गर्भावस्था में शिशु की हलचल (बेबी मूवमेंट)| Pregnancy Me Baby Ki Movement

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गर्भवती महिला के लिए वह पल बेहद खास होता, जब उसे अपने गर्भधारण की खबर मिलती है। वहीं, यह खुशी तब और बढ़ जाती है, जब उसे गर्भ में पहली बार अपने शिशु की हलचल महसूस होती है। कई गर्भवती महिलाओं को तो शिशु की पहली हलचल समझने में समय लग जाता है। अगर आप गर्भवती हैं और आपके मन में शिशु की हलचल को लेकर सवाल हैं, तो यह लेख आपके सवालों का जवाब है। मॉमजंक्शन के इस लेख में हम गर्भ में शिशु की हलचल से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां देंगे।

आइए, लेख की शुरुआत में जानते हैं कि पहली बार शिशु की हलचल कब महसूस होती है।

गर्भ में बच्चे का लात मारना मां को कब महसूस होता है? | Baby Ki Movement Kab Hoti Hai

गर्भावस्था के शुरू के कुछ महीनों तक शिशु की हलचल का गर्भवती को अहसास नहीं हो पाता। ज्यादातर महिलाओं को गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के आसपास शिशु का हिलना-डुलना महसूस होता है। इसके अलावा, 24वें सप्ताह के बाद से लगातार गर्भ में बच्चे के लात मारने को गर्भवती महिला महसूस कर सकती है (1)। चूंकि, इससे पहले शिशु काफी छोटा होता है, इसलिए उसकी गतिविधियों को पहचान पाना मुश्किल होता है। ऐसे में इन गतिविधियों को गर्भवती महिला कभी-कभी गैस की समस्या समझ बैठती हैं। कई बार आपको पेट में स्पंदन-सा महसूस हो सकता है, जो शिशु की हलचल हो सकती है। अगर आप पहले भी मां बन चुकी हैं, तो इन अहसासों को आप समझने लगेंगी। वैसे, ज्यादातर शिशु की लात का अहसास दूसरी और तीसरी तिमाही में होता है।

आगे जानते हैं कि शिशु का हिलने-डुलने का पता कब-कब चल सकता है।

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प्रेगनेंसी में बच्चे की हलचल कितनी बार महसूस होती है?

जब आप 20 से 24 सप्ताह के (दूसरी तिमाही) बीच शिशु की हलचल महसूस कर लेंगी, तो इसके बाद आप इसे कई बार महसूस कर पाएंगी। हालांकि, जरूरी नहीं कि आप ये हलचल हर बार ही महसूस कर पाएं। खासतौर पर जब आप किसी काम में व्यस्त होंगी, तब हो सकता है कि इस तरफ आपका ध्यान न जाए और शिशु की हलचल को पहचान न पाएं। तीसरी तिमाही में शिशु ज्यादा सक्रिए हो जाता है और इसके अंत तक 2 घंटे में करीब 10 बार हलचल कर सकता है (2)। वहीं, प्रसव के दौरान एक स्वस्थ शिशु लगातार हलचल करता रहता है।

लेख के अगले भाग में शिशु की हलचल सप्ताहवार बताया गया है।

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सप्ताह दर सप्ताह मेरे शिशु की हलचल कैसी महसूस होगी?

शुरुआती दौर में शिशु की हलचल का अहसास कम होता है, लेकिन जैसे-जैसे गर्भावस्था का समय बढ़ता जाता है, शिशु लगातार हलचल करना शुरू कर देता है। नीचे हम सप्ताह दर सप्ताह के हिसाब से शिशु की हलचल के बारे में बता रहे हैं :

  • 20 से 24वां सप्ताह : इस दौरान सप्ताह दर सप्ताह शिशु की गतिविधियां बढ़ने लगेंगी। आपको महसूस होगा कि शिशु दिन के समय ज्यादा गतिविधियां करता है। वहीं शाम के समय में हाथ-पैर चलता है।
  • 24 से 28वां सप्ताह : इस दौरान, शिशु की हिचकियों पर ध्यान देना शुरू करें। जब शिशु हिचकी लेगा, तो आपको धक्का लगने जैसा महसूस होगा। इसके अलावा, शिशु गर्भ में घूमता भी है और बाहर हुई तेज आवाज पर उछल भी सकता है।
  • 29 से 31वां सप्ताह : इस सप्ताह तक शिशु की हलचल कम होने लगेगी, लेकिन जब भी हलचल होगी, बिल्कुल स्पष्ट होगी। इस दौरान शिशु की हलचल इसलिए कम होती है, क्योंकि शिशु के आकार में वृद्धि होने के चलते गर्भ में जगह कम पड़ने लगती है। इस अवधी तक शिशु करीब 14 इंच का हो जाता है (3)। यही कारण है कि उसे हाथ-पैर मारने के लिए ज्यादा जगह नहीं मिल पाती।
  • 32 से 35वां सप्ताह : इस दौरान, शिशु की हलचल तेज महसूस होगी, लेकिन गतिविधियों की संख्या कम होने लगेगी।
  • 36वां सप्ताह : इस समय तक शिशु का सिर घूमकर नीचे की ओर आ जाता है।

आइए, अब शिशु की हलचल से जुड़े कुछ फैक्ट्स के बारे में जानते हैं।

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शिशु की हलचल के बारे में तथ्य

गर्भ में शिशु का लात मारना एक नन्ही-सी जान का आपके अंदर होने का अहसास कराता है। इसके अलावा, शिशु की हलचल इस बात का भी प्रमाण होती है कि गर्भ में वह स्वस्थ है और उसका विकास अच्छे से हो रहा है। नीचे हम शिशु की हलचल से संबंधित कुछ तथ्य शेयर कर रहे हैं :

  1. बाहर की गतिविधियों पर शिशु प्रतिक्रिया देता है : जी हां, गर्भ में पल रहा शिशु बाहर हो रही गतिविधियों पर लात मारकर प्रतिक्रिया देता है। बाहर जो आवाज हो रही है, आप क्या खा रही हैं, इन सब पर शिशु हलचल के जरिए प्रतिक्रिया देता है। ऐसे में कभी हाथ चलाना, तो कभी पैर मारने की गतिविधियां शिशु कर सकता है।
  • ध्वनि पर शिशु की हलचल : गर्भावस्था के 20वें सप्ताह में शिशु हल्की-हल्की ध्वनियां सुन सकता है। वहीं, सप्ताह बढ़ते-बढ़ते वह ऊंची ध्वनियां सुनने लगता है (4)। इससे पता चलता है कि शिशु स्वस्थ तरीके से गर्भ में विकसित हो रहा है।
  • खाने पर शिशु की हलचल : गर्भवती महिला जो भी खाती है, एमनियोटिक द्रव की वजह से शिशु उसके स्वाद को समझने लगता है। स्वाद पसंद आने पर या न पसंद आने पर शिशु प्रतिक्रिया देता है।
  1. एक तरफ लेटने से शिशु की हलचल बढ़ती है : गर्भवती के लेटने की स्थिति शिशु की हलचल को प्रभावित करती है। जब गर्भवती महिला बाईं तरफ करवट लेकर लेटती है, तो उस समय शिशु की हलचल ज्यादा होती है। ऐसा रक्त की आपूर्ति बढ़ने के कारण होता है। आप अपने आराम के लिए एक तरफ करवट लेकर पैरों के बीच तकिया लगाकर लेट सकती हैं। इससे आपको आराम महसूस होगा (5)
  1. 28वें सप्ताह में हलचल कम होना हो सकती है परेशानी : 28वां सप्ताह यानी तीसरी तिमाही में शिशु का हिचकी लेना महसूस हो सकता है। हो सकता है डॉक्टर आपको शिशु की हलचल गिनने के लिए कहें। ऐसे में आप रोजाना शिशु की हलचल को गिनें। आप पाएंगी कि किसी एक समय पर शिशु की हलचल काफी बार होगी। अगर आपको कुछ दिनों बाद उस समय पर शिशु की हलचल कम होती होती नजर आए, तो एक बार डॉक्टर से संपर्क कर लें (6)
  1. गर्भावस्था के आखिरी दिनों में हलचल कम होना सामान्य है : आखिरी दिनों में भ्रूण पूरी तरह विकसित हो जाता है और उसे हलचल करने के लिए कम जगह मिलती है, इसलिए उसकी हलचल कम होना बिल्कुल सामान्य है। ऐसे में आपको इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

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गर्भ में बच्चे की हलचल महसूस न होने पर क्या करें?

अगर आपको गर्भधारण के 24वें सप्ताह तक शिशु की कोई हलचल महसूस न हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें। वहीं, अगर आपको लगे कि शिशु के हलचल करने की प्रक्रिया कम हो रही है, तो यह चिंता का कारण हो सकता है। इस बात पर ध्यान दें कि अगर गर्भ में शिशु 28वें सप्ताह तक बहुत कम हलचल कर रहा है, तो एक बार डॉक्टर से संपर्क कर लें (3)। ऐसे में डॉक्टर आपकी जांच करेंगे और शिशु की हलचल न होने के कारण का पता लगाएंगे।

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मुझे शिशु की हलचल के बारे में डॉक्टर से कब बात करनी चाहिए?

गर्भावस्था में आपको शिशु की हलचल पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। अगर आपको निम्न में से कोई भी लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए, जैसे :

  • अगर आप दो घंटे से करवट लेकर लेटी हैं, तब भी दस या इससे ज्यादा बार हलचल महसूस न हो, तो डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • अगर बाहर बहुत तेज शोर हो रहा है, तब भी आपको किसी तरह की हलचल महसूस न हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि गर्भ में पल रहे ज्यादातर शिशु बाहर होने वाले शोर-गुल पर हलचल करके प्रतिक्रिया देते हैं।

नोट : अगर शिशु कम हलचल कर रहा है, तो शिशु को प्लेसेंटा से पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलना एक कारण हो सकता है। अगर डॉक्टर को ऐसे कोई लक्षण दिखाई देते हैं, तो शिशु के स्वास्थ्य की ठीक से जांच की जा सकती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गर्भ में शिशु की कम गतिविधि होने को कब गंभीरता से लें?

अगर शिशु की गतिविधियों में तेज़ी से कमी आई है या फिर वह कई दिनों से हलचल कम रहा है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। इसके अलावा, अगर आपका शिशु बाहर होने वाले शोर पर बिल्कुल भी प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है, तो ऐसे में आप डॉक्टर से संपर्क करें।

शिशु की हलचल कम है, तो इसका मतलब है कि मेरा बच्चा बीमार है?

शिशु की हलचल कम होने का मतलब जरूरी नहीं कि वह बीमार हो। अगर गर्भावस्था के आखिरी दिन चल रहे हैं, तो ऐसा होना सामान्य है। वहीं, अगर गर्भावस्था के बीच के समय की बात करें, तो ऑक्सीजन के अभाव में शिशु हलचल कम कर सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जरूर संपर्क करना चाहिए।

रात को गर्भ में शिशु ज्यादा सक्रिय क्यों होता है?

गर्भ में शिशु का हरकत करने का समय अलग-अलग हो सकता है। दिन के समय आप आप ज्यादा सक्रिए रहती हैं और गतिविधियां करती रहती हैं। इसलिए, जब आप रात के समय आराम की अवस्था में आ जाती हैं, तो शिशु शांति के माहौल में सक्रिए होने लगता है और लात मारता है।

अगर मेरा बच्चा लात नहीं मार रहा है, तो मुझे क्या करना चाहिए?

अगर आपको लगे कि बच्चा गर्भ में लात नहीं मार रहा है या उसकी उसकी हलचल कम हो गई है, तो घबराएं नहीं। आप आराम से बैठें और शांत हो जाएं। कुछ मीठा या ठंडा पेय पदार्थ का सेवन करें और अपने पैरों को ऊपर करें। ठंडे और मीठे के अहसास से आपका शिशु हलचल करना शुरू कर सकता है। ऐसा करने से आपका शिशु हिचकी, कलाबाजी या लात मारने जैसी प्रतिक्रिया दे सकता है।

किस स्थिति में मैं अपने बच्चे के हलचल या किक महसूस नहीं कर सकती?

ऐसा बहुत बार होता है जब आप शिशु की हलचल नहीं महसूस कर पाएंगी। नीचे हम कुछ कारण बता रहे हैं जब शिशु की हलचल आपको महसूस नहीं हो पाएगी :

  • जब आप किसी काम में व्यस्त होंगी, तो बच्चे की हलचल को पहचाना मुश्किल होगा।
  • जब बच्चा पूरी तरह विकसित हो जाएगा, तो उसे गर्भ में किक मारने की जगह नहीं मिल पाएगी।
  • अगर अपरा (placenta) आगे की तरफ आ जाती है, तो इससे शिशु की हलचल कम हो सकती है। इसे ‘एंटीरियर प्लेसेंटा’ कहा जाता है। हालांकि, यह चिंता का विषय नहीं है, यह बिल्कुल सामान्य है।

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इस लेख में हमने गर्भावस्था के दौरान होने वाली शिशु की हलचल से जुड़ी कुछ जरूरी बातें की, जिनका जानना हर गर्भवती के लिए जरूरी है। हम उम्मीद करते हैं कि इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब आपको मिल गए होंगे। साथ ही इस लेख को अपने परिचितों के साथ भी जरूर शेयर करें।

संदर्भ (References) :

1. Baby’s Movements: What Is Normal? By South Eastern Sydney Local Health District
2. Baby Movements During Pregnancy By Pregnancy Birth And Baby
3. Fetal Growth And Development By Website Of The State Of South Dakota Department Of Health
4. Fetal Development By Begin For Birth
5. Problems Sleeping During Pregnancy By Medline Plus
6. Fetal Movement Counting By Children’s Hospital Of Philadelphia