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प्रेगनेंसी के दौरान सर्वाइकल कैंसर होने के कारण, लक्षण व इलाज | Cervical Cancer During Pregnancy In Hindi

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गर्भावस्था के दौर को स्वस्थ तरीके से बिताने पर ही आने वाला शिशु सेहतमंद हो सकता है। अगर प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती को किसी तरह की समस्या होती है, तो इसका असर भ्रूण पर भी पड़ सकता है। अगर परेशानी छोटी हो, तो भ्रूण को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचता है। वहीं, गर्भावस्था में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर समस्या हो जाए, तो यह चिंता का विषय बन सकता है। ऐसे में मॉमजंक्शन के इस लेख में गर्भावस्था में सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। तो प्रेगनेंसी में सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें।

इस लेख में आगे बढ़ने से पहले जानते है कि सर्वाइकल कैंसर क्या है।

सर्वाइकल कैंसर क्या होता है?

सर्वाइकल कैंसर एक प्रकार का कैंसर होता है, जो सर्विक्स (Cervix) यानी गर्भाशय ग्रीवा से शुरू होता है। सर्विक्स, जिसे गर्भाशय ग्रीवा भी कहा जाता है, गर्भाशय के ही निचले हिस्से का भाग होता है, जो योनि के ऊपरी भाग में खुलता है। यह कैंसर गर्भाशय ग्रीवा की सतह पर मौजूद कोशिकाओं से शुरू होता है। सर्विक्स में दो तरह की कोशिकाएं होती हैं, जिनमें स्क्वैमस (Squamous) और कॉलमनर (Columnar) सेल्स शामिल है। ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर स्क्वैमस सेल्स से होते हैं। यह कैंसर काफी धीमी गति से विकसित होता है (1)। आगे हम गर्भावस्था में सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी और कई महत्वपूर्ण जानकारियां आपके साथ साथ साझा कर रहे हैं।

लेख के आगे के भाग में बताएंगे कि गर्भावस्था में सर्वाइकल कैंसर की समस्या कितनी आम है।

प्रेगनेंसी के दौरान सर्वाइकल कैंसर होना कितना आम है?

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफार्मेशन) की वेबसाइट पर पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, गर्भावस्था के समय सर्वाइकल कैंसर होना असमान्य है। इस समस्या का निदान प्रेगनेंसी के समय जांच के दौरान हो सकता है। गर्भावस्था में यह समस्या प्रति 10,000 महिलाओं में से 0.1 से 12 प्रतिशत गर्भवतियों को हो सकती है। वहीं, सर्वाइकल इंट्राएपिथेलियल नियोप्लासिया (Cervical Intraepithelial Neoplasia – CIN) के रिपोर्ट के अनुसार प्रति 1000 महिलाओं में से 1.30 से 2.7 प्रतिशत महिलाओं को यह गंभीर बीमारी हो सकती है (2)

आइए, अब लेख के इस भाग में जानते हैं सर्वाइकल कैंसर के स्टेजेस से जुड़ी जरूरी जानकारियों के बारे में।

सर्वाइकल कैंसर के स्टेज

सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती लक्षण से लेकर गंभीर होने तक इसे कई अलग-अलग स्टेजेस में बांटा जा सकता है। नीचे हम सर्वाइकल कैंसर के इन्ही स्टेजेस के बारे में बता रहे हैं (3):

  1. पहला चरण : यह कैंसर होने का शुरुआती चरण है। इस वक्त यह केवल गर्भाशय ग्रीवा में पाया जा सकता है। इसे ट्यूमर के आकार और ट्यूमर के प्रसार के आधार पर IA और IB के दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है।
    • स्टेज IA1 में, कैंसर बहुत कम मात्रा में फैला होता है, जिसे केवल एक माइक्रोस्कोप से देखा जा सकता है। यह गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) के ऊतकों में पाया जाता है। इस समय ट्यूमर का आकार और गहराई 3 मिलीमीटर तक या उससे कम हो सकता है। वहीं, स्टेज IA2 में, ट्यूमर का आकार 3 मिलीमीटर से अधिक हो सकता है, लेकिन 5 मिलीमीटर से कम हो सकता है।
    • स्टेज IB1 में, ट्यूमर 2 सेंटीमीटर या उससे छोटा हो सकता है और गहराई 5 मिलीमीटर से अधिक हो सकती है। वहीं, IB2 में ट्यूमर 2 सेंटीमीटर से बड़ा हो सकता है, पर 4 सेंटीमीटर से कम हो सकता है। इसके अलावा, IB3 स्टेज में ट्यूमर 4 सेंटीमीटर से बड़ा हो सकता है।
  1. दूसरा चरण : इस चरण में कैंसर योनि के ऊपरी दो-तिहाई भाग में या गर्भाशय के आस-पास के ऊतकों में फैल सकता है। इस स्टेज को IIA और IIB के चरणों में विभाजित किया गया है। कैंसर कितना फैला है, इस स्टेज को इसी आधार पर बांटा गया है।
    • स्टेज IIA : कैंसर गर्भाशय ग्रीवा से योनि के ऊपरी दो-तिहाई हिस्से तक फैल गया होता है, लेकिन गर्भाशय के आस-पास के ऊतक तक नहीं फैल पाया होता है। स्टेज IIA ट्यूमर के आकार के आधार पर IIA1 और IIA2 के चरणों में विभाजित है।
    • IIA1 चरण में, ट्यूमर 4 सेंटीमीटर या उससे छोटा हो सकता है। वहीं, IIA2 चरण में, ट्यूमर 4 सेंटीमीटर से बड़ा हो सकता है।
    • स्टेज IIB: इस स्टेज में गर्भाशय ग्रीवा से गर्भाशय के चारों तरफ के ऊतक तक कैंसर फैल गया होता है।
  1. तीसरा चरण: इस चरण में आने तक कैंसर योनि के निचले तीसरे या श्रोणि की दीवार (Pelvic Walls) तक फैल गया होता है। इससे गुर्दे और लिम्फ नोड्स (Lymph Nodes) की समस्या भी हो सकती है। इस चरण को IIIA, IIIB और IIIC के चरणों में विभाजित किया जा सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कितना फैला है।
    • स्टेज IIIA: कैंसर योनि के निचले तीसरे हिस्से में फैल गया होता है, लेकिन श्रोणि की दीवार तक नहीं फैला होता है।
    • स्टेज IIIB: कैंसर श्रोणि की दीवार तक फैल गया होता है और ट्यूमर एक या दोनों मूत्रवाहिनी को अवरुद्ध करने के लिए काफी बड़ा हो चुका होता है। इससे गुर्दे के काम में रुकावट उत्पन्न हो सकता है।
    • स्टेज IIIC: इस वक्त कैंसर श्रोणि के लिम्फ नोड्स में फैल गया होता है या बड़ी धमनी (Aorta) के पास पेट में लिम्फ नोड्स में फैला होता है।
  1. चौथा चरण: इस चरण में आते-आते कैंसर शरीर के सभी भागों में फैल गया होता है। इस स्टेज को IVA और IVB के चरणों में विभाजित किया जाता है, जिसके आधार पर बताया जा सकता है कि कैंसर कहां तक फैला है।
    • स्टेज IVA: इस समय कैंसर आसपास के अंगों में फैल गया होता है, जैसे मूत्राशय (Bladder) या मलाशय (Rectum)।
    • स्टेज IVB: इस स्टेज में कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल चुका होता है, जैसे कि लिवर, फेफड़े, हड्डियों में।

आगे पढ़िए, गर्भावस्था के समय सर्वाइकल कैंसर होने के क्या कारण हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान सर्वाइकल कैंसर होने के कारण

गर्भावस्था के दौरान सर्वाइकल कैंसर की समस्या होने के पीछे ह्यूमन पेपिलोमावायरस (Human papillomavirus- एचपीवी) जिम्मेदार होता है। इस वायरस के पनपने के पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं (4) :

  • यह वायरस शारीरिक संबंध बनाने से फैल सकता है।
  • अधिक धूम्रपान करने से सर्वाइकल कैंसर का जोखिम हो सकता है।
  • अगर महिला कई बार गर्भवती हुई है तो भी इस समस्या के पनपने का जोखिम हो सकता है।
  • ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस (HIV-एचआईवी) इन्फेक्शन भी इसका कारण हो सकता है।

चलिए अब जानते हैं कि गर्भावस्था के दौरान सर्वाइकल कैंसर होने पर किस तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान सर्वाइकल कैंसर होने के लक्षण

गर्भावस्था के समय सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती चरण और अंतिम चरणों में अलग-अलग प्रकार के लक्षण नजर आ सकते हैं। हालांकि, कई बार इसके लक्षण सामान्य बीमारी से मिलते-जुलते हो सकते हैं, जिस कारण सर्वाइकल कैंसर का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में नीचे हम पहले शुरुआती चरण के लक्षणों की जानकारी दे रहे हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (5):

  • योनी से पीप या खून का रिसाव हो सकता है।

प्रेगनेंसी में लेट सर्वाइकल कैंसर के लक्षण कुछ इस प्रकार के हो सकते हैं:

अब हम गर्भावस्था के समय सर्वाइकल कैंसर के डायग्नोसिस के बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान सर्वाइकल कैंसर डायग्नोसिस

गर्भावस्था के समय सर्वाइकल कैंसर की जांच करने के लिए कई तरीकों को अपनाया जा सकता है। इन निदान की प्रक्रियाओं के बारे में नीचे विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई (5):

1. सर्वाइकल साइटोलॉजी (Cervical cytology)

गर्भावस्था के समय सर्वाइकल कैंसर का निदान करने के लिए इस तकनीक का सबसे पहले इस्तेमाल किया जा सकता है। इस परीक्षण के जरिए कोशिकाओं का सैंपल लिया जाता है और उससे सर्विक्स में कोशिकाओं की असामान्यता का पता लगाया जा सकता है।

2. पैप स्मीयर टेस्ट

सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए पैप स्मीयर टेस्ट (Pap smear) का सहारा भी लिया जा सकता है। इसमें सर्विक्स से लिए गए कोशिकाओं की जांच की जाती है (6)। इस टेस्ट से शुरुआत में ही सर्वाइकल कैंसर का पता लगाया जा सकता है और कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है (7)

3. कोल्पोस्कोपी

प्रेगनेंसी के समय सर्वाइकल कैंसर की जांच करने के लिए डॉक्टर कोल्पोस्कोपी की मदद ले सकते हैं। दरअसल, कोल्पोस्कोप एक उपकरण होता है, जिसकी मदद से गर्भाशय ग्रीवा की जांच की जाती है और सर्वाइकल कैंसर का पता लगाया जा सकता है। डॉक्टर इस निदान को पहले और दूसरे ट्राइमेस्टर में कर सकते हैं। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान हार्मोन के स्तर में बदलाव के कारण कोल्पोस्कोपी (Colposcopy) से सर्वाइकल की छवि को पहचानना मुश्किल हो सकता है।

4. बायोप्सी

इस परीक्षण के दौरान टिश्यू का सैंपल लिया जाता है। इसकी प्रयोगशाला में जांच कर कैंसर सेल्स का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, इसे गर्भावस्था के दौरान न करने की सलाह दी जाती है। दरअसल, गर्भावस्था के दौरान इसे कराने पर अधिक ब्लीडिंग या गर्भपात का जोखिम हो सकता है।

आगे जानिए, सर्वाइकल डिस्प्लेसिया क्या होता है।

सर्वाइकल डिस्प्लेसिया क्या है?

सर्वाइकल डिसप्लेसिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें सर्विक्स के ऊपरी परत की कोशिकाओं में असामान्य तरीके से परिवर्तन होता है। कोशिकाओं का यह परिवर्तन कैंसर नहीं होता है, लेकिन यदि इसका वक्त रहते उपचार न किया जाए, तो ये सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकता है (8)

चलिए, अब पढ़ते हैं सर्वाइकल कैंसर के बारे में पता चलने के बाद क्या होता है।

प्रेगनेंसी के दौरान सर्वाइकल कैंसर का पता होने के बाद क्या होता है?

प्रेगनेंसी के समय सर्वाइकल कैंसर के बारे में पता चलने के बाद डॉक्टर गर्भवती के सेहत को ध्यान में रखते हुए इसके इलाज की प्रक्रिया को शुरू कर सकते हैं। यह समस्या गंभीर है, तो क्रायोसर्जरी (Cryosurgery-यह कैंसर सेल्स को फ्रीज करने की तकनीक होती है) और लेजर सर्जरी जैसे इलाज की मदद ली जा सकती है (9)। इसके अलावा, कुछ और भी इलाज की प्रक्रियाओं को अपनाया जा सकता है, जिसके बारे में लेख में आगे विस्तार से जानकारी दी गई है।

इस लेख के अगले भाग में कीमोथेरेपी से भ्रूण पर किस प्रकार का असर हो सकता है, हम इसकी जानकारी देने जा रहे हैं।

क्या कीमोथेरेपी से गर्भ में बच्चे पर प्रभाव पड़ता है?

एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक मेडिकल रिसर्च में दिया गया है कि गर्भावस्था के समय कीमोथेरेपी लेने से गर्भ में पल रहे भ्रूण को नुकसान हो सकता है। भ्रूण को किस तरह के नुकसान हो सकते हैं, यह इस थेरेपी के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाइयों पर निर्भर करता है। दूसरी या तीसरी तिमाही में कीमोथेरेपी कराने से शिशु का समय से पहले जन्म, शिशु के विकास में रुकावट, जन्म के दौरान कम वजन और बोन मैरो टॉक्सिसिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं (10)

आइए, अब जान लेते है कि सर्वाइकल कैंसर के कारण कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती हैं।

सर्वाइकल कैंसर से होने वाले खतरे

कई बारी सर्वाइकल कैंसर के उपचार के बावजूद इससे कुछ अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इन खतरों के बारे में नीचे जानकारी दी गई है, जो कुछ इस प्रकार हैं (1):

  • जिन महिलाओं ने गर्भाशय को बचाने के लिए सर्वाइकल कैंसर का इलाज कराया है, उनमें कैंसर का जोखिम फिर से उत्पन्न हो सकता है।
  • सर्जरी या रेडिएशन के बाद यौन स्वास्थ्य, आंत और मूत्राशय के कार्य प्रणाली से जुड़ी समस्याएं हो सकती है।

अब हम आगे सर्वाइकल कैंसर के इलाज से संबंधित जानकारी देने जा रहे हैं।

सर्वाइकल कैंसर के ट्रीटमेंट

प्रेगनेंसी के समय सर्वाइकल कैंसर के इलाज को गर्भावस्था को ध्यान में रख कर अलग-अलग चरणों में विभाजित किया जा सकता है। इस कैंसर के इलाज की प्रक्रिया के बारे में नीचे विस्तारपूर्वक जानकारी साझा की गई है (5):

गर्भावस्था के शुरुआती चरण में सर्वाइकल कैंसर का ट्रीटमेंट

प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में इस कैंसर के इलाज के लिए सर्विक्स में ट्यूमर सेल्स को हटाने व स्वस्थ टिश्यू के लिए सर्जरी या थेरेपी का सहारा लिया जा सकता है ।

  • लूप इलेक्ट्रोसर्जिकल एक्सिजन प्रोसीजर (एलईईपी) – लीप (LEEP- Loop electrical excision procedure), इस प्रक्रिया में में एक पतले तार जैसे उपकरण की मदद से बिजली का उपयोग कर असामान्य ऊतकों को हटाया जा सकता है (5) (11)
  • क्रायोथेरेपीगर्भावस्था के दौरान क्रायोथेरेपी की मदद से भी सर्वाइकल कैंसर का इलाज किया जा सकता है (12)। इस उपचार की सहायता से असामान्य कोशिकाओं को फ्रीज यानी जमाया जा सकता है (13)
  • लेजर थेरेपी प्रेगनेंसी के दौरान सर्वाइकल कैंसर के इलाज के लिए लेजर थेरेपी का विकल्प भी लिया जा सकता (14)। इस थेरेपी में प्रभावशाली लाइट का इस्तेमाल कर असामान्य ऊतक को नष्ट किया जा सकता है ।

दूसरी और तीसरी तिमाही में सर्वाइकल कैंसर का ट्रीटमेंट

गर्भावस्था के दूसरे और तीसरे तिमाही में कोई भी उपचार को कराने से पहले कई डॉक्टरों से सलाह लेने की आवश्यकता हो सकती है। दरअसल, इस दौरान किसी भी इलाज का असर भ्रूण पर भी पड़ सकता है। नीचे हम इसके लिए कुछ एडवांस इलाज के बारे में बता रहे हैं:

  • रेडिकल हिस्टेरेक्टॉमी इस इलाज को करने की सलाह कैंसर की गंभीरता के अनुसार दिया जाता है। यह इलाज गर्भावस्था के तुरंत बाद किया जाना उचित है। इस इलाज की मदद से गर्भाशय और आसपास के कैंसर प्रभावित ऊतकों को हटाया जा सकता है (5)। इस इलाज से जुड़ी सटीक जानकारी डॉक्टर से ली जा सकती है।
  • रेडिएशन थेरेपी–  इसे भी कैंसर की गंभीरता के अनुसार करने की सलाह दी जा सकती है। वहीं, कुछ स्टेजेस को ध्यान में रखते हुए इस ट्रीटमेंट को भ्रूण के पूर्ण विकास होने तक टालने की सलाह भी दी जा सकती है (5)। इसे लो डोज कीमोथेरेपी के साथ किया जा सकता है।

नोट : गर्भावस्था में सर्वाइकल कैंसर का कोई भी उपचार पूरी तरह से गर्भवती की स्थिति और कैंसर के स्टेज पर निर्भर करता है। डॉक्टर महिला के सेहत को देखते हुए उपचार के अलग-अलग विकल्प का सहारा ले सकते हैं।

चलिए जानते है, प्रेगनेंसी के समय सर्वाइकल कैंसर होने पर किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान सर्वाइकल कैंसर को लेकर सावधानियां

गर्भावस्था के समय सर्वाइकल कैंसर होने पर कुछ बातों को लेकर सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। इन सावधानियों की जानकारी आगे लेख में दी गई है:

  • नियमित तौर पर इलाज के लिए विशेषज्ञ के पास जाते रहें।
  • गर्भावस्था के समय इस समस्या के लक्षण को कम करने के लिए डॉक्टर से सही खानपान के बारे में जानकारी लें।
  • इस दौरान मन को शांत रखने की कोशिश करें। अगर कैंसर के कारण अधिक तनाव में आते हैं, तो इसका असर आने वाले शिशु पर भी पड़ सकता है।
  • इस दौरान शरीर में किसी तरह की भी असहजता महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

अब हम सर्वाइकल कैंसर से बचने के उपाय बताने जा रहे हैं।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव

सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए कई जरूरी उपायों को अपनाया जा सकता है। इन बचाव के उपायों की मदद से इस कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है (1)

  • ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन लगवाएं। यह वैक्सीन अधिकांश प्रकार के एचपीवी संक्रमण, जो सर्वाइकल कैंसर का जोखिम उत्पन्न कर सकते हैं, उन्हें रोकने का काम कर सकती है। वहीं, डॉक्टर से गर्भवती इस बात की जानकारी ले सकती हैं कि यह वैक्सीन गर्भावस्था के दौरान उनके लिए उचित है या नहीं।
  • एक से अधिक लोगों से यौन संबंध बनाने से बचें।
  • धूम्रपान करने से बचें, धूम्रपान से सर्वाइकल कैंसर होने का जोखिम बढ़ सकता है।
  • पैप स्मीयर टेस्ट का सहारा लें। यह एक प्रकार का टेस्ट होता है, जिसके जरिए शरीर में हुए परिवर्तनों का पता लगाया जा सकता है। जिसके बाद सर्वाइकल कैंसर को पनपने से पहले ही नष्ट किया जा सकता है।
  • अगर डॉक्टर द्वारा ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) परीक्षण कराने की सलाह दी जा रही है, तो 30 वर्ष और अधिक उम्र की महिला को पैप परीक्षण भी कराना चाहिए। इससे सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी जानकारी का वक्त रहते पता लग सकता है।

सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर समस्या है, जिससे राहत पाने के लिए सही इलाज की आवश्यकता होती है। शरीर में कोई भी अलग लक्षण दिखे तो उसे अनदेखा न करें, बल्कि डॉक्टरी सलाह लें। साथ ही अगर किसी गर्भवती में सर्वाइकल कैंसर का निदान हुआ है तो इस दौरान अधिक पैनिक न हों। तनाव के कारण इसके इलाज में परेशनियां आ सकती है और समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में इस समस्या के दौरान डॉक्टर के निर्देशों का पालन करते रहें और इलाज कराते रहें। हम उम्मीद करते हैं कि हमारे इस लेख में दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी रहे। इसे अन्य लोगों के साथ शेयर कर हर किसी को इस विषय से अवगत कराएं।

संदर्भ (References):


 

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