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शिशुओं को हिचकी आने के 6 कारण व रोकने के उपाय | Baccho Ki Hichki Rokne Ke Upay  

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हर किसी ने कभी न कभी हिचकी का अनुभव किया होगा, जिसमें गले से अचानक ‘हिक’ की आवाज आने लगती है। ऐसा डायफ्राम (सीने के मध्य मौजूद विशेष मांसपेशियां) में संकुचन या फिर स्वर पैदा करने वाली मांसपेशियों के अचानक बंद होने की वजह से होता है (1)। हालांकि, वयस्कों में सामान्य तौर पर हिचकी कुछ समय में अपने आप ही बंद हो जाती है। मगर, बच्चों में हिचकी आने लगे तो यह बच्चे के माता-पिता के लिए चिंता का विषय बन सकती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि बच्चों में हिचकी आना कब सामान्य है और कब इस मामले में गंभीर होने की जरूरत है। यही वजह है कि माॅमजंक्शन के इस आर्टिकल में हम बच्चों में हिचकी से जुड़ी कई जरूरी बातें बताने जा रहे हैं।

सबसे पहले जानते हैं कि क्या छोटे बच्चों को हिचकी आना सामान्य है?

क्या छोटे बच्चों को हिचकी आना सामान्य है? | Baby Hiccups In Hindi

बच्चों को यदि हिचकी आती है तो इस दौरान घबराने की जरूरी नहीं है, क्योंकि बड़ों के जैसे ही नवजात या छोटे शिशुओं में हिचकी आना सामान्य है। यह हिचकी सामान्य तौर पर कुछ मिनट में अपने आप ही बंद हो जाती है। मगर, इसके विपरीत अगर बच्चों में हिचकी की समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो इसे सामान्य नहीं समझना चाहिए (2)। ऐसे में बिना देर किए हिचकी दूर करने के उपाय अपनाने चाहिए, जिनके बारे में हम लेख में आगे विस्तार से बताएंगे।

आर्टिकल के इस हिस्से में हम छोटे बच्चों में हिचकी आने के कारण जान लेते हैं।

छोटे बच्चों को हिचकी आने के कारण | Newborn Baby Hichki Aana

शिशुओं में हिचकी आने के कोई स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं है। फिर भी कुछ स्थितियां हैं, जिन्हें बच्चों में हिचकी आने के कारण के रूप में देखा जाता है। यह स्थितियां कुछ इस प्रकार हो सकती हैं :

  1. ज्यादा फीडिंग के कारण: बच्चे को यदि बहुत अधिक मात्रा में फीडिंग कराई जाती है तो इससे उनका पेट फूलने लगता है। पेट फूलने के कारण डायाफ्राम के फैलने और अचानक संकुचन होने की क्रिया होती है, जो हिचकी का कारण बन सकती है (3)
  1. डायाफ्राम की ऐंठन: बड़ों के जैसे ही बच्चों में भी हिचकी का एक कारण डायाफ्राम की ऐंठन हो सकती है (4)। डायफ्राम सीने के मध्य स्थिति फेफड़ों से जुड़ी मांसपेशियां होती हैं और सांस लेने की प्रक्रिया में मदद करती हैं (1)
  1. बच्चे को जल्दी-जल्दी फीड कराना: बच्चों को बहुत जल्दी और तेजी से फीडिंग करने पर भी उन्हें हिचकी की समस्या हो सकती है (4)
  1. ब्रीथिंग प्रॉब्लम: कभी-कभी सांस लेने में कठिनाई होने पर भी हिचकी की समस्या हो सकती है। दरअसल, सांस लेने में कठिनाई होने पर डायाफ्राम तेजी से सिकुड़ता और फैलता है, जो हिचकी की वजह बनती है (5)
  1. खाने के तापमान में अचानक परिवर्तन: खाने के तापमान में अचानक परिवर्तन (बहुत ठंडा या गर्म पेय) के कारण भी हिचकी आ सकती है (4)
  1. गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स: पेट के अंदर का खाना जब वापस भोजन नली में चला जाता है तो इसे गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स कहा जाता है। यह डायाफ्राम के संकुचन को उत्तेजित कर सकता है, जिससे हिचकी आती है (6)

हिचकी के कारणों को जानने के बाद आइए अब हम बच्चों में हिचकी रोकने के उपाय जान लेते हैं।

छोटे बच्चों में हिचकी को कैसे रोके? | New Born Baby Ki Hichki Rokne Ke Upay

लंबे समय तक हिचकी की समस्या परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए यहां हम बच्चों में हिचकी रोकने के कुछ आसान उपाय बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं :

1. अपने आप ठीक होने दें

आम तौर पर देखा जाता है कि बड़ों की तरह ही बच्चों में भी हिचकी अपने आप ही कुछ समय में बंद हो जाती है। इसलिए हिचकी आने पर कुछ मिनट तक इंतजार करें। मुमकिन है, सामान्य स्थिति होने पर दो से चार मिनट में हिचकी आना अपने आप बंद हो जाए (2)

2. थोड़ा-थोड़ा करके दूध पिलाएं

लगातार दूध पीने की स्थिति में बच्चे कुछ मात्रा में हवा भी निगल जाते हैं, जिस कारण उन्हें हिचकी आ सकती है। ऐसे में बच्चों को थोड़ा-थोड़ा करके ही दूध पिलाएं। इससे वह पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन ले पाएंगे और अतिरिक्त हवा निगलने की आशंका भी कम हो सकेगी (7)

3. चीनी के दाने

बच्चों में हिचकी की समस्या होने पर चीनी के दाने फायदेमंद हो सकते हैं। इसलिए हिचकी आने पर बच्चों की जीभ के नीचे कुछ चीनी के दाने रख सकते हैं। इससे हिचकी की समस्या में बच्चों को राहत मिल सकती है (3)

4. बच्चे को सही स्थिति में बिठाएं

दूध पीने के दौरान आमतौर पर शिशु कुछ मात्रा में हवा भी निगल जाते हैं (7)। यह हवा हिचकी का कारण बन सकती है (8)। ऐसे में बच्चे को सही स्थिति में बिठाकर निगली गई हवा को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है। इस तरह हिचकी को कम करने में भी यह उपाय सहायक हो सकता है। इसके लिए बच्चों के सिर को सहारा देते हुए उन्हें गोद में सीधा बिठाया जा सकता है (9)

यहां जानते हैं कि शिशुओं को हिचकी आने पर क्या नहीं करना चाहिए।

शिशु के हिचकी आने पर क्या नहीं करना चाहिए?

शिशुओं को हिचकी आने पर कुछ सावधानियों को ध्यान में रखते हुए निम्न कार्यों को नहीं करना चाहिए, जो कुछ इस प्रकार हैं :

  • उन्हें अतिरक्त भोजन खिलाने से बचना चाहिए (3)
  • कुछ महिलाएं हिचकी आने पर बच्चों की पीठ को मलने के स्थान पर थपकीयां देती हैं, ऐसा करने पर हिचकी की समस्या अधिक बढ़ सकती है।
  • बच्चों को हिचकी आने पर कुछ महिलएं उनके हाथ पैर और जीभ को खींचने लगतीं है। यह खतरनाक हो सकता है। बच्चे के सभी अंग बहुत नाजुक होते हैं। ऐसे में इन अंगों को खींचना इन अंगों में क्षति का कारण बन सकता है। इसलिए भूलकर भी ऐसा न करें।
  • ऊंची आवाज में बोलना वयस्कों के मामले में कुछ हद तक हिचकी को रोकने में कारगर हो सकता है, लेकिन यह तरीका छोटे बच्चों के साथ काम नहीं करता है। ऊंची आवाज में बोलने पर बच्चे डर सकते हैं और इसका उनके नाजुक कानों पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
  • हिचकी को बंद करने के लिए कभी भी बच्चों की सांस रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना बच्चों के लिए घातक और जानलेवा साबित हो सकता है।

आगे अब हम बच्चों में हिचकी की समस्या से बचाव के कुछ आसान उपाय बताने जा रहे हैं।

छोटे बच्चों में हिचकी की रोकथाम | Bache Ki Hichki Kaise Roke

छोटे बच्चों की हिचकी को रोका नहीं जा सकता है। मगर, हिचकी आने की समस्या को कुछ हद तक कम जरूर किया जा सकता है। इसके लिए यहां हम कुछ बचाव संबंधी उपाय बताने जा रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं :

  • बच्चों को अधिक मात्रा में दूध पिलाने से बचें। वजह यह है कि इससे दूध के साथ हवा निगलने की आशंका अधिक रहती है, जो हिचकी का कारण बन सकती है (9)
  • बच्चों को जल्दी-जल्दी भोजन या दूध का सेवन न कराएं, क्योंकि इससे खाद्य या पेय के कुछ अंश इसोफेगस (गले का एक हिस्सा) में अटक या चिपक सकते हैं। इस कारण भी हिचकी आने की समस्या हो सकती है (9)
  • दूध पिलाने के बाद या फिर कुछ खिलाने के बाद बच्चे को थोड़ी देर के लिए सीधा बैठाकर रखें। ऐसा करने पर बच्चों द्वारा निगली गई हवा को बाहर निकलने में मदद मिल सकती है (8)
  • दूध पीने के बाद बच्चे को डकार जरूर दिलाएं (9)

बच्चे को हिचकी आने पर डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए, आगे हम इस बारे में बताने जा रहे हैं।

डॉक्टर से कब मिलें

वैसे तो बच्चों में हिचकी आना सामान्य है, जो कुछ ही समय में अपने आप बंद हो सकती है (2)। इसके बावजूद अगर यह समस्या सामान्य से अधिक समय तक रहती है और ऊपर दिए गए उपायों को अपनाने के बाद भी यह दूर नहीं होती है तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

यहां आपने यह तो जान ही लिया कि बच्चों में हिचकी आना बहुत ही आम बात है और यह एक प्राकृतिक क्रिया है। मगर, कभी-कभी अधिक समय तक बच्चों में हिचकी की समस्या परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में लेख में शामिल बच्चों में हिचकी से बचाव के उपाय और इसे दूर करने के तरीकों को अपनाकर कुछ हद तक हिचकी से राहत पाई जा सकती है। फिर भी अगर इन उपायों को अपनाने के बावजूद भी बच्चे की हिचकी दूर नहीं होती है तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

संदर्भ (References):