने से यूरेथ्रल या ग्लैड्यूलर इंजरी भी हो सकती है। खतना के ऑपरेशन के दौरान किसी तरह की गलती होने से मूत्रमार्ग या फिर उसकी ग्लांस (टिप) में चोट लग सकती है। इसलिए, यह खतना का एक गंभीर नुकसान हो सकता है (18)

5. यूरिनरी रिटेंशन

लड़के का खतना कराने से होने वाला एक नुकसान यूरिनरी रिटेंशन भी है (18) (20)। इस समस्या के दौरान मूत्राशय में मौजूद पेशाब पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाता है। मूत्राशय खाली करने में होने वाली इस परेशानी को ही यूरिनरी रिटेंशन कहते हैं। पेशाब करने में अचानक असमर्थता और बार-बार मूत्राशय को पूरी तरह से खाली करने की अक्षमता इस परेशानी में शामिल है (21)

6. मीटल स्टेनोसिस (Meatal Stenosis)

खतना का एक नुकसान मीटल स्टेनोसिस भी है (18)। खतना के बाद जब यूरेथ्रल ओपनिंग (Meatus) में असामान्य संकीर्णता होने लगती है, उसे ही मीटल स्टेनोसिस कहते हैं। यूरेथ्रल ओपनिंग मूत्र के निकासी छिद्र को कहा जाता है। जब पेशाब निकलने वाला यह द्वार छोटा होने लगता है, तो पेशाब करते समय समस्या होती है (22)

7. कन्सिल्ड पेनिस

खतना के नुकसान की फेहरिस्त में कन्सिल्ड पेनिस भी शामिल है (18)। इसमें लिंग का आकार सामान्य से छोटा लगता है, लेकिन असल में प्राइवेट पार्ट छोटा होता नहीं है। इस दौरान पेनिस प्रीप्यूबिक ऊतकों में दब जाता है या फिर खतना के कारण होने वाले स्कार (घाव को भरने के लिए बनने वाले ऊतक) में छिप जाता है (23)। इसी वजह से लिंग का साइज छोटा लगता है।

8. पेनाइल डिफॉर्मिटी

कम मामलों में ही सही लेकिन खतना से होने वाले नुकसान में से एक पेनाइल डिफॉर्मिटी भी है (18)। डिफॉर्मिटी का अर्थ किसी तरह की विकृति है। इसलिए, पेनाइल डिफॉर्मिटी होने का आशय यह है कि लिंग के अगले हिस्से की विकृति, जिससे वह दिखने में सामान्य से थोड़ा अलग व अजीब लग सकता है।

खतना कराने के फायदे और नुकसान के बाद आगे खतना कराने से जुड़ी तैयारी और प्रक्रिया जानेंगे।

खतना कराने से पहले क्या कुछ करना जरूरी है?

यदि आपने बच्चे का खतना कराने का फैसला ले लिया है, तो सबसे पहले डॉक्टर से बात करनी चाहिए। डॉक्टर इस संबंध में कुछ इस तरह की बातें बता व सलाह दे सकते हैं।

  • खतना के प्रति आपकी रुचि देखने के बाद डॉक्टर खतना से संबंधित सभी तरह के जोखिम के बारे में बताएंगे।
  • इससे खतना करने या न करने के बारे में पुनर्विचार करने का मौका मिलता है।
  • यही नहीं, इस प्रक्रिया के बारे में डॉक्टर से भी प्रश्न भी किए जा सकते हैं।
  • सभी बातों को समझने और सवालों के जवाब से संतुष्ट होने के बाद डॉक्टर पूछ सकते हैं कि अब खतना कराना है या नहीं, यह बताइए।
  • आपकी तरफ से हां में जवाब मिलने के बाद विशेषज्ञ शिशु के स्वास्थ्य और अन्य स्थिति की स्टडी करके इस सर्जिकल प्रक्रिया को करने के लिए एक सही समय और दिन निर्धारित करेंगे।
  • उसके बाद आपको एक फॉर्म भरना पड़ सकता है। इसमें सर्जिकल प्रक्रिया को लेकर आपकी ओर से सहमति होती है।
  • डॉक्टर इस प्रक्रिया को करने से पहले शिशु को कुछ न पिलाने व खिलाने की सलाह दे सकते हैं।

अब आगे पढ़िए खतना के दौरान किस प्रकार की तैयारी की जाती है।

खतना करने के दौरान की तैयारी

खतना करवाने का फैसला ले लिया है, तो प्रक्रिया के दौरान कुछ इस तरह की तैयारी की जाती है।

  • लिंग वाले हिस्से को अच्छे से धोया जाता है।
  • शिशु को ऑपरेशन वाले कपड़े पहनाए जा सकते हैं।
  • ऑपरेशन रूम में ले जाने के लिए बच्चे को आरामदायक टेबल पर पीठ के बल लिटाया जा सकता है।
  • शिशु को स्थिर रखने के लिए किसी तरह के बैंड का उपयोग डॉक्टर कर सकते हैं।

अब जानिए कि खतना करने की प्रक्रिया क्या है और इस दौरान क्या किया जाता है।

खतना किस तरह किया जाता है?

खतना ऐसी चिकित्सकीय प्रक्रिया है, जिसे प्रशिक्षित मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा करवाना सुरक्षित माना जाता है। खतना करने में करीब 15 से 20 मिनट लगते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान माता-पिता अपने बच्चे के करीब रह सकते हैं। इस सर्जिकल प्रोसीजर को कुछ इस तरह से किया जाता है।

1. रूम में ले जाना

डॉक्टर बच्चे को सबसे पहले प्रोसीजर रूम में लेकर जाएंगे। इस कमरे में ही डॉक्टर यह चिकित्सकीय प्रक्रिया को पूरा करते हैं। यहां इस प्रक्रिया के लिए जरूरी सभी चीजें होती हैं। हम ऊपर बता ही चुके हैं कि बच्चे को ऑपरेशन वाले कपड़े पहनाकर पीठ के बल टेबल पर लिटाया जाता है। डॉक्टर इस टेबल से बच्चे को प्रोसीजर रूम वाले बेड में लेटाते हैं, जिस पर इस प्रक्रिया को पूरा किया जाता है। बच्चे को ऊपर से एक गर्म कपड़े से भी लपेटा जा सकता है।

2. सुन्नपन

ऑपरेशन करने वाले हिस्से को एंटीबायोटिक्स से धोकर एनेस्थीसिया (सुन्न करने वाली दवा) दिया जा सकता है। यह कितनी मात्रा में देना है या नहीं देना है, इसका निर्णय डॉक्टर लेते हैं। सुन्नपना पैदा करने के लिए डॉक्टर क्रीम या इंजेक्शन का उपयोग करते हैं (9)। बच्चा ज्यादा हिले नहीं यह सुनिश्चित करने के लिए उसके ऊपर आरामदायक बैंड लगाया जा सकता है।

3. फोरस्किन कटिंग

यह मुख्य सर्जिकल प्रक्रिया है। यह करते हुए डॉक्टर सुन्न की हुई जगह पर खतना करने के लिए निर्धारित की गई रिंग को डालते हैं। इस दौरान प्लास्टिक रिंग या स्पेशल क्लैम्प को लगाकर रक्त को फोरस्किन वाले हिस्से में परिचालित होने से रोका जाता है। फिर डॉक्टर अपने अनुभव दिखाते हुए फोरस्किन को निकाल देते हैं (9)

खतना विधि का विकल्प चिकित्सक के आराम और प्रशिक्षण के स्तर पर या फिर माता-पिता के चयन पर भी निर्भर करता है। इन तकनीकों में गोमको क्लैंप, मोगेन क्लैंप और प्लास्टीबेल शामिल हैं। इनके अलावा, सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली तकनीक “फ्री-हैंड खतना” है, जिसमें स्लीव तकनीक या डॉर्सल वेंट्रल स्लिट शामिल हैं। कुछ डॉक्टर स्लिट यानी चीरा लगाकर इस स्किन को निकालने की प्रक्रिया को पूरा करते हैं (24)। यह हिस्सा न कम निकलना चाहिए और न ही ज्यादा। ऐसा होने से कुछ कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं ।

4. आफ्टर ऑपरेशन

ऑपरेशन करने के बाद डॉक्टर बहते खून को रोकने के लिए रूई से उस हिस्से की सफाई करते हैं। उसके बाद जरूरी क्रीम या बैंडेज लगाई जा सकती है। ऑपरेटेड हिस्से को इंफेक्शन से बचाए रखने के लिए डॉक्टर कुछ खास दिशा निर्देश भी दे सकते हैं।

खतना करने की पूरी प्रक्रिया जानने के बाद आगे पढ़िए इससे जुड़े जोखिम।

खतना की प्रक्रिया से जुड़े कुछ जोखिम

खतना से जुड़ी इतनी सारी जानकारी प्राप्त करने के बाद इस सर्जिकल प्रक्रिया से होने वाले कुछ जोखिम पर गौर करना भी आवश्यक है। खतना के इन सभी पहलुओं को जानने के बाद आप इस प्रक्रिया को लेकर सही फैसला ले पाएंगे। खतना के जोखिम आगे क्रमवार समझाए गए हैं।

1. तीव्र व गंभीर दर्द

खतना कराने का एक जोखिम तीव्र व गंभीर दर्द हो सकता है। सभी तरह के ऑपरेशन के बाद इस तरह के दर्द का सामना करना पड़ सकता है। बच्चे में होने वाले खतना में यह दर्द ज्यादा इसलिए लग सकता है, क्योंकि उनकी उम्र इतनी कम होती है कि उन्हें दर्द निवारक दवाई नहीं दी जा सकती है। कुछ क्रीम लगाकर उनके दर्द को कम करने का प्रयास किया जा सकता है। रिसर्च बताते हैं कि गंभीर दर्द का जोखिम तकरीबन 7.8 प्रतिशत होता है (25)

2. रक्तस्राव

करीब 22.3 प्रतिशत मामलों में बच्चों को ऑपरेशन के बाद रक्तस्राव हो सकता है। यह भी खतना का एक तरह का जोखिम ही है। इसे खतना के जोखिम और नुकसान दोनों में ही गिना जाता है (25)

3. ब्रोंकोस्पेज्म या लैरींगोस्पेज्म

खतना करने के दो जोखिम ब्रोंकोस्पेज्म या लैरींगोस्पेज्म भी हैं। बेशक, इनके बारे में आपने सुना नहीं होगा। ब्रोंकोस्पेज्म होना मतलब वायुमार्ग (ब्रोन्कियल ट्यूब) में ऐंठन और सिकुड़न होना। इसमें सांस लेना मुश्किल हो जाता है और घरघराहट (सांस लेते समय सीटी जैसी ध्वनि) आने लगती है। लैरींगोस्पेज्म की बात करें, तो इसमें स्वरयंत्रिकाओं (वोकल कॉर्ड) की मांसपेशियों में ऐंठन का एहसास होता है। रिसर्च के अनुसार, खतना का यह जोखिम 17 प्रतिशत तक रहता है (25)

4. मीटाइटिस (Meatitis)

खतना के जोखिम की सूची में एक नाम मीटाइटिस भी है। इसका मतलब है लिंग की ओपनिंग में लालिमा होना। इस पर घाव, फोड़ा या पपड़ी भी हो सकती है, जिस वजह से यूरिन पास करते समय भी दर्द होता है। कुछ मामलों में मीटल स्टेनोसिस भी जोखिम बन सकता है। इसका जिक्र हमने ऊपर खतना के नुकसान वाले भाग में भी किया है। इस समस्या में पेशाब द्वार छोटा हो जाता है और यूरिन पास करने में परेशानी होने लगती है (8)

5. लिंग की संवेदनशीलता कम होना

बताया जाता है कि कुछ मामलों में खतना का एक जोखिम लिंग की संवेदनशीलता का कम होना भी हो सकता है। इसके कारण बड़े होने के बाद उसके वैवाहिक जीवन का सुख कुछ कम हो सकता है। यह वैवाहिक सुख की कमी का कारण बनने के साथ ही पार्टनर के दर्दनाक अनुभव की भी वजह बन सकता है (26)

6. मूत्रमार्ग संबंधी फिस्टुला

मूत्रमार्ग संबंधी फिस्टुला (Urethra Cutaneous fistula) भी खतना का एक जोखिम हो सकता है। फिस्टुला का अर्थ है भगंदर (24)। रिसर्च के अनुसार, डॉक्टर खतना करने की बेहतर ट्रेनिंग लेकर इस जोखिम से लोगों को बचा सकते हैं (27)। मूत्रमार्ग संबंधी भगंदर में ग्रोन क्षेत्र (जांघों के बीच का हिस्सा) में एक तरह की अनचाही ओपनिंग हो जाती है, जहां से पेशाब का रिसाव हो सकता है।

ऑपरेशन की प्रक्रिया और जोखिम के बाद उस हिस्से की देखभाल के बारे में जानिए।

खतना के बाद की देखभाल किस तरह करें?

खतना कराने के बाद उस ऑपरेटेड हिस्से का ध्यान रखना भी जरूरी है। एक तो वह हिस्सा संवेदनशील होता है और ऊपर से वहां हुए ऑपरेशन की वजह से देखभाल के लिए इन बातों पर ध्यान देना चाहिए।

1. हीलिंग प्रक्रिया

रिसर्च बताती हैं कि हीलिंग प्रक्रिया के दौरान ऑपरेशन के बाद खुली हुई ग्लांस (लिंग का टिप व हेड) और कटे हुए फोरस्किन के हिस्से की सुरक्षा के लिए पेट्रोलियम जेली की आवश्यकता होती है (9)। इससे इंफेक्शन और ब्लीडिंग का खतरा कम हो सकता है (28)

2. खतना के बाद बच्चे को नहलाना

अधिकांश बाल रोग विशेषज्ञ शिशु को एक से दो हफ्ते में एक या दो बार स्पंज बाथ देने की ही सलाह देते हैं। स्पंज बाथ यानी गिले कपड़े या स्पंज से बच्चे के शरीर को पोंछकर उसे साफ करना। खतना करने के बाद भी यह किया जा सकता है।

बच्चे को पूरी तरह से नहलाने के बारे में ऑपरेशन वाले हिस्से के पूरी तरह से ठीक होने के बाद ही सोचें। इस दौरान बच्चे को बाथ टब में रखते हुए और उससे निकालते समय खास ध्यान दें। बच्चे का पेनिस बाथ टब पर लगना नहीं चाहिए। इससे उसे दर्द हो सकता है। बच्चे का शरीर साबुन या वॉशक्लॉथ से स्क्रब भी बिल्कुल न करें। सिर्फ गुनगुना पानी से उसका शरीर साफ कर सकते हैं।

3. खतना के बाद सूजन

ऑपरेशन वाले हिस्से में कुछ दिनों तक हल्की सूजन होना, लालिमा दिखना और रक्त निकलने जैसी चीजें हो सकती है। ये घबराने वाली बात नहीं है। सात से दस दिन में यह बिल्कुल ठीक हो जाता है। इस हिस्से का ख्याल रखने के लिए डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह पर अमल करते रहें। बच्चे को दर्द होने पर विशेषज्ञ द्वारा सुझाई गई दर्दनिवारक क्रीम ऑपरेटेड हिस्से में लगा सकते हैं। साथ ही पेट्रोलियम जेली भी लगाते रहें।

4. पट्टी बदले

खतना की गए जगह पर किसी तरह की पट्टी या बैंडेज लगी हुई है, तो उसे डॉक्टर द्वारा बताए गए अंतराल में बदलते रहें। ऐसा न करने से उस जगह पर इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है। बच्चे को नहलाते व उसके शरीर को साफ करते समय यह पट्टी बिल्कुल भी गीली नहीं होनी चाहिए। शिशु के घाव व पट्टी को जितना हो सके उतना सूखा रखें (29)

5. घरेलू उपचार से बचें

खतना कराने के बाद प्रभावित हिस्से में होने वाली जलन, दर्द और लालिमा को दूर करने के लिए कई बार माता-पिता घरेलू उपचार का इस्तेमाल कर लेते हैं। यह गलती बिल्कुल भी न करें। डॉक्टर भी बच्चे के अभिभावकों को खतने के घरेलू उपचार न करने की सख्त हिदायत देते हैं। किसी भी तरह के लुभावने वादे व बातों पर आकर लिंग वाले हिस्से में घरेलू उपचार वाली चीजें न लगाएं। इनसे टिटनेस और अन्य इंफेक्शन का खतरा हो सकता है (29)

अब पढ़िए, खतना कराने के बाद उसे ठीक होने में कितना समय लगता है।

खतना करने के बाद कितने दिन में ठीक हो सकते है?

खतना करवाने के बाद उसकी हीलिंग प्रक्रिया बच्चों में तेजी से होती है। नवजात में दो हफ्ते में खतना से संबंधित घाव पूरी तरह भर जाते हैं। बड़े लोगों का खतना करने पर हीलिंग में 6 हफ्ते या उससे ज्यादा का समय लग सकता है (30)

आगे जानिए कि खतना कराने के बाद चिकित्सक से कब संपर्क किया जाना चाहिए।

शिशु को डॉक्टर के पास कब ले जाएं

खतना करवाने के बाद कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, जो इस प्रकार हैं (26) (29)

  • खतना वाले हिस्से से लगातार खून का बहना।
  • लिंग में नीलापन या कालापन दिखाई देना।
  • खतना करने के छह से आठ घंटे बाद भी बच्चे को पेशाब न आना।
  • बुखार आना।
  • ऑपरेटेड हिस्से में लगातार दर्द होना।
  • ऑपरेशन के तीन से पांच दिन बाद भी लिंग में सूजन और लालिमा रहना।
  • लिंग से पीले रंग का स्राव होना।
  • प्लास्टिक बेल से हुए ऑपरेशन के दस से बारह दिन बाद भी इस बेल का न गिरना।
  • इंफेक्शन होने पर।
  • बच्चे के बीमार होने पर।
  • शिशु का पेट सामान्य के मुकाबले कठोर लगना।
  • घाव से दुर्गंध आना।
  • ऑपरेशन किए गए हिस्से से मवाद (पस) निकलना।
  • पेशाब करने में परेशानी होना या पेशाब करते समय बच्चे का रोना।

अब आप समझ ही गए होंगे कि खतना के फायदे तो हैं, लेकिन किसी तरह की ऊंच-नीच होने पर इसके कुछ जोखिम और नुकसान भी हो सकते हैं। माता-पिता खतना के फायदे और नुकसान दोनों को पढ़ने के बाद सूझबूझ से बच्चे का खतना कराने व न कराने का फैसला ले सकते हैं। यह सर्जिकल प्रक्रिया किसी भी बच्चे के लिए अनिवार्य नहीं है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि खतना न कराने से बच्चे को किसी तरह की समस्या होती है। बिना खतना करवाए भी बच्चा अच्छे से अपनी लाइफ जी सकता है। खतना के फायदे और धर्म के आधार पर इसे करवाने या इसके नुकसान के आधार पर न कराने का निर्णय लिया जा सकता है। यह पूरी तरह से माता-पिता का अपने बच्चे के लिए लिया गया निजी फैसला होगा।

संदर्भ (References) :

1. Male circumcision By PubMed
2. Penile Inflammatory Skin Disorders and the Preventive Role of Circumcision By NCBI
3. Phimosis in Children By NCBI
4. Neonatal and child male circumcision: a global review By WHO
5. An overview of benign and premalignant lesions of the foreskin By ScienceDirect
6. Reported Male Circumcision Practices in a Muslim-Majority Setting By NCBI
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