गर्भावस्था में कौन से योगासन करने चाहिए और कौन से नहीं? | Pregnancy Me Konsa Yoga Karna Chahiye

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योग करने से शरीर को कई फायदे हो सकते हैं, लेकिन जब बात गर्भावस्था की हो, तो अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। इसमें कोई शक नहीं कि योग करने से शारीरिक और मानसिक तनाव कम होता है, जो गर्भवती और आने वाले शिशु दोनों के लिए अच्छा होता है (1)। गर्भावस्था के दौरान कोई भी योगासन करने से पहले योग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि कुछ योगासन ऐसे भी हैं, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान नहीं करना चाहिए। मॉमजंक्शन के इस लेख में गर्भावस्था में योगासन करने के फायदे और कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए, इसकी जानकारी देंगे।

क्या गर्भावस्था के दौरान योग करना सुरक्षित है?

अनेक शोध से यह साबित हो गया है कि गर्भावस्था के दौरान योग करना सुरक्षित है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर और योग विशेषज्ञ के सुझाव से आप योग करना शुरू कर सकते हैं। बिना विशेषज्ञ की सलाह से योग न करें, क्योंकि कुछ आसन आपको नुकसान भी पहुंचा सकते हैं (1)

लेख के इस भाग में जाने कि योग कब करना चाहिए।

गर्भावस्था में योग शुरू करने का सबसे अच्छा समय क्या है?

योग करने का सही समय सुबह और शाम का होता है। इस समय प्रकृति शांत होती है, जिससे ध्यान लगाने में सहायता मिलती है। सुबह योग करने से आप पूरे दिन खुद को तनाव से मुक्त महसूस करते हैं। योग के जरिए आपके शरीर में ऑक्सीजन का संचार अच्छी तरह से होता है, जिससे गर्भ में मौजूद शिशु को भी ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में मिल सकती है। यह उन गर्भवती महिलाओं के ज्यादा लाभदायक है, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप की समस्या होती है या भ्रूण का सही तरीके से विकास नहीं होता है। इन दिनों ये समस्याएं आम हो गई हैं।

आगे लेख में प्रेग्नेंसी में कौन सा योग करे इसकी जानकारी देंगे।

गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित योगासन | Pregnancy Me Konsa Yoga Karna Chahiye

यहां हम तीनों तिमाही के अनुसार बता रहे हैं कि गर्भवती महिला को कौन-कौन से योगासन करने चाहिए (2)

पहली तिमाही

1. त्रिकोणासन

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गर्भावस्था के दौरान पाचन शक्ति को बढ़ाने के लिए यह अच्छा आसन माना जाता है। इससे शरीर लचीला होता है।

  • पहले सीधे खड़े हो जाएं और पैरों को आपस में जोड़ लें।
  • हाथ शरीर से सटे हुए होने चाहिए।
  • धीरे-धीरे अपने पैरों को फैलाएं। ध्यान रहे कि दोनों पैर एक दूसरे के समानांतर हों।
  • अपने दोनों हाथों को शरीर से दूर फैलाते हुए कंधों के समानांतर ले आएं।
  • फिर बाएं पैर को बाहर की ओर मोड़ें।
  • गहरी सांस लेते हुए अपने बाईं ओर झुकें और बाएं हाथ की उंगलियों से फर्श को छूने का प्रयास करें। इसी समय दाहिने हाथ को ऊपर उठाएं।
  • अपने सिर को बाईं ओर झुकाएं और दाहिने हाथ की उंगलियों को देखने का प्रयास करें।
  • कुछ सेकंड रुकें और सामान्य सांस लेते रहें।
  • धीरे-धीरे सांस छोड़ें और सामान्य मुद्रा में पहुंच जाएं।
  • फिर दूसरी तरफ भी इसी प्रक्रिया को दोहराएं।

2. वीरभद्र आसन

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यह आपके पूरे शरीर के लिए फायदेमंद होता है।

  • सामान्य स्थिति में खड़ा होकर हाथों को सामने रखें।
  • दाएं पैर को आगे ले जाएं।
  • अब दाएं घुटने को हल्का-सा मोड़ दें और पिछले पैर को सीधा रखें और तलवा जमीन से सटा हुआ हो।
  • गहरी सांस लें और धीरे-धीरे अपने हाथों को अपने सिर के ऊपर उठाएं।
  • हाथ नमस्कार मुद्रा में होने चाहिए।
  • पीछे की ओर हाथ को खींचे पर ध्यान रहे की पीठ सीधी रहे।
  • फिर अपने हाथों को नीचे लाते हुए धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
  • इसके बाद घुटनों को सीधा कर लीजिए।
  • पैरो को मिला लीजिए और फिर ऐसा ही दूसरी तरफ से कीजिए।

3. वृक्षासन

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इससे पैर, पीठ और बाजुएं लचीली होती हैं और ध्यान लगाने में भी मदद मिलती है।

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले सीधी तरह तनकर खड़े हो जाएं।
  • अपने शरीर का भार बाएं पैर डाल दें फिर अपने दाएं घुटने को मोड़ दें।
  • दाएं पैर के तलवे को घुटनों के ऊपर ले जाएं और अपने बाए जांघ के साथ जोड़े दें।
  • आपके दाएं पैर की एड़ी के दबाव का असर बाएं जांघ पर होना चाहिए।
  • इसके बाद बाएं पैर से अपने शरीर का संतुलन बनाए रखने की कोशिश करें।
  • संतुलन बनने के बाद अपने दोनों हाथों को शरीर से दूर फैलाते हुए कंधों के समानांतर ले आएं और फिर सांस लेते हुए हाथों को सिर से ऊपर ले जाएं और नमस्कार की मुद्रा में आ जाएं।
  • शरीर को तानकर रखे और संतुलन बिगड़ने न दें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए हाथों को नीचे लाएं और सामान्य मुद्रा में आ जाएं।
  • इसी प्रक्रिया को दूसरे पैर से भी करें।

दूसरी तिमाही

1. वज्रासन

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यह योगासन गर्भावस्था के समय पाचन की समस्या को दूर करने में सहायक होता है। यह गर्भाशय में खून की बहाव को बेहतर करता है, जो गर्भावस्था में अच्छा होता है।

  • दोनों पैरों को सामान्य स्थिति में रखें।
  • फिर घुटनों को मोड़कर अपने कूल्हों को दोनों एड़ियों के बीच सटा लें।
  • आपको पैरों के दोनों अंगूठे एक-दूसरे से मिले हुए होने चाहिए।
  • अब अपनी कमर और सिर को बिल्कुल सीधा रखें।
  • हाथ जंघाओं पर होने चाहिए।
  • कुछ देर इसी स्थिति में रहें और आंख बंद करके ध्यान लगाने का प्रयास करें।

2. मत्स्य क्रीड़ासन

इस आसन से पाचन क्रिया में मदद मिलती है। साथ ही कब्ज के समस्या से भी राहत मिली है। इसके अलावा, पैरों की नसों को भी आराम मिलता है।

  • योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
  • अब दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें।
  • हथेलियों को अपने बाईं तरफ रखें और सिर को दाएं हाथ पर रखें।
  • फिर बाएं घुटने को मोड़कर कमर तक ले आएं और बाईं कोहनी को घुटने के पास रखें।
  • इस दौरान दायां पैर बिल्कुल सीधा रहना चाहिए।
  • अब सामान्य सांस लेते रहें।
  • कुछ देर इसी अवस्था में रहने के बाद यही प्रक्रिया दूसरी तरफ भी दोहराएं।

3. मार्जरी आसन

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श्रोणि की मांसपेशियों को टोन करने में मदद मिली है। साथ ही रीढ़ और कंधों की मांसपेशियों में लचीलापन आता है।

  • अपने घुटनों को मोड़ते हुए आगे की ओर झुक जाएं।
  • इस अवस्था में आपके घुटने व तलियां फर्श पर रहेंगी। हाथ बिल्कुल सीधे होने चाहिए।
  • अब सांस लेते हुए सिर को ऊपर की ओर उठाएं और कमर को नीचे झुकाने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहें और फिर सांस छोड़ते हुए सिर को छाती की तरफ लाएं और कमर को ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान ठुड्डी को छाती से सटाने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहने के बाद सामान्य मुद्रा में वापस लौट आएं।
  • आप जितनी बार इसे कर सकती हैं, इसे दोहराएं।

4. ताड़ासन

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इस योग को करने से आपके शरीर में खींचाव आता है। इससे दर्द व थकान से राहत मिलती हैं।

  • आप दोनों पंजों को आपस में मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं।
  • शरीर को स्थिर रखे और शरीर का वजन दोनों पैरों पर एक सामान होना चाहिए।
  • उंगलियों को आपस में फंसाते हुए भुजाओं को सिर के ऊपर तक ले जाएं।
  • अब सांस लेते हुए भुजाओं, कंधों और छाती को ऊपर की ओर खींचें।
  • साथ ही एड़ियों को भी ऊपर उठा लें और शरीर के पूरे भार को पंजों पर संतुलित करें।
  • बिना संतुलन खोएं शरीर को नीचे से ऊपर तक तान लें।
  • सामान्य सांस लेते रहें और कुछ सेकंड के लिए इसी मुद्रा में बने रहें।
  • शुरुआत में संतुलन बनाए रखना मुश्किल होता है, लेकिन अभ्यास के साथ यह आसान हो जाएगा।
  • इस आसन से बाहर आने के लिए सारी प्रक्रिया को विपरीत क्रम में करें।

5. भद्रासन

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इस आसन से पाचन तंत्र को लाभ पहुंचता है और पेट की विभिन्न बीमारियों से राहत मिलती है। यह योगासन मानसिक तनाव से भी राहत दिलाने का काम करता है।

  • दोनों टांगों को आगे की ओर फैलाकर जमीन पर बैठ जाएं।
  • अब घुटनों को मोड़ते हुए दोनों तलवों को एक-दूसरे से जोड़ लें।
  • फिर हाथों की उंगलियां आपस में फंसाते हुए दोनों पंजों को पकड़ लें।
  • धीरे-धीरे पैर को मूलाधार की ओर ले जाए। जब तक मूलाधार के नीचे न पहुंच जाएं।
  • ध्यान रहे कि घुटने जमीन से स्पर्श होने चाहिए।
  • आपकी कमर और सिर बिल्कुल सीधा होना चाहिए।
  • आंखों को बंद करें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें।

6. कटि चक्रासन

इस आसन से कमर, पीठ और कूल्हों की मांसपेशियों को मजूबत करने में सहायता मिलती है। साथ ही शारीरिक और मानसिक तनाव से भी राहत मिलने में मदद मिलती है।

  • सबसे पहले सावधान अवस्था में खड़े हो जाएं।
  • इस तरह से खड़े हों कि दोनों पैरों के बीच डेढ़ से दो फुट की दूरी बनी रहे।
  • अब अपने दोनों हाथ कंधों की सीध में सामने की ओर फैलाएं।
  • इसके बाद लंबी गहरी सांस ले और फिर सांस छोड़ते हुए कमर से ऊपर के हिस्से को दाईं ओर मोड़ें।
  • इस दौरान दोनों हाथ भी पीछे की ओर ले जाएं।
  • आपका दायां हाथ सीधा रहेगा, जबकि बायां हाथ कोहनी से मुड़ जाएगा।
  • कुछ देर इसी अवस्था में रहकर सामान्य सांस लेते रहें।
  • फिर सांस लेते हुए सामान्य मुद्रा में आ जाएं और दूसरी तरफ भी इसी प्रक्रिया को दोहराएं।

तीसरी तिमाही

1. अर्ध तितली आसन

यह कूल्हों के जोड़ों को आरामदायक अवस्था में लाने के लिए अच्छा आसन है। इससे प्रसव की प्रक्रिया को आसान करने में मदद मिलती है।

  • सबसे पहले बैठ जाएं और अपने पैरों को फैला लें।
  • ध्यान रहे कि आपकी पीठ सीधी होनी चाहिए।
  • सामान्य रूप से सांस लेते रहें। अब बाई जांघ के ऊपर अपने दाएं पैर को रखें।
  • ध्यान रहे कि इसमें आपके पैर का तलवा ऊपर की ओर होना चाहिए।
  • इसके बाद अपने बाएं हाथ से दाएं पंजे को पकड़ लें।
  • फिर दाएं हाथ से दाएं घुटने को पकड़ कर ऊपर-नीचे करें।
  • बाद में यही प्रक्रिया दूसरे पैर से भी करें।

2. पूर्ण तितली आसन

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यह जांघ की मांसपेशियों को राहत देता है और पैरों की थकान को दूर करता है।

  • जमीन पर बैठकर टांगोंं को आगे की ओर फैला लें।
  • फिर घुटनों को मोड़ते हुए तलवों को एक-दूसरे से मिला लें।
  • अब हाथों की उंगलियां आपस में फंसाते हुए पैरों को पकड़कर शरीर के जितना हो सके पास लाने की कोशिश करें।
  • इसके बाद सामान्य श्वास लेते हुए दोनों घुटनों को ऊपर-नीचे करें, जैसे तितली के पंख हिलते हैं।

3. चक्कीचलनासन

श्रोणि और पेट की नसों और मांसपेशियों को टोन करने का कार्य करता है और उन्हें प्रसव के लिए तैयार करता है।

  • जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सामने की तरफ फैला लें।
  • दोनों पैरों के बीच करीब 2 फुट की दूरी रखें।
  • अब बाजुओं को कंधे के समानांतर सामने की ओर फैला लें और दोनों हाथों की उंगलियां आपस में जकड़ते हुए मुट्ठी बना लें।
  • फिर लंबी गहरी सांस लेते हुए कूल्हों से ऊपर के हिस्से को आगे ले जाएं और दाईं ओर जाते हुए काल्पनिक घेरा बनाएं।
  • फिर शरीर को पीछे ले जाते हुए बाईं ओर से होते हुए आगे की ओर झुकें।
  • इस तरह से आप कई चक्र कर सकते हैं। इसे आप पहले क्लाॅक वाइज और फिर एंटी क्लॉक वाइज करें।

4. उत्तानासन

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यह आसन पीठ, गर्भाशय, जांघों और टखनों की मांसपेशियों को मजबूत करता है।

  • पैरों को सामान्य स्थिति में रख कर सीधे खड़े हो जाएं।
  • हाथों को शरीर के साथ सटा कर रखे और लंबी सांस लेते रहें।
  • फिर सांस छोड़ते हुए शरीर को कमर से मोड़ते हुए आगे की ओर झुकें।
  • साथ ही अपने हाथों से जमीन को छूने का प्रयास करें।
  • साथ ही सिर को टांगों से स्पर्श करने की कोशिश करें।
  • कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहने के बाद सांस लेते हुए सीधे हो जाएं।

नोट : गर्भावस्था के दौरान इन सभी योगासनों को स्वयं से करने का प्रयास न करें, बल्कि किसी प्रशिक्षक की देखरख में ही करें। साथ ही पहले डॉक्टर से पूछ लें कि आप योगाभ्यास कर सकती हैं या नहींं।

इस लेख के आगे भाग में गर्भावस्था के दौरान योग करने के लाभ की जानकारी देंगे।

गर्भावस्था के दौरान योग के लाभ

गर्भावस्था के दौरान योग को सही प्रकार से किया जाए, तो उससे गर्भवती को अनेक लाभ हो सकते हैं, जो इस प्रकार से हैं (3):

  • प्रसव के दौरान होने वाला दर्द कम हो सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान होने वाले तनाव, चिड़चिड़ाहट व थकान से राहत मिल सकती है।
  • शिशु के स्वास्थ पर सकारात्मक असर पड़ता है।
  • पीठ दर्द से राहत मिल सकती है।
  • डिलीवरी के दौरान होने वाले जोखिम को कम किया जा सकता है।
  • कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है।
  • शरीर में लचीलापन आता है।
  • रात को अच्छी नींद आ सकती है।

लेख में आगे हम योग करते समय ध्यान रखने वाली बातों के बारे में बता रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान योग करते समय बरती जाने वाली सावधानियां

गर्भावस्था के दौरान योग करते समय जरूरी बातों पर ध्यान देना जरूरी है, जो आपके व होने शिशु के लिए लाभदायक है (1)

  • गर्भवती को डॉक्टर से पूछे बिना योग आसान नहीं करना चाहिए। साथ ही अगर किसी महिला को लो लाइंग प्लेसेंटा या फिर प्रीटर्म लेबर की समस्या हो, तो उन्हें किसी भी तरह के व्यायाम से बचना चाहिए।
  • योग करते समय शरीर का सही आसन में होना व उचित श्वास प्रक्रिया पर ध्यान देना जरूरी है।
  • पहली तिमाही के बाद ऐसा कोई आसन न करें, जिससे गर्भाशय में रक्त का प्रवाह कम हो जाए।
  • शरीर में जरूरत से ज्यादा खिंचाव लाने वाले आसन से दूर रहें।
  • अधिक संतुलन की आवश्यकता वाले आसन से बचें।
  • शरीर को अधिक गर्म करने वाले आसन से दूर रहे।
  • सभी योगाभ्यास योग्य योग निरीक्षक की देखरेख में ही करें।

इस लेख के आगे के भाग में हम गर्भावस्था में न करने वाले योगासन की जानकारी दे रहे हैं।

प्रेग्नेंसी में न करने योग्य योगासन | Pregnancy Me Konsa Yoga Nahi Karna Chahiye

कुछ योगासन ऐसे भी हैं, जिन्हें गर्भावस्था में नहीं किया जाना चाहिए। यहां हम ऐसे ही कुछ आसनों के बारे में बता रहे हैं।

पहली तिमाही

  • अधो मुख व्रक्सासन- इस आसन से हार्मोन असंतुलित हो सकते हैं और चक्कर आने का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही सिर के सहारे संतुलित होना मुश्किल हो जाता है, जिससे गिरने का खतरा बना रहता है।
  • नौकासना- इस योगासन में पैरों को ऊपर उठाना होता है, जिसका असर गर्भ पर होता है। इसे करने से गर्भाशय में रक्त का प्रवाह रुक सकता है।
  • अर्ध नमस्कार पार्श्वकोणासन- यह पेट में रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है। गर्भाशय में पर्याप्त रक्त प्रवाह को रोककर शिशु के विकास पर प्रभाव डाल सकता है।
  • अर्ध चंद्रासन- इस आसन में स्थिरता की आवश्यकता होती है। यह गर्भाशय में रक्त के प्रवाह को भी सीमित कर सकता है। इसके अलावा, शरीर के ठीक से संतुलित न होने पर गिरने का खतरा रहता है।

दूसरी तिमाही

  • शवासन- इस आसन में पीठ के बल लेटना होता है, जो दूसरी तिमाही के दौरान उचित नहीं होता है।
  • भुजंगासन – इस आसन में आपको पेट के बल लेटने की जरूरत होती है। यह आसन पेट पर दबाव डालता है, जो भ्रूण के लिए अच्छा नहीं है।
  • उर्ध्व धनुरासन (चक्रासन)- गर्भावस्था के दौरान रीढ़ की हड्डी के आसन हानिकारक होते हैं। इसलिए, चक्रासन से बचना चाहिए।
  • शलभासन- यह भी पेट के बल लेटकर किया जाने वाला आसन है। इसे करने से पेट की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ सकता है। इससे रक्त परिसंचरण प्रभावित हो सकता है। इस आसन से शिशु को दर्द भी हो सकता है।

तीसरी तिमाही

  • विक्रम योग- तीसरी तिमाही के दौरान, चयापचय में वृद्धि और हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होना सामान्य है। ऐसे में गर्म कमरे में किया जाने वाला विक्रम योग आपके और बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
  • उत्कटासन- इसमें ऊपरी शरीर का खिंचाव शामिल है। तीसरे तिमाही के दौरान स्नायुबंधन और मांसपेशियों को पहले से ही खींचाव आ जाता है। इसलिए, यह योगासन नहीं करना चाहिए।
  • पश्चिमोत्तानासन- इसमें कमर से ऊपर के हिस्से को आगे की ओर झुकाया जाता है। यह आसन पेट को संकुचित कर सकता है और पेट की मांसपेशियों के लिए समस्या का कारण बन सकता है।

गर्भवती महिला का शारीरिक और मानसिक रूप से का शांत रहना जरूरी है। इसमें योगासन ही मदद कर सकते हैं। आप इस लेख में बताए गए योगासन कर सकते हैं, लेकिन योग्य योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही। आप गर्भावस्था के दौरान योग करते समय अपने पॉश्चर और सांस लेने व छोड़ने पर जरूर ध्यान रखें। साथ ही ऊपर बताई गई सावधानियों का भी ध्यान रखें। इससे गर्भवती और आने वाले शिशु को लाभ हो सकता है।

संदर्भ (Reference) :