प्रेगनेंसी में आंख आना: कारण, लक्षण व उपचार | Conjunctivitis During Pregnancy In Hindi

Conjunctivitis During Pregnancy In Hindi

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प्रेगनेंसी के दौरान छोटी से छोटी स्वास्थ्य समस्या का भी पूरा ध्यान रखना आवश्यक है। ऐसी ही एक समस्या है गर्भावस्था के दौरान आंख आना यानी कंजंक्टिवाइटिस। ऐसे में अगर कोई महिला गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस की समस्या का अनुभव करती है, तो उसे क्या करना चाहिए या क्या नहीं, इसी से जुड़ी विस्तृत और उचित जानकारी मॉमजंक्शन के इस लेख में साझा की गई है। यहां हम गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस के कारण से लेकर गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस का इलाज की पूरी जानकारी दे रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस से जुड़ी जानकारी जानने से पहले पढ़ें कि आंख आना क्या है।

आंख आना (कंजंक्टिवाइटिस) क्या है?

कंजंक्टिवा नामक एक पारदर्शी ऊतक हमारी आंखों के सफेद हिस्से और पलकों के बाहरी परत को कवर करती है, जिसमें होने वाले सूजन को ही आंख आना या कंजंक्टिवाइटिस कहते हैं। इसे पिंक आई (Pink Eye) यानी गुलाबी आंखों की समस्या भी कहते हैं (1)। यह किसी भी उम्र व वर्ग के लोगों में हो सकता है, जो एक्यूट या क्रॉनिक से लेकर संक्रामक या गैर-संक्रामक भी हो सकता है। अगर इसकी स्थति एक्यूट है, तो यह आमतौर पर 1 से 2 सप्ताह या कुछ मामलों में 3 से 4 सप्ताह तक रह सकता है। वहीं, अगर इसकी स्थिति गंभीर या क्रॉनिक है, तो यह 4 सप्ताह से अधिक समय तक रह सकता है (2)।

अब पढ़ें गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस के कारण क्या हो सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान आंख आने के कारण

गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस के कारण सामान्य दिनों जैसे ही हो सकते हैं। यहां पर हम उन वजहों को बता रहे हैं, जो आंख आने के कारण होते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (3):

1. बैक्टीरिया: बैक्टीरियल इंफेक्शन प्रेगनेंसी में आंख आने का एक कारण हो सकता है। मेडिकल टर्म में इसे बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस (Bacterial Conjunctivitis) कहते हैं। इसके लक्षणों में आंखों से मवाद बहने और आंखों में सूजन की समस्या हो सकती है। यह एक या दोनों आंखों को प्रभावित कर सकता है और एक आंख से दूसरी आंख तक फैल भी सकता है (4)।

2. वायरस: गर्भावस्था में कुछ प्रकार के वायरस भी आंख आने का कारण बन सकते हैं। इसे वायरल कंजंक्टिवाइटिस (Viral Conjunctivitis) कहते हैं, जिसके होने पर आंखों में लालिमा के साथ ही आंखों से ओकुलर डिस्चार्ज यानी मोटा व चिपचिपा तरल का बहना, आंखों में दर्द होना और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता के लक्षण भी हो सकते हैं। वायरस के कारण हुआ यह कंजंक्टिवाइटिस एक आंख से दूसरी आंख में तेजी से फैल सकता है (5)।

3. एलर्जी: कुछ स्थितियों में मौसम के कारण होने वाली एलर्जी भी गर्भावस्था के दौरान आंख आने का कारण बन सकती है। इसे एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस (Allergic Conjunctivitis) कहते हैं। यह लगभग 40 प्रतिशत लोगों को प्रभावित कर सकता है। ये आंखों के धूल के संपर्क में आने के कारण हो सकता है। इस दौरान आंखों में खुजली और आंसू निकलना देखा जा सकता है (6)।

इसके अलावा, अगर किसी महिला को लंबे समय से किसी तरह की एलर्जी या अस्थमा की समस्या है, तो भी आंख आने का जोखिम बढ़ा सकता है। इसे वर्नल किरैटो कंजंक्टिवाइटिस (Vernal Keratoconjunctivitis) कहते हैं (7)। लंबे समय से एक ही कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर रखना भी आंख आने का कारण हो सकता है (1)। इस वजह से इस तरह के पर्यावरणीय या आदतों से जुड़े कारकों को भी गर्भावस्था में आंख आने का कारण माना जा सकता है।

4. केमिकल: आंखों में किसी तरह के केमिकल के जाने से भी आंख आ सकती है (1)। आंखों में किसी तरह का आई ड्रॉप या कोई तरल डालने से यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा, इसे केमिकल कंजंक्टिवाइटिस (Chemical Conjunctivitis) कहते हैं (8)। इसे एक तरह का टॉक्सिक कंजंक्टिवाइटिस (Toxic Conjunctivitis) भी कहा जा सकता है। इससे आंखों में सूखापन, सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं (3)।

5. यौन संचारित संक्रमण: क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस गर्भावस्था के दौरान होने वाला एक यौन संचारित रोग (एसटीडी) है (9)। यह क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस (Chlamydia Trachomatis) नामक बैक्टीरिया के कारण हो सकता है, यह संक्रमित व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाने से हो सकता है। इसका एक कारण साफ-सफाई में कमी को भी माना जा सकता है (10)।

6. रोगी के संपर्क में आना: आंख आने की समस्या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है (11)। इसलिए, अगर गर्भवती महिला किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आती है, जिसे पहले से ही कंजंक्टिवाइटिस हुआ हो, तो ऐसे व्यक्ति से संपर्क करना भी गर्भावस्था में कंजंक्टिवाइटिस का कारण बन सकता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति के चीजों को उपयोग करने से भी यह समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस के कारण जानने के बाद आगे पढ़ें इसके लक्षण।

प्रेगनेंसी में कंजंक्टिवाइटिस के लक्षण

लेख के इस भाग में आप गर्भावस्था में आंख आने के लक्षण पढ़ सकते हैं। ध्यान रखें कि गर्भावस्था में आंख आने के लक्षण आम दिनों की तरह ही हो सकते हैं, जो निम्नलिखित हैं (1) (12):

  • धुंधला दिखना।
  • सोने के दौरान पलकों पर पपड़ी बन जाना।
  • आंखों में दर्द होना।
  • आंखों में चुभन महसूस होना।
  • आंखों से आंसू या पानी निकलना।
  • आंखों में खुजली होना।
  • आंखें लाल होना।
  • प्रकाश के प्रति आंखों का संवेदनशील होना या रोशनी की तरफ देखने में परेशानी होना।
  • आंखों में सूजन होना।

आगे पढ़ें गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस से जुड़े जोखिम की स्थिति।

अगर गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस होता है तो क्या कोई जोखिम है?

क्या गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस होने से गर्भवती महिला या उसके शिशु को कोई खतरा हो सकता है, यह एक गंभीर सवाल है। बता दें, आमतौर पर आंख आने की स्थिति 1 हफ्तों में अपने आप ठीक हो सकती है (2)। इसलिए, इसे गर्भवती महिला या उसके भ्रूण के लिए हानिकारक नहीं माना जा सकता है।

हालांकि, अगर गर्भवती को यौन संचारित संक्रमण जैसे – क्लैमाइडियल या गोनोकोकल कंजंक्टिवाइटिस जैसे संक्रमण के कारण कंजंक्टिवाइटिस हुआ है और सही वक्त पर इसका इलाज न हुआ तो इसके बैक्टीरिया मां से नवजात शिशु में फैल सकता है। साथ ही शिशु को भी आंख आने की समस्या हो सकती है, जिसे गंभीर माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य चिकित्सक नवजात की स्थिति और लक्षणों के आधार पर तत्काल प्रभाव से उपचार की प्रक्रिया भी शुरू कर सकते हैं (13)।

गर्भावस्था में पिंक आई का इलाज कैसे किया जा सकता है, इसकी जानकारी नीचे पढ़ें।

गर्भावस्था में पिंक आई (Conjunctivitis) का इलाज और देखभाल

गर्भावस्था में पिंक आई या कंजंक्टिवाइटिस का इलाज करने और जरूरी देखभाल के लिए स्वास्थ्य चिकित्सक कई विधियां अपना सकते हैं। इसके लिए स्वास्थ्य चिकित्सक आंख आने के कारण के आधार पर उपचार की विधि अपना सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं (1):

1. एंटीबायोटिक दवा या आई ड्रॉप: एनसीबीआई की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान कुछ तरह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन या इस्तेमाल करना सुरक्षित माना जा सकता है (14) (15)। इसलिए, अगर गर्भावस्था में आंख आने का कारण बैक्टीरिया है, तो इसके इलाज में एंटीबायोटिक दवा या आई ड्रॉप के इस्तेमाल की सलाह दी जा सकती है। इसके अलावा, हल्के स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप आंख आने के लक्षणों को कुछ हद तक कम करने में भी मदद कर सकते हैं (1)। ध्यान रहे गर्भावस्था में बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी तरह के दवा का उपयोग बिल्कुल न करें।

2. एंटीवायरल दवा या ड्रॉप: अगर किसी वायरल संक्रमण या वायरस, जैसे – हर्पीज या जोस्टर वायरस के कारण कंजंक्टिवाइटिस हुआ हो, तो इसके लिए स्वास्थ्य चिकित्सक एंटीवायरल दवाओं की मदद ले सकते हैं। एंटीवायरल दवाएं ऐसी स्थिति में आंख आने के इलाज में मदद कर सकती हैं (16)। एंटीवायरल दवाएं गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित मानी जा सकती है, हालांकि इस दौरान आई ड्रॉप के रूप में इनका इस्तेमाल करते समय डॉक्टरी सलाहनुसार जरूरी सावधानी भी बरतनी चाहिए (14)।

3. लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स या आर्टिफीशियल टीयर्स: इस दौरान आंखों का सूखापन कम करने के लिए स्वास्थ्य चिकित्सक आर्टिफीशियल टीयर्स का उपयोग भी कर सकते हैं (1)। इस तरह के आई ड्रॉप आंखों से आंसू बहाने में मदद कर सकते हैं, जिससे आंखों का सूखापन कम हो सकता है। साथ ही, यह गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित भी माना जा सकता है (17)।

अब पढ़ें गर्भावस्था में आंख आने के घरेलू उपचार के बारे में।

गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस के घरेलू उपचार

लेख के इस भाग में आप गर्भावस्था में आंख आने के घरेलू उपाए पढ़ सकते हैं। ध्यान रखें यहां बताए गए किसी भी उपाय को गर्भावस्था की स्थिति और आंख आने के लक्षणों के आधार पर ही उपयोग करें। तो गर्भावस्था में कंजंक्टिवाइटिस के घरेलू उपाय कुछ इस प्रकार हैं:

1. गुनगुना सेंक: गुनगुने पानी का सेंक लेने से पलकों व आंखों में पर हो रही असुविधा को कम किया जा सकता है। इसके लिए किसी बर्तन में गुनगुना पानी भरें। फिर उसमें साफ कॉटन पैड या कोई नर्म सूती कपड़ा भिगोएं। इसके बाद इसका पानी निचोड़कर उसे आंखों और पलकों के ऊपर रखें (1)।

इसके अलावा, एनसीबीआई भी इसकी पुष्टि करता है कि गर्म सेंक लेना आंखों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है (18)। जिस आधार पर माना जा सकता है कि यह आंखों से जुड़ी समस्या को कम करने में प्रभावकारी हो सकता है।

2. ठंडी सिंकाई: कोल्ड कंप्रेस या ठंडी सिंकाई भी गर्भावस्था में कंजंक्टिवाइटिस के इलाज में प्रभावी हो सकती है। खासतौर पर, अगर आंख आने का कारण एलर्जी है, तो यह काफी लाभकारी हो सकता है (1)। ठंडी सिंकाई वायरल कंजंक्टिवाइटिस के लक्षणों को भी बढ़ने से रोकने में मदद कर सकती है और आंखों को आराम दे सकती है (2)।

3. ग्रीन टी: एनसीबीआई के एक शोध में इसका जिक्र मिलता है कि ग्रीन टी के अर्क में एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते हैं, जो आंखों में सूजन की समस्या कम कर सकते हैं (19)। वहीं, आंख आने पर सूजन होना भी इसका एक लक्षण हो सकता है (20)। ऐसे में गर्भावस्था में आंख आने के घरेलू उपाय के तौर पर ग्रीन टी के पानी का उपयोग आंखों को धोने के लिए किया जा सकता है। चाहें तो ग्रीन टी से बनी चाय का सेवन भी कर सकती हैं, लेकिन ध्यान रखें कि गर्भावस्था में एक या दो कप की सीमित मात्रा में ही ग्रीन टी का सेवन करें (21)।

4. शहद: एक शोध के अनुसार, शहद का उपयोग बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस के घरेलू इलाज में किया जा सकता है (22)। इसके अलावा, कुछ रिसर्च यह भी बताते हैं कि शहद युक्त क्रीम लगाना उपयोगी हो सकता है। शहद युक्त आई ड्रॉप ड्राई आई की समस्या से राहत प्रदान करने के साथ-साथ आंखों को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकता है (23)। दरअसल, शहद में एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लामेटरी गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया के साथ-साथ सूजन कम करने में भी मदद कर सकते हैं। इसका उपयोग कई तरह की आंखों से जुड़ी हल्की-फुल्की समस्याओं के लिए किया जा सकता है (24)।

5. एलोवेरा जेल: एलोवेरा का एंटी माइक्रोबियल गुण गर्भावस्था में आंख आने का घरेलू इलाज कर सकता है। इसका यह गुण बैक्टिरिया को नष्ट करके पिंक आई के उपचार में प्रभावकारी हो सकता है (25)। इसके लिए गर्भवती महिलाएं ताजे एलोवेरा की पत्तियों से उसका जेल निकालें और हल्के हाथों से उसके आंखों को बंद करके पलकों के ऊपर लगा सकती हैं। हालांकि, ध्यान रहे इस दौरान इसका पीला भाग जिसे लैटेक्स कहते हैं, उसे पूरी तरह से अलग कर लें। चाहें तो मार्केट में मिलने वाले एलोवेरा जेल का उपयोग भी कर सकते हैं।

6. फिटकरी: एक शोध के मुताबिक, यूनानी उपचार में फिटकरी को एंटी-कंजंक्टिवाइटिस (Anti-Conjunctivitis) माना गया है। जिस वजह से इसका इस्तेमाल आंख आने के घरेलू उपाय में किया जा सकता है। दरअसल, फिटकरी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया पर प्रभावकारी हो सकते हैं (26)। ऐसे में गर्भवती महिलाएं आंख आने की हल्की-फुल्की समस्या होने पर फिटकरी युक्त पानी से अपनी आंखों की सफाई कर सकती हैं। हालांकि, बेहतर है इस बारे में एक बार डॉक्टरी सलाह भी लें।

7. गुलाब जल: एनसीबीआई के एक शोध में इसका जिक्र है कि एक हर्बल औषधी के रूप में गुलाब जल से बना आई ड्रॉप का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह कंजंक्टिवाइटिस के साथ ही ड्राई आई या आंखों से जुड़ी अन्य समस्याओं के उपचार में मदद कर सकता है। इस शोध में यह भी बताया गया है कि आयुर्वेद के अनुसार, गुलाब जल में एंटी-इन्फेक्टिव और एंटी-इंफ्लामेटरी जैसे गुण होते हैं, जो विभिन्न प्रकार के संक्रमण, सूजन और नेत्र संबंधी विकारों के इलाज में प्रभावकारी हो सकते हैं (27)। तो चाहें तो गुलाबजल की कुछ बूंद पानी में डालकर आंखों को धो सकते हैं।

8. नमक पानी: गर्भावस्था में आंख आने के घरेलू उपाय में नमक पानी भी शामिल किया जा सकता है। नमक युक्त सामान्य सेलाइन पानी को सावधानी से उपयोग करना आंख आने की समस्या में लाभकारी माना गया है (28)। ऐसे में गर्भवती महिलाएं एक बर्तन में साफ गुनगुना पानी लें और उसमें नमक मिलाकर उसमें रुई भिगोकर आंखों को पोंछ सकती हैं।

9. धनिया का पानी: आंख आने के घरेलू इलाज में धनिया लाभकारी हो सकता है। दरअसल, इससे जुड़ी जानकारी में धनिया में एंटी इंफ्लामेटरी गुण होने का जिक्र मिलता है, जो सूजन कम करने में सहायक हो सकता है (29)। इस आधार पर माना जा सकता है कि यह आंख आने के लक्षण जिसमें सूजन भी शामिल है, उसके लिए उपयोगी हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं धनिया के पत्तों या बीजों को पानी में उबाल कर ठंडा होने पर उस पानी का इस्तेमाल आंख धोने के लिए कर सकती हैं।

नोट: ऊपर बताए गए घरेलू उपाय आंख आने के हल्के-फुल्के लक्षणों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इन्हें कंजंक्टिवाइटिस का पूर्ण इलाज न मानें। साथ ही अगर समस्या गंभीर है या मन में घरेलू उपाय को लेकर संशय है तो इन्हें आजमाने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें।

आंख आने से बचाव करने के लिए गर्भवती महिलाएं क्या कर सकती हैं, यह यहां पढ़ें।

गर्भावस्था के दौरान आंख आने को कैसे रोका जाए?

गर्भावस्था के हर पल को कंजंक्टिवाइटिस से सुरक्षित बनाए रखने के लिए गर्भवती कई बातों का ध्यान रख सकती हैं, जो आंख आने के लक्षणों को रोकने में काफी मदद कर सकते हैं, जैसे (30) (31):

  • अपनी आंखों को साफ पानी से धोते रहें।
  • गंदे हाथों से आंखों को छूने से बचें।
  • हमेशा हाथों को साफ रखें व बाहर से आने के बाद हाथों को हैंडवाश से धोएं।
  • आंखों में लालिमा या कोई कचड़ा दिखाई देने पर आंखों को तुरंत साफ पानी से धोएं।
  • आंखों में खुजली, लालिमा या अन्य परेशानी होने पर आंखों को न मसलें।
  • आंखों को पोंछने के लिए हमेशा साफ तौलिए का ही इस्तेमाल करें। साथ ही इसे अन्य सदस्यों के साथ साझा न करें।
  • कोशिश करें गर्भावस्था में आई मेकअप से दूरी बनाए रखें। अगर इस दौरान आंखों का मेकअप करना चाहती हैं, तो हमेशा सही मेकअप उत्पाद का चयन करें। इस्तेमाल से पहले इनमें मौजूद सामग्रियों और बनने व एक्सपायरी डेट की भी जांच करें।
  • साफ-सुथरे स्थानों में रहें।
  • धूप में जाते समय आंखों पर धूप का चश्मा पहनें।
  • लंबे समय तक कॉन्टेक्ट लेंस न पहनें। हर बार इस्तेमाल के बाद और इस्तेमाल से पहले लेंस को साफ जरूर करें। साथ ही इसे किसी के साथ शेयर न करें।
  • कोई भी आई ड्रॉप्स या आई कॉस्मेटिक्स का उपयोग किसी अन्य के साथ साझा न करें।
  • संक्रमित लोगों के संपर्क में जाने से बचाव करें।
  • खांसने या छींकने के बाद हाथों से आंखों को न छुएं। हाथों को धोने के बाद ही आंखों को छूएं।
  • रूमाल, तौलिया या चश्में जैसे अन्य वस्तुएं अन्य लोगों के साथ साझा न करें।

आंख आने पर डॉक्टर से कब मिलें, जानने के लिए स्क्रॉल करें।

डॉक्टर से कब संपर्क करें?

गर्भावस्था के दौरान कंजंक्टिवाइटिस की निम्नलिखित स्थितियां होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, जैसे (1) (31):

  • 3 से 4 दिनों के बाद भी आंख आने के लक्षणों में सुधार न हो।
  • आंख आने के कारण आंखों की रोशनी प्रभावित होती है।
  • प्रकाश के प्रति नजरों का संवेदनशील होना।
  • आंख आने के बाद आंखों के दर्द का लगातार बढ़ते रहना या दर्द का अधिक गंभीर होना।
  • पलकें या आंखों के आसपास की त्वचा में सूजन या लालिमा होना।
  • आंख आने के साथ-साथ अगर बुखार भी हो।
  • आंख आने के अन्य लक्षणों के साथ ही सिरदर्द होना।
  • दवाइयों के बाद भी अगर 24 घंटों में लक्षणों में सुधार न हो।
  • आंख आने के लक्षणों के साथ ही गर्भवती महिला की कमोजर इम्यूनिटी होना या एचआईवी इंफेक्शन (HIV) या अन्य गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो।

गर्भावस्था में कंजंक्टिवाइटिस से जुड़ी तमाम जरूरी जानकारी यहां हमने दी है। इस लेख से हमें यह पता चलता है कि गर्भावस्था में आंख आने के कई कारण हो सकते हैं, हालांकि इसका एक मुख्य कारण उचित साफ-सफाई न रखना भी हो सकता है। ऐसे में इस समस्या से बचाव करने के लिए जरूरी है कि गर्भवती महिलाओं को शरीर के साथ-साथ अपने चेहरे व आंखों जैसे संवेदशनील अंगों की भी उचित साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। अगर इसके बावजूद भी किसी अन्य कारण से कंजंक्टिवाइटिस होता है, तो डॉक्टरी सलाह पर उसका उचित उपचार जरूर कराएं। साथ ही लेख में बताए गए विभिन्न घरेलू उपायों को भी भी अपनी सुविधानुसार आजमां सकती हैं। अब इस महत्वपूर्ण लेख को अन्य लोगों के साथ भी जरूर शेयर करें।

References:

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