प्रेगनेंसी में रेट्रोवर्टेड यूट्रस: कारण, लक्षण व इलाज | Retroverted Uterus Meaning In Hindi

Retroverted Uterus

Image: Shutterstock

IN THIS ARTICLE

महिलाओं को अपने जीवन में कई तरह की शारीरिक परेशानियों और जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। इनमें से एक रेट्रोवर्टेड यूट्रस भी है। यह आम समस्या है, लेकिन ज्यादातर महिलाओं को इसके बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। इसी वजह से मॉमजंक्शन के इस लेख के जरिए हम रेट्रोवर्टेड यूट्रस के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। यहां आप रेट्रोवर्टेड यूट्रस क्या है, इसके लक्षण और यह किन कारणों से होता है जानेंगे। साथ ही हम रेट्रोवर्टेड यूट्रस के दौरान शारीरिक संबंध बनाने और गर्भधारण करने से जुड़ी जानकारियां भी देंगे।

सबसे पहले जान लेते हैं कि रेट्रोवर्टेड यूट्रस होता क्या है।

रेट्रोवर्टेड यूट्रस या रेट्रोवर्टेड गर्भाशय क्या है? | Retroverted Uterus Or Tipped Uterus in Hindi

कभी-कभी किसी शारीरिक समस्या के कारण गर्भाशय में कुछ जटिलताएं हो जाती हैं, उन्हीं में से एक रेट्रोवर्टेड यूट्रस है। इस दौरान गर्भाशय अपने निश्चित स्थान से पीछे की ओर झुक जाता है। इसी वजह से इसे रेट्रोवर्टेड यूट्रस या फिर टिपड (Tipped) यूट्रस कहा जाता है। आमतौर पर हर पांच में से एक महिला का यूट्रस रेट्रोवर्टेड यानी पीछे को झुका हुआ होता है (1)

रेट्रोवर्टेड यूट्रस क्या है जानने के बाद आगे जानिए इस समस्या के लक्षण क्या-क्या होते हैं।

रेट्रोवर्टेड यूट्रस के लक्षण

शोध के मुताबिक सामान्यतः महिलाओं में रेट्रोवर्टेड यूट्रस के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। हां, कुछ मामलों में इसके कारण दर्द या असहजता हो सकती है (1)।  कहा जाता है कि अगर रेट्रोवर्टेड यूट्रस से संबंधित एंडोमेट्रियोसिस ( ऊतक का गर्भाशय से बाहर की ओर बढ़ना) विकार महिला को होता है, तो कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई देते हैं, जो इस प्रकार हैं (2):

  • सहवास के समय दर्द होना
  • मासिक धर्म के दौरान पीड़ा

रेट्रोवर्टेड यूट्रस के संकेत जानने के बाद अब इसके कारण पर एक नजर डाल लेते हैं।

रेट्रोवर्टेड यूट्रस के कारण

महिलाओं में गर्भाशय के झुके होने के कई कारण हो सकते हैं। यहां हम कुछ प्रमुख कारणों के बारे में विस्तार से बताएंगे। आइए, जानते हैं कि रेट्रोवर्टेड यूट्रस के कारण क्या हैं (1) (2)

  1. प्राकृतिक बदलाव न होना : आमतौर पर लड़कियों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ गर्भाशय आगे की ओर झुकता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह सामान्य प्रक्रिया नहीं होती है। इसी वजह से उनका यूट्रस पीछे को ही झुका रह जाता है।
  1. पेल्विक लिगामेंट में कमजोरी :  रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज के समय पेल्विक लिगामेंट्स में कमजोरी आने से यूट्रस की पोजीशन बदल सकती है। पेल्विक लिगामेंटस पेट से लेकर जांघों के बीच के कनेक्टिव टिश्यू को कहा जाता है। ये कोशिकाएं गर्भाशय को अन्य पेल्विक हिस्से से ग्लू करके यानी चिपकाकर पीछे की ओर ले जाती है, जिससे इसकी पोजीशन में बदलाव हो जाता है।
  1. एंडोमेट्रियोसिस : एंडोमेट्रियोसिस भी रेट्रोवर्टेड यूट्रस का कारण हो सकते हैं। इस दौरान एंडोमेट्रियल कोशिकाएं यूट्रस के बाहर बढ़ने लगती हैं।
  1. गर्भावस्था : गर्भाशय अपनी जगह पर कनेक्टिव टिश्यू (लिगामेंट्स) के कारण बना रहता है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान इनमें ज्यादा खिंचाव हो जाता है। इस ओवर स्ट्रेच के कारण गर्भाशय पीछे की ओर झुक जाता है।
  1. फाइब्रॉएड : यह छोटी और कैंसर रहित गांठ होती है, जो गर्भाशय को पीछे की ओर धकेलने का कारण बन सकती है।
  1. एडहेशन्स : पेल्विक सर्जरी के कारण शरीर में बनने वाले एडहेशन गर्भाशय को उसकी जगह से खींच सकते हैं। एडहेशन ऑपरेशन के बाद बनने वाला स्कार टिश्यू होता है, जो शरीर की अलग-अलग सतहों को जोड़ देता है।
  1. साल्पिंगिटिस : यह फैलोपियन ट्यूब में होने वाली सूजन है, जो जीवाणु संक्रमण के कारण होती है। माना जाता है कि इसके कारण भी गर्भाशय रेट्रोवर्टेड हो जाता है।

रेट्रोवर्टेड यूट्रस के बारे में अन्य महत्वपूर्ण जानकारी पढ़ने के लिए आगे स्क्रॉल करें।

रेट्रोवर्टेड यूट्रस का निदान कैसे किया जा सकता है?

शरीर में रेट्रोवर्टेड यूट्रस से जुड़े कुछ लक्षण दिखने पर या रूटीन चेकअप के बाद इस स्थिति का निदान करने के लिए डॉक्टर कुछ टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं। ये टेस्ट कुछ इस प्रकार हैं।

  • पैप परीक्षण के जरिए भी रेट्रोवर्टेड यूट्रस का पता लगाया जा सकता है (2)। यह गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) की जांच करने का एक तरीका है।
  • इसके अलावा रूटीन पेल्विक परीक्षण से भी इसकी जांच की जा सकती है (2)

निदान के बाद रेट्रोवर्टेड यूट्रस के ट्रीटमेंट के बारे में भी जानना जरूरी है। क्या है इसका उपचार नीचे पढ़ें।

रेट्रोवर्टेड यूट्रस के उपचार

बताया जाता है कि ज्यादातर मामलों में रेट्रोवर्टेड यूट्रस को उपचार की आवश्यकता नहीं पड़ती है। हां, अगर इसका कारण एडहेशन या एंडोमेट्रियोसिस है, तो डॉक्टर मामूली सर्जरी या कुछ अन्य सलाह दे सकते हैं, जो इस प्रकार हैं (1) (2)

  1. व्यायाम : अगर रेट्रोवर्टेड यूट्रस किसी गंभीर कारण से नहीं हुआ है, तो डॉक्टर व्यायाम की सलाह दे सकते हैं। बताया जाता है कि कुछ एक्सरसाइज यूट्रस की पोजीशन को ठीक कर सकते हैं। जैसे कि पेल्विक रॉकिंग या पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज।
  1. पेसरी डिवाइस का इस्तेमाल: पेसरी एक प्लास्टिक या सिलिकॉन डिवाइस होता है। इसे योनि में कुछ समय के लिए फिट किया जाता है, ताकि यूट्रस अपनी सही पोजीशन पर आ सके। हालांकि, लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से इंफेक्शन का और साइड इफेक्ट का खतरा हो  सकता है।
  1. सर्जरी : लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से भी गर्भाशय को सही जगह पर लाया जा सकता है। इस ऑपरेशन को आसान और सफल बताया जाता है। कुछ गंभीर मामलों में गर्भाशय हटाने से संबंधित सर्जरी यानी हिस्टेरेक्टॉमी करने की सलाह भी डॉक्ट दे सकते हैं।
  1. हॉर्मोन थेरेपी : एंडोमेट्रियोसिस के लिए हॉर्मोन थेरेपी करने की सलाह डॉक्टर दे सकते हैं।

लेख में अगले भाग में पढ़ें कि रेट्रोवर्टेड यूट्रस से गर्भावस्था प्रभावित होती है या नहीं।

गर्भावस्था पर रेट्रोवर्टेड यूट्रस का प्रभाव

आमतौर पर रेट्रोवर्टेड यूट्रस के कारण गर्भावस्था पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। पहली तिमाही में यूट्रस पेल्विक एरिया से बाहर की ओर बढ़ने लगता है। कुछ प्रतिशत मामलों में गर्भाशय बढ़ते हुए पेल्विक बोन (सेकरम) पर फंस जाता है। इस स्थिति को अव्यवस्थित गर्भाशय यानी इनकारसेरेटेड यूट्रस कहा जाता है। ऐसा होने पर गर्भावस्था के 12 से 14 वें सप्ताह में दर्द और पेशाब में कठिनाई हो सकती है (1)

एक रिसर्च यह भी कहती है कि रेट्रोवर्टेड यूट्रस वाली महिलाओं को गर्भावस्था के पहले हफ्ते हल्की ब्लीडिंग हो सकती है। साथ ही कुछ दुर्लभ मामलों में गर्भपात की आशंका भी हो सकती है (4)

आइए, इस लेख में आगे जानते हैं कि रेट्रोवर्टेड यूट्रस के साथ महिला गर्भवती हो सकती है या नहीं।

क्या आप रेट्रोवर्टेड यूट्रस के साथ गर्भवती हो सकती हैं?

हां, रेट्रोवर्टेड यूट्रस के साथ भी महिलाएं गर्भवती हो सकती है। यह स्थिति गर्भावस्था के साथ हस्तक्षेप नहीं करती है (2)। ऐसी संभावना बहुत ही कम हो कि रेट्रोवर्टेड यूट्रस के कारण गर्भधारण करने में कठिनाई हो।

अगर मन में सवाल है कि रेट्रोवर्टेड यूट्रस होने पर शारीरिक संबंध बनाना चाहिए या नहीं, तो नीचे जानें इसका जवाब।

क्या रेट्रोवर्टेड यूट्रस होने पर शारीरिक संबंध बनाए जा सकते हैं?

जैसा कि हम ऊपर बता ही चुके हैं कि रेट्रोवर्टेड यूट्रस होना आम है, इसलिए इसका यौन जीवन पर कोई खास असर नहीं पड़ता है। इस तरह के यूट्रस के साथ भी महिलाएं शारीरिक संबंध बना सकती हैं। बस इसके कारण थोड़ा दर्द हो सकता है, इसलिए इस दौरान पोजीशन का ध्यान रखना चाहिए (2)। इससे जुड़ी सतर्कता बरतने के लिए एक बार डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते हैं।

आगे पढ़ें कि इस परेशानी में डॉक्टर से सलाह कब ली जानी चाहिए।

डॉक्टर से मिलने कब जाएं?

अगर पेल्विक यानी पेट से जांघ के बीच के हिस्से में दर्द है या वहां असहजता महसूस होती है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए (1)। इन दोनों बातों के अलावा लेख में ऊपर बताए गए अन्य लक्षण महसूस होने पर भी चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

रेट्रोवर्टेड यूट्रस महिलाओं में होने वाली एक आम समस्या है। इससे कुछ हल्की परेशानियां हो सकती हैं, जिसके बारे में हम लेख में बता चुके हैं। अगर किसी को रेट्रोवर्टेड यूट्रस से गंभीर परेशानियां हो रही हैं, तो वो डॉक्टर से संपर्क करके इसका इलाज करवा सकते हैं। बस इसका पता लगाने के लिए आपको डॉक्टर से रूटीन चेकअप करवाते रहना होगा। ऐसा करने से आप इस परेशानी से होने वाली जटिलताओं से भी बच सकती हैं।

संदर्भ (References) :