प्रेगनेंसी में क्या खाएं और क्या न खाएं - Pregnancy Me Kya Khana Or Nahi Khana Chahiye

Pregnancy Me Kya Khana Or Nahi Khana Chahiye

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हर गर्भवती महिला यही चाहती है कि जन्म के समय उसका बच्चा बिल्कुल स्वस्थ और तंदरुस्त हो। अपनी यह इच्छा पूरी करने के लिए गर्भवती महिलाएं अक्सर अपने आहार में कई नई चीज़ों को भी शामिल करती हैं। पर ज़्यादातर महिलाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें यह पता नहीं होता कि गर्भ धारण करने के बाद कौन-कौन-सी चीज़ें कितनी मात्रा में खानी चाहिए।

दरअसल, गर्भावस्था के दौरान खाई जाने वाली चीज़ों के साथ कई तरह की भ्रांतियां और मिथक भी जुड़े हुए हैं। इस वजह से गर्भवती महिलाओं तक अक्सर सही जानकारी नहीं पहुंच पाती है। वे यह नहीं जान पाती हैं कि गर्भावस्था के दौरान उन्हें कौन-सी चीज़ें खानी चाहिए और कौन-सी नहीं।

मॉमजंक्शन का यह लेख उन सभी महिलाओं के लिए है, जो गर्भावस्था के दौरान खान-पान की चीज़ों से जुड़ी बिल्कुल सही जानकारी पाना चाहती हैं। इतना ही नहीं, इस लेख के साथ हम एक डाइट चार्ट भी दे रहे हैं। इस डाइट चार्ट को फ़ॉलो करके गर्भवती महिला अपना और अपने बच्चे की सेहत का सही ढंग से ख्याल रख सकती है।

गर्भावस्था में क्या खाना चाहिए? | Pregnancy me kya khana chahiye?

अगर आप गर्भवती हैं, तो अपने खान-पान में नीचे बताई गई चीज़ों को ज़रूर शामिल करें :

1. डेयरी उत्पाद

चूंकि आप गर्भवती हैं, तो आपको अपने और अपने शिशु के विकास के लिए ज़्यादा प्रोटीन और कैल्शियम की ज़रूरत होगी। 19 से 50 साल तक की उम्र वाली गर्भवती महिला के शरीर को रोज़ाना 1,000mg कैल्शियम की ज़रूरत होती है। (1) इसलिए आप अपने खान-पान में डेयरी उत्पादों को ज़रूर शामिल करें। दही, छांछ, दूध, आदि जैसे डेयरी उत्पाद गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद होते हैं। ध्यान रहे कि गर्भवती महिला को पाश्चुरीकृत डेयरी उत्पादों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। (2)

2. ब्रोकली और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां

गर्भवती महिलाओं को अपने खान-पान में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां ज़रूर शामिल करनी चाहिए। इसलिए, आप पालक, पत्तागोभी, ब्रोकली (एक प्रकार की गोभी), आदि जैसी सब्ज़ियां ज़रूर खाएं। पालक में मौजूद आयरन गर्भावस्था के दौरान खून की कमी को दूर करता है। (3)

3. सूखे मेवे

गर्भावस्था में सूखे मेवों को भी अपने खान-पान में शामिल करें। मेवों में कई तरह के विटामिन, कैलोरी, फ़ाइबर, ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड, आदि पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए काफ़ी अच्छे होते हैं। अगर आपको एलर्जी नहीं है, तो अपने खान-पान में काजू, बादाम, अखरोट, आदि को शामिल करें। अखरोट में भरपूर मात्रा में ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड होता है। इसके अलावा, बादाम और काजू भी गर्भावस्था में फ़ायदा पहुंचाते हैं। (4)

4. शकरकंद

गर्भावस्था में शकरकंद (स्वीट पोटैटो) खाना भी काफ़ी फ़ायदेमंद होता है। इसमें विटामिन-ए होता है, जो शिशु की देखने की शक्ति को विकसित करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा, इसमें विटामिन-सी, फ़ोलेट और फ़ाइबर भी मौजूद होते हैं। (5) (4)

5. साबूत अनाज

गर्भावस्था के दौरान साबूत अनाजों को अपने आहार में ज़रूर शामिल करें। खासतौर पर गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान साबूत अनाजों का सेवन फ़ायदेमंद होता है। इससे आपको भरपूर कैलोरी मिलती है, जो गर्भ में शिशु के विकास में मदद करती है। आप साबूत अनाज के तौर पर ओट्स, किनोआ, भूरे चावल, आदि को अपने आहार में शामिल कर सकती हैं। इन अनाजों में प्रोटीन की प्रचूर मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा, इनमें फ़ाइबर, विटामिन-बी और मैग्नीशियम भी मौजूद होता है, जो गर्भावस्था में फ़ायदा पहुंचाते हैं। (6)

6. एवोकाडो (रुचिरा)

एवोकैडो एक ऐसा फल है, जिसे हर गर्भवती महिला को खाने की सलाह दी जाती है। इसमें भरपूर मात्रा में फ़ोलेट होता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क और उसकी रीढ़ की हड्डी के विकास के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है। इसके अलावा, एवोकैडो में विटामिन-के, पोटैशियम, कॉपर, मोनोअनसैचुरेटेड वसा, विटामिन-ई, आदि भी मौजूद होता है। इसलिए, गर्भवती महिला को रोज़ाना एक एवोकैडो खाने की सलाह दी जाती है। (7)

7. कॉड लीवर तेल

गर्भावस्था में कॉड लीवर तेल का सेवन भी फ़ायदेमंद होता है। यह तेल कॉड मछली के लीवर से बनाया जाता है। इसमें प्रचूर मात्रा में ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड, विटामिन-डी और विटामिन-ए होता है, जिन्हें शिशु की आंखों और दिमाग के विकास के लिए ज़रूरी माना जाता है। इसके अलावा, कॉड लीवर तेल गर्भ में पल रहे शिशु को टाइप-1 मधुमेह के खतरे से भी बचाता है। एक शोध में यह साबित हुआ है कि जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कॉड लीवर तेल का सेवन करती हैं, उनके शिशु को मधुमेह होने का खतरा कम होता है। (8) ध्यान रखें कि गर्भावस्था में उतनी ही मात्रा में कॉड लीवर तेल का सेवन करें, जिससे आपके शरीर को 300 माइक्रोग्राम विटामिन-ए और 100 माइक्रोग्राम विटामिन-डी की आपूर्ति हो जाए। इससे ज़्यादा मात्रा में कॉड लीवर तेल का सेवन करने से भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है। (9)

8. अंडा

अंडा पौष्टिक तत्वों का खज़ाना होता है। रोज़ अंडा खाने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को भी अपने आहार में अंडे को शामिल करना चाहिए। अंडे में प्रोटीन, कोलीन, बायोटीन, कोलेस्ट्रोल, विटामिन-डी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके अलावा एक बड़े अंडे में 77 कैलोरी ऊर्जा होती है। इसलिए, अंडे को गर्भवती महिलाओं के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद माना जाता है। (10)

9. बिना वसा का मांस

अगर गर्भवती महिला मांसाहारी है, तो उन्हें अपने खान-पान में मीट को ज़रूर शामिल करना चाहिए। मांस में भरपूर मात्रा में लौह तत्व (आयरन), ज़िंक और विटामिन-बी 12 होता है। अक्सर गर्भवती महिलाओं के शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। इसकी वजह से उनके खून में हीमोग्लोबिन का स्तर गिरने लगता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए मांस का सेवन काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं को बिना वसा वाले मांस को ही अपने खान-पान में शामिल करना चाहिए। (11)

10. ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिएं

हर व्यक्ति को दिन में कम से कम 8 से 10 ग्लास पानी पीना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को तो इस नियम का ज़्यादा कड़ाई से पालन करना चाहिए। उन्हें पानी की कमी से सिर दर्द, थकान, कब्ज़, आदि जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को हमेशा खुद को हाइड्रेट रखने की सलाह दी जाती है। (12)

11. फल और फलों का जूस

गर्भावस्था में महिला को तरह-तरह के मौसमी फल खाने चाहिए। हो सके तो उन्हें संतरा, तरबूज़, नाशपाती आदि जैसे फलों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। इसके अलावा, वे इन फलों का रस भी पी सकती हैं। दरअसल, गर्भवती महिला को अलग-अलग चार रंगों के फल खाने की सलाह दी जाती है। (13)

12. बेर की प्रजाति के फल

गर्भावस्था में बेर की प्रजाति वाले फलों का सेवन भी फ़ायदेमंद माना जाता है। इनमें भरपूर मात्रा में पानी, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन-सी होता है, जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए ज़रूरी होता है। इसलिए, गर्भवती महिला को अपने खान-पान में स्ट्रॉबेरी, रास्पबेरी, ब्लैकबेरी आदि जैसे फलों को शामिल करना चाहिए।

13. फलियां

गर्भावस्था में फलियों का सेवन ज़रूर करना चाहिए। इनमें फ़ोलेट, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फ़ाइबर आदि मौजूद होते हैं, जिन्हें गर्भावस्था के लिए बेहद फ़ायदेमंद माना जाता है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को मटर, चना, सोयाबीन आदि खाने की सलाह दी जाती है। (14)

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गर्भावस्था में क्या नहीं खाना चाहिए? | Pregnancy me kya nahi khana chahiye?

ऐसी बहुत-सी चीज़ें हैं जिनका सेवन गर्भवती महिलाओं को नहीं करना चाहिए। नीचे हम आपको एक-एक करके ऐसी चीज़ों के नाम बताने जा रहे हैं, जिनसे गर्भवती महिलाओं को परहेज करना चाहिए :

1. कभी भी कच्चा अंडा न खाएं

गर्भवती महिलाओं को अच्छी तरह से पका हुआ अंडा ही खाना चाहिए। अधपके अंडे के सेवन से सालमोनेला संक्रमण का खतरा हो सकता है। इस संक्रमण से गर्भवती महिला को उल्टी और दस्त की समस्या हो सकती है। (15)

2. शराब से बिल्कुल दूर रहें

नशीली चीज़ों का सेवन हर किसी के लिए हानिकारक होता है। गर्भवती महिलाओं को तो केवल शराब ही नहीं, बल्कि हर तरह के नशे से बिल्कुल दूर रहना चाहिए। दरअसल, शराब के सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। शराब से भ्रूण के दिमागी और शारीरिक विकास में बाधा आती है। इतना ही नहीं, शराब पीने से गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ जाता है। (16)

3. कैफ़ीन का सेवन न करें

गर्भावस्था में डॉक्टर बहुत कम मात्रा में कैफ़ीन लेने की सलाह देते हैं। चाय, कॉफ़ी और चॉकलेट जैसी चीजों में कैफ़ीन पाया जाता है। ज़्यादा मात्रा में कैफ़ीन लेने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, कैफ़ीन का ज़्यादा सेवन करने से जन्म के समय शिशु का वज़न कम रह सकता है। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान रोज़ाना 200 मिलिग्राम तक कैफ़ीन के सेवन को सुरक्षित माना जाता है। (17)

4. उच्च स्तर के पारे वाली मछली न खाएं

जैसा कि हम पहले बता चुके हैं, गर्भावस्था में मछली खाना काफ़ी फ़ायदेमंद होता है। लेकिन, गर्भवती महिलाओं को ऐसी मछलियों को खाने से बचना चाहिए, जिनके शरीर में पारे का स्तर अधिक होता है। जैसे कि स्पेनिश मेकरल, मार्लिन या शार्क, किंग मकरल और टिलेफिश जैसी मछलियों में पारे का स्तर ज़्यादा होता है। ऐसी मछलियों को खाने से भ्रूण के विकास में बाधा आ सकती है। (18)

5. गर्भावस्था में कच्चा पपीता न खाएं

गर्भावस्था में कच्चा पपीता खाना असुरक्षित हो सकता है। कच्चे पपीते में एक ऐसा केमिकल पाया गया है, जो भ्रूण को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए गर्भावस्था में कच्चा पपीता खाने से बचें। (19)

6. कच्ची अंकुरित चीज़ें न खाएं

यूं तो अंकुरित नाश्ता सेहत के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद होता है, लेकिन गर्भावस्था में कच्ची अंकुरित चीज़ें खाने से बचना चाहिए। दरअसल, कच्ची अंकुरित दालों में साल्मोनेला, लिस्टेरिया और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जिससे फ़ूड प्वॉयज़निंग की समस्या हो सकती है। इसके कारण गर्भवती महिला को उल्टी या दस्त की शिकायत हो सकती है और मां के साथ-साथ शिशु की सेहत को भी नुकसान पहुंच सकता है। (20)

7. क्रीम दूध से बना पनीर न खाएं

गर्भावस्था में क्रीम दूध से बना पनीर नहीं खाना चाहिए। चूंकि इस तरह के पनीर को बनाने में पाश्चुरीकृत दूध का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, इसलिए इसमें लिस्टेरिया नाम का बैक्टीरिया मौजूद होता है। इस बैक्टीरिया की वजह से गर्भपात और समय से पहले प्रसव का खतरा बढ़ सकता है। (21)

8. कच्चे मांस का सेवन ना करें

अगर आप गर्भवती हैं, तो कच्चा मांस बिल्कुल न खाएं। इस बात का ध्यान रखें कि आप अगर मांस खा रही हैं, तो वो पूरी तरह से पका हुआ हो। कच्चा मांस आपको टॉक्सोपलॉस्मोसिस से संक्रमित कर सकता है। इससे गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है। (22)

9. बिना धुली हुई सब्ज़ियां और फल न खाएं

किसी भी फल और सब्ज़ी को खाने से पहले उसे अच्छी तरह धोना न भूलें। बिना धुली हुई सब्ज़ी और फल में टॉक्सोप्लाज़्मा नाम का बैक्टीरिया मौजूद हो सकता है, जिससे शिशु के विकास में बाधा आती है। (23)

10. घर पर बनी आइसक्रीम न खाएं

गर्भावस्था में घर पर बनी आइसक्रीम खाने से भी बचना चाहिए। आमतौर पर इसे बनाने के लिए कच्चे अंडों का इस्तेमाल होता है। हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि कच्चे अंडे से गर्भवती महिलाओं को सालमोनेला संक्रमण हो सकता है। (24)

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गर्भावस्था आहार चार्ट

गर्भावस्था के दौरान एक आम महिला के लिए यह जानना काफ़ी अहमियत रखता है कि उसे कौन-सी चीज़ें किस मात्रा में खानी चाहिए। उसकी इसी ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए हम नीचे एक ऐसी डाइट चार्ट दे रहे हैं, जिसे खासतौर पर गर्भधारण कर चुकी महिलाओं के लिए ही तैयार किया गया है। आपको बता दें कि इस यूनीक डाइट चार्ट को राष्ट्रीय पोषण संस्थान, हैदराबाद ने बनाया है। (25)

सुबह सात बजे :

क्या खाएंकैलोरीप्रोटीन (ग्राम)फ़ायदे
एक ग्लास दूध1504सुबह दूध पीने से एसिडीटी की समस्या नहीं होती है।
गेहूं के दो बिस्कुट या रस्क502गर्भावस्था में होने वाली मितली की समस्या से राहत दिलाता है।
भीगे हुए छह बादाम504शरीर को ताकत मिलती है।

सुबह नौ बजे का नाश्ता :

गाजर के दो भरवां पराठे2006गाजर में मौजूद फ़ाइबर पाचन शक्ति को बेहतर बनाए रखता है।
एक कप दही754शरीर को प्रोटीन के साथ कैल्शियम, और विटामिन-डी भी मिलता है।
या फिर, दो अंडों का ऑमलेट16010शरीर को भरपूर प्रोटीन मिलता है।
या फिर, दो भूरी ब्रेड भून कर खाएं1003यह फ़ाइबर का अच्छा स्रोत है और आपकी पाचन शक्ति को बढ़ाता है।
या फिर, उपमा खाएं2503यह शरीर को कैल्शियम और फ़ाइबर की आपूर्ति करता है।

इसके अलावा, पोहा, मूंग दाल या पनीर का चीला भी नाश्ते में लिया जा सकता है।

सुबह 11 बजेसेब, संतरा या अनार में से कोई एक फल खाएं। इससे शरीर में पानी का स्तर सही बना रहता है।
सुबह 12 बजेएक ग्लास नारियल पानी या नींबू पानी पिएं। यह आपको कब्ज़ और गैस जैसी समस्याओं से बचाता है।
क्या खाएंकैलोरीप्रोटीन (ग्राम)फ़ायदे
गेहूं के आटे की दो रोटी2006इससे शरीर को ऊर्जा और फ़ाइबर मिलता है।
एक कटोरी दाल या मछली करी या पालक पनीर की सब्ज़ी1506इससे शरीर को प्रोटीन, कई तरह के विटामिन और पोषक तत्व मिलते हैं।
खीरे और टमाटर की सलादइससे शरीर को ज़रूरी खनिज मिलते हैं।
नींबू के साथ चावल1002नींबू में विटामिन-सी होता है। इससे आपके शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

इसके अलावा, दोपहर के भोजन में सोयाबीन की सब्ज़ी और कोफ़्ता करी जैसी चीज़ें भी शामिल की जा सकती हैं।

2:30 बजेएक ग्लास छांछ पिएं, इससे हाजमा ठीक रहता है और शरीर को कैल्शियम मिलता है।
4:30 बजेचाहें तो एक कप चाय पिएं। हो सके तो इस समय ’ग्रीन टी’ पिएं।
6:00 बजेएक मुठ्ठी भूना हुआ चना या सूखे मेवे खाएं। यह आयरन, प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है।
7:30 बजेइस समय एक कटोरी सब्ज़ियों का सूप या चिकन सूप पिया जा सकता है।

रात का खाना (8:00 बजे)

क्या खाएंकैलोरीप्रोटीन (ग्राम)फ़ायदे
ज्वार या बाजरे की दो रोटी2006रात को ऐसा अनाज आसानी से हजम हो जाता है।
मेथी की सब्ज़ी और मूंग की दाल1504इससे शरीर को आयरन और प्रोटीन मिलता है।
चुकंदर और गाजर की खीर1506इससे खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है और शरीर को विटामिन-ए के साथ अन्य पौष्टिक तत्व भी मिलते हैं।

रात में खाना खाने के करीब दो घंटे बाद, एक ग्लास गर्म दूध, दो खजूर और दो बादाम खाएं। इससे अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है।

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गर्भावस्था में खाने-पानी की चीज़ों से जुड़े मिथक :

हमारे समाज में गर्भावस्था में खाने-पीने की चीज़ों को लेकर बहुत सारे मिथक प्रचलित हैं। इनमें से कई मिथकों पर तो पढ़े-लिखे लोग भी भरोसा करते हैं। नीचे हम ऐसे ही कुछ मिथकों और उनसे जुड़े तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं :

मिथक : गर्भवती महिला को दो लोगों के लिए खाना चाहिए।

तथ्य : यह बात पूरी तरह से गलत है। ज़बर्दस्ती ज़्यादा भोजन करने से वज़न बढ़ता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को संतुलित मात्रा में केवल पौष्टिक भोजन ही करना चाहिए।

मिथक : हल्के रंग का भोजन करने से गोरा बच्चा पैदा होता है।

तथ्य : अक्सर सुना जाता है कि हल्के रंग की कुछ खास चीज़ें, जैसे टोफ़ू, सोया उत्पाद, आदि ख़ाने से गोरा बच्चा पैदा होता है। लेकिन, इस बात में कोई सच्चाई नहीं है। बच्चे का रंग उसके जीन पर निर्भर करता है, ना कि किसी तरह के भोजन पर।

मिथक : पपीता और अनानास खाने से गर्भपात हो सकता है।

तथ्य : ऐसा नहीं है। पपीता अगर ठीक से पका हुआ हो, तो उसे खाना सुरक्षित होता है। गर्भपात ज़्यादातर किसी स्वास्थ संबंधी परेशानियों के चलते होता है। रही बात अनानास की, तो उसे भी गर्भावस्था में खाया जा सकता है।

मिथक : गर्भावस्था में जड़ी-बूटियां और टॉनिक लेने से बुद्धिमान बच्चा पैदा होता है।

तथ्य : बाज़ार में गर्भवती महिलाओं के लिए कई तरह के टॉनिक उपलब्ध हैं। लेकिन, इनके सेवन से बुद्धिमान बच्चा पैदा होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

मिथक : फ़ुल क्रीम दूध ज़्यादा पौष्टिक होता है।

तथ्य : कम फैट वाले दूध में भी उतने ही पौष्टिक तत्व होते हैं जितने फ़ुल क्रीम दूध में। (26)

मिथक : गर्भावस्था में केसर या संतरा खाने से गोरा बच्चा जन्म लेता है।

तथ्य : यह बात पूरी तरह से मिथक है। सच्चाई ये है कि शिशु का रंग उसके जीन पर निर्भर करता है। कुछ विशेष चीज़ें खाने से शिशु के रंग पर कोई असर नहीं पड़ता है।

मिथक : गर्भावस्था में घी या मक्खन खाने से प्रसव में आसानी होती है।

तथ्य : यह बात भी पूरी तरह से गलत है। सच्चाई ये है कि सामान्य प्रसव कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे कि शिशु के आकार। गर्भ में शिशु की अवस्था का प्रसव की जटिलता या सरलता से सीधा संबंध होता है।

मिथक : मसालेदार भोजन करने से प्रसव शुरू हो सकता है।

तथ्य : इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हां, मसालेदार भोजन करने से गर्भवती महिलाओं को पेट में जलन, एसिडिटी या गैस की शिकायत हो सकती है। इसलिए, गर्भवती औरतों को मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए।

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गर्भावस्था के दौरान अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अब हम गर्भवती महिलाओं के मन में अक्सर उठने वाले कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं। भले ही ये सवाल सुनने में बेहद सामान्य लगें, लेकिन हर गर्भवती महिला को इनके जवाब पता होने चाहिए :

क्या गर्भावस्था के दौरान मुझे अनुपूरक लेने चाहिए?

हां, खासतौर पर गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में आपको डॉक्टर की सलाह लेकर फ़ोलिक एसिड के अनुपूरक लेने चाहिए। इसके अलावा, डॉक्टर आपकी सेहत को देखते हुए आयरन, विटामिन, आदि के अनुपूरक लेने का सुझाव भी दे सकते हैं। (27)

क्या मुझे ज़्यादा भोजन खाना चाहिए, क्योंकि मैं गर्भवती हूं?

नहीं, ऐसा बिल्कुल भी ज़रूरी नहीं है। बस इस बात का ध्यान रखें कि आप जो भी खाएं, उसमें सभी ज़रूरी पौष्टिक तत्व प्रचूर मात्रा में मौजूद हों। आपको और आपके शिशु को किसी भी पोषक तत्व की कमी नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, गर्भावस्था की पहली तिमाही में आपको प्रतिदिन 1800 कैलोरी, दूसरी तिमाही में प्रतिदिन 2200 कैलोरी और तीसरी तिमाही में प्रतिदिन 2400 कैलोरी की ज़रूरत होती है। इसलिए, आपको अपने भोजन की मात्रा ऊर्जा की ज़रूरत के हिसाब से भी तय करनी चाहिए। (28)

गर्भावस्था के दौरान मुझे कितनी बार भोजन करना चाहिए?

आपको दिन में पांच से छह बार भोजन करना चाहिए। आपको अपने खान-पान के रुटीन में तीन बार भोजन करने और दो बार हल्के स्नैक्स लेने की आदत को शामिल करना चाहिए। कोशिश करें कि हर दो घंटे में थोड़ा-थोड़ा कुछ ना कुछ खाती रहें। ऐसा करने से आपका पाचन भी सही रहेगा और गैस या एसिडिटी की शिकायत भी नहीं होगी। (29)

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अगर आपके मन में गर्भावस्था के दौरान खान-पान की चीज़ों से जुड़ा कोई सवाल अभी भी मौजूद है, तो नीचे कमेंट बॉक्स में अपना सवाल ज़रूर लिखें। इसके अलावा, यह लेख उन सभी महिलाओं के साथ शेयर करना न भूलें, जो जल्द ही मां बनने वाली हैं।

संदर्भ (References) :

1. Pregnancy and diet by Better health channel
2. Milk and dairy products by NI direct government
3. Healthy Eating During Pregnancy and Breastfeeding by Family health service
4. Top 10 foods for a healthy pregnancy by center for health human rights and development
5. Health and nutrition knowledge, attitudes and practices of pregnant women attending and not-attending ANC clinics in Western Kenya: a cross-sectional analysis by US National Library of Medicine National Institutes of Health
6. Health Tips for Pregnant Women by national institute for diabetes and digestive and kidney diseases
7. The Role of Avocados in Maternal Diets during the Periconceptional Period, Pregnancy, and Lactation by US National Library of Medicine National Institutes of Health
8. Use of cod liver oil during pregnancy associated with lower risk of Type I diabetes in the offspring By US National Library of Medicine National Institutes of Health
9. Cod Liver Oil by Medline plus
10. Nutrients In Eggs By Egg Nutrition center
11. Lean Meat and poultry, fish, eggs, tofu, nuts and seeds and legumes/beans By Eat for Health logo
12. Nutrition Column An Update on Water Needs during Pregnancy and Beyond By US National Library of Medicine National Institutes of Health
13. Proper Nutrition during Pregnancy By Ministry of Health
14. Pregnancy and healthy eating by food standard australia new zealand
15. Food Safety for Pregnant Women by Food safty
16. Proper Nutrition during Pregnancy by Ministry of Health
17. Caffeine and Pregnancy by South Eastern Sydney Local Health District
18. Mercury in fish by Better health channel
19. Know about Papaya by Medline Plus
20. Sprouts: What You Should Know By Food Safety
21. Pregnancy and your diet by Northern Territory Government
22. Food Safety for Moms-to-Be: Safe Eats – Meat, Poultry & Seafood by U.S. food and drug administration
23. Food Safety for Moms-to-Be: Safe Eats – Fruits, Veggies & Juices by U.S. food and drug administration
24. Checklist of Foods to Avoid During Pregnancy By Food Safety
25. Dietary guideline for Indians By NIN Website
26. DEBUNKING 5 COMMON PREGNANCY FOOD MYTHS By Baby Bonus
27. Vitamins, supplements and nutrition in pregnancy By National Health Service
28. Eating right during pregnancy By Medline Plus
29. Frequency of eating during pregnancy and its effect on preterm delivery By US National Library of Medicine National Institutes of Health

 

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