प्रेगनेंसी में खर्राटे आना : कारण, जटिलताएं व इलाज | Pregnancy Me Kharate Ka Ilaj

Pregnancy Me Kharate Ka Ilaj

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खर्राटे आना एक सामान्य समस्या है, जिसे अक्सर हम अपने आसपास कई लोगों में देखते हैं। वहीं, प्रेगनेंसी के दौरान भी कई महिलाएं इस समस्या से गुजरती हैं। आइये, मॉमजंक्शन के इस लेख में जानते हैं कि गर्भावस्था में खर्राटे आना कितना आम है और इससे एक गर्भवती महिला और भ्रूण को क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं। इसके अलावा, लेख में इससे निजात व इससे बचाव के कुछ कारगर उपाय भी बताए गए हैं। पूरी जानकारी के लिए लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

तो चलिए, सबसे पहले जान लेते हैं कि प्रेगनेंसी में खर्राटे लेना कितना आम है।

प्रेगनेंसी में खर्राटे आना कितना आम है?

गर्भावस्था में खर्राटे लेना आम माना जा सकता है। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) की वेबसाइट पर मौजूद एक शोध के अनुसार, प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवतियों में खर्राटे लेने की समस्या बढ़ सकती है। वहीं, शोध में मौजूद एक अमेरिकन स्टडी के मुताबिक यह आंकड़ा गर्भावस्था से पहले 4 प्रतिशत हो सकता और प्रेगनेंसी की अंतिम तिमाही तक यह बढ़कर 14 प्रतिशत तक भी जा सकता है (1)। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जिनके बारे में लेख में आगे विस्तार से बताया गया है।

चलिए, अब जानते हैं गर्भावस्था में खर्राटे आना कब से शुरू होता है।

प्रेगनेंसी में खर्राटे आना कब से शुरू होता है?

जैसा कि हमने बताया कि गर्भावस्था में खर्राटे लेना सामान्य माना जाता है। वहीं, एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक रिसर्च के मुताबिक, प्रेगनेंसी में गर्भवतियां हैबिचुअल स्नोरिंग (हफ्ते में तीन रातों से ज्यादा) का अनुभव पहली तिमाही में 7-11 प्रतिशत तक कर सकती हैं और यह आंकड़ा तीसरी तिमाही में 16 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकता है (2)। ऐसे में हम कह सकते हैं कि खर्राटों की समस्या पहली तिमाही से शुरू होकर अंतिम तिमाही तक रह सकती है।

यहां हम प्रेगनेंसी के दौरान खर्राटे लेने के कारणों को बता रहे हैं।

प्रेगनेंसी में खर्राटे लेने के क्या-क्या कारण हैं?

खर्राटे की समस्या तब होती है, जब नाक और मुंह के जरिए हवा का बहना बाधित हो जाता है। इस दौरान जब व्यक्ति सांस लेता है, तो गले की दीवार में कंपन होता है, जिससे एक कर्कश आवाज उत्पन्न होती है, जिसे खर्राटे कहते हैं (3)। गर्भावस्था में इसके होने के विभिन्न कारण हो सकते हैं, जिन्हें नीचे बताया गया है (2) (1) :

  • स्लीप डिसऑर्डर ब्रीथिंग (नींद से जुड़ा गंभीर विकार, जिसमें सांस बार-बार बंद और शुरू हो जाती है)।
  • प्रेगनेंसी में राइनाइटिस (नाक से जुड़ी सूजन) के कारण नाक का बंद होना।
  • प्रेगनेंसी की शुरुआत में बॉडी मास इंडेक्स (BMI) का अधिक होना।
  • गर्भावस्था में हार्मोनल बदलाव (4)

इसके अलावा भी कई अन्य कारण हैं, जो प्रेगनेंसी में खर्राटों की समस्या का कारण बन सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (3) :

  • मोटापा की समस्या, जिसके कारण गले में मौजूद अतिरिक्त ऊतक वायु मार्ग पर दबाव डालने लगते हैं।
  • गर्भावस्था के अंतिम महीने के दौरान वायुमार्ग से जुड़े ऊतकों में सूजन।
  • नसल सेप्टम (नाक के छिद्रों को विभाजित करने वाली हड्डी) का मुड़ना।
  • जुकाम के कारण या फिर एलर्जी की वजह से नाक का बंद होना।
  • मुंह के ऊपरी भाग (नरम तालू) में सूजन होना। 

लेख के इस भाग में हम प्रेगनेंसी के दौरान खर्राटे लेने से जुड़े जोखिमों की चर्चा करेंगे।

प्रेगनेंसी में खर्राटे से जुड़ी जटिलताएं क्या-क्या हैं?

गर्भावस्था में खर्राटे लेना प्रेगनेंसी से जुड़ी कुछ जटिलताओं का कारण भी बन सकता है, जो कुछ इस प्रकार हैं (1) :

  • गर्भावस्था में गंभीर खर्राटों की समस्या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन (गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप) का कारण बन सकती है।
  • इस दौरान गंभीर खर्राटों की समस्या प्री-एक्लेम्पसिया का जोखिम खड़ा कर सकती है। बता दें कि यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें एक गर्भवती का रक्तचाप प्रेगनेंसी के 20 हफ्ते बाद अचानक से बढ़ जाता है और यूरिन में प्रोटीन आने के साथ अन्य शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं (5)
  • गर्भावस्था में गंभीर खर्राटों की समस्या जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावस्था में मधुमेह) का जोखिम भी खड़ा कर सकती है।
  • इसके अलावा, गंभीर खर्राटों की समस्या सिजेरियन डिलीवरी (सर्जरी के जरिए होने वाली डिलीवरी) का जोखिम खड़ा सकती है।
  • वहीं, प्रेगनेंसी में खर्राटे भ्रूण के सामान्य से कम आकार और विकास (small-for-gestational age) का जोखिम बढ़ा सकते हैं।

स्क्रॉल करके जानिए प्रेगनेंसी में खर्राटे से जुड़े एक गंभीर सवाल का जवाब।

क्या खर्राटे गर्भवती के रक्तचाप और भ्रूण के आकार को प्रभावित करते हैं?

जी हां, खर्राटे गर्भवती के ब्लड प्रेशर और भ्रूण के आकार को प्रभावित कर सकते हैं। जैसा कि लेख में हमने ऊपर जानकारी दी कि गर्भावस्था में गंभीर खर्राटों की समस्या गर्भवती के रक्तचाप को बढ़ाने और भ्रूण के सामान्य से कम आकार या विकास (Small for gestational age) का जोखिम खड़ा कर सकती है (1)। इसके अलावा, एक अन्य शोध में जिक्र मिलता है कि लेट प्रेगनेंसी में गंभीर खर्राटों की समस्या भ्रूण के विकास को बाधित कर सकती है, जिससे भ्रूण का आकार प्रभावित हो सकता है (4)

अब बारी है, गर्भावस्था में खर्राटों का इलाज जानने की।

प्रेगनेंसी में खर्राटों का इलाज | Treatment Of Snoring During Pregnancy

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि गर्भावस्था में खर्राटों की समस्या विभिन्न कारणों से उत्पन्न हो सकती है। इसलिए, इसका इलाज इसके कारणों पर निर्भर करता है। इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले समस्या के कारण का पता लगाएगा, फिर इलाज की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। जैसे कि प्रेगनेंसी में खर्राटों का कारण अगर एसडीबी यानी स्लीप डिसऑर्डर ब्रीथिंग है, तो निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं (2) :

मेडिकल उपकरण :

इसमें सीपीएपी (continuous positive airway pressure) और ओरल एसएडी (oral mandibular repositioning devices) शामिल हैं।

(i) सीपीएपी : इसमें एक उपकरण के जरिए वायुमार्ग में दवाब के साथ हवा डाली जाती है, ताकि नींद के दौरान वायुमार्ग खुला रहे (6)। सीपीएसी के द्वारा दी जाने वाली तेज हवा वायुमार्ग को बाधित होने से बचाने का काम कर सकती है।

(ii) ओरल एमएडी : यह एक ऐसा उपकरण है, जो जबड़े और जीभ की पोजीशन को थोड़ा बदलाव लाकर वायुमार्ग को बाधित होने से बचाने में मदद कर सकता है, जिससे खर्राटों का जोखिम कम हो सकता है (7)। हालांकि, ओरल एमएडी के मुकाबले सीपीएपी को ज्यादा प्रभावकारी माना गया है। वहीं, इसके कुछ दुष्प्रभाव भी सामने आ सकते हैं, जैसे दर्द, मतली और प्रभावित जगह की हड्डी और मांसपेशियों में बदलाव।

जीवनशैली में बदलाव :

एक उचित जीवन शैली अपना कर भी गर्भावस्था में खर्राटों की समस्या से बचा जा सकता है। जैसा कि हम लेख में पहले ही बता चुके हैं कि मोटापा भी खर्राटों का कारण बन सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी में वजन को नियंत्रित रख खर्राटों से आराम और इससे जुड़ी जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है (2)

सर्जरी :

अगर ऊपर बताए गए उपाय से कोई लाभ नहीं होता है, तो डॉक्टर गंभीर स्थिति में सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। इससे संबंधित शोध में ट्रेकियोस्टोमी (वायुमार्ग से जुड़ी सर्जरी) नामक सर्जरी का जिक्र मिलता है, जिसकी मदद से एसडीबी का इलाज किया जा सकता है। हालांकि, इस सर्जरी को अधिक प्राथमिकता नहीं दी जाती, क्योंकि इसके कई नकारात्मक प्रभाव सामने आ सकते हैं (8)। इसलिए, संबंधित डॉक्टर से परामर्श कर प्रेगनेंसी में इसके अन्य कई सुरक्षित विकल्प चुने जा सकते हैं। 

चलिए अब हम प्रेगनेंसी में खर्राटे से बचाव के कुछ टिप्स बता देते हैं।

प्रेगनेंसी में खर्राटों से बचाव कैसे करें?

यहां हम कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं, जिनकी मदद से गर्भावस्था में खर्राटे की समस्या से बचाव किया जा सकता है (9) :

  • अगर किसी का वजन अधिक है, तो सबसे पहले वजन को नियंत्रित करें।
  • पीठ के बल सोने के बजाय एक करवट लेकर सोएं।
  • अगर नाक बंद है, तो उसे ठीक करने के उपाय करें।
  • अपने बेडरूम को न ज्यादा शुष्क और न ही बहुत नम रखें।
  • शराब के सेवन से बचें।
  • संतुलित आहार का सेवन करें।

लेख के अंत में जानेंगे कि गर्भावस्था में डॉक्टर से सलाह कब लेनी चहिए।

डॉक्टर से कब संपर्क करें

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि गर्भावस्था में खर्राटे लेना कुछ गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए, समय रहते इसका उपचार जरूरी है। नीचे हम कुछ ऐसी स्थितियों का जिक्र कर रहे हैं, जिनके सामने आने पर डॉक्टर से संपर्क जरूर करें (3) :

  • एकाग्रता या याददाश्त से जुड़ी समस्या होने पर।
  • सुबह सो कर उठने के बाद आराम न महसूस होने पर।
  • अगर दिन में बहुत अधिक सुस्ती या नींद आ रही हो।
  • सुबह-सुबह सिर दर्द की समस्या होने पर।
  • सामान्य से अधिक वजन बढ़ गया हो।
  • खर्राटों को कम करने के उपाय अगर काम न कर रहें हो।

दोस्तों, गर्भावस्था में खर्राटे लेना सामान्य है, लेकिन यह कई जटिलताओं को जन्म दे सकता है। इसलिए, गर्भावस्था में इसके प्रभाव को कम करने के लिए लेख में बताए गए खर्राटों से बचाव के उपाय जरूर करें। वहीं, डॉक्टर से कब संपर्क करें वाले सेक्शन में बताई गईं स्थितियों के सामने आने पर या अत्यधिक खर्राटों की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हम उम्मीद करते हैं कि हमारा यह आर्टिकल आपके लिए मददगार साबित होगा।

संदर्भ (References) :