प्रेगनेंसी के दौरान पति पत्नी का रिश्ता कैसा होना चाहिए? | Husband And Wife Relationship During Pregnancy In Hindi

Husband And Wife Relationship During Pregnancy In Hindi

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गर्भावस्था एक ऐसा वक्त होता है जो पति-पत्नी दोनों के लिए ही बहुत खास होता है। एक तरफ आने वाले नन्हे मेहमान की खुशी और माता-पिता बनने का उत्साह। वहीं, दूसरी तरफ आने वाले जिम्मेदारियों को लेकर मन ढेर सारी उथल-पुथल। मन में इस तरह की मिली-जुली भावनाओं का सैलाब आना स्वाभाविक है। हालांकि, कई बार इस तरह की उलझनें दंपत्ति के बीच खटास और मनमुटाव का कारण बन जाती है। ऐसे में वक्त रहते इन्हें समझने और धैर्य से काम लेने की आवश्यकता होती है। तो इसी खास विषय पर मॉमजंक्शन का हमारा यह आर्टिकल है। यहां हम प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी के रिश्ते में होने वाले बदलाव के बारे में जानकारी देगा। साथ ही हम प्रेगनेंसी में पति पत्नी का रिश्ता कैसा होना चाहिए, इसके टिप्स भी देंगे।

आइए सबसे पहले प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी के रिश्ते के महत्व के बारे में जानते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी के रिश्ते का महत्व

पति-पत्नी का रिश्ता उस वक्त एक नया मोड़ ले लेता है जब पत्नी प्रेग्नेंट होती है। इस दौरान पति-पत्नी के रिश्ते में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के बदलाव आ सकते हैं। ऐसे में जानते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी का रिश्ता मजबूत होना कितना मायने रखता है।

1. पहले से ज्यादा देखभाल

प्रेगनेंसी में पत्नी को अपना ख्याल पहले से और ज्यादा रखने की जरूरत होती है। साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु को भी देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में, पत्नी को यह उम्मीद रहती है कि पति भी उन्हें इमोशनली और फिजिकली सपोर्ट करेंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो रिश्ते के साथ-साथ पत्नी और बच्चे की सेहत पर भी असर पड़ सकता है।

2. सपोर्ट जरूरी है

प्रेगनेंसी के दौरान अगर पत्नी को पति का सपोर्ट मिले, तो वह अपने शरीर में होने वाले बदलावों के दर्द को आसानी से सह सकती है। साथ ही, गर्भावस्था में मूड स्विंग से होने वाले भावनात्मक बदलावों का उनके मन पर नकारात्मक असर नहीं पड़ सकता है।

3. कम होने ना दें प्यार

अक्सर देखा गया है कि गर्भावस्था के समय पति-पत्नी के बीच रोमांस की कमी आ जाती है। कई कपल्स यह नहीं समझ पाते कि प्रेगनेंसी के दौरान इंटीमेसी कैसे रखी जाए। इस समय शारीरिक संबंध बनाने को लेकर पति-पति उलझन महसूस कर सकते हैं। ऐसे में इस बारे में डॉक्टर से बात करना अच्छा विकल्प हो सकता है। वहीं, रिश्ते में नयेपन को बनाएं रखने के लिए कुछ खास किया जा सकता है। हफ्ते में कभी-कभी रोमांटिक डेट या डिनर प्लान करना अच्छा विकल्प हो सकता है।

4. आराम देने का वक्त

पत्नी के पास घर के ढेरों काम होते हैं। वहीं प्रेगनेंसी में ये काम और जिम्मेदारियां बढ़ जाती है और घर संभालना मुश्किल हो जाता है। अगर पति घर के छोटे-छोटे कामों, जैसे कि किचन के काम या साफ-सफाई में उनकी मदद करें, तो पत्नी को आराम मिलेगा और वह बेहतर तरीके से अपना ख्याल रख पाएंगी।

5. उलझनों का दौर

प्रेगनेंट महिला के लिए खुद अपनी पसंद या नापसंद का ख्याल रखना मुश्किल होता है। छोटी-छोटी चीजों में उन्हें इर्रिटेशन हो सकती है। ऐसे में, पति अगर उनकी पसंद-नापसंद का ख्याल रखें तो उन्हें बेहतर महसूस होगा। साथ ही, अगर पत्नी को किसी चीज का चुनाव करने में या लंच-डिनर में क्या बनाना है यह सोचने में दुविधा हो तो पति उन्हें विकल्प देकर उनकी उलझन दूर कर सकते हैं। इससे वह खुश रह पाएंगी और इसका असर बच्चे की सेहत पर भी पड़ेगा।

6. मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना है जरूरी

प्रेगनेंसी में अगर पत्नी को पति का सपोर्ट न मिले, तो झगड़े हो सकते हैं। पत्नी ऐसा महसूस कर सकती हैं कि पति उन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं। इससे मां की मानसिक और शारीरिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। सिर्फ पत्नी ही नहीं, बल्कि पति खुद भी कई तरह की चिंताओं से गुजरते हैं। ऐसे में दोनों को एक दूसरे से बात करना और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने की जरूरत होती है।

7. जिम्मेदारियां बांटने का वक्त

प्रेगनेंसी के दौरान यह समझना जरूरी है कि बच्चे की जिम्मेदारी पति और पत्नी दोनों की होती है। पत्नी अगर अकेले ही सारी जिम्मेदारियां उठाएगी, तो वह खुद को अकेला महसूस करेंगी। इससे वह स्ट्रेस और डिप्रेशन में भी जा सकती हैं। प्रेगनेंट महिला के मन में ऐसे ही कई तरह की बातें चलती रहती है। इसलिए, पति को भी इन बातों का ख्याल रखने की जरूरत है और पत्नी को धैर्य बंधाने की जरूरत है। पति, पत्नी को समझा सकते हैं कि बच्चे की हर जिम्मेदारी वो उनके साथ बांटेंगे।

8. स्पेशल महसूस कराने का वक्त

गर्भावस्था के मुश्किल दौर में पत्नी को वक्त देना बहुत जरूरी है। इससे वह खुद को अकेला महसूस नहीं करेंगी। ऐसे में, पति को काम से थोड़ा वक्त निकालकर पत्नी के साथ समय बिताना चाहिए। ऐसे समय पर पत्नी की खुशी का ख्याल रखना जरूरी होता है और उसे स्पेशल महसूस कराने की आवश्यकता होती है। स्पेशल महसूस कराने के लिए पति चाहे तो पत्नी को सरप्राइज गिफ्ट दे सकते हैं या उनके काम में हाथ बंटा सकते हैं।

वहीं, पत्नी को भी पति को समझने और पूरा साथ देने की जरूरत है, क्योंकि पति भी तो इस दौरान कई तरह की चिंताओं का सामना कर रहे होते हैं। हां, वो इस चीज को जाहिर नहीं होने देते हैं, इसलिए साथ में बैठकर बात करना और थोड़ा वक्त बिताना अच्छा विकल्प हो सकता है।

अब जानते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी के रिश्ते में कौन-कौन से बदलाव हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी के रिश्ते में कौन-कौन से बदलाव होते हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी के रिश्ते में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ये पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों तरह के हो सकते हैं। तो प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी के रिश्ते में होने वाले बदलाव कुछ इस प्रकार हैं:

1. केयर करने से जुड़े बदलाव

गर्भावस्था के दौरान कई महिलाओं को महसूस होता है कि उनके पति पहले से ज्यादा केयरिंग हो गए हैं। दवाई, खान-पान और उनकी पूरी दिनचर्या का ध्यान रखते हैं। वहीं कुछ महिलाओं को लगता है कि उनके पति उन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं। पति के सपोर्ट से पत्नी को मानसिक तौर पर स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है। ऐसे में कुछ पति में अपनी पत्नी की देखभाल कर अपनी केयर को जाहिर करते हैं।

वहीं, कुछ पति आने वाले बच्चे और जिम्मेदारियों को लेकर इतने गंभीर रहते हैं कि वे काम में ज्यादा वक्त बिताकर ज्यादा से ज्यादा सेविंग करना चाहते हैं। इस वजह से वे पत्नी को ज्यादा वक्त नहीं दे पाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे पत्नी की केयर नहीं करते हैं। वे बस जता नहीं पाते, क्योंकि भविष्य को सिक्योर करना भी तो केयर ही है ना। इसलिए पत्नी को इस बात को समझने की जरूरत है।

2. मूड स्विंग की वजह से बदलाव

प्रेगनेंसी की वजह से महिलाओं में शरीर के साथ-साथ मानसिक बदलाव भी होते हैं। मूड स्विंग की वजह से गुस्सा और चिड़चिड़ापन होना आम बात है। भले ही सामान्य बात हो, लेकिन पति-पत्नी के रिश्ते पर इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में, पति को समझदारी दिखाते हुए प्यार से बात करनी चाहिए। वहीं, पत्नी के मन में चल रही परेशानियों की वजह से अगर उन्होंने कभी बुरा-भला कहा हो तो अपनी गलती को खुलकर मानना चाहिए। साथ ही अपने मन के उलझनों को लेकर बात करनी चाहिए।

3. फिजिकल रिलेशन में बदलाव

गर्भावस्था के दौरान फिजिकल रिलेशन बनाने को लेकर पति-पत्नी दोनों के मन में दुविधा हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर से इस बारे में बात करें। साथ ही इस दौरान पत्नी की रजामंदी का भी ख्याल रखें। ऐसे में जरूरी है कि दोनों एक-दूसरे से बात करें और स्थिति की गंभीरता को समझें।

4. बातचीत में कमी

प्रेगनेंसी के दौरान अक्सर ऐसा होता है कि पति-पत्नी दोनों अपने-अपने काम में व्यस्त हो जाते हैं। इस वजह से दोनों एक साथ समय नहीं बिता पाते या बातचीत नहीं कर पाते। ऐसे में, अगर पति थोड़ा समय निकालकर पत्नी के काम में उनकी मदद करे, तो दोनों साथ में वक्त गुजार पाएंगे। साथ ही, पत्नी को भी अच्छा महसूस होगा। वहीं, पत्नी को भी वक्त निकालकर पति से उनके पूरे दिन और काम के बारे में पूछना चाहिए। इससे उन्हें भी अच्छा लगेगा।

5. टेंशन

प्रेगनेंसी में पति-पत्नी दोनों को आने वाले बच्चे को लेकर कुछ चिंताएं होती हैं। इस टेंशन के चलते दोनों में मनमुटाव भी हो सकते हैं। हालांकि, ये तनाव रिश्ते में नकारात्मक बदलाव लाने के साथ मां की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। ऐसे में इस दौरान दोनों को एक दूसरे को समझने और एक दूसरे से बात करने की जरूरत है, ताकि इसका असर रिश्ते और एक दूसरे के सेहत पर न पड़े।

6. प्यार में कमी

प्रेगनेंसी के दौरान पत्नी-पत्नी के रिश्ते में एक सबसे बड़ा बदलाव आ सकता है, वह है प्यार में कमी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दोनों ही अपनी-अपनी जिम्मेदारियों में व्यस्त हो जाते हैं। साथ ही, पति अगर सपोर्ट न करे तो दूरियां बढ़ती जाती है। इसके अलावा, कई बार पत्नी को लगता है कि गर्भावस्था की वजह से अब वो पहले जैसी आकर्षक नहीं हैं, जिस वजह से पति उन पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हालांकि, ये मात्र उनके मन का एक वहम हो सकता है।

7. इमोशनल सपोर्ट की कमी

प्रेगनेंसी के दौरान पत्नी को इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है और वह पति से ही इसकी उम्मीद करती है। अगर पति इमोशनली अपनी पत्नी को समझता है, तो प्रेगनेंसी के मुश्किल दिनों को भी महिला आसानी से पार कर जाती है। वहीं अगर पति का साथ न मिले, तो रिश्ते में एक बड़ा नकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

8. विचारों में मतभेद

बच्चे के आने की खुशी तो माता-पिता को होती है, लेकिन कभी-कभी विचारों में मतभेद होने की वजह से यह खुशी थोड़ी फीकी पड़ सकती है। बच्चे के लिए भविष्य की प्लानिंग करने में दोनों के बीच मतभेद हो सकता है। इसके अलावा, पत्नी की पसंद और नापसंद का ख्याल न रखना भी मतभेद का कारण बन सकता है। इससे, रिश्ते में पहले जैसा प्यार नहीं रह जाता।

अब जानते हैं कि गर्भावस्था के दौरान पति-पत्नी में होने वाले सामान्य झगड़े कौन-कौन से होते हैं।

गर्भावस्था के दौरान पति-पत्नी में होने वाले सामान्य झगड़े

प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी के रिश्ते में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। नन्हे मेहमान के आने की खुशी के साथ कई चुनौतियां भी होती हैं। इन चुनौतियों की वजह से पति-पत्नी के बीच झगड़े भी हो सकते हैं। जानते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी के बीच होने वाले सामान्य झगड़े कौन-कौन से हैं।

1. पैसे की समस्या

गर्भावस्था में पति-पत्नी दोनों को ही बच्चे के भविष्य की चिंता सताने लगती है। प्रेगनेंसी में पत्नी की दवा और खानपान का खर्चा भी बढ़ जाता है। खर्चों को लेकर पति-पत्नी में झगड़े हो सकते हैं। साथ ही भविष्य में होने वाले खर्चों को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। ऐसे में, इन सब कारणों से बार-बार झगड़ा करना मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

2. समय न देना

गर्भवती होने के बाद पत्नी अपने और बच्चे के हिसाब से रूटीन सेट करना शुरू करती है। समय पर उठना और सोना, एक्सरसाइज करना या डॉक्टर के पास जाना। वहीं पति भी अपने काम में व्यस्त रहते हैं। जब दोनों एक-दूसरे को समय नहीं दे पाते, तो वे खुद को अकेला महसूस करते हैं। यही दूरियां झगड़े की वजह बनती है।

3. केयर न करना

प्रेगनेंसी में मां को सबसे ज्यादा केयर की जरूरत होती है। ऐसे में, वह पति से उम्मीद करती है वे उनकी देखभाल करें। वहीं, जब पति अपने में और अपने काम में ही व्यस्त रहते हैं और पत्नी पर ध्यान नहीं दे पाते हैं, तो झगड़ा हो सकता है।

4. बच्चे का नाम

बच्चे का नाम रखना, माता-पिता के लिए एक बड़ी बात मानी जाती है। ऐसे में, हो सकता है कि दोनों मिलकर किसी एक नाम पर अपनी रजामंदी न दे पाएं। बच्चे के नाम को लेकर जब माता-पिता के विचार नहीं मिलते तो झगड़ा होने की संभावना बढ़ जाती है।

5. चिड़चिड़ेपन की वजह से झगड़ा

प्रेगनेंसी के दौरान पत्नी के शरीर में कई बदलाव आते हैं। वहीं उन्हें मूड स्विंग जैसी समस्या का भी सामना करना पड़ता है (1)। जब पति, पत्नी की मानसिक और शारीरिक हालत को नहीं समझ पाते हैं तो झगड़ा होना लाजमी है। ऐसे में, हो सकता है कि पत्नी के मन पर बुरा असर पड़े।

6. शारीरिक संबंध से जुड़े नोंक-झोंक

प्रेगनेंसी के दौरान फिजिकल रिलेशन बनाना आसान नहीं होता। ऐसे समय पर, पत्नी की रजामंदी होनी भी जरूरी है। जब पति, पत्नी की इन भावनाओं को नहीं समझ पाते, तो रिश्ता खराब हो सकता है। फिर झगड़े भी आम हो जाते हैं। प्रेगनेंसी में इस मुद्दे पर झगड़ा करने से बचें। यह बहुत ही संवेदनशील विषय है, इसलिए इस बारे में आपस में बात करें और एक दूसरे को समझें।

7. समझदारी में कमी

प्रेगनेंसी में पति-पत्नी के बीच झगड़े होने की एक वजह समझदारी की कमी भी हो सकती है। पति ये नहीं समझ पाते कि कब पत्नी को क्या चाहिए या कब उन्हें सपोर्ट की जरूरत है या। ऐसे समय पर साथी को समझने की जरूरत होती है। वहीं, पत्नी, पति से उम्मीद करती है कि वो थोड़ा मच्योर हो जाएं। अगर ऐसा नहीं होता तो झगड़े शुरू हो जाते हैं। ऐसे में, झगड़े से बचने के लिए घर के काम में मदद करके या उन्हें डॉक्टर के पास ले जाकर अपनी केयर और समझदारी दिखा सकते हैं।

8. सिर्फ खुद के बारे में सोचना

प्रेगनेंसी के दौरान देखा गया है कि पत्नी और पति सिर्फ खुद के बारे में सोचने लगते हैं। पति को ऐसा लगता है कि अब पत्नी अपनी सेहत और बच्चे के अलावा किसी और के बारे में बात ही नहीं करती। वहीं पत्नी को भी ऐसा लग सकता है कि पति अपनी ही दुनिया में रहते हैं। मन में इस तरह का चिंता-भाव भी झगड़े की एक वजह हो सकती है।

अब इस आर्टिकल में जानते हैं कि प्रेगनेंसी में पत्नी को अपने पति से क्या उम्मीद होती है।

प्रेगनेंसी में पत्नी को क्या उम्मीद होती है उसके पति से?

प्रेगनेंसी के दौरान पत्नी को मेंटल और फिजिकल दोनों तरह के सपोर्ट की जरूरत होती है। साथ ही, पत्नी को पति से कुछ उम्मीदें होती हैं। आइए जानते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान पत्नी की किन उम्मीदों पर खरा उतरना जरूरी है।

1. साथ पाने की उम्मीद

प्रेगनेंसी के दौरान पत्नी के लिए पति का सपोर्ट होना जरूरी है। पत्नी चाहती है कि पति उनके काम में हाथ बटाएं और उनका हर कदम पर साथ दे। ऐसे में पति, पत्नी के साथ कुछ वक्त बिताकर उनको सपोर्ट कर सकते हैं। साथ बैठकर बातें करें, खाना खाएं या फिल्म देखें। साथ ही, उनसे उनके दिल की बात जानने और उनके दर्द को बांटने की कोशिश करना जरूरी है। इससे पत्नी को एहसास होगा कि उनका पार्टनर उनकी केयर करता है। पति का सपोर्ट मिलने से प्रेग्नेंट महिला फिजिकली और मेंटली दोनों तरह से रिलैक्स महसूस करती हैं।

2. देखभाल की उम्मीद

गर्भावस्था के समय गर्भवती को अधिक देखभाल की जरूरत होती है। अगर पति, अपनी प्रेग्नेंट पत्नी की देखभाल करे, तो यह उसके लिए सबसे सुखद एहसास होता है। पति को पत्नी के लिए समय निकालकर उसकी देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि बच्चे की जिम्मेदारी सिर्फ पत्नी की ही नहीं पति की भी होती है। पत्नी के खान-पान से लेकर समय पर दवाई लेने तक की जिम्मेदारी पति को उठानी चाहिए।

3. फिजिकल और मेंटल सपोर्ट की उम्मीद

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं में कई तरह के फिजिकल और मेंटल बदलाव होते हैं (2)। ऐसे में पत्नी को फिजिकली और मेंटली, दोनों तरह के सपोर्ट की जरूरत होती है। पति अगर चाहे तो पत्नी को ये सपोर्ट देकर उनकी आधी तकलीफें दूर कर सकते हैं। साथ ही, उनके आस-पास अपनी मौजूदगी बनाए रखें, ताकि अगर उन्हें किसी चीज की जरूरत हो तो आप उनकी मदद कर सकें। ऑफिस के काम से वक्त निकालकर पति को पत्नी को फोन कर लेना चाहिए, इससे पत्नी को अच्छा और स्पेशल महसूस होगा।

3. घर के कामों में मदद की उम्मीद

प्रेगनेंट महिला को डॉक्टर आराम करने की सलाह देते हैं। वहीं, पत्नी के पास घर के ढेरों काम होते हैं। ऐसे में पत्नी को उम्मीद होती है कि पति उनके काम में हाथ बटाएं। अगर हाथ न भी बटाएं तो कम से कम उनसे पूछे कि कहीं उन्हें किसी चीज की या उनकी मदद की जरूरत तो नहीं है। पति चाहें, तो पत्नी के बिना कहे ही घर के छोटे-छोटे कामों, जैसे कि किचन के काम या साफ-सफाई में उनकी मदद कर सकते हैं। इससे पत्नी का काम हल्का हो जाएगा और वह ज्यादा समय तक आराम कर सकेंगी।

4. पत्नी की पसंद-नापसंद का ख्याल रखने की उम्मीद

प्रेगनेंट महिला के लिए खुद अपनी पसंद या नापसंद का ख्याल रखना मुश्किल हो सकता है। छोटी-छोटी चीजों का चुनाव करते वक्त वो चिड़चिड़ी हो सकती हैं। ऐसे में, पति अगर उनकी पसंद-नापसंद का ख्याल रखें तो उन्हें बेहतर महसूस होगा। प्रेगनेंसी के दौरान पत्नी को मानसिक रूप से शांति देने के लिए पति का सपोर्ट बेहद जरूरी है।

5. समझने की उम्मीद

अक्सर देखा गया है कि पत्नी मूड स्विंग की वजह से यह समझ बैठती है कि पति उन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं। पत्नी के मन में अजीब-अजीब से ख्याल भी आने लगते हैं। नतीजा, प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी में झगड़े होने लगते हैं। इन झगड़ों से बचने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि पति, पत्नी को हर तरह से सपोर्ट करें। वहीं, मूड स्विंग की वजह से अगर वो चिड़चिड करें तो पति उल्टा उनसे बहस या झगड़ा न करें, बल्कि उनकी परिस्थिति को समझें। पत्नी के मूड स्विंग को दिल से न लगाएं और उनसे प्यार से बात करें।

6. पति होने की जिम्मेदारी समझने की उम्मीद

गर्भावस्था के दौरान जरूरी है कि पति अपने ऑफिस के काम से थोड़ा समय निकालकर पत्नी को दे। बच्चे की जिम्मेदारी पति-पत्नी मिलकर उठाएंगे, तो दोनों हल्का महसूस करेंगे। पत्नी को घुमाने ले जाने या साथ में डॉक्टर के पास जाने का प्लान बनाएं। पति का सपोर्ट पाकर पत्नी खुशी महसूस करती है।

7. बच्चे के भविष्य की साथ में प्लानिंग की उम्मीद

बच्चे की जिम्मेदारी पति और पत्नी दोनों की होती है, इसलिए कोई भी प्लानिंग साथ में करें। फिर चाहे वह बच्चे का नाम रखना हो या उसका कमरा सजाना हो। इसके अलावा, पति को प्रेगनेंसी के बारे में पूरी जानकारी रखनी चाहिए, जिससे जरूरत पड़ने पर वे, पत्नी की मदद कर सकें।

इस आर्टिकल के अंतिम भाग में जानते हैं कि प्रेगनेंसी में पति की अपनी पत्नी के लिए क्या जिम्मेदारी होती है।

प्रेगनेंसी में पति की क्या जिम्मेदारी होती है अपनी पत्नी के लिए?

अक्सर ऐसा देखा गया है कि पति को लगता है कि प्रेगनेंसी के दौरान उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। वे समझते हैं कि बच्चे के अच्छे भविष्य के लिए बस पैसा कमाना ही उनकी प्राथमिकता है। इसलिए वे निश्चिंत होकर अपने काम में व्यस्त रहते हैं। जबकि ऐसा सोचना गलत है। पत्नी और होने वाले बच्चे को लेकर पति की बहुत सी जिम्मेदारियां होती हैं, जो कुछ इस प्रकार हैं:

1. पत्नी को अकेला महसूस न होने दें

पति-पत्नी को बच्चे के आने की खुशी साथ मिलकर बांटनी चाहिए। पति यह समझें कि जब भी पत्नी को उनकी जरूरत हो, तो वे उनके साथ उनके पास मौजूद रहें। प्रेगनेंसी के 9 महीने तक मां को सबसे ज्यादा केयर की जरूरत होती है। ऐसे में, जरूरी है कि पति अपनी पत्नी की हर बात सुनें और समझें। पत्नी के शरीर और मूड में होने वाले बदलावों को स्वीकारने में उनकी मदद करें।

2. पत्नी के लिए अपना रूटीन बदलें

प्रेगनेंसी के दौरान पत्नी को अपनी दिनचर्या बदलनी पड़ती है। वहीं पति की भी जिम्मेदारी है कि वह पत्नी के लिए अपना रूटीन बदलें। पति, पत्नी के साथ टहलने जा सकते हैं, कोई गेम खेल सकते हैं। प्रेगनेंसी में योग व् व्यायाम करने में उनकी मदद करें। किसी रोमांटिक डेट पर ले जाएं या स्पा कराने ले जाएं। ये छोटी-छोटी चीजें पत्नी की खुशी की वजह बने सकती है।

3. पत्नी से बातचीत करें

गर्भावस्था के दौरान महिला का मन चिड़चिड़ा हो सकता है या उन्हें घबराहट महसूस हो सकती है। ऐसे में, वे कई बार पति के साथ की उम्मीद करती हैं। अगर पति, पत्नी की बातें सुनकर उनकी परेशानी समझता है, तो वे रिलैक्स महसूस कर सकती हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि गर्भावस्था के समय पत्नी से बातचीत करके उनकी मनोदशा जानने की कोशिश की जाए। इससे पति-पत्नी का रिश्ता बेहतर हो सकता है।

4. साथ में घूमें और एक-दूसरे को खुश रखें

प्रेगनेंसी में अक्सर महिलाएं घर में आराम करते-करते भी परेशान हो जाती हैं। ऐसे में, पति को उनके साथ बाहर घूमने का प्लान बनाना चाहिए। पति की केयर मिलने से पत्नी खुश रहेगी और इसका असर बच्चे के विकास पर भी पड़ेगा। प्रेगनेंसी के इस नाजुक समय में पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे के साथ की जरूरत होती है।

5. पत्नी को खास महसूस करवाएं

प्रेगनेंसी के दौरान पति का साथ न मिलने के कारण पत्नी खुद को अकेला महसूस करने लगती हैं। इससे मां की सेहत के साथ बच्चे पर भी असर पड़ता है। प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी के रिश्ते में आने वाले बदलावों से बचना जरूरी है। इसके लिए, पत्नी को खास महसूस करवाएं। पत्नी की छोटी-छोटी ख्वाहिशों को पूरा करके उन्हें स्पेशल महसूस करवाया जा सकता है।

6. झगड़ा करने से बचें

प्रेगनेंसी के 9 महीने पत्नी के लिए खास होने के साथ मुश्किल भी होते हैं। ऐसे समय पर, उनके लिए तनाव लेना या चिंता करना अच्छी बात नहीं है। पति की यह जिम्मेदारी होती है कि वह उनसे किसी भी बात झगड़ा न करें। साथ ही, उनकी हालत को समझते हुए बड़ी बात को भी हल्का करने की कोशिश करें।

7. प्रेगनेंसी के बारे में जानकारी

प्रेगनेंट पत्नी के लिए पति का सपोर्ट सबसे ज्यादा मायने रखता है। इस दौरान पत्नी लेबर पेन के डर से गुजरती है। साथ ही, शरीर में होने वाले बदलाव उन्हें चिड़चिड़ा बना देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि पति प्रेगनेंसी के बारे में पूरी जानकारी रखें, ताकि पति, पत्नी के दर्द को समझ सके। साथ ही जरूरत पड़ने पर पत्नी की मदद कर सके और पत्नी को समझा सके कि वो उनके साथ हैं। पति के इन विषयों पर दिलचस्पी लेने से पत्नी को अच्छा लगेगा और झगड़ों की गुंजाइश भी कम होगी।

8. रोमांस बनाए रखें

प्रेगनेंसी के दौरान हो सकता है कि पत्नी के मूड स्विंग के चलते कभी-कभी पति उन्हें समझ ही न पाए। जब पति का रोमांस का मूड हो, तो पत्नी साफ इनकार कर दे। वहीं, इनकार के बाद पत्नी को ऐसा लग सकता है कि उनके इनकार से पति नाराज होकर उनसे दूर हो सकते हैं। ऐसे में, पति को पत्नी से गुस्सा होने के बजाय उनके फैसले और इच्छा का सम्मान करना चाहिए। साथ ही प्यार और रोमांस को बरकरार रखने के लिए घर में ही डिनर डेट या क्वालिटी टाइम बिताना चाहिए। वहीं, कभी अगर पत्नी को किसी चीज की जरूरत हो तो पति उनके इशारे को समझकर उन्हें उनकी जरूरत की चीज लाकर दें। ऐसी छोटी-छोटी चीजों से ही तो प्यार बरकरार रहता है।

प्रेगनेंसी के दौरान पति-पत्नी का रिश्ता एक नाजुक मोड़ से गुजरता है। ऐसे में, दोनों को अपनी-अपनी जिम्मेदारियां समझनी चाहिए। बच्चे को लेकर भविष्य की चिंता होना आम बात है, लेकिन इसके चलते मनमुटाव न हों। आप हमारे इस आर्टिकल से यह समझ गए होंगे कि प्रेगनेंसी में पति का सपोर्ट मिलना बेहद जरूरी है। साथ ही पति-पत्नी दोनों को इस दौरान समझदारी और धैर्य से काम करना चाहिए। उम्मीद है कि आपको हमारा यह आर्टिकल पसंद आया होगा। इसे अन्य कपल के साथ शेयर कर, हर किसी को इन टिप्स के बारे में बताएं।