प्रेगनेंसी में आर्थराइटिस (गठिया) रोग : कारण, इलाज व परहेज | Arthritis During Pregnancy In Hindi

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प्रेगनेंसी के समय महिलाओं को अक्सर कई छोटी-बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसमें एक नाम गठिया यानी आर्थराइटिस का भी शामिल किया जा सकता है। इसलिए, प्रेगनेंसी के दौरान गठिया के कारण, इसके लक्षण और इससे संबंधित इलाज के बारे में पता होना जरूरी है, क्योंकि इस दौरान किसी भी तरह की लापरवाही मां के साथ-साथ होने वाले शिशु को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि मॉमजंक्शन के इस लेख में गर्भावस्था में आर्थराइटिस से जुड़ी विस्तारपूर्वक जानकारी लेकर आए हैं, ताकि गर्भवतियां इससे प्रभाव से बची रहें।

आइये, सबसे पहले आर्थराइटिस के विषय में जान लेते हैं।

आर्थराइटिस (गठिया) क्या होता है?

गठिया एक प्रकार की सूजन है, जो जोड़ों वाले हिस्से पर होती हैं। जोड़ उस हिस्से को कहा जाता है, जहां दो हड्डियां आपस में जुड़ती हैं। गठिया की स्थिति में जोड़ वाले भाग में अकड़न या सुई चुभने जैसा एहसास हो सकता है। इस समस्या के कारण जोड़ों में दर्द भी महसूस हो सकता है (1)। वहीं, यह समस्या गर्भावस्था के दौरान भी हो सकती है। इसलिए, समय पर इसका उपचार करवाना जरूरी है। नीचे प्रेगनेंसी में इसके कारण व लक्षण के साथ अन्य जरूरी जानकारी को साझा किया गया है।

आइये, अब जान लेते हैं गर्भावस्था में आर्थराइटिस के कारण।

प्रेगनेंसी के दौरान आर्थराइटिस के कारण और जोखिम कारक

गर्भावस्था में आर्थराइटिस की जोखिम उत्पन्न होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, इन्ही कारणों के बारे में आगे विस्तार से बता रहे हैं (2) (3) :

  1. ऑटोइम्यून डिसऑर्डर : रूमेटाइड आर्थराइटिस गठिया का एक प्रकार है, जो ऑटोइम्यून डिसऑर्डर के कारण होता है। ऑटोइम्यून डिसऑर्डर में इम्यून सिस्टम स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। इसके कारण कई समस्याएं हो सकती हैं, जिसमें रूमेटाइड आर्थराइटिस भी शामिल है (4)
  1. कार्टिलेज को नुकसान पहुंचना : कार्टिलेज (जोड़ों में मौजूद एक प्रकार का टिश्यू) जोड़ों को सुरक्षित रखने और आसानी से मूव करने में मदद करता है। अगर जोड़ों वाले भाग में सही मात्रा में कार्टिलेज ना हो, तो हड्डियां आपस में रगड़ सकती हैं। इससे सूजन की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  1. आनुवंशिक : गर्भावस्था के दौरान गठिया होने के पीछे अनुवांशिक कारण भी हो सकता है। अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही है, तो इसका जोखिम दूसरे सदस्यों में भी बना रह सकता है (5)
  1. वजन बढ़ने पर : प्रेगनेंसी के समय अधिकतर महिलाओं का वजन बढ़ जाता है (6)। वजन के बढ़ने के कारण शरीर में गठिया की समस्या उत्पन्न हो सकती है (7)
  1. इन्फेक्शन यानी संक्रमण : गर्भावस्था के समय शरीर में बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण के कारण भी गठिया हो सकता है।
  1. धूम्रपान : धूम्रपान के कारण भी रूमेटाइड आर्थराइटिस का जोखिम बढ़ सकता है (8)

नीचे जानिए गर्भावस्था में आर्थराइटिस के लक्षण।

प्रेगनेंसी के दौरान आर्थराइटिस के लक्षण

गर्भावस्था हो या सामान्य समय, गठिया के कुछ लक्षण सामने आ सकते हैं। नीचे जानिए गठिया के लक्षण (9) :

  • जोड़ों में दर्द, लालिमा और सूजन।
  • प्रभावित हिस्से को हिलाने में परेशानी।
  • बुखार।
  • वजन घटना।

आगे जानिए, आर्थराइटिस के कारण गर्भावस्था पर किस तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं।

आर्थराइटिस प्रेगनेंसी को कैसे प्रभावित कर सकता है?

आर्थराइटिस निम्नलिखित तरीके से प्रेगनेंसी को प्रभावित कर सकती है :

  • दैनिक गतिविधियों को करने में परेशानी हो सकती है (2)। गठिया के कारण ठीक से चलने या खड़े होने में तकलीफ हो सकती है।
  • जिन महिलाओं को रूमेटाइड ऑर्थराइटिस के साथ ही सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (SLE -एक तरह की ऑटोइम्यून बीमारी) होता है, उन्हें प्री-एक्लम्पसिया (उच्च रक्तचाप विकार), प्रीटर्म डिलीवरी (समय से पहले जन्म) के साथ भ्रूण के विकास में रुकावट जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है (10)

अब हम गर्भावस्था में आर्थराइटिस के दर्द से छुटाकार पाने से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान आर्थराइटिस के दर्द से कैसे राहत पाएं?

एक वैज्ञानिक शोध की मानें, तो गठिया के दर्द से राहत पाने के लिए दर्द निवारक दवाई का सहारा लिया जा सकता है (11)। वहीं, दूसरे अध्ययन में दिया है कि गर्भावस्था के दौरान इस दवाई को लिया जा सकता है (12)। हालांकि, गर्भावस्था में किसी भी दवाई का सेवन बिना डॉक्टरी परामर्श के नहीं करना चाहिए। इसलिए, प्रेगनेंसी के दौरान आर्थराइटिस के दर्द से राहत पाने के लिए डॉक्टर से बात करें।

चलिए, अब जान लेते हैं प्रेगनेंसी के समय आर्थराइटिस का इलाज किस प्रकार किया जा सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान आर्थराइटिस के लिए इलाज

गर्भावस्था के समय आर्थराइटिस के प्रभाव को कम करने के लिए डॉक्टर कुछ दवाई दे सकते हैं। इन दवाइयों की मदद से इस समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

  • दवाइयों का उपयोग : गर्भावस्था के दौरान गठिया के इलाज में कुछ दवाइयों का सहारा लिया जा सकता है। इन दवाइयों की सूची में नॉन स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs)  कोर्टिकोस्टेरॉयड, डिजीज मोडिफाइड एंटीरूमेटिक ड्रग्स (DMARDs) शामिल हैं। ये दवाइयां गठिया की सूजन को कम कर सकती हैं। हालांकि, शोध में इन दवाइयों को सावधानी के साथ इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, इसलिए बिना डॉक्टरी परामर्श के इन दवाइयों को न लें (13)
  • मसाज थेरेपी : आर्थराइटिस के लिए मसाज थेरेपी का सहारा लिया जा सकता है। दरअसल, इस थेरेपी के मदद से गठिया के दर्द और सूजन को कम किया जा सकता है (14)। ऐसे में कहा जा सकता है कि गर्भावस्था के दौरान आर्थराइटिस से राहत पाने के लिए मसाज थेरेपी ली जा सकती है। ध्यान रहे कि प्रेगनेंसी में आर्थराइटिस के लिए मसाज डॉक्टर की देखरेख में ही कराएं।
  • जीवनशैली में बदलाव : डॉक्टर खान-पान के साथ जीवनशैली से जुड़े कुछ अन्य जरूरी बदलाव करने की सलाह दे सकते हैं।

नोट : प्रेगनेंसी के दौरान गठिया के इलाज के लिए किसी भी दवाई को बिना डॉक्टरी सलाह के न लें।

प्रेगनेंसी में आर्थराइटिस के लिए आहार संबंधी जानकारी नीचे दी गई है।

प्रेगनेंसी के दौरान आर्थराइटिस होने पर खानपान

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर पब्लिश एक मेडिकल रिसर्च के अनुसार, गठिया रोग से राहत पाने के लिए एंटी-इंफ्लेमेटरी युक्त आहार ले सकते हैं (15)। वहीं, इन एंटी-इंफ्लेमेटरी युक्त खाद्य पदार्थ को गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित माना जा सकता है (16) (17)

  • गठिया की स्थिति में खाद्य पदार्थ के तौर पर फल जैसे, बेरी और केले का सेवन कर सकते हैं।
  • इस समस्या में राहत पाने के लिए आहार के रूप में ओटमील और गेहूं की रोटी ले सकते हैं।
  • आर्थराइटिस के मरीज के लिए सोयाबीन लाभकारी हो सकता है।
  • चावल का सेवन कर सकते हैं।
  • इसके अलावा, तुलसी की चाय पी सकती हैं। बता दें कि तुलसी को प्रेगनेंसी में सुरक्षित माना गया है (18)
  • इसके अलावा, भोजन के साथ दही का सेवन कर सकते हैं। इसे भी इस दौरान सुरक्षित माना गया है (19)

गर्भावस्था में आर्थराइटिस के लिए एक्सरसाइज नीचे बताई गई हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान आर्थराइटिस होने पर एक्सरसाइज

आर्थराइटिस की स्थिति में निम्नलिखित एक्सरसाइज को डॉक्टरी सलाह और एक्सपर्ट की देखरेख में किया जा सकता है (2) :

  • गठिया में आराम पाने के लिए एरोबिक एक्सरसाइज में चलना यानी वॉकिंग करना बेहतर हो सकता है (20)
  • आर्थराइटिस के दौरान मसल्स ट्रेनिंग एक्सरसाइज भी लाभकारी माना जा सकती है (21)

नीचे जानिए गर्भावस्था के दौरान आर्थराइटिस से जुड़ी सावधानियां।

प्रेगनेंसी के दौरान आर्थराइटिस से जुड़ी सावधानियां

गर्भावस्था के दौरान आर्थराइटिस होने पर कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। इन सावधानियों की वजह से गठिया से जल्दी राहत पाया जा सकता है :

  • प्रेगनेंसी के साथ-साथ आर्थराइटिस में भी भारी वजन उठाने की मनाही है। इसलिए, भूल से भी प्रेगनेंसी में गठिया के दौरान वजन न उठाएं।
  • झटके से न उठें। आराम-आराम से उठें।
  • अधिक तले हुए और मसालेदार खाद्य पदार्थों से परहेज करें।
  • अगर जोड़ों में दर्द ज्यादा हो रहा है, तो डॉक्टर की मदद लें।
  • ऊपर बताए गए एंटी-इंफ्लेमेटरी खाद्य-पदार्थों को आहार में शामिल करें।

प्रेगनेंसी में आर्थराइटिस से बचाव के उपाय नीचे बताए गए हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान आर्थराइटिस से बचाव

गर्भावस्था में आर्थराइटिस की समस्या से बचने के लिए नीचे बताए जा रहे उपाय अपना सकते हैं (2) :

  • इस समस्या से बचने के लिए रोजाना रात में 8 से 10 घंटे की नींद लें। वहीं, दिन के समय भी कुछ देर के लिए सोएं।
  • अधिक समय तक एक ही स्थिति में बने रहने से बचें।
  • ऐसी गतिविधि करने से बचें, जिससे कि जोड़ पर अधिक तनाव हो।
  • विटामिन व मिनरल से समृद्ध खाद्य पदार्थों का सेवन करें। इसके लिए फल और सब्जियों का चयन श्रेष्ठ होता है।
  • आर्थराइटिस से बचने के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ को ले सकते हैं (22)। ओमेगा-3 फैटी एसिड से समृद्ध खाद्य-पदार्थों के लिए डॉक्टर से बात कर सकते हैं।
  • धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
  • इस समस्या से बचाव के लिए प्रेगनेंसी के दौरान वजन को नियंत्रित रखना जरूरी होता है।

दोस्तों, अगर किसी गर्भवती महिला को आर्थराइटिस की समस्या है, तो वो अपना सही तरह से ध्यान रख इस समस्या के प्रभाव को कम कर सकती हैं। इस समस्या से राहत पाने के लिए विशेषज्ञों के निर्देशों का पालन करें। साथ ही लेख में बताए गई सावधानियों और जरूरी खानपान का भी ध्यान रखें। हम उम्मीद करते हैं कि इस लेख में दी गई सभी जानकारी पाठक के लिए उपयोगी साबित होगी। गर्भावस्था से जुड़ी अन्य जानकारी के लिए मॉमजंक्शन के लेख पढ़ते रहें।

संदर्भ (References) :

1. Arthritis By Medlineplus
2. Arthritis By Medlineplus
3. Rheumatic diseases and pregnancy By Citeseerx
4. New diagnosis of rheumatoid arthritis during the third trimester of pregnancy By NCBI
5. Arthritis By NIH
6. Managing your weight gain during pregnancy By Medlineplus
7. Obesity & osteoarthritis By NCBI
8. Risk Factors By CDC
9. Arthritis By NIH
10. High-risk pregnancy and the rheumatologist By Academia
11. Arthritis and pain. Current approaches in the treatment of arthritic pain By NCBI
12. Analgesics in Pregnancy: An Update on Use, Safety and Pharmacokinetic Changes in Drug Disposition By NCBI
13. The treatment of rheumatoid arthritis during pregnancy By NCBI
14. Massage Therapy for Pain and Function in Patients With Arthritis: A Systematic Review of Randomized Controlled Trials By NCBI
15. Managing Rheumatoid Arthritis with Dietary Interventions By NCBI
16. Dietary Inflammatory Potential during Pregnancy Is Associated with Lower Fetal Growth and Breastfeeding Failure: Results from Project Viva By NCBI
17. Health Tips for Pregnant Women By NIH
18. Safety classification of herbal medicines used among pregnant women in Asian countries: a systematic review By NCBI
19. Yogurt consumption during pregnancy and preterm delivery in Mexican women: A prospective analysis of interaction with maternal overweight status By NCBI
20. Aerobic exercise in pregnancy By NCBI
21. Muscle strengthening exercises during pregnancy are associated with increased energy and reduced fatigue By NCBI
22. Omega-3 Fatty Acids and Pregnancy By NCBI