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प्रेगनेंसी में निमोनिया होने के कारण, लक्षण व इलाज | Pregnancy Me Pneumonia  Ka Ilaj

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निमोनिया से लगभग सभी परिचित होंगे। साथ ही यह भी जानते होंगे कि यह साल भर में कभी भी हो सकता है, लेकिन सर्दियों के दिनों में इस समस्या के होने की आशंका ज्यादा रहती है (1)। वहीं, गर्भावस्था में निमोनिया बड़ी मुसीबत बन सकता है। इसलिए, समय रहते इसकी रोकथाम और इलाज की ओर ध्यान देना जरूरी है (2)। यही वजह है कि मॉमजंक्शन के इस लेख में हम गर्भावस्था में निमोनिया से जुड़े कारण, लक्षण और इलाज के बारे में बता रहे हैं। इन सभी पहलुओं को समझते हुए समय रहते इसकी रोकथाम की जा सकती है और एक स्वस्थ गर्भावस्था को बरकरार रखा जा सकता है।

आइए, पहले निमोनिया क्या है, जरा इस बात को समझ लेते हैं।

निमोनिया क्या है?

निमोनिया एक प्रकार का इंफेक्शन है, जो एक या दोनों फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। इस समस्या में फेफड़ों में वायुमार्ग के माध्यम से पस या तरल भर जाता है। यह इंफेक्शन हल्का या जटिल दोनों तरह का हो सकता है, जो व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करता है (3)

आगे अब हम प्रेगनेंसी में निमोनिया होने के कारणों को समझने का प्रयास करेंगे।

प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया के कारण

गर्भावस्था में निमोनिया होने के मुख्य कारण कुछ इस प्रकार हैं (4):

  • कोरोना वायरस (वायरस इंफेक्शन)
  • मायकोप्लाज्मा (एक प्रकार का बैक्टीरिया)
  • क्लैमाइडिया (अप्राकृतिक संबंध की स्थिति में होने वाला बैक्टीरियल इंफेक्शन)
  • हेमोफिलस इंफ्लुएंजा (एक प्रकार का बैक्टीरियल इंफेक्शन)
  • ग्रुप-ए स्ट्रेप्टोकोकस (गले में और त्वचा पर रहने वाला एक बैक्टीरिया)
  • मलेरिया (परजीवी द्वारा होने वाला इंफेक्शन)
  • ट्यूबरक्लोसिस (बैक्टीरिया के कारण होने वाला फेफड़ों से जुड़ा विकार)
  • इंफ्लुएंजा (नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करने वाला वायरल इंफेक्शन)
  • रेस्पिरेटरी सिनसाइटिकल वायरस (श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाला वायरस)
  • वैरिसेला जोस्टर वायरस (चिकन पॉक्स का कारण बनने वाला वायरस)

अगले भाग में हम प्रेगनेंसी में दिखने वाले निमोनिया के लक्षण बताएंगे।

प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया के लक्षण

गर्भावस्था के दौरान दिखने वाले निमोनिया के लक्षण सामान्य व्यक्ति में दिखने वाले लक्षण की तरह ही हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं (6):

  • अधिक खांसी
  • अधिक बलगम का आना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • सीने में दर्द का अनुभव
  • सांस लेने में एक अलग आवाज का सुनाई देना या घरघराहट
  • बुखार आना

आइए, अब जानते हैं कि प्रेगनेंसी में निमोनिया की पुष्टि कैसे की जाती है।

प्रेगनेंसी में निमोनिया की पहचान | Pregnancy Mein Nimoniya Ki Pehchan

प्रेगनेंसी में निमोनिया की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर उन प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करते हैं, जिसका प्रयोग सामान्य व्यक्ति पर किया जाता है (3)।

  • डॉक्टर सबसे पहले गर्भवती से लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछते हैं।
  • उसके बाद डॉक्टर स्टेथोस्कोप (धड़कन सुनने वाला यंत्र) की मदद से सीने की आवाज को सुनने का प्रयास कर सकते हैं।

इन दोनों प्रक्रियाओं के बाद संदेह की स्थिति में डॉक्टर निमोनिया की पुष्टि के लिए कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं, जो इस प्रकार हैं :

  • छाती का एक्स-रे : फेफड़े में इंफेक्शन के प्रभाव को देखने के लिए किया जा सकता है (3)। गर्भावस्था में एक्स-रे को सीमित स्तर तक सुरक्षित माना जा सकता है (6)।
  • चेस्ट अल्ट्रा साउंड : चेस्ट अल्ट्रासाउंड के माध्यम से भी डॉक्टर को फेफड़ों पर पड़े इंफेक्शन के प्रभाव को देखने में मदद मिल सकती है (7)
  • कम्प्लीट ब्लड काउंट : यह ब्लड टेस्ट इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता को देखने के लिए किया जाता है (3)।
  • ब्लड कल्चर : यह ब्लड टेस्ट इस बात का पता लगाने के लिए किया जाता है कि कहीं इंफेक्शन खून तक तो नहीं फैल गया है (3)।

आगे बढ़ते हुए अब हम गर्भावस्था में निमोनिया फैलने की प्रक्रिया को समझ लेते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान निमोनिया कैसे फैलता है?

गर्भवती हो या फिर सामान्य व्यक्ति निमोनिया फैलने का तरीका दोनों के लिए एक जैसा ही है। विशेषज्ञों के मुताबिक निमोनिया संक्रमित व्यक्ति के ड्रॉपलेट्स (मुंह या नाक से निकलने वाले तरल की बूंदों) के संपर्क में आने से फैलता है। जब ये संक्रमित बूंदें किसी तरह से एक स्वस्थ व्यक्ति के श्वसन मार्ग में पहुंच जाती हैं, तो स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं (8)

गर्भावस्था में होने वाले निमोनिया के प्रकार जानने के लिए पढ़ते रहें यह आर्टिकल।

गर्भावस्था के दौरान कॉमन टाइप के होने वाले निमोनिया

प्रेगनेंसी में होने वाले निमोनिया के प्रकार कुछ इस प्रकार हैं (9):

  1. बैक्टीरियल निमोनिया: यह प्रकार मुख्य रूप से स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा, क्लैमायडिया निमोनिया, माइकोप्लाज्मा निमोनिया और लेगियोनेला नेमोफिला. एस निमोनिया जैसे बैक्टीरिया के कारण फैलता है।
  1. वायरल निमोनिया: इन्फ्लुएंजा और वैरिसोला जोस्टर के कारण यह निमोनिया हो सकता है। वहीं, हाल ही में सामने आया है कि कोरोना वायरस भी वायरल निमोनिया के कारणों में शामिल है।
  1. फंगल निमोनिया: हिस्टोप्लास्मोसिस (histoplasmosis) और ब्लास्टोमायकोसिस (blastomycosis) दो फेफड़ों से संबंधित फंगल इंफेक्शन है, जिनके कारण फंगल निमोनिया की समस्या होती है।

गर्भावस्था में निमोनिया के प्रकार जानने के बाद हम इससे जुड़ी जटिलताओं को समझेंगे।

गर्भावस्था के दौरान निमोनिया से होने वाली जटिलताएं

गर्भावस्था में निमोनिया होने के कारण निम्न जटिलताएं देखने को मिल सकती हैं।

गर्भवती के लिए:

निमोनिया के कारण गर्भवती में दिखने वाली जटिलताएं इस प्रकार हो सकती हैं (9):

  • मेनिनजाइटिस (रीढ़ और दिमाग की परत से संबंधित सूजन)
  • गठिया (जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या)
  • एंडोकार्डिटिस (हृदय की भीतरी दीवार की सूजन)
  • एम्पाइमा (सीने और फेफड़े के मध्य पस का जमा होना)
  • पेरिकार्डिटिस (हृदय की बाहरी परत में सूजन)
  • सेप्सिस (एक जानलेवा इंफेक्शन, जिसमें संक्रमण खून के सहारे पूरे शरीर में फैल जाता है)
  • हार्ट फेल
  • किडनी फेल
  • एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (फेफड़ों में अधिक तरल जमा होने के कारण सांस न ले पाने की स्थिति)

भ्रूण के लिए:

गर्भावस्था में निमोनिया के कारण भ्रूण में निम्न जटिलताएं देखी जा सकती हैं (10):

गर्भावस्था और निमोनिया के संबंध में अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहें यह आर्टिकल।

आप गर्भावस्था के दौरान निमोनिया से कैसे बच सकती हैं?

नीचे बताए गए तरीकों को अपना कर निमोनिया से बचने में मदद मिल सकती है (11)

  • हाथों को अच्छे से साफ करें और उनकी स्वच्छता का लगातार ध्यान रखें।
  • उन सतहों को अच्छे से साफ रखें, जिन्हें अधिकतर लोग छूते हैं।
  • खांसते और छींकते वक्त टिशू या रुमाल का इस्तेमाल करें।
  • धूम्रपान से दूर रहें।
  • अस्थमा, डायबिटीज और हृदय रोग होने की स्थिति में सेहत की देखभाल पर विशेष ध्यान दें और इन बीमारियों को नियंत्रित रखने का प्रयास करें।
  • किसी भी बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने पर हाथों को अच्छी तरह से धोएं और संक्रमित व्यक्ति से दूर रहने का प्रयास करें (12)

लेख के इस भाग में आप जानेंगे कि निमोनिया को किन घरेलू नुस्खों से ठीक किया जा सकता है।

गर्भावस्था के दौरान निमोनिया का घरेलू उपचार

गर्भावस्था में निमोनिया का उपचार करने के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली घरेलू सामग्रियां इस प्रकार हैं :

  1. शहद : निमोनिया से राहत पाने में शहद का उपयोग काफी लाभकारी माना जा सकता है। एशियन पेसेफिक जर्नल ऑफ ट्रोपिकल बायोमेडिसिन के एक शोध से यह बात सिद्ध होती है। शोध में जिक्र मिलता है कि शहद में एंटीबैक्टीरियल प्रभाव पाया जाता है। शहद का यह प्रभाव निमोनिया का कारण माने जाने वाले एस-माल्टोफिलिया (S. maltophilia) के खिलाफ काम कर सकता है (13)। वहीं, गर्भावस्था में शहद को सुरक्षित बताया जाता है (14)। इस आधार पर गर्भावस्था में निमोनिया बचाव के लिए शहद को उपयोगी माना जा सकता है। इसके लिए गुनगुने पानी में शहद को डालकर पीने की सलाह दी जाती है।
  1. हल्दी : गर्भावस्था में निमोनिया से राहत पाने के लिए हल्दी को भी उपयोग में लाया जा सकता है। इस बात की पुष्टि दो अलग-अलग शोध से होती है। एनसीबीआई (National Center for Biotechnology Information) के एक शोध में जिक्र मिलता है कि हल्दी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करती है। साथ ही निमोनिया का कारण माने जाने वाले इन्फ्लुएंजा वायरस के खिलाफ लड़ने में मदद कर सकती है (15)। वहीं, दूसरे शोध में माना गया है कि गर्भावस्था में हल्दी को सीमित मात्रा में सुरक्षित हो सकता है (16)। इस आधार पर हल्दी को गर्भावस्था में निमोनिया से राहत पाने के लिए उपयोगी माना जा सकता है। निमोनिया से बचाव के लिए गर्भावस्था में दूध में हल्दी मिलाकर लेने की सलाह दी जाती है।
  1. लहसुन : गर्भावस्था में बढ़ते हुए वजन को नियंत्रित करने के लिए लहसुन को उपयोगी माना जा सकता है। इस बात को चूहों पर आधारित लहसुन से संबंधित एक शोध में भी माना गया है (17)। वहीं, लहसुन से संबंधित एनसीबीआई की साइट पर मौजूद शोध में पाया गया कि लहसुन के अर्क में एंटीबैक्टीरियल प्रभाव पाया जाता है। लहसुन का यह प्रभाव निमोनिया का कारण बनने वाले बैक्टीरिया के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है (18)। इस आधार पर गर्भावस्था में लहसुन को निमोनिया की समस्या से राहत पाने के घरेलू उपाय के तौर पर उपयोगी माना जा सकता है।
  1. अदरक : निमोनिया से बचाव के लिए गर्भावस्था में अदरक के अर्क को भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है। वजह यह है कि इसका सेवन गर्भावस्था में सुरक्षित माना गया है। वहीं, गर्भावस्था में होने वाली मतली और उल्टी की शिकायत से बचाव के लिए डॉक्टर भी अदरक का रस लेने की सलाह देते हैं। इस बात को अदरक से संबंधित एनसीबीआई की ओर से उपलब्ध एक शोध में साफ तौर पर स्वीकार किया गया है (19)। वहीं, यह गंभीर श्वसन संबंधी समस्या, जिसमें निमोनिया भी शामिल है, को ठीक करने में सहायक हो सकता है (20)। इस आधार पर गर्भावस्था में अदरक को निमोनिया से बचाव के लिए उपयोगी घरेलू उपाय माना जा सकता है।
  1. चुकंदर का रस : गर्भावस्था में निमोनिया की समस्या से राहत पाने के लिए चुकंदर का रस भी लाभदायक हो सकता है। दरअसल, चुकंदर में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण निमोनिया पैदा करने वाले बैक्टीरिया (klebsiella pneumoniae) को नष्ट करने में सहायक हो सकते हैं (21)। वहीं, चुकंदर का रस गर्भावस्था में सुरक्षित माना जाता है और यह गर्भावस्था में बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का काम कर सकता है (22)। इस आधार पर गर्भावस्था में चुकंदर के रस को निमोनिया के घरेलू उपचार के तौर पर उपयोगी माना जा सकता है।
  1. स्टीम बाथ : स्टीम बाथ भी गर्भावस्था में निमोनिया से बचाव का अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। एनसीबीआई की साइट पर उपलब्ध एक शोध में माना गया है कि स्टीम बाथ पुरुषों में श्वसन से संबंधित समस्याओं से राहत दिलाने में मददगार हो सकता है, जिसमें निमोनिया भी शामिल है (23)। एक अन्य शोध में एक स्वस्थ गर्भवती महिला के लिए स्टीमबाथ को सुरक्षित बताया गया है (24)। इस आधार पर डॉक्टर की सलाह पर स्टीमबाथ का उपयोग गर्भावस्था में निमोनिया से बचाव के लिए उपयुक्त माना जा सकता है।

घरेलू उपचार के बाद अब बारी आती है गर्भावस्था में निमोनिया के इलाज की।

गर्भावस्था के दौरान निमोनिया का इलाज

गर्भावस्था के दौरान निमोनिया का इलाज करने के लिए डॉक्टर मरीज की स्थिति को देखते हुए कुछ दवाओं को लेने की सलाह दे सकते हैं। बता दें कि निमोनिया के प्रकार और कारण के आधार पर डॉक्टर इलाज के लिए अलग-अलग दवाओं को लेने की सलाह दे सकते हैं, जो इस प्रकार हैं (25):

  • गर्भावस्था में बैक्टीरियल निमोनिया होने की स्थिति में डॉक्टर पेनिसिलिन, सेफालोस्पोरिंस और इरिथ्रोमाइसिन जैसी दवाओं को लेने की सलाह दे सकते हैं।
  • वहीं, वायरल इंफेक्शन के कारण होने वाले निमोनिया के लक्षण नजर आने के 48 घंटे के अंदर जानामिविर और ओसेल्टामिविर जैसी दवाओं को प्रभावी और गर्भावस्था में सुरक्षित माना जाता है। इन्हें डॉक्टर इस्तेमाल में लाने की सलाह दे सकते हैं।
  • इसके अलावा, गर्भावस्था में वायरल इंफेक्शन के कारण होने वाले निमोनिया से बचाव के लिए एंटी-वायरल इंजेक्शन को संपूर्ण गर्भावस्था में सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है, जिसे डॉक्टर इस्तेमाल में ला सकते हैं।
  • तीसरी तिमाही में जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एंटीफंगल के रूप में फ्लुकोनाजोल लेने की सलाह दे सकते हैं।

आगे हम गर्भावस्था में निमोनिया के कारण बच्चे पर पड़ने वाले प्रभाव की बात करेंगे।

क्या गर्भावस्था के दौरान निमोनिया होने से बच्चे पर प्रभाव पड़ता है?

हां, गर्भावस्था में निमोनिया गंभीर होने के कारण फेटल डिस्ट्रेस (भ्रूण को ऑक्सीजन न मिल पाना) और फेटल डेथ (भ्रूण मृत्यु) जैसी स्थिति पनप सकती है (26)। इस संबंध में ऊपर विस्तार से बताया गया है।

अंत में हम गर्भावस्था में निमोनिया होने पर डॉक्टर से सलाह लेने के समय के बारे में जानेंगे।

डॉक्टर से कब सलाह लें?

लेख में ऊपर बताएं गए लक्षणों के दिखाई देने पर बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए, ताकि समय रहते ही गर्भावस्था में निमोनिया की रोकथाम की जा सके।

नोट: इस स्थिति में दूसरों से कम से कम एक मीटर की दूरी बनाए रखें। साथ ही घर से बाहर जाते समय मास्क पहनें और हाथों को बार-बार सैनिटाइज करें।

लेख के माध्यम से आपको यह तो पता चल गया कि गर्भावस्था में निमोनिया काफी गंभीर स्थिति है, जिसका समय रहते उपचार अतिआवश्यक है। ऐसे में लेख में दिए लक्षण और कारण समझ कर इसका समय रहते उपचार शुरू किया जा सकता है, ताकि भविष्य में गर्भावस्था में निमोनिया से जुड़े जोखिम सामने न आएं। इसके लिए लेख में दिए गर्भावस्था में निमोनिया से बचाव के घरेलू उपाय भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। वहीं, समस्या नियंत्रित न होने की स्थिति में बिना देर किए डॉक्टरी इलाज को वरीयता देनी चाहिए। उम्मीद है कि गर्भावस्था में निमोनिया से जुड़ा यह लेख आप सभी को पसंद आया होगा। गर्भावस्था से जुड़े अन्य जरूरी विषयों की जानकारी के लिए पढ़ते रहें मॉमजंक्शन।

संदर्भ (References):

1. Seasonality of pathogens causing community-acquired pneumonia By Ncbi
2. Pneumonia in pregnancy By Ncbi
3. Pneumonia By Medlineplus
4. Infectious Diseases and Maternal Morbidity and Mortality By Cdc
5. Influenza and Pneumonia in Pregnancy By Citeseerx
6. Fetal radiation doses and subsequent risks from X-ray examinations: Should we be concerned? By Ncbi
7. The diagnosis of pneumonia in a pregnant woman with coronavirus disease 2019 using maternal lung ultrasound By Ncbi
8. Mycoplasma pneumoniae Infections By Cdc
9. Influenza and Pneumonia in Pregnancy By Ncbi
10. Pneumonia in pregnancy By Ncbi
11. Pneumonia Can Be Prevented—Vaccines Can Help By Cdc
12. Community-acquired pneumonia in adults By Medlineplus
13. Honey: its medicinal property and antibacterial activity By Ncbi
14. Honey Bee as Alternative Medicine to Treat Eleven Multidrug-Resistant Bacteria Causing Urinary Tract Infection during Pregnancy By Ncbi
15. Curcumin ameliorates severe influenza pneumonia via attenuating lung injury and regulating macrophage cytokines production By Ncbi
16. Curcumin: Could This Compound Be Useful in Pregnancy and Pregnancy-Related Complications? By Ncbi
17. The effect of Allium Sativum (Garlic) on Pregnancy, Fetal Weights, and Some Hematological Parameters in Albino Rats By Researchgate
18. Investigation on the antibacterial properties of garlic (Allium sativum) on pneumonia causing bacteria By Ncbi
19. How Safe Is Ginger Rhizome for Decreasing Nausea and Vomiting in Women during Early Pregnancy? By Ncbi
20. Ginger extract reduces delayed gastric emptying and nosocomial pneumonia in adult respiratory distress syndrome patients hospitalized in an intensive care unit By Ncbi
21. Betalains: Natural plant pigments with potential application in functional foods By Academia
22. The BEET-BP Trial – Investigating the Effect of Dietary Nitrates on Hypertension in Pregnancy By Clinicaltrials
23. Sauna bathing reduces the risk of respiratory diseases: a long-term prospective cohort study By Ncbi
24. The sauna and pregnancy By Ncbi
25. Pneumonia in the Pregnant Patient By Ncbi
26. Pneumonia Complicating Pregnancy By Ncbi