मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) अधिनियम | Maternity Leave Rules In India 2019

Maternity Leave Rules In India 2019

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व्यावसायिक जीवन के साथ-साथ हर कामकाजी महिला मातृत्व का भी पूरा सुख लेना चाहती है। यह समय किसी भी महिला के लिए सबसे खास होता है, जिसका समर्थन विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) भी करता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार गर्भावस्था के दौरान मानसिक और शारीरिक दुर्व्यवहार महिलाओं में गर्भपात, हत्या और भ्रूण संकट का कारण बन सकता है (1)। इसलिए, भारत समेत कई देशों में कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश का प्रावधान है।

अगर आप एक महिला कर्मचारी हैं और मैटरनिटी लीव, इसके लाभ और इसके आवेदन संबंधी पूरी जानकारी प्राप्त करना चाहती हैं, तो मॉमजंक्शन का यह लेख आपकी पूरी मदद करेगा।

मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) क्या है?

मैटरनिटी लीव वो अवकाश है, जो एक महिला कर्मचारी को उसकी गर्भावस्था के लिए, बच्चे के जन्म और नवजात की शुरुआती देखभाल के लिए कंपनी देती है। यह अवकाश पेड होता है, यानी इसके लिए कंपनी आपको पैसों का भुगतान करेगी। नीचे जानिए मैटरनिटी अवकाश को लेकर मातृत्व लाभ अधिनियम 2017 क्या कहता है।

मातृत्व अवकाश के लिए कौन पात्र है?

मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 2017 के तहत यह लाभ उन महिलाओं को मिलता है, जिसने कर्मचारी के रूप में मौजूदा कंपनी में पिछले एक साल में 80 दिन तक काम किया हो। अवकाश की अवधि के दौरान भुगतान दैनिक मजदूरी (Daily Wages) पर आधारित है।

आगे जानिए मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम के बारे में।

मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम, 2017 क्या है?

मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम-2017, मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 1961 का संशोधित रूप है। इस बील को राज्यसभा में 11 अगस्त 2016 और लोकसभा में 09 मार्च 2017 में पारित किया गया था। गर्भवती महिला कर्मचारियों को इस बिल का लाभ पहुंचाने के लिए इसे अप्रैल 2017 में लागू कर दिया गया था।

इस एक्ट के अंतर्गत कारखानों, खानों, दुकानों, सरकारी-गैर सरकारी या अन्य सरकार द्वारा रेजिस्टर्ड प्रतिष्ठानों में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को शामिल किया गया है।

मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम के तहत एक फर्म महिला कर्मचारी को नियुक्ति के समय मातृत्व लाभ के बारे में लिखित या इलेक्ट्रोनिक तरीके से सूचित करती है।

इस अधिनियम में कुछ जरूरी संशोधन किए गए हैं, जो इस प्रकार से हैं (2) :

मातृत्व अवकाश की अवधि कितनी है?

  • मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 2017 के तहत महिला कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी लीव की अवधी 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह की गई है।
  • महिलाएं, जिनके दो बच्चे पहले से हैं और वे अगले बच्चे की उम्मीद कर रही हैं, उनके लिए मातृत्व अवकाश की अवधि 12 सप्ताह होगी।
  • तीन महीने या उससे कम उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली महिलाओं और कमिशनिंग माताओं के लिए मातृत्व अवकाश 12 सप्ताह तय किया गया है। कमिशनिंग माताएं वे होती हैं, जो सेरोगेट्स के जरिए अपना बच्चा प्राप्त करती हैं।

आगे हम बता रहे हैं कि मातृत्व अवकाश कब शुरू किया जा सकता है।

मातृत्व अधिनियम के अनुसार, आप मातृत्व अवकाश कब शुरू कर सकते हैं?

  • मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 2017 के तहत, मातृत्व अवकाश महिलाएं डिलीवरी की अनुमानित तारीख से आठ सप्ताह पहले और शेष प्रसव के बाद ले सकती हैं।
  • एक्ट के तहत, दो बच्चों के बाद अगले बच्चे उम्मीद कर रही माताएं, प्रसव से 6 सप्ताह पूर्व और 6 सप्ताह बाद मातृत्व अवकाश शुरू कर सकती हैं।
  • बच्चा गोद लेनी वाली महिलाएं मातृत्व अवकाश गोद लेने की तारीख से शुरू कर सकती हैं। कमिशनिंग माताएं भी बच्चा प्राप्त करने की तारीख से अवकाश का लाभ ले सकती हैं।

मैटरनिटी लीव के लिए आवदेन कैसे करना है, यह जानने के लिए पढ़ते रहें आर्टिकल।

मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन/दावा कैसे करें?

आप निम्नलिखित बिंदुओं का पालन कर मैटरनिटी लीव के लिए आवेदन कर सकती हैं :

  • सबसे पहले आप सुनश्चित कर लें कि आप मैटरनिटी लीव कब से लेना चाहती हैं।
  • एक बार लीव सुनश्चित करने के बाद आप इस विषय पर अपने विभाग प्रमुख/मैनेजर से बात करें। विभाग प्रमुख/मैनेजर आपको कंपनी के एचआर विभाग या अन्य संबंधित विभाग से संपर्क करने को कहेगा।
  • एचआर या संबंधित विभाग आपको मैटरनिटी लीव संबंधी सभी नीतियों को अच्छी तरह समझाएगा, जिससे आपको किसी भी तरह की गलतफहमी न हों।
  • मैटरनिटी लीव पॉलिसी समझाने के बाद एचआर या संबंधित विभाग आपको मैटरनिटी लीव फॉर्म भरने को कहेगा। यह फॉर्म ऑनलाइन भी हो सकता और ऑफलाइन भी। हो सकता है कि इसके अलावा भी कुछ औपचारिकताएं आपको करनी पड़ें।

नोट : यह एक आम प्रक्रिया है, जो सरकारी और गैर सरकारी संस्थान दोनों पर लागू हो सकती है। सही प्रक्रिया की पुष्टि के लिए आप अपने विभाग प्रमुख या मैनेजर से बात करें।

क्या मातृत्व अवकाश के दौरान पूरा वेतन मिलेगा?

मातृत्व लाभ अधिनियम 2017 के तहत मैटरनिटी लीव के दौरान महिला कर्मचारी को दैनिक मजदूरी के आधार पर भुगतान किया जाएगा। अवधी पूरी होने के बाद अगर महिला अवकाश लेती है, तो फर्म ‘लॉस ऑफ पे’ की नीति अपना सकता है, जिसके अंतर्गत अतिरिक्त अवकाश का भुगतान नहीं किया जाएगा।

मातृत्व अवकाश की अवधि खत्म होने के बाद क्या होता है?

मातृत्व अवकाश की अवधि पूरी होने के बाद महिला एक्ट के तहत इन प्रावधानों का फायदा उठा सकती है –

  • इस एक्ट के तहत मैटरनिटी लीव के 26 सप्ताह खत्म होने के बाद ‘वर्क फ्रॉम होम’ का भी प्रावधान है, जिसमें महिला घर से ही दफ्तर का काम कर सकती हैं।
  • इस अधिनियम के तहत 50 कर्मचारियों और उससे अधिक वाली फर्म महिला को डे केयर (जहां बच्चों की देखभाल की जाती है) की सुविधा देगी और यह अनिवार्य है। इस सुविधा के तहत महिला एक दिन में चार बार अपने बच्चे को देखने के लिए डे केयर जा सकती हैं।

अगर मातृत्व अवकाश खत्म होने के बाद आप काम पर वापस नहीं जाती हैं, तो क्या होगा?

यह सवाल आपको परेशान कर सकता है कि मातृत्व अवकाश खत्म होने के बाद अगर आप दफ्तर न जाएं, तो क्या होगा? जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि मातृत्व लाभ अधिनियम 2017 आपको 26 हफ्तों के लिए भुगतान अवकाश (Paid Leave) देता हैं, लेकिन अगर आप यह अवधि खत्म होने के बाद भी दफ्तर नहीं जाते हैं, तो –

  • वर्क फ्रॉम होम का विकल्प चुन सकती हैं, जिसके लिए आपको अपने विभाग प्रमुख और एचआर से बात करनी होगी।
  • आप मैटरनिटी लीव के अलावा अतिरिक्त अवकाश के लिए आवेदन कर सकती हैं, लेकिन यह कंपनी पर निर्भर करता है कि वह आपको पेड लीव देगी या अनपेड। अगर कंपनी सिक लीव या कैजुअल लीव आदि देती है, तो उसका भगुतान किया जा सकता है।

क्या प्रेग्नेंट होने पर नियोक्ता मुझे जॉब से हटा सकता है?

नहीं, अगर कोई कंपनी गर्भवती होने की वजह से अपनी महिला कर्मचारी को नौकरी से हटाती है, तो कानूनन अवैध है। इसके लिए कंपनी पर मातृत्व लाभ अधिनियम 2017 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

मुझे मातृत्व बीमा कैसे मिल सकता है?

यह कंपनी की बीमा पॉलिसी पर निर्भर करता है, क्योंकि कई कंपनियां इस अतिरिक्त आर्थिक भार को लेना नहीं चाहती हैं। वहीं, अगर किसी कंपनी ने कर्मचारी को दी हुई बीमा पॉलिसी में मैटरनिटी कंडिशन को शामिल किया हुआ है, तो डिलीवरी और उसके बाद मां व शिशु के उपचार और दवाइयों पर हुए खर्च का भुगतान पॉलिसी के तहत किया जाता है। इस संबंध में अधिक जानकारी आपको एच.आर विभाग से मिल सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मुझे बच्चे को गोद लेने या सरोगेसी के मामले में मातृत्व अवकाश मिल सकता है?

जी हां, अगर आप तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती है या सेरोगेट्स के जरिए अपना बच्चा प्राप्त करना चाहती हैं, तो आपको मातृत्व लाभ अधिनियम 2017 के तहत 12 हफ्तों का अवकाश दिया जाएगा।

क्या मैं 26 सप्ताह के बाद मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ा सकती हूं?

मातृत्व अवकाश की अवधि मातृत्व लाभ अधिनियम 2017 के तहत 26 हफ्तों के लिए ही जाती है। यह कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करता है कि वो इस निर्धारित अवधी से ज्यादा आपको पेड अवकाश देती है या नहीं। वैसे आप कंपनी के ‘वर्क फ्राम होम’ या ‘लॉस ऑफ पे’ विकल्प का चुनाव कर सकती हैं।

मातृत्व अवकाश शुरू करने का सबसे सही समय क्या है?

मातृत्व अवकाश की शुरुआत आप मातृत्व लाभ अधिनियम 2017 के अनुसार, डिलीवरी की अनुमानित तारीख से आठ सप्ताह पहले और शेष डिलीवरी के बाद ही करें।

आशा है मातृत्व अवकाश के विषय में अब आप सब कुछ जान गए होंगे। अगर आप भी मैटरनिटी लीव लेने के बारे में सोच रही हैं, तो लेख में बताए गए मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 2017 की सभी जानकारियों और शर्तों को अच्छी तरह से पढ़ लें, ताकि आपको लीव के लिए आवेदन करने में कोई परेशानी न हो। अवकाश के दौरान भुगतान संबंधी विषय पर अपने एचआर से बात कर लें। यह एक महिला कर्मचारी के लिए महत्वपूर्ण सूचना है, इसलिए इस जानकारी को अपने अन्य साथियों से भी साझा करें। मैटरनिटी लीव पर लिखा यह लेख आपको कैसा लगा, हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

संदर्भ (References) :

 

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