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प्रेगनेंसी में गन्ने का जूस पीना चाहिए या नहीं? | Pregnancy Me Ganne Ka Ras Pina

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गर्भावस्था में डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट अन्य खाद्य पदार्थों के साथ फलों के जूस का सेवन करने की सलाह भी देते हैं, ताकि गर्भवती को जरूरी पोषण मिलता रहे। वहीं, बात करें गन्ने के रस की, तो प्रेगनेंसी में इसके सेवन को लेकर एक गर्भवती के मन में सवाल उठ सकता है कि क्या प्रेगनेंसी में गन्ने का रस सुरक्षित है? अगर आप गर्भवती हैं और आपके मन में भी ऐसा सवाल उठ चुका है, तो मॉमजंक्शन का यह लेख आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। यहां आप जान पाएंगी कि गर्भावस्था में इसका सेवन कितना सुरक्षित है। साथ ही प्रेगनेंसी में गन्ने के रस से जुड़ी अन्य जरूरी जानकारी भी यहां साझा की गई है।

सबसे पहले जानते हैं कि गर्भावस्था में गन्ने का रस कितना सुरक्षित है।

प्रेगनेंसी में गन्ने का जूस पीना चाहिए या नहीं?

हां, गन्ने का रस गर्भावस्था में पी सकते हैं। इसमें प्रोटीन, आयरन, मिनरल्स और फोलिक एसिड जैसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जिन्हें गर्भावस्था के लिए जरूरी माना जाता है (1)। वहीं, एक शोध के अनुसार, प्रेगनेंसी के दौरान मॉर्निंग सिकनेस (मतली और उल्टी) को कम करने और शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने के लिए भी गन्ने का रस एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है (2)। इन तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि गर्भावस्था में गन्ने के जूस का सेवन सुरक्षित है। वहीं, जो गर्भवती मधुमेह की समस्या से पीड़ित हैं, वो सावधानी के लिए डॉक्टरी या न्यूट्रिशनिस्ट परामर्श पर ही गन्ने के रस का सेवन करें।

स्क्रॉल करके जानिए गन्ने के रस में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में।

गन्ने के जूस के पोषक तत्व

नीचे जानिए यूएसडीए (यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर) के अनुसार गन्ने के रस में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में (3) :

  • 100 एमएल गन्ने के रस में 52 kcal ऊर्जा पाई जाती है।
  • 100 एमएल गन्ने के रस में कार्बोहाइड्रेट की 12.9 ग्राम मात्रा मौजूद होती है।
  • वहीं, 100 एमएल गन्ने के रस में 12.9 ग्राम शुगर की मात्रा मौजूद होती है।
  • इसके अलावा, 100 एमएल गन्ने के रस में 18 मिलीग्राम सोडियम मौजूद होता है।

आगे जानिए गर्भावस्था में गन्ने के रस के फायदे।

प्रेगनेंसी में गन्ने का रस पीने के फायदे

गन्ने के रस में मौजूद औषधीय गुण इसे गर्भावस्था में फायदेमंद बना सकते हैं। नीचे जानिए प्रेगनेंसी में गन्ने के रस से होने वाले फायदे :

  1. चयापचय के लिए : गन्ने के जूस का सेवन चयापचय यानी मेटाबॉलिज्म में सुधार करने का काम कर सकता है। शोध के पाया गया कि गन्ने के रस में मौजूद पॉलिफिनॉल्स चयापचय को बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं (2)। इससे चयापचय की कार्यप्रणाली (ब्लड सर्कुलेशन, शरीर के तापमान को नियंत्रित करना, श्वास लेने की प्रक्रिया में मदद आदि) बेहतर हो सकती है (4)
  1. प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए : गर्भावस्था में प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाए रखने के लिए गन्ने के रस का सेवन किया जा सकता है। रिसर्च के मुताबिक इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है। गन्ने के रस में पाए जाने वाले ये पोषक तत्व प्रतिरक्षा प्रणाली को बूस्ट करने में मददगार हो सकते हैं (2)
  1. पाचन और कब्ज की समस्या में : प्रेगनेंसी में कब्ज की समस्या हो सकती है। यहां भी गन्ने के रस के लाभ देखे जा सकते हैं। दरअसल, पोटेशियम की मौजूदगी के कारण गन्ने का रस कब्ज में आराम दिलाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, इसमें पाचन क्षमता को बढ़ाने वाले गुण भी पाए जाते हैं (2)
  1. मॉर्निंग सिकनेस को कम करे : गर्भावस्था में मॉर्निंग सिकनेस (उल्टी और मतली की समस्या) की समस्या हो सकती है। इस समस्या में भी गन्ने के रस का सेवन लाभदायक हो सकता है। अध्ययन के अनुसार अदरक मिलाकर बनाया गया गन्ने के रस का एक गिलास मॉर्निंग सिकनेस को कुछ हद तक कम कर सकता है (2)
  1. एनर्जी बूस्टर : गन्ने के रस का उपयोग एनर्जी बूस्टर के रूप में भी किया जा सकता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (एक पैमाना, जो बताता है कि कोई कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ कितनी तेजी से ब्लड ग्लूकोज को बढ़ाता है) लो होता है, जो शरीर में एनर्जी के स्तर को बनाए रखने में मददगार हो सकता है (2)
  1. बवासीर की समस्या में : गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में बवासीर की समस्या हो सकती है (5)। इस समस्या में भी गन्ने का रस उपयोगी हो सकता है। दरअसल, एक शोध में साफ जिक्र मिलता है कि भारत में गन्ने के रस का उपयोग कई समस्याओं के साथ बवासीर में भी किया जाता है (6)। हालांकि, यह कितना प्रभावी होगा, इसे लेकर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है।

प्रेगनेंसी में गन्ने के जूस से होने वाले नुकसान नीचे बताए गए हैं।

प्रेगनेंसी में गन्ने का रस पीने के नुकसान

गर्भावस्था में गन्ने के रस के फायदे होने के साथ ही इससे कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। नीचे जानिए गर्भावस्था में गन्ने के रस से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में (7) :

  • गन्ने के रस में सुक्रोज पाया जाता है। माना जाता है कि सुक्रोज का अधिक मात्रा में सेवन गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं (जैसे दस्त, उल्टी, गैस, कब्ज और मतली) का कारण बन सकता है।
  • गन्ने के रस में मौजूद सुक्रोज का अधिक सेवन दांतों की सड़न का कारण बन सकता है।

नीचे जानिए घर में गन्ने का रस निकालने का तरीका।

घर में गन्ने का रस कैसे निकालें?

वैसे ताे बाजार से गन्ने का रस आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। वहीं, इसे घर में भी निकाला जा सकता है। यहां हम बता रहे हैं गन्ने का रस निकालने का तरीका :

  • सबसे पहले गन्ने को छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
  • फिर उन टुकड़ों को बीच में से काट दें।
  • फिर जूसर की मदद से गन्ने का रस निकाल लें।
  • इसके बाद रस को छन्नी से छान लें।
  • चाहें, तो स्वाद के लिए नींबू का रस मिला सकते हैं।
  • गन्ने का रस सर्व करने के लिए तैयार है।

नीचे जानिए प्रेगनेंसी में गन्ने के जूस के सेवन से जुड़ी सावधानियां।

गर्भावस्था के दौरान गन्ने का जूस पीते समय सावधानियां

प्रेगनेंसी में गन्ने के रस के दुष्प्रभावों से बचने के लिए कुछ सावधानियों का पालन करना जरूरी है। नीचे जानिए उन सावधानियों के बारे में :

  • गन्ने का रस निकालने के पहले गन्ने को अच्छी तरह से साफ कर लें और जांच लें कि कहीं गन्ना खराब तो नहीं है।
  • हमेशा ताजा गन्ने के रस का सेवन करें।
  • बासी या फिर काफी समय से रखा हुआ गन्ने का रस हानिकारक हो सकता है, इसलिए इसके सेवन से बचना चाहिए।
  • अगर गन्ने से एलर्जी की समस्या है, तो गन्ने के रस का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • इसका सेवन सीमित मात्रा में किया जाना चाहिए।

प्रेगनेंसी में गन्ने का रस किस प्रकार फायदेमंद हो सकता है, अब आप अच्छी तरह समझ गए होंगे। अब आप चाहें, तो इसकी सीमित मात्रा का सेवन प्रेगनेंसी में कर सकती हैं। वहीं, इसके सेवन की मात्रा का जरूर ध्यान रखें, वरना इसकी अधिक मात्रा बताए गए गन्ने के रस के नुकसान का कारण बन सकती है। आपकी सुविधा के लिए हमने घर में ही गन्ने का जूस निकालने का तरीका भी बताया है। इसके अलावा, गन्ने के रस का सेवन करने जुड़ी सावधानियों का पालन भी जरूर करें। इसी तरह प्रेगनेंसी से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए जुड़े रहें मॉमजंक्शन के साथ।

संदर्भ (References) :