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क्या प्रेगनेंसी में पीला स्त्राव होना सामान्य है? | Yellow Discharge During Pregnancy In Hindi

Yellow Discharge During Pregnancy In Hindi (2)

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गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के परिवर्तन होते हैं। हॉर्मोनल बदलाव इन परिवर्तनों के मुख्य कारणों में से एक है। इसकी वजह से महिलाओं को तरह-तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। गर्भावस्था में योनि स्राव भी उन्हीं में से एक है। योनि स्त्राव अलग-अलग रंगों के हो सकते हैं, इन्हीं में शामिल है, पीला स्त्राव। प्रेगनेंसी में यह कितना सामान्य है या इसके पीछे किसी संक्रमण का संकेत है, यह जानना जरूरी है। ऐसे में मॉमजंक्शन के इस लेख से हम प्रेगनेंसी में पीला डिस्चार्ज होने से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकरियां साझा कर रहे हैं। इस विषय में ज्यादा से ज्यादा जानकारी के लिए लेख को अंत तक पढ़ें। 

चलिए, सबसे पहले समझ लेते हैं कि आखिर गर्भावस्था में पीला स्त्राव होना क्या है।

प्रेगनेंसी में पीला स्त्राव होना क्या है? | What Is Yellow Discharge? 

यह स्राव गाढ़ा, पतला या चिपचिपा हो सकता है। इसे मेडिकल भाषा में ल्यूकोरिया (leukorrhea) के नाम से जाना जाता है। पिला स्राव होना सामान्य भी हो सकता है या फिर संक्रमण का भी संकेत हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान यह मुख्य तौर पर एस्ट्रोजन हॉर्मोन में बदलाव के कारण हो सकता है (1)। लेख में आगे हम इसके कारणों और इससे जुड़ी अन्य जानकरियां साझा कर रहे हैं।

स्क्रॉल करके पढ़ें कि गर्भावस्था में पीला स्त्राव होना कितना सामान्य है। 

क्या प्रेगनेंसी में पीला स्त्राव होना सामान्य बात है? Is Yellow Discharge Normal During Pregnancy?

(1)गर्भावस्था के दौरान योनि से डिस्चार्ज होना सामान्य माना जा सकता है (2)। वहीं, अगर पीले स्त्राव की बात की जाए, तो यह सामान्य भी हो सकता है या संक्रमण के कारण भी हो सकता है (3)। दरअसल, पीला स्त्राव के रंग में अगर बदलाव हो, बदबू हो या गुप्तांग में खुजली की परेशानी हो, तो यह संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं(4)। आगे हम गर्भावस्था में येल्लो डिस्चार्ज से जुड़ी कई और अन्य जरूरी भी जानकारियां दे रहे हैं। 

अब हम बताएंगे कि प्रेगनेंसी में पीला स्त्राव कब होता है। 

प्रेगनेंसी में पीला स्त्राव कब होता है? |  When Yellow Discharge Starts In Pregnancy?

कुछ महिलाओं में यह डिस्चार्ज, जिसे ल्यूकोरिया भी कहते हैं, गर्भावस्था के शुरुआत से लेकर पूरी गर्भावस्था के दौरान हो सकता है (1)। वहीं, कुछ महिलाओं में पीला स्त्राव प्रेगनेंसी में तीसरी तिमाही में हो सकता है। एक रिसर्च के मुताबिक, गर्भावस्था के तीसरे महीने में कुछ महिलाओं में (pathogenic organisms- संक्रमण का कारण बनने वाले जीव) होते हैं, जिस कारण पीला स्त्राव हो सकता है। शरीर में मौजूद संक्रमण फैलाने वाले इन जीवों का वक्त रहते पता लगाना और इलाज करना आवश्यक है (5) 

चलिए, अब हम जान लेते हैं कि प्रेगनेंसी में होने वाला पीला स्त्राव कैसा दिखता है। 

प्रेगनेंसी में पीला स्त्राव किस तरह का दिखता है?

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाला पीला स्त्राव, म्यूकस की तरह हो सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि यह गाढ़ा, चिपचिपा या पतला हो सकता है। सामान्य तौर पर स्त्राव के दौरान यह क्लियर म्यूकस की तरह हो सकता है, लेकिन हवा के संपर्क में आते ही यह सफेद या पीले रंग में बदल सकता है। यह गंधहीन हो सकता है या फिर कभी-कभी यह दुर्गंधित भी हो सकता है (4)

लेख के इस भाग में हम प्रेगनेंसी में पीला स्त्राव होने के कारण बता रहे हैं।

प्रेगनेंसी में पीला स्त्राव होने के कारण

जैसे कि हमने पहले ही जानकारी दी है कि अगर येल्लो डिस्चार्ज के रंग में बदलाव हो या इसमें दुर्गंध हो, तो यह संक्रमण का संकेत हो सकता है। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान पीला स्त्राव होने के कारण में कौन से संक्रमण हो सकते हैं, उसकी जानकारी नीचे दी गई है। ये कारण कुछ इस प्रकार हैं (4) (5)

  • शारीरिक संबंध के दौरान होने वाले संक्रमण जैसे – क्लैमाइडिया (chlamydia- बैक्टीरियल संक्रमण), गोनोरिया (gonorrhea- बैक्टीरियल संक्रमण) व ट्राइकोमोनिएसिस (trichomoniasis- परजीवी के कारण होने वाला यौन संचारित संक्रमण) के कारण हो सकता है।
  • फंगस के कारण होने वाला योनि यीस्ट संक्रमण।
  • सामान्य बैक्टीरिया, जो योनि में रहते हैं। ये ग्रे डिस्चार्ज और खराब गंध का कारण बन सकते हैं। इसे बैक्टीरियल वेजिनोसिस (एक प्रकार का संक्रमण) कहा जाता है। बता दें कि यह संक्रमण शारीरिक संबंध बनाने से नहीं फैलता है।
  • डिटर्जेंट, फैब्रिक सॉफ्टनर, फेमिनिन स्प्रे, ऑइंटमेंट, क्रीम और गर्भनिरोधक फोम या जेली या क्रीम में पाए जाने वाले रसायन भी इसके कारण माने जा सकते हैं।

योनि डिस्चार्च के कुछ असामान्य कारण भी हैं – 

  • योनि, गर्भाशय ग्रीवा, गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब का कैंसर।
  • त्वचा संबंधी समस्या जैसे कि डिस्क्वामैटिव वैजिनाइटिस (desquamative vaginitis- एक प्रकार का सूजन) और लिचेन प्लेनस (lichen planus- त्वचा या मुंह में खुजलीदार दाने होना) के कारण भी येल्लो डिस्चार्ज हो सकता है।

अब हम जानेंगे कि येल्लो डिस्चार्ज से बचाव कैसे किया जा सकता है। 

प्रेगनेंसी में येल्लो डिस्चार्ज से बचाव कैसे करें? | How You Can Prevent Yellow Discharge When Pregnant

प्रेगनेंसी के समय कुछ बातों का ध्यान रख कर येल्लो डिस्चार्ज से बचाव किया जा सकता है। नीच हम उनकी चर्चा कर रहे हैं (4)

  • गर्भावस्था के दौरान ढीले कपड़े पहनें। इससे त्वचा में खुजली और जलन नहीं होगी।
  • कॉटन के आरामदायक कपड़े पहनें।
  • शौच के बाद गुप्तांग को अच्छे से साफ करें।
  • बाथरूम का उपयोग करने से पहले और बाद में स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें।
  • गुप्तांग पर हाइजिन या सुगंधित स्प्रे व पाउडर का उपयोग करने से बचें।
  • शारीरिक संबंध बनाने के दौरान कंडोम का उपयोग करें।
  • अगर किसी महिला को मधुमेह की समस्या है, तो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखें। 

येल्लो डिस्चार्ज से बचाव के बाद इसे ठीक करने का तरीका भी जान लेते हैं। 

येल्लो डिस्चार्ज को ठीक करने के उपाय | How Is Yellow Discharge Treated? 

जैसा कि हमने लेख में बताया कि यल्लो डिस्चार्ज संक्रमण के कारण भी हो सकता है। ऐसे में इसका उपचार लक्षणों के कारणों पर निर्भर करता है। वहीं, कुछ बातों का भी ध्यान रख कर इससे कुछ हद बचाव किया जा सकता है। नीचे क्रमवार तरीके से हम उसके बारे में बता रहे हैं (4)

  • साबुन के उपयोग से बचें – यल्लो डिस्चार्ज से बचाव के लिए गुप्तांग में साबुन या कॉस्मेटिक के प्रयोग से बचें। इनमें मौजूद केमिकल समस्या को बढ़ा सकते हैं।
  • गुनगुने पानी का उपयोग – गुनगुने पानी से गुप्तांग को धोएं। वहीं, गर्भावस्था के दौरान गुप्तांग में गुनगुने पानी के उपयोग से पहले डॉक्टरी सलाह भी लें।
  • बार-बार न धोएं – योनि को बार-बार धोने से बचें। कई महिलाएं जब योनि में दर्द या जलन महसूस करती हैं, तो बार-बार साफ करती हैं, लेकिन वास्तव में यह लक्षणों को बढ़ाने का कारण बन सकता है। यह शरीर में मौजूद स्वस्थ बैक्टीरिया, जो संक्रमण से बचाने में सहायक हो सकता है, उन्हें हटा सकता है।
  • दवाइयां – जैसा कि हमने लेख में बताया कि येल्लो डिस्चार्ज होने के पीछे बैक्टीरियल संक्रमण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर संक्रमण के कारण के अनुसार एंटीबॉयोटिक या एंटी वायरल दवाइयां दे सकते हैं (6)

नोट: गर्भावस्था के दौरान ऐसे किसी भी दवाइयों के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

लेख के अंत में जानेंगे कि येल्लो डिस्चार्ज होने पर डॉक्टर से चेकअप कब करवाना चाहिए।

येल्लो डिस्चार्ज में आपको कब चिंता करनी चाहिए और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? 

लेख के शुरुआत में जानकारी दी गई है कि गर्भावस्था के दौरान पीला स्त्राव होना सामान्य हो सकता है। वहीं, अगर यह अधिक होने लगे और इससे खराब गंध आए, तो यह चिंता का विषय भी हो सकता है। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान पीला स्त्राव होने के साथ अगर नीचे बताए गए लक्षण दिखें, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें (4)

इसके अलावा भी कुछ ऐसे बदलाव हैं, जो संक्रमण जैसी समस्या का संकेत दे सकते हैं। ऐसी स्थिती में भी गर्भवती महिलाओं को तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। ये संकेत कुछ इस प्रकार हैं (4)

  • स्राव के रंग या गंध में अचानक बदलाव आना।
  • योनि के आसपास के क्षेत्र में खुजली, लालिमा और सूजन होना।
  • अगर किसी महिला को लग रहा हो कि उनके द्वारा ली जा रही दवा के कारण स्राव हो रहा हो, तो एक बार डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।
  • अगर सावधानी बरतने के बाद भी हफ्तों तक लक्षण ठीक नहीं हो रहे हैं।
  • योनि पर फफोले या अन्य घाव का होना।
  • अगर यूरिन पास करते वक्त जलन हो, तो यह मूत्र पथ के संक्रमण का संकेत भी हो सकता है।

उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ने के बाद आपको प्रेगनेंसी में येल्लो डिस्चार्ज से जुड़ी जरूरी जानकारियां मिल गई होगी। भले ही यह सामान्य हो, लेकिन कुछ मामलों में यह चिंता का कारण भी बन सकता है। ऐसे में ऊपर बताए गए लक्षणों का ध्यान रखें और समस्या ज्यादा हो, तो डॉक्टरी परामर्श लेने में देर न करें। वहीं, इस लेख को अन्य महिलाओं के साथ शेयर कर येल्लो डिस्चार्ज से बचाव के तरीके सभी को बताएं। हम उम्मीद करते हैं कि यह लेख आपके लिए मददगार साबित होगा। महिला स्वास्थ्य से संबंधित अन्य जानकारी के लिए पढ़ते रहें मॉमजंक्शन। 

संदर्भ (Sources) :